आखिर पीएम मोदी ने “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” के तहत ही तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौते क्यों किए?
आखिर पीएम मोदी ने “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” के तहत ही तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौते क्यों किए?
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को यदि गहराई से देखें, तो उनमें एक साझा लक्ष्य स्पष्ट दिखाई देता है, वह यह कि भारत के युवाओं को रोजगार, कौशल, तकनीक, वैश्विक अवसर और भविष्य की अर्थव्यवस्था में नेतृत्व दिलाना। इसीलिए मोदी सरकार के अधिकांश वैश्विक समझौते केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” का हिस्सा माने जा रहे हैं।
सवाल है कि पीएम मोदी ने “युवा-केंद्रित विकास मॉडल” के तहत ही तमाम अंतरराष्ट्रीय समझौते आखिर क्यों किए? तो यह जान लीजिए कि इसके पीछे प्रधानमंत्री मोदी का उद्देश्य यह है कि युवाओं को ज्यादा से ज्यादा रोजगार और कामधाम मिले और देश की चतुर्दिक तरक्की में वो अपना योगदान दे सकें। इसके दृष्टिगत ही उन्होंने निम्नलिखित कदम उठाए-
पहला, रोजगार और स्किल डेवलपमेंट को केंद्र में रखा गया: मोदी ने कई मंचों पर कहा कि भारत की विदेश नीति का मुख्य उद्देश्य युवाओं को अवसर देना है। हाल ही में उन्होंने स्पष्ट कहा कि भारत की अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां “युवाओं की सेवा” के लिए संरचित की गई हैं। इन समझौतों के जरिए स्किल ट्रेनिंग, नई तकनीकों का प्रशिक्षण, वैश्विक रोजगार, और उद्योग आधारित शिक्षा को बढ़ावा दिया जा रहा है।
दूसरा, सेमीकंडक्टर समझौते- युवाओं के लिए भविष्य की नौकरियां: भारत ने जापान, सिंगापुर, नीदरलैंड, जर्मनी, और फ्रांस के साथ सेमीकंडक्टर और हाई-टेक निर्माण पर समझौते किए। इसका सीधा लाभ युवाओं को चिप डिजाइन, एआई (AI), रोबोटिक्स, इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण,और रिसर्च क्षेत्रों में मिलेगा। भारत अब “मैन्युफैक्चरिंग औरLPPप टेक्नोलॉजी हब” बनने की कोशिश कर रहा है।
तीसरा, एआई (AI) और डिजिटल समझौते युवाओं को भविष्य की अर्थव्यवस्था से जोड़ रहे। स्वीडन, फ्रांस, यूरोपीयन संघ और अन्य देशों के साथ एआई (AI) तथा डिजिटल इनोवेशन पर सहयोग बढ़ाया गया। क्यों महत्वपूर्ण? क्योंकि आने वाले वर्षों में, एआई (AI), साइबर सिक्योरिटी, डेटा साइंस, क्लाउड टेक्नोलॉजी,और ऑटोमेशन सबसे बड़े रोजगार क्षेत्र होंगे। मोदी सरकार युवाओं को उसी भविष्य के लिए तैयार करना चाहती है।
चौथा, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) से रोजगार के अवसर: यूनाइटेड किंगडम, यूरोपीयन संघ और अन्य देशों के साथ व्यापार समझौतों का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि भारतीय युवाओं के लिए वैश्विक बाजार खोलना भी है। इनसे एमएसएमई सेक्टर बढ़ेगा, स्टार्टअप को बाजार मिलेगा, आईटी (IT) और सेवा क्षेत्र को विस्तार मिलेगा, और लाखों नई नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
पंचम, वैश्विक मोबिलिटी समझौते: कई देशों के साथ “स्किल मोबिलिटी” और “वर्कफोर्स एक्सचेंज” समझौते हुए। इसका मतलब भारतीय युवाओं को विदेशों में काम, रिसर्च, और प्रोफेशनल अवसर मिलेंगे। विशेषकर जापान, जर्मनी, यूरोप, और खाड़ी देशों को प्रशिक्षित भारतीय युवाओं की जरूरत है।
छठा, ग्रीन एनर्जी और नई अर्थव्यवस्था: नॉर्वे, यूनाइटेड अरब एमिरेट्स, फ्रांस और यूरोपीय देशों के साथ ग्रीन हाइड्रोजन, क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, और जलवायु तकनीक पर समझौते हुए। ये क्षेत्र आने वाले दशकों में करोड़ों नौकरियों का आधार बन सकते हैं।
सातवां, शिक्षा और रिसर्च साझेदारी: कई समझौतों में संयुक्त रिसर्च, छात्र एक्सचेंज, टेक्नोलॉजी ट्रेनिंग, और वैश्विक विश्वविद्यालय सहयोग शामिल हैं। इसका उद्देश्य भारतीय युवाओं को विश्वस्तरीय शिक्षा और रिसर्च से जोड़ना है।
आठवां, “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” का वैश्विक संस्करण: मोदी की रणनीति यह रही कि विदेशी निवेश भारत आए, लेकिन उससे भारतीय युवाओं को कौशल और रोजगार भी मिले। इसीलिए रक्षा निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल निर्माण, ईवी, और सेमीकंडक्टर उद्योगों में विदेशी कंपनियों को भारत में उत्पादन हेतु प्रोत्साहित किया गया।
नौवां, स्टार्टअप इंडिया को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ना: भारत की विदेश नीति अब केवल सरकारों तक सीमित नहीं रही।अब स्टार्टअप, इनोवेशन, फिनटेक, और डिजिटल उद्यमिता को भी वैश्विक साझेदारी से जोड़ा जा रहा है। इससे भारतीय युवाओं को पूंजी, तकनीक, और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच मिल रही है।
लेकिन इस राह में कुछेक चुनौतियां भी हैं। यह ठीक है कि समझौते बड़े-बड़े हुए हैं, पर सफलता इस पर निर्भर करेगी कि क्या युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल मिलेगा? क्या रोजगार वास्तव में बढ़ेंगे? क्या छोटे शहरों और गांवों के युवा भी लाभान्वित होंगे? क्या शिक्षा व्यवस्था उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बदलेगी?
निष्कर्षतः यह कहा जा सकता है कि मोदी सरकार के अधिकांश अंतरराष्ट्रीय समझौतों का मूल उद्देश्य केवल विदेश नीति नहीं, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार, नई तकनीक, वैश्विक अवसर, कौशल विकास, और भारत को भविष्य की अर्थव्यवस्था का केंद्र बनाना है। यानी भारत की विदेश नीति अब सीधे भारत के युवाओं के भविष्य से जुड़ चुकी है। गत दिनों 19वें रोजगार मेले में पीएम मोदी ने खुद ही इसका खुलासा किया।
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें