सूरत-ए-हाल बाढ़: अभाव में भी स्वभाव नहीं बदलने की सीख देते हैं सनातन संस्कार
सूरत-ए-हाल बाढ़: अभाव में भी स्वभाव नहीं बदलने की सीख देते हैं सनातन संस्कार @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, बहराइच, उत्तरप्रदेश जब भी कोई प्राकृतिक विपदा आती है तो वह मानव मन को बहुत सताती है, तड़पाती है। ऐसी परिस्थिति में प्राकृतिक आपदा प्रबंधन चाहे कितना भी किया जाए, वह पर्याप्त नहीं होता है, मतलब ऊंट के मुंह में जीरा का फोरन के समान। और हां, हमारा व्यक्तिगत अनुभव यह रहा है कि चाहे राहत व बचाव कार्य जितना अच्छा किया जाए, राजनीतिक व प्रशासनिक विद्वेष वश उतनी ही आलोचना मिलती है। उसी का अनुभव मैं आज अभिव्यक्त करूंगा। दरअसल, बात सात, आठ, नौ और दस अक्टूबर 2022 को हुई लगातार बारिश से आई अप्रत्याशित बाढ़ से उतपन्न परिस्थितियों की है, जिसके चलते राहत व बचाव कार्यवश मैं लगातार व्यस्त रहा एवं राज्य सरकार के दिशा-निर्देश व दायित्व बोध के चलते एक जिलाधिकारी के तौर पर हमने और हमारी टीम ने एक उत्कृष्ट व्यवस्था देने की कोशिश एवंK अपने इस प्रयास में मैं काफी सफल रहा। परंतु कुछ ऐसे अनुभव हुए जो किसी को भी खुश नहीं करेंगे। बता दूं कि उत्तरप्रदेश के बहरा...