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यक्ष प्रश्न: आखिर देशवासियों के अंदर कैसे जगाया जाएगा स्वदेशी के संकल्प का भाव?

यक्ष प्रश्न:  आखिर देशवासियों के अंदर कैसे जगाया जाएगा स्वदेशी के संकल्प का भाव? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतवासियों के लिए, खासकर यहां के सत्ता प्रतिष्ठान के लिए, स्वदेशी या विदेशी वस्तुओं को उपयोग में लाए जाने या फिर उसका बहिष्कार किये जाने का सियासी आह्वान कोई नई बात नहीं है, क्योंकि सर्वप्रथम राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने ही आजादी की लड़ाई को धार देने के लिए और अंग्रेजों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए ऐसा प्रासंगिक आह्वान किये जाने की शुरुआत की थी। बाद में यह आह्वान भी एक सियासी हथकंडा बन गया। वहीं, 1990 के दशक में भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण और भूमंडलीकरण के बाद आरएसएस-भाजपा के स्वदेशी आंदोलन का जो हश्र हुआ और इनकी ही बाजपेयी-मोदी सरकारों के द्वारा बहुराष्ट्रीय कम्पनियों से जो प्रेम दिखाया गया, वह भी कोई पुरानी बात नहीं है। लेकिन मौजूदा दौर में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बार-बार 'लोकल फ़ॉर वोकल' की बात करते हैं तो थोड़ा गम्भीर होना स्वाभाविक है।  इसलिए सवाल उठता है कि आखिर देशवासियों के अंदर कैसे स्वदेशी के संकल्प का भाव जगाया जाएगा, यक्ष प...