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मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में आखिर कब जागरूक होंगे अंग के बुद्धिजीवी

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मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में आखिर कब जागरूक होंगे अंग के बुद्धिजीवी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार मंजूषा एक पारंपरिक लोक चित्रकला है जो बिहार के भागलपुर जिले के अंग क्षेत्र से जुड़ी हुई है और इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त है। लेकिन सुलगता हुआ सवाल है कि आखिर मंजूषा लोक चित्रकला को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय फलक तक पहुंचाने की दिशा में महाजनपद कालीनअंग भूमि के बुद्धिजीवी कब तलक जागरूक होंगे। हालांकि, स्थानीय पत्रकारों ने जो नेक पहल शुरू की है, इस बात की उम्मीद बंधी है कि समसामयिक सियासत इसे मुकम्मल मुकाम प्रदान करने में कोताही नहीं बरतेगी। ऐसा इसलिए कि ईबीसी आदि वर्ग की यह पारंपरिक लोककला है जिसे बढ़ावा देने से इनकी कला और अध्यवसाय में भी दिन दूनी रात चौगुनी तरक्की होगी। जहां तक इसकी उत्पत्ति और विशेषताएँ की बात है तो अवकाश प्राप्त प्रधानाध्यापिका श्री मती गायत्री देवी बताती हैं कि यह कला मुख्य रूप से बिहुला-विषहरी लोककथा पर आधारित है, जिसमें सर्प चित्रण और रेखाचित्र शैली प्रमुख हैं। अपने जमाने की विदुषी महिला स...