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क्या अपने खिलाफ जारी वैश्विक षड्यंत्रों को समझ पाएगा भारत और निकाल लेगा उसकी रणनीतिक काट?

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क्या अपने खिलाफ जारी वैश्विक षड्यंत्रों को समझ पाएगा भारत और निकाल लेगा उसकी रणनीतिक काट? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पहले अमेरिका और सोवियत संघ, फिर अमेरिका एवं रूस और अब अमेरिका व चीन के बीच जो दुनिया का थानेदार बनने की होड़ मची है, उससे गुटनिरपेक्ष देश भारत के हित गहरे तक प्रभावित हुए हैं। यह हमारे देश के नेताओं और अधिकारियों की गलत और पक्षपाती नीतियों का ही दुष्परिणाम है कि भारत को न चाहते हुए भी कभी अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर तो कभी आंतरिक भूभाग पर युद्ध जैसे हालातों से गुजरना पड़ता है, जिसमें धन-जन की हानि होती है।  दरअसल, हमारे देश में बढ़ते साम्प्रदायिक विवाद, जातीय विवाद, क्षेत्रीय विवाद आदि का मौलिक कारण यह है कि विदेशी तिकड़मों के चलते आजादी से पहले हमारे 'मानवीय मूल्यों' से 'सियासी बलात्कार' हुए हैं, और उसके बाद उपजे पक्षपाती 'संवैधानिक मूल्यों' से भी 'अनैतिक प्रशासनिक व न्यायिक बलात्कार' हुए हैं! जहां प्रशासनिक और न्यायिक विवेक का खुल्लमखुल्ला उल्लंघन यह कहते हुए किया गया कि हमारे संविधान में ऐसा कहा गया है अथवा उस...