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मुख्यमंत्री शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन संस्थाएँ उससे कमजोर नहीं होनी चाहिए!

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मुख्यमंत्री शक्तिशाली हो सकता है, लेकिन संस्थाएँ उससे कमजोर नहीं होनी चाहिए: पंडित गोविंद बल्लभ पंत            (10 सितंबर को जन्मदिन पर विशेष) "समकालीन राजनीति में यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता है: विनोद पंत, भाजपा नेता व समाजसेवी, वसुंधरा, गाजियाबाद" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक समकालीन राजनीति में उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पं. गोविंद बल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता है, क्योंकि  यह केवल इतिहास को याद करने का विषय नहीं है बल्कि वर्तमान को और सुधारने का संकल्प भी हो सकता है। यह कहना है उनके पौत्र विनोद पंत का, जो खुद भाजपा नेता व समाजसेवी, वसुंधरा, गाजियाबाद  हैं। समकालीन राजनीति में यूपी के मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत की राजनीतिक उपयोगिता के बारे में विनोद पंत बताते हैं कि  स्वतंत्रता सेनानी से मुख्यमंत्री तक का सफर करने वाले पंत आज की राजनीति के लिए सुशासन, संघवाद, भूमि-सुधार, प्रशासनिक अनुशासन और राजनीतिक सहमति का एक उपयोगी राजनीतिक मॉडल प्रस्तुत करत...

भारत की राष्ट्रनीति बनाम राज्यों की मनमानी: क्या भारत को नए संघीय अनुबंध की जरूरत है?

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भारत की राष्ट्रनीति बनाम राज्यों की मनमानी: क्या भारत को नए संघीय अनुबंध की जरूरत है? (India's National Policy vs. Arbitrary Actions by States: Does India Need a New Federal Compact?) "21वीं सदी की भारतीय राष्ट्रनीति निम्नलिखित पंक्तियां हो सकती है- नया संघीय अनुबंध सत्ता के केंद्रीकरण का दस्तावेज नहीं, सत्ता की जवाबदेही का समझौता होना चाहिए। भारत को न कमजोर केंद्र चाहिए, न बेलगाम राज्य। भारत को चाहिए- “संविधान से ऊपर कोई सरकार नहीं, राजनीति से ऊपर राष्ट्रहित, और सत्ता से ऊपर नागरिक।” यही वह सूत्र है जो भारत को ‘केंद्र बनाम राज्य’ की अंतहीन लड़ाई से निकालकर ‘Team India’ की वास्तविक शासन-पद्धति तक ले जा सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की राष्ट्रनीति को केवल केंद्र सरकार की नीति मानना सही नहीं होगा। भारतीय संविधान की दृष्टि से राष्ट्रनीति का मूल आधार है—संविधान की सर्वोच्चता, राष्ट्रीय एकता, विधि का शासन, नागरिकों की समानता और संघ–राज्य के बीच संवैधानिक संतुलन। सर्वोच्च न्यायालय भी संविधान को विधायी, कार्यकारी और न्यायिक सत्ता का...