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आखिर भारतीय संविधान से अपेक्षित मौलिक संशोधन कबतक? समझिए कितने हैं जरूरी?

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आखिर भारतीय संविधान से अपेक्षित मौलिक संशोधन कबतक? समझिए कितने हैं जरूरी? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भले ही भारतीय संविधान ने देश-काल-पात्र के परिप्रेक्ष्य में हम भारतीयों को बहुत कुछ दिया है, फिर भी इससे और अधिक लेने की अपेक्षा रखना लाजिमी है। इस दिशा में सुलगता हुआ सवाल यही है कि आखिर सिस्टम पर विगत लगभग आठ दशकों से कुंडली मार कर बैठने वाले लोगों या उनके उत्तराधिकारियों-परिजनों ने, जिसमें संविधान की आरक्षण व्यवस्था द्वारा पैदा किये हुए राजनीतिक, प्रशासनिक, न्यायिक और मीडियागत के 'अभिजात्य वर्गों' के विधिक शोषण से उनके ही वर्ग या समाज के संघर्षरत अन्य लोगों को आखिर मुक्ति कब तक मिलेगी! इतना ही नहीं, नियम कानून द्वारा इस देश में असली समाजवाद, समानतावाद और समरसतावाद कब तक लाया जाएगा? वहीं, पूरी व्यवस्था पर हावी होते परिवारवाद और सम्पर्कवाद को कब और कैसे हतोत्साहित किया जाएगा? चाहे अल्पसंख्यक वाद हो या पंथनिरपेक्षता/धर्मनिरपेक्षता का सवाल, इसे व्यवहारिक अमलीजामा कब तक पहनाया जाएगा? वहीं, पाकिस्तान-बंगलादेश के मुकाबिल इसे तुलनात्मक रूप से कबतक ला...

भारतीय संविधान की सफलता और विफलता दोनों को कतिपय प्रमुख बातों से ऐसे समझिए

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भारतीय संविधान की सफलता और विफलता दोनों को कतिपय प्रमुख बातों से ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक संविधान दिवस 2025 पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को एक विस्तृत पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने संविधान की महानता, नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों और पहली बार मतदाता बनने वाले युवाओं के लिए संदेश दिया। उन्होंने संविधान की शक्ति का उदाहरण देते हुए बताया कि कैसे एक गरीब परिवार से आने वाला व्यक्ति प्रधानमंत्री पदतक पहुंच सकता है। इसलिए उन्होंने मताधिकार को अधिकार के साथ-साथ जिम्मेदारी बताते हुए युवाओं में लोकतंत्र के प्रति गर्व और जिम्मेदारी जागृत करने की बात कही।  इसके अलावा, पीएम मोदी ने सरदार पटेल और भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती और संविधान के प्रति कर्तव्यों का पालन करने पर जोर दिया, जो देश के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें संविधान को मजबूत करने वाला हर कदम उठाना चाहिए और संविधान निर्माताओं के सपनों को साकार करने का दायित्व सबका है। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि हमारा संविधान राष्ट्रीय अस्मिता की ...