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क्या अब्राहमिक भाईचारे के मुकाबले हान-हिंदू-स्लाविक भाईचारे को मजबूत कर पाएंगे जिनफिंग-मोदी-पुतिन?

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क्या अब्राहमिक भाईचारे के मुकाबले हान-हिंदू-स्लाविक भाईचारे को मजबूत कर पाएंगे जिनफिंग-मोदी-पुतिन? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भले ही विभिन्न सभ्यता-संस्कृति का सम्मिलन-संघर्ष और उनका राजनीतिक उपयोग-दुरुपयोग देश-दुनिया के लिए कोई नई बात नहीं है, लेकिन रूस-चीन के चक्रब्युह में फंसा अमेरिका अब जो भू-राजनीतिक खेल अब्राहमिक ब्रदरहुड की आड़ में खेलने की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है, वह यदि सफल होता है तो प्राचीनकाल लीन महाभारत, मध्ययुगीन धर्मयुद्ध, आधुनिक युगीन प्रथम-द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद एक और बड़ा युद्ध दरवाजे पर दस्तक देने वाला है।  संभव है कि रूस-यूक्रेन युद्ध को ही निकट भविष्य में एक और बड़ा विस्तार मिल जाए। हाल ही में भारत के खिलाफ पाकिस्तान को उकसाने की जो उसकी पुरानी रणनीति पुनः प्रकाश में आई है, उसमें चीन-भारत ने यदि रूसी प्रभाववश आपसी समझदारी न दिखाई होती, तो अमेरिका अपने क्षुद्र चाल सफल हो जाता! इसलिए सवाल उठता है कि "अब्राहमिक भाईचारे" के मुकाबले "हान-हिंदू भाईचारे" को मजबूत करने में जिनफिंग-मोदी अपनी भावी भूमिका निभाएंगे, या फ...