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मार्च 4, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

यूक्रेन में चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के लिए क्यों जाते हैं भारतीय छात्र, जानिए प्रमुख वजहें

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यूक्रेन में चिकित्सा शिक्षा हासिल करने के लिए क्यों जाते हैं भारतीय छात्र, जानिए प्रमुख वजहें @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार रूस और यूक्रेन के बीच जारी मौजूदा संघर्ष ने भारत के लिए एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। यूक्रेन में फंसे हजारों भारतीय छात्रों को वहां से सुरक्षित निकालने की चुनौती भारत सरकार के समक्ष उतपन्न हो चुकी है। सरकार लगातार उनकी वापसी के लिए प्रयास कर रही है। इंडिया से फ्लाइट भेज उन्हें वापस लाया जा रहा है। यूक्रेन में फंसे हुए ज्यादातर छात्र ऐसे हैं, जो मेडिकल की पढ़ाई के लिए वहां गए हुए थे।  गौरतलब है कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद वहां से सभी फ्लाइट ऑपरेशन बंद है, जिसके चलते हजारों भारतीय छात्र वहां मुश्किल और खतरनाक परिस्थितियों में फंसे हुए हैं। वहीं, रूस-यूक्रेन के बीच होने वाला युद्ध अब लंबा खींच रहा है। इससे परेशान यूक्रेन ने खारकीव शहर में, भारतीय छात्रों को बंधक बना रखा है और मानव शिल्ड के रुप में इस्तेमाल कर रहा है। इसलिए भारत सरकार ने अपने नागरिकों को वहां से निकालने के लिए 'ऑपरेशन गंगा' के तहत सभी तरह के प्रयास शुरू कर दिए हैं...

प्रधानमंत्रियों की सूझबूझ से सामर्थ्यशाली बना भारत, बढ़ी वैश्विक पूछ

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प्रधानमंत्रियों की सूझबूझ से सामर्थ्यशाली बना भारत, बढ़ी वैश्विक पूछ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार साम्यवादी सोवियत संघ यानी यूएसएसआर के पतन के साथ ही शीत युद्ध की समाप्ति के बाद पूंजीवादी अमेरिका ने जिस भूमंडलीकरण यानी ग्लोबलाइजेशन और नई आर्थिक नीति यानी न्यू इकोनॉमिक पालिसी को बढ़ावा दिया, उसे तीसरी दुनिया के देशों में नवआर्थिक साम्राज्यवाद करार दिया गया। जिसके तहत दुनिया के थानेदार संयुक्त राज्य अमेरिका ने नाटो देशों के साथ मिलकर कहीं विकास की चकाचौंध दिखाकर तो कहीं बल प्रयोग आजमाकर मनमाफिक नीतियों को लागू करवाया।  हालांकि, समय के साथ ही नई आर्थिक नीतियों की सफलता का कारक समझी गईं बहुराष्ट्रीय कम्पनियों और उनकी छत्रछाया में विकसित हुईं राष्ट्रीय कम्पनियों की पोल खुलती गई। क्योंकि इनका मकसद सुशासन और जनसुविधाएं विकसित करवाना नहीं था, बल्कि इसी की आड़ लेकर लाभकारी सरकारी संस्थाओं का निजीकरण करवाना हो गया, ताकि सरकार और उसके चमचों की सभी अंगुलियां घी में डूबी रहें।  लेकिन इन्हीं नीतियों का फायदा उठाकर विकसित हुए चीन ने जब अपने विस्तारवादी रवैये का इजहार कि...