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प्रैक्टो जैसे ऐप से डॉक्टर-रोगी के सम्बन्धों को झुलसने से बचाइए

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जैसे ऐप से डॉक्टर-रोगी के सम्बन्धों को झुलसने से बचाइए @ डॉ मनीष कुमार/न्यूरोसर्जन, दिल्ली-एनसीआर भले ही चिकित्सकों को पृथ्वी का दूसरा भगवान समझा जाता है, लेकिन देश व समाज में कुछ ऐसी प्रत्यक्ष-परोक्ष  ताकतें सक्रिय हैं, जो इनके पवित्र पेशे के माध्यम से आर्थिक शोषण को बढ़ावा दिलवा रही हैं। ऐसा करके वो लोग न केवल रोगियों के जीवन से खिलवाड़ कर रहे हैं, बल्कि अकस्मात अप्रत्याशित चिकित्सा बोझ पैदा करके  उनके तीमारदारों को भी मानसिक व आर्थिक रूप से रुग्ण बनाने की वजह बन रहे हैं। ऐसे संगठित व अनापेक्षित  कुकृत्यों से चिकित्सकों की सामाजिक प्रतिष्ठा गिरी है, और लोगों को उनमें भी कोई 'खलनायक' नजर आता प्रतीत हो रहा है, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। सच कहा जाए तो आज शायद हर किसी को यह पता है और समझ में आता है कि आप जिस मोबाइल को या किसी भी तकनीकी गैजेट्स यानी यंत्र को, जो आपके जीवन को आसान बनाने-करने का आभास देता है और आप उसे अपनी जेब में प्यार से लिए फिरते हैं, यह न केवल आपकी जासूसी करता है बल्कि आपके हितों के साथ समझौता और कभी कभार खिलवाड़ भी करता है। अमूमन, आपके हर फै...

राजा-प्रजा में विकसित समझदारी से टल जाते हैं बड़े से बड़े संकट

राजा-प्रजा में विकसित समझदारी से टल जाते हैं बड़े से बड़े संकट # महापुरुषों की विराट राष्ट्रीय चेतना को संकीर्णता के दायरे में न समेटें, बता रहे हैं यूपी के संस्कृति विभाग के विशेष सचिव डॉ दिनेश चंद्र सिंह @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस राजा-प्रजा के बीच कितना मधुर व भरोसे का सम्बन्ध होना चाहिए और इससे क्या-क्या लाभ हुए हैं, इस बात के दृष्टांत भारतीय इतिहास में अनेक हैं। इसके विपरीत, जब शासक-शासित के बीच जनसेवा की बजाए जनशोषन-उत्पीड़न की प्रवृति हावी हो जाती है तो इसके कितने बड़े व भयावह दुष्परिणाम हुए हैं, इस बात के उदाहरण भी हमारे इतिहास में भरे पड़े हैं। यह दोनों स्थितियां हमारे तल्ख वर्तमान के लिए कुछ सीख हैं तो कुछ सबक भी।  चाहे पुरातन राजतंत्र हो या फिर आधुनातन लोकतंत्र, यथा राजा तथा प्रजा की कहावत को दोनों चरितार्थ करते आये हैं। राजतंत्र में शक्ति बल और लोकतंत्र में संख्या बल, शासन की प्रवृत्ति पर चाहे जितनी भी हावी रही हो और इसे संतुलित करते रहने के चाहे जितने भी यत्न किये गए हों। लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि जब जब जनता को सुख, शांति, सुरक्षा की गारंटी मिली, वह हर वि...