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जैविक हथियार क्या है? इसके दुरूपयोग की आशंकाओं से भारत जैसा विकासशील देश क्यों चिंतित हैं?

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जैविक हथियार क्या है? इसके दुरूपयोग की आशंकाओं से भारत जैसा विकासशील देश क्यों चिंतित हैं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जैविक हथियार ऐसे हथियार होते हैं जिनमें विस्फोटक के बजाय वायरस, बैक्टीरिया, फंगस या विषाक्त जैविक एजेंटों का उपयोग किया जाता है। इन हथियारों का उद्देश्य लोगों, जानवरों या पौधों में जानलेवा बीमारियां फैलाना होता है, जिससे बड़ी संख्या में मौतें, विकलांगता और सामाजिक-आर्थिक तबाही हो सकती है। स्पष्ट है कि जैविक हथियार बिना धमाके के भी बड़ी तबाही करते हैं और ये कम समय में व्यापक क्षेत्र में प्रभाव डाल सकते हैं।  जानकारों की मानें तो इतिहास में पहला जैविक हथियार प्रयोग प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी ने किया था, और बाद में द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने भी इसका इस्तेमाल किया था। आज भी अमेरिका, रूस, चीन और अन्य कई देश जैविक हथियारों के संभव भंडारण और अनुसंधान में संलग्न हैं, हालांकि इन हथियारों की वास्तविक उपस्थिति का खुलासा आमतौर पर नहीं होता है। भारत सहित दुनिया के अन्य विकाशशील देशों के लिए जैविक हथियार एक गंभीर खतरा हैं क्योंकि ये महाम...

रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से वैश्विक महाशक्तियों की सोच-साजिश दोनों पर पड़ेगा बहुआयामी असर

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रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से वैश्विक महाशक्तियों की सोच-साजिश दोनों पर पड़ेगा बहुआयामी असर @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक रूसी राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्रा से वैश्विक महाशक्तियों खासकर अमेरिका, यूरोपीय संघ और चीन आदि की सोच और साजिश दोनों पर गहरा बहुआयामी असर पड़ेगा। साथ ही पुतिन की नई दिल्ली यात्रा से भारत-रूस संबंधों को भी काफी फायदा होगा। इस दौरे के दौरान दोनों देश अपनी रणनीतिक और सैन्य साझेदारी को और मजबूत करेंगे, जिसमें अगली पीढ़ी के Su-57 फाइटर जेट और एडवांस्ड S-500 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीद पर चर्चा होगी। इसके अलावा, आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मेगा इंडिया-रूस बिजनेस फोरम का आयोजन होगा, जिससे व्यापार और निवेश के मौके बढ़ेंगे। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों के मुताबिक, रक्षा सहयोग के अतिरिक्त इस दौरे पर परमाणु ऊर्जा संयंत्र कुडनकुलम के विस्तार और चंद्रयान मिशन में रूस की भागीदारी पर भी समझौते होने की संभावना है। दोनों देश वीजा फ्री यात्रा जैसे नागरिक सुविधाओं पर भी बात करेंगे, जिससे लोगों के बीच संपर्क और बढ़ेगा। इस प्रकार पुतिन क...

केंद्रीय सत्ता में सनातनी संस्कार प्रतिरोपित करने के लिए मोदी सरकार का आभारी रहेगा देश

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केंद्रीय-सूबाई सत्ता में सनातनी संस्कार-व्यवहार प्रतिरोपित करने के लिए मोदी सरकार का आभारी रहेगा देश-देशवासी @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्र में विगत तीन आम-चुनावों से सत्तारूढ़ नरेंद्र मोदी सरकार ने अब तक जो कई महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों और संस्थानों के नाम बदले दिए हैं, उनका एकमात्र मकसद प्रशासनिक और सांस्कृतिक सोच-समझ में बदलाव लाना है। साथ ही उन सभी को और अधिक जनहितैषी बनाना है।चूंकि शब्दों के मंत्रमय असर और व्यवहार से हम भारतीय वाकिफ हैं, इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के इस फैसले की सर्वत्र सराहना हो रही है। खासकर आरएसएस-भाजपा के लोग तो इसे सांस्कृतिक सपनों के सच होने जैसा मान रहे हैं। इसलिए कहा जा सकता है कि केंद्रीय-सूबाई सत्ता में सनातनी संस्कार-व्यवहार प्रतिरोपित करने के लिए नरेंद्र मोदी सरकार का देश-देशवासी सदैव आभारी रहेगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अबब तक हुआ प्रमुख नाम परिवर्तन इस प्रकार हैं:- पहला, प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) का नाम बदलकर अब "सेवा तीर्थ" कर दिया गया है। इसमें पीएमओ के साथ-साथ मंत्रिमंडल सचिवालय, राष्ट्रीय सुरक्षा...