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पूर्वी भारत के युवा उद्यमियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे उद्यमी स्व. अजय कुमार सिंह

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पूर्वी भारत के युवा उद्यमियों के लिए सदैव प्रेरणा स्रोत बने रहेंगे उद्यमी स्व. अजय कुमार सिंह @ कर्तव्यपथ/कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कहते हैं कि बांस, बांस बांसुरी होती है, हर बांस में बांसुरी नहीं होती है। कुछ ऐसे ही विलक्षण प्रतिभा के स्वामी थे लौह कारोबारी स्व. अजय कुमार सिंह, जिन्हें प्यार से लोग अजय दा भी कहते थे। यदि उन्हें गुदड़ी का लाल कहा जाएगा तो गलत नहीं होगा। अपने बाल सुलभ हुनर और प्रौढ़ प्रतिभा के बल पर उन्होंने वह सब कुछ साकार कर दिखाया, जिससे प्रेरणा पूर्वी भारत खासकर बिहार-झारखंड के युवाओं को लेना चाहिए। देखा जाए तो जिस समय बिहार तथाकथित जंगलराज के दौर में प्रवेश कर रहा था, उसी समय एक संसाधनहीन युवा अपने जिंदगी के, गांव-समाज व घर-परिवार की बेहतरी के सपने बुन रहा था। इसकी क्रम में कभी बाहुबलियों से अपने कारोबारी हितों की हिफाजत करनी पड़ती थी, तो दूसरी ओर जाति और वर्ग विशेष के पेशे के दांवपेंच को सुलझाते हुए अपने लिए एक जगह भी बनाने की जद्दोजहद चल रही थी। ऐसी विकट परिस्थितियों में उन्होंने हर वो दांव चले, जो उनके आदमकद बनने के लिए बहुत जरूरी थे। लेकिन जैसे ही त...