रक्षाबंधन के उदात्त सनातनी भाव में अंतर्निहित शाश्वत सांसारिक मायने को ऐसे समझिए
रक्षाबंधन के उदात्त सनातनी भाव में अंतर्निहित शाश्वत सांसारिक मायने को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक ब्राह्मण पर्व 'रक्षाबंधन' न केवल भाई-बहनों, बल्कि पंडित-यजमान के पारस्परिक प्रेम, विश्वास और आपसी सौहार्द का एक अनोखा अवसर है, जहां बहन अपने भाई की कलाई पर और ब्राह्मण अपने यजमान के हाथ, शस्त्र और कारोबारी प्रतिष्ठान पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी शाश्वत सुरक्षा की प्रार्थना करते हैं। यह एक ऐसा मंगलकामना पर्व है जो सनातनी दूरदर्शिता, पारस्परिक उदारता और रिश्तों के शाश्वत गौरव भाव को अभिव्यक्त करता है। इसके शाश्वत मायने समूची दुनिया के लिए सकारात्मक हैं और इसे समझते ही सनातनी गौरव भाव का बोध होता है। कहा गया है कि यदि आपके विचार अच्छे होंगे तो जीवन-जगत में सबकुछ अच्छा यानी अनुकूल होगा। इसलिए पारस्परिक मानवीय सम्बन्धों, कारोबारी प्रतिस्पर्धा और दो देशों की सीमाओं पर फैलते जा रहे खूनी संघर्ष के परिप्रेक्ष्य में रक्षाबंधन के मायने को समझने और समझाने की जरूरत है। सच कहूं तो यह पर्व सशक्त लोगों द्वारा निर्बलों की रक्षा करने की प्रेरणा सकल विश्व...