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मार्च 3, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

रंगोत्सव होली के सियासी और सांस्कृतिक मायने

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रंगोत्सव होली के सियासी और सांस्कृतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक रंगपर्व होली भले ही भारतीय सभ्यता-संस्कृति से अनुप्राणित है, लेकिन गुलामी काल में यह पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति के सामाजिक दुष्प्रभाव से भी यह अछूती नहीं बची है। आमतौर पर यह रंगोत्सव देश-दुनिया में हंसी ठिठोली का त्योहार समझा जाता है। इस दौरान आमलोगों में रंग-गुलाल खेलने के साथ-साथ मीठे पकवानों, नमकीन मांसाहारों और नशीले पदार्थों के सेवन जैसे (भांग), द्रव्य (शराब) और गैस (गांजा) का प्रयोग बहुतायत में देखने को मिलता है जिससे लोग झूम उठते हैं। आमतौर पर शुद्र यानी सेवक पर्व होली आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है, जब घोर दुश्मन भी एक दूसरे के गले मिलने से नहीं हिचकते हैं। बदलते जमाने के अनुरूप लोकपर्व होली का रंगोत्सव भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व ब्रांडिंग का भी पर्याय बन चुका है। यह वसंत पर्व अब सामाजिक-राजनीतिक ध्रुवीकरण, सांप्रदायिक तनाव और चुनावी रणनीति का प्रतीक बन गया है। लोकतांत्रिक भारत में यह प्रवृत्ति वर्ष दर वर्ष गहराती जा रही है। खासकर 2026 में ही बिहार, यूपी और अन्य राज्य...

भारत व कनाडा के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के द्विपक्षीय निहितार्थ

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भारत व कनाडा के बीच हुए व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते के द्विपक्षीय निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक आधुनिक विश्व के देश एक दूसरे के ऊपर पर बहुत हद तक आश्रित रहते हैं। इसलिए परस्पर मधुर सम्बन्ध कायम रखना चाहते हैं। यदि कभी कभार कोई मतभेद उतपन्न हो भी जाए तो उसे जल्द निपटाना ही उनकी प्राथमिकताओं में शुमार होता है। भारत और कनाडा ने भी यही किया। समय व परिस्थितियों वश उपजी हुई नेतृत्व गत वैचारिक खाई को शीघ्र ही पाट लिया और भरोसेमंद रिश्ते कायम करते हुए  गत 2 मार्च, दिन सोमवार को व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) किए। इसके संदर्भ शर्तों (TOR) पर जो हस्ताक्षर हुए, वो एक ऐतिहासिक कदम है, जो द्विपक्षीय व्यापार को 2030 तक 50 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य रखता है। इससे दोनों देशों को भरपूर फायदा मिलेगा। जिस तरह से भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में पीएम नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी की अहम मौजूदगी में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल व मनिंदर सिद्धू ने दस्तावेज आदान-प्रदान किए, उनका अपना महत्व है और यह कदम साल 2023 के चरम तनाव के बाद आपसी संबंधों की पुनःबहाली ...