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आखिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की गम्भीर लापरवाहियों के लिए कौन होगा जिम्मेदार? बताइए सरकार!

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आखिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की गम्भीर लापरवाहियों के लिए कौन होगा जिम्मेदार? बताइए सरकार! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्र सरकार के शिक्षा विभाग के मातहत कार्य करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA)) पर पिछले कुछ वर्षों में कई बड़ी परीक्षाओं—विशेषकर NEET (UG), UGC NET और अन्य भर्ती/प्रवेश परीक्षाओं—को लेकर प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा केंद्रों की अनियमितताओं और प्रशासनिक खामियों के आरोप लगे हैं। इससे जागरूक युवाओं के बीच प्रगतिशील मोदी सरकार की छवि प्रभावित हुई है और सरकारी कार्यों की विश्वसनीयता पर उनके मन में संदेह पैदा हुआ है।  यही नहीं, संवैधानिक पदधारियों द्वारा इन्हें रोकने में विफलता से व्यवस्था के अंदर जड़ जमाये भ्रष्टाचार की प्रवृत्ति के लोगों को बढ़ावा मिलने की चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, यह कहना कि NTA "पूरी तरह विफल" है, एक राजनीतिक और मूल्यांकनात्मक निष्कर्ष होगा, लेकिन यह अवश्य कहा जा सकता है कि सम्बन्धित एजेंसी को परीक्षा सुरक्षा और विश्वसनीयता बनाए रखने में गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ा ...

भारतीय समुद्र तटीय क्षेत्र पर मंडराते जलवायु संकट की चेतावनी को ऐसे समझिए

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भारतीय समुद्र तटीय क्षेत्र पर मंडराते जलवायु संकट की चेतावनी को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारत के तटीय क्षेत्रों पर जलवायु परिवर्तन का संकट मंडरा रहा है। इससे राजनीतिक दलों को एक और मुद्दा मिल जाएगा। अज़ीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी द्वारा मीडिया से साझा की गई रिपोर्ट "इंडियन कोस्टल रीजन : क्लाइमेट प्रोजेक्शन 2021-2040" के अनुसार, यह संकट अगले कुछ सालों में आमलोगों की जिंदगियों, रोजगार की स्थितियों और पारिस्थितिक तंत्र को बदल कर रख देगा। इसलिए इस स्थिति से बचने के लिए अनिवार्य प्रशासनिक तैयारी समयपूर्व ही हो जानी चाहिए, अन्यथा जन-मुसीबत बढ़ जाएगी। दरअसल, निकट भविष्य (2021-2040) की संभावनाओं पर ध्यान देते हुए यह अध्ययन नीति-निर्माताओं और स्थानीय समुदायों के लिए व्यावहारिक अंतर्दृष्टियां प्रदान करता है। चूंकि इस अध्ययन के लिए CMIP6 मॉडल का इस्तेमाल किया गया है, जिसे क्षेत्रीय स्तर की सटीकता बढ़ाने के लिए संतुलित किया गया है। इस प्रकार यह रिपोर्ट आगाह करती है कि अनुकूलन का समय बड़ी तेजी से घटता जा रहा है क्योंकि भारत के सभी प्रश...

आखिर कबतक मिलेंगे 'सनातनी राष्ट्रवाद' से जुड़े ज्वलंत सवालों के निर्णायक जवाब? समझिए

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आखिर कबतक मिलेंगे 'सनातनी राष्ट्रवाद' से जुड़े ज्वलंत सवालों के निर्णायक जवाब? समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय सनातनी राष्ट्रवाद से जुड़े ज्वलंत सवालों, यथा-  संपूर्ण गोवंश हत्याबंदी कानून, समान नागरिक संहिता, राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC), पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) मुक्ति, अविरल गंगा-निर्मल गंगा, बांग्लादेशी घुसपैठिए भगाना, कैलाश मानसरोवर मुक्ति, स्वदेशी और विकेंद्रीकरण, जनसंख्या नियंत्रण कानून, शिक्षा का भारतीयकरण, रुपये को मजबूत करना,चीन से आयात घटाना आदि पर हमारे देश में राजनीति तो बहुत हुई, लेकिन ऐसे ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी द्वारा पिछले 12 वर्षों में भी मनोवांछित परिणाम नहीं दिया जाना आमलोगों के दिलोदिमाग को उद्वेलित कर रहा है।  आम तौर पर देखा जा रहा है कि जो लोग भाजपा समर्थक नहीं हैं, उनका मनोमिजाज अब आमलोगों को इन्हीं धधकते हुए मसलों पर उकसा रहा है कि आखिर क्यों भाजपा नीत एनडीए सरकार ऐसा नहीं कर पाई, जबकि विपक्ष में रहते हुए उसने इन मुद्दों को खूब हवा दी...