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अगस्त 1, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अमेरिका के टैरिफ अटैक से प्रभावित होंगे भारतीय निर्यात, लेकिन लांग टर्म में कारोबारी हित रहेंगे अछूते!

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अमेरिका के टैरिफ अटैक से प्रभावित होंगे भारतीय निर्यात, लेकिन लांग टर्म में कारोबारी हित रहेंगे अछूते!  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक लीजिए, अंततोगत्वा अमेरिका ने भारत पर अपना टैरिफ बम फोड़ ही दिया। लेकिन अब भारत क्या जवाबी कार्रवाई करता है, इसपर दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। उल्लेखनीय है कि गत बुद्धवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने भारतीय चीजों पर 25% जवाबी टैरिफ लगाने का पुनः ऐलान किया। हालांकि, चतुराई पूर्वक ट्रंप ने भारत को 'दोस्त' बताते हुए निज सोशल मीडिया साइट 'सोशल ट्रूथ' पर किये गए अपने पोस्ट में लिखा है कि यह टैरिफ 1 अगस्त से लागू होगा। वहीं, अभी तक यह भी साफ नहीं हुआ है कि ट्रंप का यह टैरिफ पहले से लागू 10% शुल्क के अतिरिक्त होगा या उसमें ही समाहित होगा। इसके अलावा, भारत की रूसी मित्रता के लिए जो अमेरिकी जुर्माना लगेगा, वह कितना होगा। बता दें कि ट्रंप ने इससे पहले गत 2 अप्रैल को भारत सहित कई देशों पर 10% टैरिफ लगाया था, जिसे पहले 90 दिनों तक और फिर बाद में 1 अगस्त तक टाल दिया था। वहीं, इस बार ट्रंप ने यह ऐलान भी किया कि...

पहलगाम आतंकी हमला: यूएनएससी रिपोर्ट में पाकिस्तान बेनकाब, काम नहीं आई चीनी-अमेरिकी दोस्ती!

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पहलगाम आतंकी हमला: यूएनएससी रिपोर्ट में पाकिस्तान बेनकाब, काम नहीं आई चीनी-अमेरिकी दोस्ती! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मॉनिटरिंग रिपोर्ट में भारत के पहलगाम आतंकी हमले में आतंकी संगठन "द रेजिस्टेंस फ्रंट" (टीआरएफ) की भूमिका का जिक्र होने के बाद अब पाकिस्तान के लिए बचने का कोई रास्ता नहीं रह गया है।इस प्रकार आतंकवादियों की मदद के लिए अब दुनिया से मुंह छिपाने का भी कोई रास्ता उसके लिए नहीं बचा हुआ  है। देखा जाए तो उसका यह झूठ अब दुनिया के सामने एक बार फिर बेनकाब हो चुका है कि भारत में हुए आतंकवादी हमले से उसका कोई नाता नहीं है। कुलमिलाकर यह अप्रत्याशित रिपोर्ट भारत के अनवरत यानी लगातार किए गए कूटनीतिक प्रयासों की जीत है। इससे यह भी स्पष्ट हो जाता है कि भारत के प्रति अमेरिका-चीन दोनों के रुख में नरमी आई है। खास बात यह है कि मॉनिटरिंग टीम ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि टीआरएफ ने दो बार हमले की जिम्मेदारी ली है और यह पहलगाम आतंकी अटैक भी पाकिस्तान की जमीन से संचालित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एल...

आखिर अमेरिकी 'टेररिस्ट इकॉनमी' और इंडियन 'डेड इकॉनमी' जैसे आरोपों के अंतरराष्ट्रीय मायने क्या हैं?

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आखिर अमेरिकी 'टेररिस्ट इकॉनमी' और इंडियन 'डेड इकॉनमी' जैसे आरोपों के अंतरराष्ट्रीय मायने क्या हैं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंफ ने दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और तेजी से मजबूत होती जा रही 'समाजवादी अर्थव्यवस्था' यानी भारतीय अर्थव्यवस्था को डेड इकॉनमी करार दिया है, तो एक भारतीय होने के नाते उनसे मेरा सीधा सवाल है कि आखिर उनकी अमेरिकी अर्थव्यवस्था क्या है- 'कैपिटलिस्ट इकॉनमी' या 'टेररिस्ट इकॉनमी!' मुझे पता है कि वो मेरे इस सवाल का जवाब नहीं देंगे, इसलिए आज उनकी डॉलर डिप्लोमेसी, मिलिट्री डिप्लोमेसी और घृणित कूटनीति को आईना दिखलाना अपना राष्ट्रघर्म/बुद्धिजीवी धर्म समझता हूं। वहीं, अमेरिका को यह भी स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि रूस के साथ भारत गर्त में नहीं, बल्कि उंस शिखर पर जाएगा जहां आज अमेरिका काबिज है!  सच कहूं तो सात समुंदर पार बसा अमेरिका यदि अपनी फूट डालो और राज करो वाली क्षुद्र नीतियों और अभद्र स्वभाव/व्यवहार के बल पर एशिया-यूरोप के देशों पर शासन करना चाहता है तो अब उसके दिन लद गए...