सिर्फ इतना याद रखना…
सिर्फ इतना याद रखना… @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार सिर्फ इतना याद रखना, जब ज्वार उठेगा तो भाटा भी आएगा। हर ऊँची लहर के बाद, समुद्र फिर शांत हो जाएगा। धैर्य को अपना दीपक बनाना, आशा को अपना पतवार। अँधियारे कितने भी गहरे हों, उगता है हर दिन नया उजियार। वक़्त कभी एक-सा नहीं रहता, सुख-दुःख आते-जाते मेहमान हैं। जो ठहरकर संघर्ष करता है, उसी के हाथों में सम्मान है। गिरना यदि जीवन की रीति है, तो उठना भी उसका विधान है। हर हार के गर्भ में छिपा हुआ, एक नई जीत का वरदान है। इसलिए घबराना मत साथी, कठिनाई से न नज़र चुराना। सिर्फ इतना याद रखना— जब ज्वार उठेगा तो भाटा भी आएगा, बस अपने मन में विश्वास जगाए रखना, और हर परिस्थिति में धैर्य बनाए रखना।