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रणनीतिक सामग्रियों के उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है भारत

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रणनीतिक सामग्रियों के उत्पादन में  तेजी से आगे बढ़ रहा है भारत "भारत के पास रणनीतिक सामग्री बनने की पर्याप्त आधारभूत क्षमता है; चुनौती संसाधन की कमी से ज्यादा उन्हें बड़े पैमाने पर उच्च-मूल्य, उच्च-शुद्धता वाले तैयार पदार्थों में बदलने की है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  रणनीतिक सामग्री वे खनिज, धातु और उन्नत पदार्थ हैं जिनकी उपलब्धता किसी देश की रक्षा, ऊर्जा-सुरक्षा, अंतरिक्ष, इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, परमाणु तकनीक, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन और उच्च-तकनीकी उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। इनकी आपूर्ति कुछ देशों में केंद्रित होने के कारण इनका आर्थिक और सामरिक महत्व बढ़ जाता है। भारत ने मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत विगत 12 वर्षों में इस क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। इससे इस बात की उम्मीद बंधती है कि आने वाले वर्षों में अपनी सटीक रणनीति के तहत भारत इस क्षेत्र में भी बुलंदियों पर पहुंचेगा और ग्लोबल साउथ के देशों के लिए भी एक अच्छा विकल्प उपलब्ध करवाएगा। भारत के संदर्भ में इसे समझने के लिए खनिज, उसके शुद्धिकरण/प्रसंस्...

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में जेन जी ने एबीवीपी को जीताया, एनएसयूआई को छकाया, समझिए इसके राजनीतिक निहितार्थ

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में जेन जी ने एबीवीपी को जीताया, एनएसयूआई को छकाया, समझिए इसके राजनीतिक निहितार्थ  "जेन-जी युवाओं का रूझान अब भी एबीवीपी के साथ बना हुआ है। चर्चित जेन-जी आंदोलन (CJP) के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेन-जी युवाओं को खुद से जोड़े रखने का जो बीड़ा उठाया, वह सफल रहा। इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी दूरगामी होंगे।" @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय पैनल के चार में से तीन मुख्य पदों (अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव) पर जीत हासिल की है। वहीं उपाध्यक्ष पद पर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहाँ निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने बड़ी जीत दर्ज की है। इस चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई का खाता भी नहीं खुल सका। इससे साफ है कि जेन-जी युवाओं का रूझान अब भी एबीवीपी के साथ बना हुआ है। चर्चित जेन-जी...

हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए

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हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए  "हिंदी भाषा भारत को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन इसे किसी राजनीतिक एजेंडे या अनिवार्यता के बजाय आपसी संवाद और बाजार की जरूरत के तहत स्वाभाविक रूप से विकसित होने देना ही देश के बहुभाषी ताने-बाने को मजबूत रख सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भारत में हिंदी भाषा को लेकर चलने वाली राजनीति और उसकी जमीनी सच्चाई के बीच एक बड़ा अंतर है, जो लगातार गहराता चला गया। हालांकि अब इसे पाटने और इससे लेकर गाहे बगाहे उत्पन्न होते रहने वाले मतभेदों को दूर करने की जरूरत है। एक तरफ जहां हिंदी को राजनीतिक ध्रुवीकरण और भाषाई अस्मिता के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, वहीं व्यावहारिक धरातल पर इसकी स्थिति बिल्कुल अलग नजर आती है। इसलिए जनसामान्य के नजरिए से ही इसका सम्यक समाधान अपेक्षित है। https://www.pravakta.com/assess-the-hindi-language-from-the-perspective-of-ground-reality-not-politics/ खासकर भारतीय अभिजात्य वर्ग यानी अंग्रेजी दां लोगों के इशारे पर दक्षिण-पश्चिम-पूर्वी भ...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे विश्व के ताकतवर नेता बन गए? उनके गूढ़ राजनीतिक गुणों के बारे में जानिए।

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे विश्व के ताकतवर नेता बन गए? उनके गूढ़ राजनीतिक गुणों के बारे में जानिए। "पीएम मोदी ने पारंपरिक गुटनिरपेक्षता की नीति को बदलते हुए 'मल्टी-अलाइनमेंट' की रणनीति अपनाई। भारत ने एक ही समय में अमेरिका, रूस, यूरोप और मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) के साथ मजबूत व्यापारिक और सुरक्षा संबंध बनाए रखे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच वैश्विक दबावों के बावजूद भारत के राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनना उनकी मजबूत कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।" # प्रधानमंत्री के जन्मदिन (17 सितंबर) पर विशेष @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक क्षेत्रीय नेता से वैश्विक पटल पर सबसे प्रभावशाली शीर्ष नेताओं में शामिल होना, उनकी सुदृढ़ रणनीतिक सोच, जनसंपर्क क्षमता और कूटनीतिक दूरदर्शिता का परिणाम है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रमुख और चर्चित चेहरों में से एक हैं। देश की जनता उन्हें अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखती है, और विपक्षी नेताओं के साथ उनके राजनीति...

जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए?

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जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए? "यदि नितिन नवीन भाजपा को युवाओं—विशेषकर Gen Z, first-time voters, college students, युवा professionals और startup/entrepreneur वर्ग—से जोड़ना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी बदलाव उन्हें यह करना होगा कि युवाओं को केवल “वोट बैंक” नहीं, बल्कि पार्टी के विचार, संगठन और नीति-निर्माण में भागीदार बनाया जाए।" @  कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन युवा नेता हैं, लेकिन युवाओं खासकर जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की उनकी मुहिम जब रंग नहीं ला पाई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह कार्य अपने ही जिम्मे ले लिया और श्रीराम कॉलेज से लेकर मेट्रो तक "हनुमान कूद" करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे खुद नितिन नवीन के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोदी-शाह और भाजपा-आरएसएस में तालमेल बिठाने के चक्कर में वह खुद अप्रासंगिक होते नजर आ रहे हैं। देखा जाए तो लगभग आठ महीने से वो पार्टी के राष...

क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय?

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क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय? (Is the chapter of a 'new institutional era' beginning in Ayodhya?) "अब तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का संचालन मुख्यतः ट्रस्ट के पदाधिकारियों और धार्मिक-सामाजिक नेतृत्व के माध्यम से होता रहा। अब पहली बार पूर्णकालिक CEO का पद बनाया गया है। इसका अर्थ है कि मंदिर प्रशासन को केवल धार्मिक न्यास के पारंपरिक ढांचे में नहीं, बल्कि एक बड़े, जटिल और बहुस्तरीय संस्थान के रूप में देखने की जरूरत महसूस हुई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के सबसे शक्तिशाली धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों में बदल चुका है। इसलिए जब भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र कुमार मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाता है, तो इसे महज एक प्रशासनिक नियुक्ति मानकर छोड़ देना शायद इस घटनाक्रम के वास्तविक राजनीतिक और संस्थागत अर्थ को छोटा करके देखना होगा। इस बड़ा अभिप्राय यह है कि क्या अयोध...

आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं?

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आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं? (After all, how long will political and administrative beliefs continue to wander in the mirage of Swadeshi?) "सच कहूँ तो “स्वदेशी से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से प्रतिस्पर्धी भारत और प्रतिस्पर्धी भारत से विश्व बाजार में भारतीय नेतृत्व की पैठ बढ़ती है।” इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंस्टा पोस्ट में देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता भी बतलाई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "आर्थिक विकास दर" में उल्लेखनीय वृद्धि पर देशवासियों को बधाई देते हुए एक बार फिर से स्वदेशी का राग अलापा है और विदेशों से गैर जरूरी सोने की खरीद न करने, विदेश यात्रा से परहेज करने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की है। चूंकि ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुके हैं, इसलिए सवाल उठता है कि आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में राजनीतिक आस्थाएं कबतक भटकेंगी? जब स्वदेशी ही सफलता का मूल मंत्र है तो बार-बार आह्वान करने से बेहतर है, वैधानिक प्रतिबंध लगा देना, या मात्रा...

जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए

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जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए (How to assess the political maneuvering of Congress and BJP regarding caste census) "कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज करने के लिए स्पष्ट, पूर्व-निर्धारित सूची/कोडिंग व्यवस्था नहीं होगी, तो अलग-अलग नाम, वर्तनी और उपजातियों के कारण आंकड़े अविश्वसनीय हो सकते हैं। इसलिए उसने इसे दुरुस्त करने की मांग उठाई, ताकि जातिगत जनगणना सही तरह से हो सके।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का भाजपा के खिलाफ मौजूदा हमला केवल “जाति गिनी जाए या नहीं” का सवाल नहीं है, बल्कि असली लड़ाई अब डेटा की विश्वसनीयता, सामाजिक न्याय की राजनीति और उससे बनने वाले नए राजनीतिक समीकरण की है। यही वजह है कि अगस्त 2026 में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा जाति-जनगणना पद्धति पर आपत्ति जताई है। इसलिए जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को ऐसे जानिए। कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज...

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा से चीनी-पाकिस्तान में मचेगा हड़कंप!

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US Ambassador Sergio Gour's visit to Jammu and Kashmir will cause a stir in China and Pakistan! अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा से चीनी-पाकिस्तान में मचेगा हड़कंप! अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा से चीनी-पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। यह मोदी कूटनीति का ही करिश्मा है कि जब जब कोई भारत को घेरने की कोशिश करता है तो खुद ही घिरता हुआ महसूस करने को अभिशप्त हो जाता है। जानिए विस्तार से.... @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जरा गौर कीजिए, जब चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत को आंखें दिखा रहा हो, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का  जम्मू-कश्मीर/लद्दाख पहुंचना और जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भारतीय कूटनीति की कितनी बड़ी सफलता है, क्योंकि यह परोक्ष रूप से चीन को संदेश है कि भारत का साथ मिलते ही अमेरिका अन्य एशियाई 'बदमाशों' को रौंद डालेगा।  उधर, पाकिस्तान को संदेश है कि इस्लामिक नाटो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं बनेगा, यदि अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहेगा। जी हां, अमेरिकी राजदूत की 19–20 अगस्त 202...