संदेश

जून 17, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

"जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं....."

चित्र
"जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं....." @ परमेश्वर सिंह/पुस्तक समीक्षक इतिहास साक्षी है कि "जमाना उन्हें याद रखता है जो लिखने लायक कुछ कर जाते हैं या पढ़ने लायक कुछ लिख जाते हैं।" आईएएस अधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह में यह दोनों विशेषताएं पाई जाती हैं। कालजयी रचना "काल- प्रेरणा" सरीखे उनके श्रम साध्य लेखन कार्य से यह परिलक्षित होता है कि "डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह जी ईज ए पर्सन ऑफ वर्सटाइल पर्सनैलिटी एंड स्प्लेंडिड जेनेरोसिटी।" इस कृति में डॉ दिनेश चंद्र सिंह के द्वारा व्यक्त किए गए विचारों, लोक कल्याणकारी कार्यों, प्रीतिकर कार्यसंस्कृति और लोक संग्रही स्वभाव को जानकर ही उपर्युक्त निष्कर्ष पर पहुंचा हूं। काल-प्रेरणा की विषय-वस्तु गूढ़ है। वेदों पर जब आप गौर करेंगे तो पाएंगे कि अथर्ववेद के सूक्त संख्या 53 व 54 में काल की महिमा का प्रतिपाद न किया गया है। वस्तुतः काल की छह स्थितियां होती हैं- पहला, जायते (जन्म लेना); दूसरा, अस्ति (वर्तमान अवस्था); तीसरा, वर्द्धते (विकास); चतुर्थ, विपरिणमते...

आईएएस डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह की कृति ''काल-प्रेरणा" पर एक विहंगम दृष्टि

चित्र
आईएएस डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह की कृति ''काल-प्रेरणा" पर एक विहंगम दृष्टि  @ पुस्तक समीक्षा/परमेश्वर सिंह अथर्ववेद के सूक्त संख्या 53 54 में काल की महिमा का प्रतिपादन किया गया है। वस्तुतः काल की छह स्थितियां होती हैं- पहला, जायते (जन्म लेना); दूसरा, अस्ति (वर्तमान अवस्था); तीसरा, वर्द्धते (विकास); चतुर्थ, विपरिणमते (बढ़ती उम्र का शरीर पर प्रभाव); पंचम, अपक्षीयते (वृद्धावस्था); षष्टम, म्रियते (मृत्यु)। वस्तुतः मृत्यु एक ऊर्जा का दूसरी ऊर्जा में रूपांतरण है। ऊर्जा अमर है और द्रव्य नाशवान।  सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की अवधारणा के प्रति आस्थावान केरल के वर्तमान राज्यपाल डॉ आरिफ मोहम्मद खान ने इस कृति का लोकार्पण किया है। उत्तराखंड के ऊर्जावान और यशस्वी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस लोकप्रिय कृति के लिए शुभ संदेश भेजे हैं। बाबा हरदेव सिंह जैसे गहन अध्येता और प्रकांड विद्वान ने काल प्रेरणा की शुभाशंसा लिखी है।  आत्म उद्गार में वैश्विक महामारी कोविड-19 के प्रकोप के दौरान आपने समर्पित भाव से की गई सेवा का उल्लेख किया है। वस्तुतः श्रद्धापूर्वक की गई सेवा लघु मानव को मह...