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बिहार में सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा? समझिए विस्तार से

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बिहार में सियासी ऊंट किस करवट बैठेगा? समझिए विस्तार से @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक लोकतंत्र की जननी बिहार के राजनेतागण अपनी व्यक्तिगत, गुटगत, पार्टीगत और गठबंधनगत सियासी महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए चुनावी जनादेश को अकसर धत्ता बताने के आदी समझे जाते हैं। पहले जब यहां कांग्रेस का एकछत्र राज या जनता पार्टी-जनता दल का छिटपुट राज हुआ करता था, तब मुख्यमंत्री बदल दिए जाते थे। लेकिन जब क्षेत्रीय दलों के रहनुमा लालू प्रसाद (राजद) या नीतीश कुमार (जदयू) की सियासी चलती आई तो मुख्यमंत्री कम, गठबंधन साथी बदलने की एक नई परिपाटी शुरू हो गई। लोजपा नेता स्व. रामविलास पासवान और अब उनके पुत्र केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान, हम नेता व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी, रालोसपा नेता उपेंद्र कुशवाहा, वीआईपी पार्टी नेता मुकेश सहनी के अलावा वामपंथी दलों ने इनका खूब साथ दिया। बताया जाता है कि इसके पीछे कांग्रेस और भाजपा के केंद्रीय व सूबाई नेतृत्व की अदूरदर्शिता भरी मनमानी तथा राजद और जदयू आदि क्षेत्रीय दलों के घात-प्रतिघात की सियासत की भी बड़ी भूमिका रही है। ऐसा प्रतीत होता है ...