सवा सौ साल पुराना है भारत में आरक्षण का इतिहास, गुलाम और आजाद भारत में ऐसे जुड़ती गईं आरक्षण की कड़ियां
सवा सौ साल पुराना है भारत में आरक्षण का इतिहास, गुलाम और आजाद भारत में ऐसे जुड़ती गईं आरक्षण की कड़ियां @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार भारत में आरक्षण के इतिहास के बारे में यदि किसी संस्था ने आपको नहीं बताया है तो यह जान लीजिए कि अपने देश में आरक्षण की मानसिकता से समानता स्थापित करने व विकास करने की बात महज सवा सौ वर्ष पुरानी बात है। जिसके मद्देनजर आजाद भारत में सरकारी सेवाओं और संस्थानों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं रखने वाले पिछड़े समुदायों, अनुसूचित जातियों व जनजातियों से सामाजिक-शैक्षणिक पिछड़ेपन को दूर करने के लिए भारत सरकार ने कानून के जरिये सरकारी एवं सार्वजनिक क्षेत्रों की इकाइयों में, धार्मिक व भाषाई अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थानों को छोड़कर, सभी सार्वजनिक तथा निजी शैक्षिक संस्थानों में पदों तथा सीटों के प्रतिशत को आरक्षित करने की कोटा प्रणाली प्रदान की है। इसके अलावा, भारतीय संसद में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के प्रतिनिधित्व के लिए भी आरक्षण नीति को विस्तारित किया गया है। केंद्र सरकार ने उच्च शिक्षा में 27 प्रतिशत आरक्षण दे रखा है और विभिन्न रा...