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सरकारी दृष्टांत के सहारे लोगों को निःस्वार्थ कर्म के लिए प्रेरित करने का प्रेरणा पुष्प है कर्मकुम्भ

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सरकारी दृष्टांत के सहारे लोगों को निःस्वार्थ कर्म के लिए प्रेरित करने का प्रेरणा पुष्प है कर्मकुम्भ @ कमलेश पांडेय/संपादक की कलम से... समकालीन दुनिया में सनातन सभ्यता व संस्कृति के आलोक में 'वसुधैव कुटुम्बकम' और 'सर्वे भवन्तु सुखिनः' की अवधारणा को पुनः प्रतिष्ठापित करने के उदेश्य से 'कर्म-कुंभ' नामक इस पुस्तक की परिकल्पना की गई, जिसमें न केवल महाकुम्भ 2025 से जुड़े महत्वपूर्ण पलों को रेखांकित करने का एक विनम्र प्रयास किया गया है बल्कि एक प्रशासनिक अधिकारी के व्यक्तिगत/टीमगत कार्यों से उपजने वाली सामूहिक चेतना के सकारात्मक पहलुओं को भी दर्शाने की एक अदद कोशिश की गई है, ताकि समस्त मानवता को अनुप्राणित करने वाले शासक-सेवक वर्ग की अन्तरात्मा को झंकझोरा जा सके। आईएएस अधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र सिंह द्वारा मौलिक रूप से लिखित तथ्यों व मौखिक रूप से प्रेषित स्वर संग्रह रूपी वाक्यों को संपादित करना निःसंदेह एक जटिल कार्य रहा है। लेकिन जब उद्देश्य व्यक्ति नहीं समष्टि हो तो फिर पेशेवर दक्षता अपने आप ही छाप छोड़ने लगती है। मेरे द्वारा संपादित यह पुस्तक लेखक की तीसरी...

सभ्यता के गागर में सांस्कृतिक सागर सरीखा है कर्मकुम्भ

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सभ्यता के गागर में सांस्कृतिक सागर सरीखा है कर्मकुम्भ # लेखन कला और संपादकीय कौशल की बनी अद्भुत मिशाल है कर्मकुम्भ,  @ पुस्तक समीक्षा/ प्रो (डॉ) मनोज मिश्र, संकायाध्यक्ष, जौनपुर विश्वविद्यालय, जौनपुर डॉ. दिनेश चन्द्र सिंह, आई.ए.एस. द्वारा सृजित पुस्तक कर्मकुम्भ, आर्ष परम्परा में गोस्वामी तुलसीदास जी की उन महनीय पंक्तियों का मुझे स्मरण करा रही है जिसमें उन्होंने लिखा है कि- कीरति भनिति भूति भलि सोई। सुरसरि सम सब कहँ हित होई। अर्थात कीर्ति, कविता और सम्पत्ति वही उत्तम है, जो गंगाजी की तरह सबका हित करने वाली हो। मुझ अल्प विषया मतिः के लिए पुस्तक कर्मकुम्भ की समीक्षा चुनौतीपूर्ण कार्य है जिसे यथा सम्भव पूरी करने की कोशिश कर रहा हूँ। कुल 24 अध्यायों से अलंकृत इस पुस्तक में महाकुंभ का शुभ कलश, मंगलकारी चेतना और विराट स्वरूप का दिग्दर्शन, प्रशासनिक तैयारियां अब शोध अनुसंधान का विषय, उत्कृष्ट प्रबंधकीय व्यवस्था का अनुपम उदाहरण, संगम स्नान की दिव्य अनुभूति, प्रयागराज से जुड़ी महत्वपूर्ण अनुभूतियाँ, महाकुंभ की आस्था और जलवायु परिवर्तन घोषणा पत्र, अनुपम व अविस्मरणी योग्यता, सनातन ...

दिव्य व भव्य महाकुंभ 2025 के सांस्कृतिक वैभव का विचार पुष्प है कर्मकुम्भ

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दिव्य व भव्य महाकुंभ 2025 के सांस्कृतिक वैभव का विचार पुष्प है कर्मकुम्भ @ आईएएस डॉ दिनेश चंद्र सिंह, डीएम, जौनपुर प्रस्तुत पुस्तक आपके हाथों में समर्पित है। यह विचार पुष्प की भांति है। यह व्यवहार पुष्पमाला सरीखा है, जिससे मानवता व सज्जनता का शृंगार होगा। धर्म हमें जीवन यात्रा हेतु दिव्य दृष्टि और धैर्य प्रदान करता है। इसका साक्षात दर्शन दिव्य व भव्य महाकुंभ 2025 के सफल आयोजन में पूरी दुनिया ने देखा। एक संत शासक के अनुशासन से जीवन कितना संवर व निखर सकता है, इसकी अनुभूति मेरे साथ ही उन तमाम लोगों को भी हुई होगी, जो यहां समीचीन विषय-वस्तु है। अष्टावक्र गीता में कहा गया है कि- "आयासात सकलो दुःखी नैनं जानाति कश्चन। अनेनैवोपदेशेन धन्यः प्राप्नोति निर्वृतिम्।।" (उद्धरण-सूत्र-3, अष्टावक्र गीता-पृष्ठ-220). अर्थात "निज प्रयास से सबलोग दुःखी हैं। इसको कोई नहीं जानता है। इसी उपदेश से भाग्यवान लोग निर्वाण को प्राप्त होते हैं।" देखा जाए तो धन, यश, पद, प्रतिष्ठा, ज्ञान, विद्वता, ऐश्वर्य, समृद्धि आदि सबकुछ प्रयास से ही मिलता है, लेकिन ये सब तो सांसारिक वस्तुएं या भाव ह...

दुनियावी क्षतिज पर वैचारिक इंद्रधनुष सरीखी है आईएएस डॉ दिनेश चंद्र की कालजयी कृति "कर्मकुम्भ"

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दुनियावी क्षतिज पर वैचारिक इंद्रधनुष सरीखी है आईएएस डॉ दिनेश चंद्र की कालजयी कृति "कर्मकुम्भ" @ पुस्तक समीक्षा/परमेश्वर सिंह, लेखक व प्रकाशक मशहूर लेखक व प्रशासक आईएएस डॉ० दिनेशचन्द्र सिंह जी, जिलाधिकारी, जौनपुर, यूपी, की नई बहुचर्चित पुस्तक "कर्म-कुंभ" का अवलोकन किया। इससे पूर्व भी आपकी दो पुस्तकों- "काल-प्रेरणा" और "कर्म-निर्णय" को पढ़ चुका हूँ। इसलिए कह सकता हूँ कि "कर्म-कुंभ" आपकी तीसरी सारगर्भित कृति है जिसके विषयवस्तु की फलक बहुत व्यापक है। विभिन्न प्रासंगिक तथ्यों व आंकड़ों से भरपूर यह कृति ज्ञान का भंडार है। इस कृति में भारत के धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना की सफल प्रस्तु‌ति के द्वारा इस देश की विविधता में एकता का दर्शन कराया गया है। परम पुनीत सनातन धर्म दुनिया का प्राचीनतम धर्म है। समग्रतावादी भारतीय संस्कृति इसी की कोख से जन्मी है। हिन्दू संस्कृति मातृभूमि की ललाट और एकत्व की मेरुदण्ड है। प्रोएक्टिव स्वभाव सिनर्जी के सिद्धान्त पर कार्य करने का तरीका डॉ० दिनेश चन्द्र सिंह IAS का वैशिष्ट्‌य है।  बहु‌मुखी प्र...

यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने जौनपुर के डीएम डॉ दिनेश चंद्र सिंह की नई पुस्तक 'कर्मकुम्भ' का किया विमोचन

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यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने जौनपुर के डीएम डॉ दिनेश चंद्र सिंह की नई पुस्तक 'कर्मकुम्भ' का किया विमोचन नई दिल्ली/जौनपुर। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर उत्तरप्रदेश अंतर्गत जौनपुर जनपद के जनप्रिय जिलाधिकारी और लोकप्रिय प्रशासक डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस की पांचवीं कालजयी पुस्तक 'कर्मकुम्भ' का विमोचन महामहिम राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने संगोष्ठी भवन, पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर में किया।  इस अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय, शिक्षा राज्यमंत्री डा. रजनी तिवारी, रिलायंस के चेयरमैन सुनील दत्त, पूर्वांचल विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर डा.वंदना सिंह, जिलाधिकारी गाजीपुर, मुख्य विकास अधिकारी, गाजीपुर, मुख्य विकास अधिकारी जौनपुर ध्रुव खाड़िया आदि मौजूद रहे। इस अवसर पर विषय प्रवेश कराते हुए वक्ता ने कहा कि आज शरद पूर्णिमा है। बहुत ही पवित्र दिन है। इस दिन शुरू किया हुआ कोई भी कार्य निष्फल नहीं होता, बल्कि उसमें एक नया ओज और तेज पाया जाता है। इस पुस्तक का भी सार-संक्षेप ओज व तेज से अभिप्रेरित है। इसलिए सनातन संस्कृति में इस खा...