जब राजा का धर्म प्रजा की रक्षा करना है तो जनभक्षकों को नहीं मिटाने के लिए दोषी कौन? बताए सरकार
जब राजा का धर्म प्रजा की रक्षा करना है तो जनभक्षकों को नहीं मिटाने के लिए दोषी कौन? बताए सरकार @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कभी हिंदुत्व और राष्ट्रवाद का प्रतीक समझा जाने वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अब सौ वर्ष का हो चुका है, लेकिन अपने गठन के मौलिक उद्देश्यों से भटक चुका है। यह बात मैं नहीं कह रहा, बल्कि वक्त वक्त पर आए इसके विरोधाभाषी बयानों से स्पष्ट होता है। यूँ तो अपने गठन के उद्देश्यों में यह एक हद तक सफल रहा है, लेकिन इसके चेले-चपाटियों ने यानी जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेताओं ने लोकतांत्रिक सत्ता हासिल करने के बाद भी कोई उल्लेखनीय भूमिका नहीं निभाई, चाहे इसका कारण जो भी रहा हो। लिहाजा यह सामूहिक चिंता का विषय है, क्योंकि उनकी इस मौकापरस्त प्रवृति से राष्ट्रीय सुख-शांति व समृद्धि प्राप्ति का दिशा में बाधा पहुंची है! भले ही हम कभी सोने की चिड़ियां और विश्वगुरु रहे हों, लेकिन आज संघर्षभूमि मतलब दंगा-फसाद और बर्बर हत्याकांड भूमि के रूप में अभिशप्त कर दिए गए हैं। इसलिए अब यह समझ में नहीं आता कि इस्लाम और ईसाई मतावलंबियों द्वारा...