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आखिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वीटो प्राप्त देशों की अनर्गल भूमिका पर उठते ज्वलंत सवालों की कब तक उपेक्षा करेगी शेष दुनिया?

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आखिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वीटो प्राप्त देशों की अनर्गल भूमिका पर उठते ज्वलंत सवालों की कब तक उपेक्षा करेगी शेष दुनिया? "वास्तव में, सुरक्षा परिषद को पंगु बनाने में रूस और अमेरिका सबसे आगे हैं, क्योंकि ये दोनों देश अपने भू-राजनीतिक स्वार्थों और सहयोगियों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को सबसे ज्यादा ताक पर रखते हैं। इसके बाद चीन का नंबर आता है, जो अपनी आर्थिक और सैन्य ताकत के बल पर वैश्विक जवाबदेही से बचता है।" @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि "समरथ को नहीं दोष गोसाईं।" यानी जो लोग धन और बल से ताकतवर होते हैं वो कुछ भी करें, दुनिया उनके दोष नहीं गिनती/मानती। संयुक्त राष्ट्र संघ प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने भी कुछ ऐसी ही कड़ी आलोचना दुनियावी वीटो शक्ति प्राप्त देशों की, की है और दो टूक शब्दों में कहा है कि "जो वैश्विक शक्तियां खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं, वे ही सुरक्षा परिषद में बैठी हैं। इससे सुरक्षा परिषद पंगु हो गई है। इसलिए इस वैश्विक संस्था मे...

हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए

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हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए  "हिंदी भाषा भारत को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन इसे किसी राजनीतिक एजेंडे या अनिवार्यता के बजाय आपसी संवाद और बाजार की जरूरत के तहत स्वाभाविक रूप से विकसित होने देना ही देश के बहुभाषी ताने-बाने को मजबूत रख सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भारत में हिंदी भाषा को लेकर चलने वाली राजनीति और उसकी जमीनी सच्चाई के बीच एक बड़ा अंतर है, जो लगातार गहराता चला गया। हालांकि अब इसे पाटने और इससे लेकर गाहे बगाहे उत्पन्न होते रहने वाले मतभेदों को दूर करने की जरूरत है। एक तरफ जहां हिंदी को राजनीतिक ध्रुवीकरण और भाषाई अस्मिता के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, वहीं व्यावहारिक धरातल पर इसकी स्थिति बिल्कुल अलग नजर आती है। इसलिए जनसामान्य के नजरिए से ही इसका सम्यक समाधान अपेक्षित है। https://www.pravakta.com/assess-the-hindi-language-from-the-perspective-of-ground-reality-not-politics/ खासकर भारतीय अभिजात्य वर्ग यानी अंग्रेजी दां लोगों के इशारे पर दक्षिण-पश्चिम-पूर्वी भ...