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ट्रंफ व नेतन्याहू के खिलाफ ईरान के शीर्ष शिया मौलवी के इस्लामिक फतवे के अंतरराष्ट्रीय मायने को ऐसे समझिए

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ट्रंफ व नेतन्याहू के खिलाफ ईरान के शीर्ष शिया मौलवी के इस्लामिक फतवे के अंतरराष्ट्रीय मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक इस्लामिक गणतंत्र ईरान के शीर्ष शिया मौलवी नासेर मकारेम शिराजी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को "अल्लाह के दुश्मन" बताया है। उन्होंने दुनियाभर के मुस्लिमों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए एक फतवा जारी किया है, जिसमें दो टूक कहा है कि कोई भी शख्स या सरकार जो वैश्विक इस्लामिक समुदाय के नेतृत्व के लिए खतरा बनेगा, उसका माकूल जवाब दिया जाएगा। ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामनेई को धमकी देने या उनकी हत्या की कोशिश करने वालों को अल्लाह के प्रकोप का सामना करना पड़ेगा। इस तरह की हरकत को अल्लाह की तौहीन के तौर पर देखा जाएगा और उसे अल्लाह के खिलाफ युद्ध के तौर पर देखा जाएगा।  लिहाजा उनके ताजा इस्लामिक फतवे के अंतरराष्ट्रीय मायने को समझना बहुत जरूरी है। ऐसा इसलिए कि  इस्लाम पर खतरे की दुहाई देकर समय-समय पर ढेरों फतवे जारी किए गए हैं। कई फतवों में तो इस्लाम की खिलाफत करने...

पीएम मोदी की अफ्रीकी व दक्षिण अमेरिकी देशों की यात्रा से ग्लोबल साउथ को मिलेगी मजबूती, भारत की वैश्विक धमक बढ़ेगी

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पीएम मोदी की अफ्रीकी व दक्षिण अमेरिकी देशों की यात्रा से ग्लोबल साउथ को मिलेगी मजबूती, भारत की वैश्विक धमक बढ़ेगी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब वैश्विक पटल पर अमेरिका और चीन एक दूसरे पर पलटवार करने के लिए रूस के मित्र भारत को अपने-अपने खेमे में मिलाने के लिए तरह-तरह की भारत विरोधी चालें चल रहे हैं, वहीं भारत अपनी सधी चाल से रूस को भी हैरत में डालते हुए ग्लोबल साउथ यानी तीसरी दुनिया के देशों पर निरंतर अपनी पकड़ मजबूत करता जा रहा है। इसलिए पीएम नरेंद्र मोदी विगत 11 वर्षों से लगातार वैश्विक यात्रा कर रहे हैं और भारत की वैश्विक स्थिति को काफी मजबूती प्रदान कर चुके हैं। उनकी कोशिश है कि भारत दुनिया के गुटनिरपेक्ष देशों को एक सशक्त नेतृत्व प्रदान करे और अपने साथ साथ सभी देशों का आशातीत विकास करे। इससे सत्य व अहिंसा की वैश्विक भावना को भी मजबूती मिलेगी। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने 9 दिवसीय विदेश दौरे पर बुधवार को घाना की राजधानी अकरा के लिए रवाना हो गए। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भी भारत के वैश्विक साझेदारी को ग्लोबल साउथ और अटलांटिक के दोनों पक...

अफ्रीकी देश माली में तीन भारतीयों के अपहरण के आतंकी व वैश्विक मायने को ऐसे समझिए

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अफ्रीकी देश माली में तीन भारतीयों के अपहरण के आतंकी व वैश्विक मायने को ऐसे समझिए , @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अफ्रीकी देश माली में तीन भारतीयों के अपहरण के आतंकी मायने स्पष्ट हैं और साफ तौर पर भारत सरकार को आगाह करने वाले हैं। आखिर यह महज संयोग है या फिर कोई अभिनव प्रयोग, कि एक तरफ गत 1 जुलाई को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम अफ्रीका के देशों की यात्रा पर रवाना हुए, और दूसरी तरफ़ पश्चिमी अफ्रीका के ही पश्चिमी माली में गत 1 जुलाई को ही कई जगहों पर आतंकवादी हमले हुए। इन हमलों के बाद तीन भारतीय नागरिकों को बंधक भी बना लिया गया है।  कहना न होगा कि जिस तरह से इस बारदात में शक की सुई कुख्यात वैश्विक आतंकवादी संगठन अलकायदा समर्थित मुखौटा संगठन नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन यानि जेएनआईएम की ओर घूम रही है, वह चिंता का विषय है। बताया जाता है कि जेएनआईएम वर्ष 2017 में अस्तित्व में तब आया था, जब इसने पश्चिम अफ्रीका में सक्रिय चार बड़े जिहादी गुटों- अंसार दिन, अल-मुराबितून, अल-कायदा इन द इस्लामिक मघरेब यानी एक्यूआईएम की साहेल ब्रांच और मकना कतीबात मसिन...

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसमें दुनिया को मंजूर नहीं चीनी दखल!

तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा का उत्तराधिकारी कौन होगा, इसमें दुनिया को मंजूर नहीं चीनी दखल! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक चीन ने पहले भारतीय भूभाग रहे स्वायत्त प्रदेश तिब्बत पर अवैध कब्जा किया और अब वह चाहता है कि तिब्बती बौद्ध धर्मगुरु दलाईलामा का भावी उत्तराधिकारी कौन होगा, यह फैसला भी रिपब्लिक ऑफ चाइना की सहमति और स्वीकृति से ही तय हो। लेकिन मौजूदा दलाईलामा, भारत और अमेरिका के अलावा बहुतेरे देशों को दलाईलामा के चयन में चीनी दखल मंजूर नहीं है। इसके पीछे उसका दुस्साहसी नेतृत्व भी जिम्मेदार है जो शुरू से ही तिब्बतियों के जनाधिकार को, मानवाधिकार को कुचलता आया है। यही वजह है कि आए दिन बदलते भूराजनीतिक समीकरणों के बीच दलाईलामा के उत्तराधिकार के मसले पर भारत ने दलाई लामा का पक्ष लिया है। जबकि चीन ने भारत को तिब्बत से दूरी बनाए रखने की नसीहत दी है और इसमें दिलचस्पी को अलगाववादी गतिविधियों को समर्थन बताते हुए उसके अंजाम भुगतने की भी बात कही है।  ऐसे में सवाल उठता है कि दलाई लामा के उत्तराधिकारी को चुने जाने का इतिहास क्या है? आखिर मौजूदा दलाई लामा को कैसे चुना गया ...