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खेल को शौकिया मत खेलिए, बल्कि प्रोफेशन के रूप में अपनाइए: अभिषेक कुमार

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जानिए कैसे एक खिलाड़ी बन गया अधिशासी अधिकारी? # खेल को शौकिया मत खेलिए, बल्कि प्रोफेशन के रूप में अपनाइए: अभिषेक कुमार #  जब ये आपका जुनून बन जाएगा, तब आप सफलता के शिखर पर होंगे: अभिषेक कुमार कमलेश पांडेय/भास्कर ब्यूरो गाजियाबाद। भले ही समय और परिस्थितियों पर कभी भी किसी का वश नहीं चलता है, लेकिन जो उनके अनुरूप खुद को ढाल लेता है, जिंदगी में वही आगे बढ़ता है और सफलता दर सफलता प्राप्त करता है। मुरादनगर नगरपालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी अभिषेक कुमार एक ऐसे व्यक्ति हैं, जिनकी पूरी अभिरुचि तो रही खेल के मैदान में, लेकिन जीवन की कुछ अनहोनी और कुछ पारिवारिक प्रेरणा ने उन्हें खिलाड़ी के बजाय आमलोगों के काम आने वाला अधिशासी अधिकारी बना दिया। अंबेडकरनगर जनपद के मूल निवासी अभिषेक कुमार की पारिवारिक पृष्ठभूमि भले ही कृषक और शिक्षक परिवार की रही हो, लेकिन उनका मन पढ़ाई-लिखाई में कम और खेल-कूद के मैदान में ज्यादा लगता था। क्रिकेट, फुटबॉल और कबड्डी के जबर्दस्त खिलाड़ी रहे श्री कुमार का दाहिना अंगूठा यदि घास काटने वाली मशीन से नहीं कटा होता तो वह खेल की दुनिया में अपनी किस्मत आजमाते, जनसेवा की द...

मुरादनगर नगरपालिका परिषद की साख को पुर्नस्थापित करने की पूरी कोशिश करूंगा: अभिषेक कुमार

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मुरादनगर नगरपालिका परिषद की साख को पुर्नस्थापित करने की पूरी चेष्टा करूंगा: अभिषेक कुमार # स्टैंडर्ड मानक और उचित प्राक्कलन के अनुसार करवाए जाएंगे नगरपालिका क्षेत्र में विकास कार्य: अधिशासी अधिकारी # नगरपालिका के प्रति पनपे अविश्वास के भाव को विश्वास के भाव में तब्दील करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी # नगर विकास विभाग की जनकल्याणकारी योजनाओं को मूर्त रूप दिया जाएगा मुरादनगर में, ताकि जरूरतमंद लोग लाभान्वित हों कमलेश पांडेय/भास्कर ब्यूरो गाजियाबाद। जनपद अंतर्गत मुरादनगर नगरपालिका परिषद, मुरादनगर के अधिशासी अधिकारी अभिषेक कुमार ने नगरपालिका की पिछले महीनों में लुढ़की साख को पुनर्स्थापित करने के प्रयास तेज कर दिए हैं। यूपी के प्रतिष्ठित इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र रहे अभिषेक कुमार वर्ष 2007 में ईओ संवर्ग की सेवा में आए और उनकी पहली पोस्टिंग शाहजहांपुर जनपद में हुई। उसके बाद गौतमबुद्धनगर, मेरठ और बिजनौर में ईओ रहते हुए इतना उम्दा कार्य किये कि शासन ने उन्हें गाजियाबाद के उस मुरादनगर नगरपालिका परिषद की जिम्मेदारी सौंपी, जो गत महीनों में सूबाई सुर्खियों में रह चुका है। शासन ने उन्ह...

जानिए, पूर्व व्यापी कर (रेट्रो टैक्स) क्या है? सरकार ने इसे क्यों समाप्त किया? एफडीआई पर इसका क्या असर होगा?

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जानिए, पूर्व व्यापी कर (रेट्रो टैक्स) क्या है? सरकार ने इसे क्यों समाप्त किया? एफडीआई पर इसका क्या असर होगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तंभकार पूर्व व्यापी कर यानी रेट्रो टैक्स एक अस्वाभाविक टैक्स समझा जाता है जो लगभग एक दशक तक केन्द्र सरकार के गले की हड्डी बनी रही। पूर्व अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह और उनके बीरबल नुमा वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी (अब पूर्व राष्ट्रपति) की शानदार सियासी जोड़ी द्वारा थोपे गए रेट्रो टैक्स ने विदेशों में भारत की इतनी जगहंसाई कराई कि मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी काबिल वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण को पिछले 8-9 साल से हतोत्साहित एफडीआई को प्रोत्साहित करने की गरज से इस कानून को ही वापस लेना पड़ा।  यहां पर एक दिलचस्प सवाल उठ रहा है कि जब तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक दूसरे के मुरीद समझे जाते हों और पूर्व अर्थशास्त्री  प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वर्तमान वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण की विद्वता संदेह से परे हो, तो फिर इस दादागिरी भरे कर कानून को लाना गलत था, या फिर इसे वापस लेना गलत है। ...