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शिक्षा के लिए एक समान राष्ट्रनीति क्यों नहीं? राज्यों से विमर्श कर बनाइए!

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शिक्षा के लिए एक समान राष्ट्रनीति क्यों नहीं? राज्यों से विमर्श कर बनाइए! (Why not have a uniform national policy for education? Formulate one in consultation with the states!) "भारत “एक समान शिक्षा राष्ट्रनीति” पर गंभीरता से विचार करे। लेकिन यहां ‘एक समान’ का अर्थ समझना होगा। इसका अर्थ यह नहीं कि दिल्ली में बैठकर पूरे देश के लिए एक ही पाठ्यपुस्तक, एक ही भाषा, एक ही परीक्षा और एक ही शिक्षा मॉडल तय कर दिया जाए। भारत की शक्ति उसकी विविधता में है। इसलिए शिक्षा की राष्ट्रीय नीति थोपने की नहीं, सहमति बनाने की परियोजना होनी चाहिए।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। संविधान ने देश को संघीय ढाँचा दिया है, लेकिन नागरिकों को समान अधिकार और अवसर देने का संकल्प भी उतनी ही मजबूती से रखा है। फिर सवाल उठता है—जब भारत के हर बच्चे का भविष्य समान रूप से महत्वपूर्ण है, तो उसकी शिक्षा की गुणवत्ता, अवसर और दिशा राज्यों के बीच इतनी अलग-अलग क्यों हो? कहीं सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, कहीं आधारभूत सुविधाओं का अभाव है, ...

मुख्यमंत्री शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन संस्थाएँ उससे कमजोर नहीं होनी चाहिए!

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मुख्यमंत्री शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन संस्थाएँ उससे कमजोर नहीं होनी चाहिए: पंडित गोविंद बल्लभ पंत            (10 सितंबर को जन्मदिन पर विशेष) "समकालीन राजनीति में यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता है: विनोद पंत, भाजपा नेता व समाजसेवी, वसुंधरा, गाजियाबाद" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक समकालीन राजनीति में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पं. गोविंद बल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता है, क्योंकि  यह केवल इतिहास को याद करने का विषय नहीं है बल्कि वर्तमान को और सुधारने का संकल्प भी हो सकता है। यह कहना है उनके पौत्र विनोद पंत का, जो खुद भाजपा नेता व समाजसेवी, वसुंधरा, गाजियाबाद  हैं। समकालीन राजनीति में यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता के बारे में विनोद पंत बताते हैं कि  स्वतंत्रता सेनानी से मुख्यमंत्री तक का सफर करने वाले पंत आज की राजनीति के लिए सुशासन, संघवाद, भूमि-सुधार, प्रशासनिक अनुशासन और राजनीतिक सहमति का एक उपयोगी राजनीतिक मॉडल प्रस्तुत करत...

भारत की राष्ट्रनीति बनाम राज्यों की मनमानी: क्या भारत को नए संघीय अनुबंध की जरूरत है?

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भारत की राष्ट्रनीति बनाम राज्यों की मनमानी: क्या भारत को नए संघीय अनुबंध की जरूरत है? (India's National Policy vs. Arbitrary Actions by States: Does India Need a New Federal Compact?) "21वीं सदी की भारतीय राष्ट्रनीति निम्नलिखित पंक्तियां हो सकती है- नया संघीय अनुबंध सत्ता के केंद्रीकरण का दस्तावेज नहीं, सत्ता की जवाबदेही का समझौता होना चाहिए। भारत को न कमजोर केंद्र चाहिए, न बेलगाम राज्य। भारत को चाहिए- “संविधान से ऊपर कोई सरकार नहीं, राजनीति से ऊपर राष्ट्रहित, और सत्ता से ऊपर नागरिक।” यही वह सूत्र है जो भारत को ‘केंद्र बनाम राज्य’ की अंतहीन लड़ाई से निकालकर ‘Team India’ की वास्तविक शासन-पद्धति तक ले जा सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की राष्ट्रनीति को केवल केंद्र सरकार की नीति मानना सही नहीं होगा। भारतीय संविधान की दृष्टि से राष्ट्रनीति का मूल आधार है—संविधान की सर्वोच्चता, राष्ट्रीय एकता, विधि का शासन, नागरिकों की समानता और संघ–राज्य के बीच संवैधानिक संतुलन। सर्वोच्च न्यायालय भी संविधान को विधायी, कार्यकारी और न्यायिक सत्ता का...

राम मंदिर के सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के पीछे छिपे प्रशासनिक व सियासी संदेश को समझिए

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राम मंदिर के सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के पीछे छिपे प्रशासनिक व सियासी संदेश को समझिए (Understand the administrative and political message behind the appointment of Air Marshal Jitendra Mishra as the CEO of Ram Temple) "क्या राम मंदिर की भव्यता के साथ उसकी प्रशासनिक विश्वसनीयता भी उतनी ही भव्य बन पाएगी? यही वह प्रश्न है जो आने वाले वर्षों में राम मंदिर की राजनीतिक विरासत तय करेगा। क्योंकि अब राम मंदिर का सवाल केवल यह नहीं है कि “रामलला का मंदिर कितना भव्य है?” बल्कि मौलिक सवाल यह है कि “रामलला के मंदिर की व्यवस्था कितनी आदर्श है?”  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उत्तरप्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारतीय राजनीति के सबसे लंबे और निर्णायक अध्यायों में से एक रहा है। इस मंदिर आंदोलन ने भारतीय राजनीति की दिशा बदली, भाजपा को राष्ट्रीय सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और अंततः 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीकात्मक लक्ष्य पूरा हुआ। लेक...

जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए

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जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए (How to assess the political maneuvering of Congress and BJP regarding caste census) "कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज करने के लिए स्पष्ट, पूर्व-निर्धारित सूची/कोडिंग व्यवस्था नहीं होगी, तो अलग-अलग नाम, वर्तनी और उपजातियों के कारण आंकड़े अविश्वसनीय हो सकते हैं। इसलिए उसने इसे दुरुस्त करने की मांग उठाई, ताकि जातिगत जनगणना सही तरह से हो सके।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का भाजपा के खिलाफ मौजूदा हमला केवल “जाति गिनी जाए या नहीं” का सवाल नहीं है, बल्कि असली लड़ाई अब डेटा की विश्वसनीयता, सामाजिक न्याय की राजनीति और उससे बनने वाले नए राजनीतिक समीकरण की है। यही वजह है कि अगस्त 2026 में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा जाति-जनगणना पद्धति पर आपत्ति जताई है। इसलिए जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को ऐसे जानिए। कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज...

शारदा हॉस्पिटल,, ग्रेटर नोएडा के सहयोग से निःशुल्क HLA टाइपिंग शिविर में 120 रोगियों की जांच हुई

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शारदा हॉस्पिटल,, ग्रेटर नोएडा के सहयोग से निःशुल्क HLA टाइपिंग शिविर में 120 रोगियों की जांच हुई # निःशुल्क HLA टाइपिंग शिविर में 120 सैंपल लिए गए # जरूरतमंद बच्चों एवं मरीजों को मिली महत्वपूर्ण जांच की सुविधा राजनैतिकदुनिया टीम लखनऊ, 1 सितंबर 2026। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों एवं मरीजों को महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा एवं शारदा केयर हेल्थसिटी" के सहयोग से "Paras Neuro-Spine Multi-Speciality Hospital, लखनऊ" में निःशुल्क HLA Typing शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में थैलेसीमिया, सिकल सेल डिजीज एवं अन्य रक्त संबंधी तथा आनुवंशिक विकारों से पीड़ित बच्चों एवं मरीजों के लिए कुल 120 HLA सैंपल लिए गए।  शिविर को बाल आयुष फाउंडेशन द्वारा सहायता से, थैलेसीमिया सेवा समिति के संस्थापक अविनाश सिंह एवं दिव्यांग सहायता केंद्र (स्वयंसेवी संस्था) के विशेष सहयोग से आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन Paras Neuro-Spine Multi-Speciality Hospital, सरस्वती पुरम, रायबरेली रोड, लखनऊ में किया गया। ...

भारत का बिश्केक संदेश: अब 'गुट' नहीं, 'भूमिका' चुनने की दरकार!

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भारत का बिश्केक संदेश: अब 'गुट' नहीं, 'भूमिका' चुनने की दरकार!   Bishkek Message of India: Now need to choose 'Bhoomika', not 'faction'! "भारत अब किसी धुरी से जुड़कर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर करेगा विश्व राजनीति! वह न अमेरिकी खेमे में जुड़ेगा, और न ही चीन-रूस धुरी में बंधेगा! समझिए विस्तार से...." @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत अब न तो अमेरिका का पिछलग्गू बनना चाहता है, और न ही चीन-रूस धुरी का हिस्सा बनने में दिलचस्पी रखता है; बल्कि वह तो रूस से संबंध रखते हुए, चीन से प्रतिस्पर्धा करते हुए और ईरान-मध्य एशिया से जुड़ते हुए अपनी स्वतंत्र वैश्विक शक्ति की जगह बना रहा है, ताकि भारत भी एक वैसी महत्वपूर्ण शक्ति बन जाए, जिसे आंख दिखाने से पहले दुनिया सौ बार सोचे। देखा जाए तो यही बिश्केक SCO की सबसे महत्वपूर्ण भारतीय कूटनीतिक पटकथा है। दरअसल, किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में 31 अगस्त-1 सितंबर को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को केवल एक बहुपक्षीय बैठक मानना भारत की मौजूदा विदेश नीति को समझने में बड़ी ...