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मार्च 26, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

साध्य कठिन हो साधन चाहे स्वल्प, पूर्ण करेगा वह आपका संकल्प

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साध्य कठिन हो साधन चाहे स्वल्प, पूर्ण करेगा वह आपका संकल्प @ अनुभूति/डॉ दिनेश चंद्र, आईएएस उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दोबारा इस पद पर आरूढ़ होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन इसके पीछे उनकी कार्यनिष्ठा, व्यक्तिगत समर्पण और चुम्बकीय व्यक्तित्व का बड़ा योगदान है। यद्यपि गत 23 मार्च, 2022 को उनके मुख्यमंत्री पद शपथ ग्रहण समारोह में भौतिक रूप से उपस्थिति तो संभव नहीं थी। परन्तु इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से शपथ ग्रहण समारोह की अलौकिक, अविस्मरणीय एवं गौरवशाली क्षणों को देखकर मन अत्यन्त प्रसन्नचित हुआ।  .....और इसी से प्रभावित होकर विगत दिवसों की अनुभूति को लेखनीबद्ध करते हुए मन में प्रसन्नता के भाव को लेकर आपके यशस्वी एवं ऐश्वर्यवान होने की कामना करते हुए यह अभिव्यक्त करना चाहता हूं कि 10 मार्च, 2022 का सुखद दिवस उत्तराखंड के  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अग्निपरीक्षा का कठिन एवं दुर्लभ क्षण था। एक ओर राज्य में सीएम पुष्कर सिंह धामी  के नेतृत्व में लोकतंत्र के महापर्व में "सामान्य विधानसभा निर्वाचन 2022" के अन्तर्गत उत्तराखण्ड में उनके चुन...

साध्य कठिन हो साधन चाहे स्वल्प, पूर्ण करेगा वह आपका संकल्प

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साध्य कठिन हो साधन चाहे स्वल्प, पूर्ण करेगा वह आपका संकल्प @ अनुभूति/डॉ दिनेश चंद्र, आईएएस उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का दोबारा इस पद पर आरूढ़ होना किसी चमत्कार से कम नहीं है। लेकिन इसके पीछे उनकी कार्यनिष्ठा, व्यक्तिगत समर्पण और चुम्बकीय व्यक्तित्व का बड़ा योगदान है। यद्यपि गत 23 मार्च, 2022 को उनके मुख्यमंत्री पद शपथ ग्रहण समारोह में भौतिक रूप से उपस्थिति तो संभव नहीं थी। परन्तु इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से शपथ ग्रहण समारोह की अलौकिक, अविस्मरणीय एवं गौरवशाली क्षणों को देखकर मन अत्यन्त प्रसन्नचित हुआ।  .....और इसी से प्रभावित होकर विगत दिवसों की अनुभूति को लेखनीबद्ध करते हुए मन में प्रसन्नता के भाव को लेकर आपके यशस्वी एवं ऐश्वर्यवान होने की कामना करते हुए यह अभिव्यक्त करना चाहता हूं कि 10 मार्च, 2022 का सुखद दिवस उत्तराखंड के  मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अग्निपरीक्षा का कठिन एवं दुर्लभ क्षण था। एक ओर राज्य में सीएम पुष्कर सिंह धामी  के नेतृत्व में लोकतंत्र के महापर्व में "सामान्य विधानसभा निर्वाचन 2022" के अन्तर्गत उत्तराखण्ड ...

मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों को शपथ लेने की बीजेपी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दी बधाई

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मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रियों को शपथ लेने की बीजेपी नेताओं व कार्यकर्ताओं ने दी बधाई गाजियाबाद। शुक्रवार को लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक समेत अन्य 50 मंत्रीगणों द्वारा अटल स्टेडियम स्थित शपथ ग्रहण समारोह स्थल पर शपथ ग्रहण करने पर गाजियाबाद नगर निगम के पार्षद और उनके वार्ड प्रतिनिधि समेत भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। बधाई देने वालों में वार्ड नम्बर 87 की पार्षद निर्मला त्यागी और उनके वार्ड प्रतिनिधि सलेक चंद त्यागी, पूर्व राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य, किसान मोर्चा भाजपा, बी एस बढोरिया, देविंदर त्यागी, निहिल श्रीवास्तव, शिशिर कानूनगो, मनीषा, संजय दूबे, संदीप, राहुल त्यागी, मुकुल, सुभराम शर्मा, नकुल त्यागी, नेहा शर्मा, पूनम बंसल, ममता तिवारी, अरविन्द, अनुराधा, मीनू सक्सेना, अनुपमा गुप्ता, सत्येंद्र चौधरी, अनिल भारद्वाज आदि प्रमुख हैं। फोटोकैप्शन:- निर्मला त्यागी, निगम पार्षद, वार्ड नम्बर 87 ज्ञानखण्ड, इंदिराप...

हिंदुत्व, विकास और सामाजिक संतुलन के सहारे हिंदी पट्टी में भाजपा फिर से जमायेगी अपने राजनैतिक अंगद पांव

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हिंदुत्व, विकास और सामाजिक संतुलन के सहारे हिंदी पट्टी में भाजपा फिर से जमायेगी अपने राजनैतिक अंगद पांव  # यूपी में लगातार दूसरी बार गठित हुई योगी सरकार के मंत्रियों के चयन से इस बात के मिल रहे हैं संकेत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार हिंदुत्व और विकास के एजेंडे पर देश-प्रदेश की राजनीति  में सियासी फर्राटे भरने वाली भारतीय जनता पार्टी ने उत्तरप्रदेश में दूसरी बार लगातार बनी योगी सरकार के मंत्रियों के चयन में जो सामाजिक संतुलन स्थापित करने की सकारात्मक पहल की है, यदि वही उसकी सियासी रोड मैप बन जाये तो निकट भविष्य में हिंदी पट्टी की राजनीति काफी हद तक उसके पक्ष में बदल सकती है।  हिंदी पट्टी से हमारा तातपर्य यूपी, बिहार, दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, छत्तीसगढ़ समेत उन राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों से है, जहाँ हिंदी भाषी मतदाता बहुतायत में हैं। ये लोग सियासत को जातीय और साम्प्रदायिक चश्मे से देखने को आदी समझे जाते हैं। यही वजह है कि यहां मंडल और कमंडल की राजनीति न केवल जोर पकड़ी, बल्कि राष्ट्रवाद और विकास के म...