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अब तक सफल दिख रहा योगी का राजनीतिक हठयोग, आगे प्रभु राम जानें!

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अब तक सफल दिख रहा योगी का राजनीतिक हठयोग, आगे प्रभु राम जानें! @ राजपथ/अशोक कौशिक, संपादक, हिन्द आत्मा उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का राजनैतिक प्रबंधन काबिले तारीफ है। अपनी बात मनवाने की उनकी सियासी अदाएं भी दिलचस्प हैं। उन्होंने प्रशासनिक सक्रियता का भी एक अद्भुत उदाहरण पेश किया और कराया है। शासन के विभिन्न जटिल आयामों को उन्होंने जिस खूबसूरती से सुलझवाया है, उसे देख-सुनकर बड़े-बड़े लोग भी दंग रह जाते हैं।  एक संत से राजनेता बनने के बावजूद हिंदुत्व के पैमाने पर उन्होंने जिस साम, दाम, दंड और भेद की नीति को प्रश्रय दिया है, उससे उनके सारे विरोधी चित्त होते जा रहे हैं। इसे उनका सियासी हठयोग भी समझा जा रहा है। अपनी टीम का चयन उन्होंने जिस कार्यकुशलता के साथ किया है और वक्त वक्त पर उसमें जो बदलाव वो करते आ रहे हैं, उसका लाभ शासन-प्रशासन होते हुए आमजन को भी मिला है। इसलिए उनकी लोकप्रियता अपने चरम पर है।  केंद्रीय गृह मंत्री मंत्री अमित शाह का यह कहना कि 2024 में पीएम नरेंद्र मोदी की तीसरी जीत सुनिश्चित करने के लिए 2022 में सीएम योगी आदित्यनाथ की दूसरी जीत सु...

कहीं दीप जले, कहीं दिल, जीवन-यापन कितनी मुश्किल

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कहीं दीप जले, कहीं दिल, जीवन यापन कितनी मुश्किल! @ राजपथ/अशोक कौशिक, सम्पादक, हिन्द आत्मा लोकपर्व दीपावली चार नवंबर को मनाई जाएगी। लोग अपने घर व प्रतिष्ठान को सजायेंगे, लक्ष्मी-गणेश की पूजा करेंगे, मिठाई आदि उपहार अपने परिचित जनों को बांटेंगे। आतिशबाजी करेंगे। यह उत्सव हमलोग देश-विदेश में मनाएंगे, कहीं कम-कहीं ज्यादा। वैसे भी साधन-संपन्न लोगों की तो हर रोज दीवाली होती है। दिवाला तो उनका निकलता है जो दाने दाने को मोहताज होते हैं। हमारी व्यवस्था में हाशिए पर धकेल दिए गए होते हैं।  बहुत सारे लोग श्रमवीर होते हैं, लेकिन उनके श्रम का उचित मूल्य उन्हें नहीं मिल पाता है। बमुश्किल अपने जीवन का गुजारा तो कर लेते, पर पर्व-त्यौहार मनाने व तड़क भड़क वाली जिंदगी जीने लायक वो नहीं बचते! चाहकर भी कुछ नहीं कर पाते। खुद को तो मना लेते हैं, लेकिन बीबी-बच्चों कैसे मनाएं। जब इंसान पंच बराबर यानी सगे-सम्बन्धियों, मित्रों-पड़ोसियों के स्तर का नहीं होता तो अफसोस के अलावा वो कर भी क्या सकता।  इसलिए कहा जाता है कि दीपावली एक ऐसा उत्सव है जहां कहीं दीप जलते हैं तो कहीं दिल। जब से हमारे समाज ने...