"जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं....."
"जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं....." @ परमेश्वर सिंह/पुस्तक समीक्षक इतिहास साक्षी है कि "जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं।" आईएएस अधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह में यह दोनों विशेषताएं पाई जाती हैं। कालजयी रचना "काल- प्रेरणा" सरीखे उनके श्रम साध्य लेखन कार्य से यह परिलक्षित होता है कि "डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह जी ईज ए पर्सन ऑफ वर्सटाइल पर्सनैलिटी एंड स्प्लेंडिड जेनेरोसिटी।" इस कृति में डॉ दिनेश चंद्र सिंह के द्वारा व्यक्त किए गए विचारों, लोक कल्याणकारी कार्यों, प्रीतिकर कार्यसंस्कृति और लोक संग्रही स्वभाव को जानकर ही उपर्युक्त निष्कर्ष पर पहुंचा हूं। काल-प्रेरणा की विषय-वस्तु गूढ़ है। वेदों पर जब आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि अथर्ववेद के सूक्त संख्या 53 व 54 में काल की महिमा का प्रतिपाद न किया गया है। वस्तुतः काल की छह स्थितियां होती हैं- पहला, जायते (जन्म लेना); दूसरा, अस्ति (वर्तमान अवस्था); तीसरा, वर्द्धते (विकास); चतुर्थ, विपरिणमते...