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छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भारत के रोडमैप के कायल हुए सदस्य देश, सुशासन व विकास को मिलेगी गति

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छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भारत के रोडमैप के कायल हुए सदस्य देश, सुशासन व विकास को मिलेगी गति @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक थाईलैंड में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में भारत के रोडमैप पर सभी सदस्य देश कायल हुए। इससे सुशासन व विकास को गति मिलने के आसार बढ़ गए हैं। बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने थाईलैंड की अध्यक्षता में बैंकाक में आयोजित बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में गत 4 अप्रैल 2025 शुक्रवार को भाग लिया। जिसका विषय था- "बिम्सटेक: समृद्ध, लचीला और खुला।" इस दौरान सभी सदस्य देशों का ध्यान क्षेत्रीय सहयोग को और अधिक मज़बूत करने और आसन्न प्रमुख चुनौतियों का समाधान करने पर था।  तभी तो इस शिखर सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए मोदी ने सदस्य देशों, यथा- थाईलैंड, बंगलादेश, नेपाल, म्यांमार, श्रीलंका, भूटान के सामने आपसी साझेदारी मजबूत करने के लिए 21 बिंदुओं का एक्शन प्लान पेश किया, जिसपर सबने सहमति जताई। वहीं, उन्होंने सभी सदस्य देशों को भारत की भुगतान प्रणाली 'यूपीआई' से जुड़ने का प्रस्ताव  दिया। ताकि उनके पारस्परिक व्यापार, व्यवसाय,...

बिम्सटेक क्या है? इसका उद्देश्य क्या है? इसकी उत्पत्ति और महत्व पर प्रकाश डालिए।

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# बिम्सटेक क्या है? इसका उद्देश्य क्या है? इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? इसके महत्व पर प्रकाश डालिए। @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिम्सटेक यानी बहु-क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी पहल (Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation- BIMSTEC) एक क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें बांग्लादेश, भूटान, भारत, म्यांमार, नेपाल, श्रीलंका और थाईलैंड जैसे 7 सदस्य देश शामिल हैं। इस क क्षेत्रीय संगठन में दक्षिण एशिया के पाँच देश- बांग्लादेश, भूटान, भारत, नेपाल, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के दो देश- म्याँमार एवं थाईलैंड शामिल हैं। इसका गठन वर्ष 1997 में बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच बहुमुखी तकनीकी और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था। बिम्सटेक में शामिल देशों की कुल आबादी लगभग 1.5 बिलियन है तथा इनकी संयुक्त GDP 3.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक है। # बिम्सटेक का उद्देश्य क्या है? और इसकी उत्पत्ति कैसे हुई? बिम्सटेक का उद्देश्य बंगाल की खाड़ी क्षेत्र के देशों के बीच बहुमुखी तकनीकी और आर्थिक सह...

जब अहिंसक विश्व की राह दिखा गए भगवान महावीर तो हिंसा भाव त्यागिए

अहिंसक विश्व की राह दिखा गए हैं भगवान महावीर, इसलिए हिंसा भाव त्यागिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार आदिकालीन जैन धर्म में समस्त जीवों के प्रति संयमपूर्ण व्यवहार की कामना की गई है जो व्यापक अर्थों में अहिंसा की अवधारणा को परिपुष्ट करता है। यद्यपि अहिंसा का शाब्दिक अर्थ है, किसी भी प्रकार की हिंसा न करना। फिर भी इसके पारिभाषिक अर्थ विध्यात्मक और निषेधात्मक दोनों बताए जाते हैं जिनका अपना महत्व है। जहाँ लोगों में सत्प्रवृत्ति, स्वाध्याय, अध्यात्मसेव, उपदेश, ज्ञानचर्चा आदि आत्महितकारी व्यवहार विध्यात्मक अहिंसा की श्रेणी में आते हैं, वहीं उनमें किसी के प्रति रागद्वेषात्मक प्रवृत्ति न करना, किसी का प्राणवध न करना या फिर ऐसी दुष्प्रवृति मात्र का विरोध करना भी निषेधात्मक अहिंसा समझा जाता है| अहिंसा विषय के मर्मग्य बताते हैं कि किसी संयमी व्यक्ति के द्वारा भी यदि अशक्य कोटि का प्राणवध हो जाता है, तो भी वह निषेधात्मक अहिंसा, हिंसा नहीं है। क्योंकि निषेधात्मक अहिंसा में केवल हिंसा का वर्जन होता है, जबकि विध्यात्मक अहिंसा में सत्क्रियात्मक सक्रियता होती है। इसलिए यह स्थूल दृष्टि का निर्...