संदेश

जुलाई 7, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

Samrat Choudhary's political acumen: Is Bihar's politics truly entering a new era?

चित्र
सम्राट चौधरी की सियासी सूझबूझ: क्या बिहार की राजनीति सचमुच नए दौर में प्रवेश कर रही है? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार की राजनीति में बदलाव का दावा नया नहीं है, लेकिन हर दौर में उसकी कसौटी अलग रही है। कभी सामाजिक न्याय सबसे बड़ा राजनीतिक विमर्श बना, तो कभी सुशासन केंद्र में आया और अब विकास, निवेश तथा प्रशासनिक स्थिरता को लेकर नई बहस दिखाई देती है। ऐसे समय में भाजपा के वरिष्ठ नेता और प्रमुख रणनीतिकार के रूप में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की राजनीतिक भूमिका स्वाभाविक रूप से चर्चा के केंद्र में है। राजनीतिक विश्लेषकों का एक वर्ग मानता है कि भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार के गठन के बाद सम्राट चौधरी ने संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने की कोशिश की। गठबंधन की राजनीति में संवाद बनाए रखना, विभिन्न नेताओं के बीच तालमेल और कार्यकर्ताओं के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखना उनकी प्रमुख राजनीतिक प्राथमिकताओं में रहा है। इससे सरकार को अपेक्षाकृत स्थिर राजनीतिक वातावरण...

Rann of Bankipur Vis by-election: not a seat, the political direction of Bihar exam

चित्र
बांकीपुर विस उपचुनाव का रण: एक सीट नहीं, बिहार की राजनीतिक दिशा की परीक्षा # जनादेश केवल विधायक नहीं चुनेगा, बल्कि सत्ता, विपक्ष और नए राजनीतिक विकल्पों की विश्वसनीयता भी परखेगा https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ प्रणय राज, युवा राजनीतिक विश्लेषक बिहार की राजनीति में कुछ चुनाव ऐसे होते हैं, जिनका महत्व उनकी भौगोलिक सीमाओं से कहीं अधिक होता है। पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट का उपचुनाव भी ऐसा ही चुनाव बनता जा रहा है। यह केवल रिक्त हुई एक विधानसभा सीट को भरने का संवैधानिक उपक्रम नहीं, बल्कि राज्य की वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों, सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रति जनता के विश्वास, विपक्ष की प्रभावशीलता और उभरते राजनीतिक विकल्पों की स्वीकार्यता की महत्वपूर्ण परीक्षा है। भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव अपनी परंपरागत शहरी राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक क्षमता को बनाए रखने की चुनौती है। वहीं जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर के लिए यह पहली प्रत्यक्ष चुनावी परीक्षा है। चुनावी रणनीतिकार के रूप में उनकी पहचान पहले से स्...

Prime Minister Narendra Modi's visits to Australia, New Zealand, and Indonesia will give momentum to the Indo-Pacific strategy.

चित्र
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और इंडोनेशिया यात्रा से परवान चढ़ेगी इंडो-पैसिफिक रणनीति     client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और इंडोनेशिया यात्रा को केवल तीन देशों के दौरे के रूप में नहीं, बल्कि भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति, आर्थिक कूटनीति और संतुलित विदेश नीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इसलिए इसके कई महत्वपूर्ण कूटनीतिक मायने निकलते हैं, जिन्हें हम सबको समझना चाहिए। पहला, इंडो-पैसिफिक में भारत की भूमिका मजबूत करना:  ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड, दोनों हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक साझेदार हैं। इन देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर भारत यह संदेश देता है कि वह क्षेत्र में नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था, स्वतंत्र नौवहन और स्थिरता का समर्थक है। दूसरा, चीन को संतुलित करने की रणनीति: हालांकि भारत खुले तौर पर किसी देश का नाम नहीं लेता, लेकिन यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब चीन का प्रभाव प्रशांत क्षेत्र और दक्षिण-पूर्व ...