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भारतीय-अमेरिकी कूटनीतिक सम्बन्धों में दिखी हाजिरजवाबी के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ

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जितनी जल्दी अमेरिका, भारत के कूटनीतिक संदेशों को समझ लेगा, उसकी तिलमिलाहट दूर हो जाएगी! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक वैश्विक सम्बन्धों को नया आयाम देने वाले रायसीना डायलॉग 2026 में अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ के एक बेबाक से अब यह बात साफ हो चुकी है कि जब भारत के दोस्त अमेरिका जैसे हों, तो उसे बर्बाद होने के लिए चीन जैसे आस्तीन के सांपों की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। तब शायद यूरोप और रूस मिलकर भी भारत को न बचा पाएं। ऐसा इसलिए कि जो जहर ब्रिटेन और अमेरिका जैसे साम्राज्यवादी देशों के दिलोदिमाग में भरा हुआ है, उससे न तो ब्रिटेन का कल्याण हुआ, न ही अमेरिका का होगा। हां, इनकी क्षुद्र चालों से भारतीय उपमहाद्वीप और अरब-खाड़ी देशों में भयंकर धार्मिक कलह पैदा होगी। हालांकि भारत सरकार भी इन विदेशों हरामखोर चालों से सावधान है और जो जवाबी कूटनीतिक मोर्चेबंदी करती जा रही है, वैसी बानगी अतीत में कभी नहीं दिखती। इसलिए भारत का भविष्य उज्ज्वल है। वह वीर भोग्या वसुंधरा की तर्ज पर वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवंतु सुखिनः की राह पर अग्रसर है। समकालीन कलह के लिए अमेरिका-...

उत्तरप्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उपजे असंतोष को सूझबूझ पूर्वक पाट रहे हैं योगी आदित्यनाथ!

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उत्तरप्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच उपजे असंतोष को सूझबूझ पूर्वक पाट रहे हैं योगी आदित्यनाथ! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उत्तर प्रदेश में भाजपा के संगठनात्मक पदों और सरकारी निकायों के पदों पर नियुक्तियों में विलंब मुख्य रूप से जातीय-क्षेत्रीय संतुलन, आंतरिक खींचतान और केंद्रीय नेतृत्व के मंथन के कारण हो रहा है। इससे कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ा है, हालांकि मार्च 2026 तक बड़े बदलाव की तैयारी चल रही है। आलम यह है कि प्रदेश के सभी 16 नगर निगम में 10-10 मनोनीत होने वाले पार्षदों की नियुक्ति अटकी पड़ी है, जबकि तीन साल बीतने को है। विभिन्न बोर्डों की भी यही स्थिति है। इससे विधानसभा चुनाव 2027 में पार्टी की रणनीति पर भी असर पड़ना लाजिमी है, क्योंकि अमित शाह और योगी आदित्यनाथ की रस्साकशी में कार्यकर्ताओं में निराशा है। जहां तक विलंब के प्रमुख कारण की बात है तो जातीय एवं सामाजिक समीकरण इसकी पहली वजह है। भाजपा का ओबीसी करण होने से पार्टी के वफादार कार्यकर्ताओं में रोष गहराता जा रहा है। इसका असर 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों और 2026 में होने वाले त्रिस्...

भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के लिए करने होंगे भगीरथ प्रयास

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भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के लिए करने होंगे भगीरथ प्रयास @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय राजनीति में महिलाओं की भूमिका वर्तमान में सीमित है, लेकिन कानूनी सुधार, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता से इसे मजबूत किया जा सकता है। इस दिशा बीते वर्षों में पारित हुआ महिला आरक्षण विधेयक जैसा कदम बहुत ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके आकार लेने में अभी समय लगेगा, क्योंकि कतिपय तकनीकी बारीकियां अभी शेष हैं। आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व लगभग 14-15% है, जबकि राज्यसभा में 13% मात्र। वहीं पंचायती राज में 33-50% आरक्षण से स्थानीय स्तर पर सफलता मिली है, लेकिन संसदीय स्तर पर यह वैश्विक औसत (25%) से कम है। यही वजह है कि राजनीति में महिलाओं की भूमिका बढ़ाने के लिए निम्नलिखित प्रमुख उपाय करने होंगे।  पहला, अविलंब महिला आरक्षण लागू करें: नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संशोधन) भले ही 33% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करता है, लेकिन 2026 के बाद जनगणना और परिसीमन के बाद ही यह प्रभावी होगा।  दूसरा, शिक्षा और प्रशिक्षण: महिलाओं क...