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आखिर विश्व, भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना क्यों चाहता है? समझिए

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आखिर विश्व, भारत की विकास यात्रा का हिस्सा बनना क्यों चाहता है? समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक विश्व आज भारत की विकास यात्रा का हिस्सा इसलिए बनना चाहता है, क्योंकि भारत केवल “बड़ा बाजार” नहीं रहा, बल्कि वह अब यह देश वैश्विक राजनीति, अर्थव्यवस्था, तकनीक, सुरक्षा और मानव संसाधन का एक निर्णायक केंद्र बनता जा रहा है। खास बात यह है कि अब वह कई मामलों में अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस-जर्मनी-यूके जैसे यूरोपीय देशों से होड़ भी लेने लगा है। पहला, दुनिया को भारत में सबसे बड़ा बाजार दिख रहा है: भारत दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश है। यहां तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग, डिजिटल उपभोक्ता और विशाल युवा शक्ति वैश्विक कंपनियों को आकर्षित कर रही है। इसी कारण तकनीक, ई-कॉमर्स, ऑटोमोबाइल, रक्षा, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा क्षेत्रों में भारी विदेशी निवेश आ रहा है।  दूसरा, चीन के विकल्प के रूप में भारत: अमेरिका-चीन तनाव और सप्लाई चेन संकट के बाद दुनिया “चाइना प्लस वन” रणनीति अपना रही है। कई बहुराष्ट्रीय कंपनियां अब उत्पादन और निवेश का बड़ा हिस्सा भारत में स्थानांतरित...

विकसित भारत की यात्रा में युवा मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जानिए कैसे?

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विकसित भारत की यात्रा में युवा मुख्य भूमिका निभा रहे हैं, जानिए कैसे? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक विकसित भारत की यात्रा में युवा इसलिए मुख्य भूमिका निभा रहे हैं क्योंकि वही भारत की कार्यशक्ति हैं, वही तकनीकी शक्ति हैं, वही नवाचार की ऊर्जा हैं, और वही भारत को 21वीं सदी की वैश्विक महाशक्ति बना सकते हैं। युवा केवल भविष्य नहीं हैं, बल्कि वे वर्तमान भारत की सबसे निर्णायक शक्ति बन चुके हैं। सच कहूं तो “विकसित भारत 2047” की यात्रा में युवा सबसे बड़ी शक्ति बनकर उभरे हैं। वास्तव में, आज का भारतीय युवा केवल नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नवाचार, तकनीक, स्टार्टअप, कौशल, राष्ट्रनिर्माण और वैश्विक नेतृत्व का वाहक बनता जा रहा है। जानिए आखिर कैसे वो अपनी भूमिका निभा पा रहे हैं :- पहला, भारत की सबसे बड़ी ताकत- युवा जनसंख्या: भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में गिना जाता है। लगभग 65% आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है। यही जनशक्ति भारत को डेमोग्राफिक डिविडेंड (Demographic Dividend) देती है। यानी काम करने वाली विशाल आबादी, नए विचार, तेजी से सीखने की क्षमता, और उत्पा...

आखिर पीएम मोदी ने “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” के तहत ही तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौते क्यों किए?

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आखिर पीएम मोदी ने “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” के तहत ही तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौते क्यों किए? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को यदि गहराई से देखें, तो उनमें एक साझा लक्ष्य स्पष्ट दिखाई देता है, वह यह कि भारत के युवाओं को रोजगार, कौशल, तकनीक, वैश्विक अवसर और भविष्य की अर्थव्यवस्था में नेतृत्व दिलाना। इसीलिए मोदी सरकार के अधिकांश वैश्विक समझौते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” का हिस्सा माने जा रहे हैं। सवाल है कि पीएम मोदी ने “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” के तहत ही तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौते आखिर क्यों किए? तो यह जान लीजिए कि इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य यह है कि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार और कामधाम मिले और देश की चतुर्दिक तरक्की में वो अपना योगदान दे सकें। इसके दृष्टिगत ही उन्होंने निम्नलिखित कदम उठाए- पहला, रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को केंद्र में रखा गया: मोदी ने कई मंचों पर कहा कि भारत की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अवसर देना है। हाल ह...

'कॉकरोच जनता पार्टी' की डिजिटल लोकप्रियता के सियासी निहितार्थ

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'कॉकरोच जनता पार्टी' की डिजिटल लोकप्रियता के सियासी निहितार्थ  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कॉकरोच जनता पार्टी जैसे व्यंग्यात्मक डिजिटल पेज को लाखों लाइक मिलना केवल इंटरनेट-मज़ाक नहीं माना जा सकता, बल्कि यह कई गहरे सामाजिक-राजनीतिक संकेत देता है- खासकर युवाओं, मध्यम वर्ग और डिजिटल समाज की मानसिकता के बारे में। यही वजह है कि केंद्र-राज्यों में सत्तारूढ़ दलों और नागरिक प्रशासन को सावधान हो जाना चाहिए, अन्यथा उन्हें अगली जेन-जी क्रांति के साइड इफेक्ट्स का सामना करना पड़ सकता है। बताया जाता है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की टिप्पणी अशोभनीय थी, जिससे अब खुद भी वो मुकर चुके हैं, लेकिन उनकी उक्ति ने सत्ता प्रतिष्ठान की सोच को उजागर करके लोगों को भड़काने का काम किया है, और शायद विपक्षी दलों के हिमायती लोग और उनकी समर्थक युवा पीढ़ी इसी मौके की तलाश में थी, जो कॉकरोच जनता पार्टी जैसे व्यंग्यात्मक डिजिटल पेज के सृजन और उसको मिले लाखों लाइक से स्पष्ट होती है। इसे केवल इंटरनेट-मज़ाक समझने की बजाए इस असंतोष की जड़ में जाना होगा।  कॉकरोच जनता ...

नवाचार, निर्माण और वितरण जैसी वैश्विक त्रिशक्ति को साधकर विकसित बनेगा भारत

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नवाचार, निर्माण और वितरण जैसी वैश्विक त्रिशक्ति को  साधकर विकसित बनेगा भारत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश, और उनमें भी सर्वाधिक युवा तादात वाला देश भारत और उसकी सरकार की 21वीं सदी की चुनौतियां बहुत बड़ी हैं। लेकिन भाजपा नीत एनडीए की मोदी सरकार जिस तरह से ठोस रणनीति पूर्वक आगे बढ़ रही है, वह इस जनसंख्या वृद्धि वाली 'आपदा' को भी कामकाजी 'अवसर' में बदल देगी। भले ही भारत के राष्ट्रीय संसाधन सीमित हैं, लेकिन सुरसा मुख की भांति लगातार बढ़ती जा रही जनसंख्या की चिंता सरकार को है।  लिहाजा, केंद्र सरकार अमेरिका, रूस-चीन, जर्मनी, जापान, दक्षिण कोरिया, जापान, ताइवान, सिंगापुर आदि विकसित देशों से बहुत कुछ सीख रही है, ताकि वह खुद अपनाकर न केवल विकसित बने, बल्कि हर हाथ को काम और हर व्यक्ति को भोजन सुरक्षा प्रदान कर सके। विकसित भारत 2047 के रूप में यही लक्ष्य लिए हुए सरकार आगे बढ़ रही है। इसके लिए वह तकनीकी कुशलता का सहारा लेकर  अकुशल मानव श्रम को कुशल मानव श्रम में बदलना चाहती है ताकि देश-दुनिया ...