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सनातन धर्म, भारतीयता और हिंदुत्व की हिफाजत के लिए सदैव ततपर रहते हैं विश्व सनातन हिन्दू संसद के समर्थक, जानिए क्या क्या है इनकी राय

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सनातन धर्म, भारतीयता और हिंदुत्व की हिफाजत के लिए सदैव ततपर रहते हैं विश्व सनातन हिन्दू संसद के समर्थक, जानिए क्या क्या है इनकी राय @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार सनातन धर्म, भारतीयता और हिंदुत्व की हिफाजत के लिए विश्व सनातन हिन्दू संसद के समर्थक गण सदैव ततपर रहते हैं। आर्यावर्त के आदि धर्म सनातन धर्म यानी हिन्दू धर्म के क्या क्या हैं मर्म और इनकी पुनर्स्थापना के लिए क्या क्या करने हैं उपाय, इन बातों को जानने व समझने के लिए  वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कमलेश पांडेय ने इनसे अलग अलग बातचीत की, जिससे स्पष्ट पता चला कि ये अपनी पीढ़ियों के सुखद व सुमधुर भविष्य के खातिर अपने वर्तमान को न्यौछावर करने को उद्दत हैं। यह इस मिट्टी का अहोभाग्य है। अब आप भी जानिए कि क्या क्या है इनकी राय, जिनका है हर एक हिंदुस्तानी से व्यापक सरोकार, आसेतु हिमालय से सात समंदर पार तक।  यहां प्रस्तुत है उनकी अलग अलग राय:- 1. विश्व सनातन हिंदू संसद भारत और विदेशों में रणनीतिक विचारकों और समर्पित क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से, हर जगह सनातनियों के गौरव और सुर...

सनातन धर्म, भारतीयता और हिंदुत्व की हिफाजत के लिए सदैव ततपर रहते हैं विश्व सनातन हिन्दू संसद के समर्थक, जानिए क्या क्या है इनकी राय

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सनातन धर्म, भारतीयता और हिंदुत्व की हिफाजत के लिए सदैव ततपर रहते हैं विश्व सनातन हिन्दू संसद के समर्थक, जानिए क्या क्या है इनकी राय @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार सनातन धर्म, भारतीयता और हिंदुत्व की हिफाजत के लिए विश्व सनातन हिन्दू संसद के समर्थक गण सदैव ततपर रहते हैं। आर्यावर्त के आदि धर्म सनातन धर्म यानी हिन्दू धर्म के क्या क्या हैं मर्म और इनकी पुनर्स्थापना के लिए क्या क्या करने हैं उपाय, इन बातों को जानने व समझने के लिए  वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कमलेश पांडेय ने इनसे अलग अलग बातचीत की, जिससे स्पष्ट पता चला कि ये अपनी पीढ़ियों के सुखद व सुमधुर भविष्य के खातिर अपने वर्तमान को न्यौछावर करने को उद्दत हैं। यह इस मिट्टी का अहोभाग्य है। अब आप भी जानिए कि क्या क्या है इनकी राय, जिनका है हर एक हिंदुस्तानी से व्यापक सरोकार, आसेतु हिमालय से सात समंदर पार तक।  यहां प्रस्तुत है उनकी अलग अलग राय:- 1.  विश्व सनातन हिंदू संसद भारत और विदेशों में रणनीतिक विचारकों और समर्पित क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के एक नेटवर्क के माध्यम से, हर जगह सनातनियों के गौरव और सुरक्षा क...

विश्व सनातन हिन्दू संसद सनातन धर्म की विशेषताओं से देश-दुनिया को अवगत कराने की मुहिम चलाएगा: रौचिका अग्रवाल

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विश्व सनातन हिन्दू संसद सनातन धर्म की विशेषताओं से देश-दुनिया को अवगत कराने की मुहिम चलाएगा: रौचिका अग्रवाल कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार नई दिल्ली। दुनिया की तीसरी बड़ी आबादी सनातन मतावलम्बियों की है, जो शांतिपूर्ण सहअस्तित्व और समावेशी विकास में आस्था रखते हैं। हालांकि ईसाईयत और इस्लामी जगत के बीच एक अरसे से जो अंतरराष्ट्रीय प्रतिद्वंद्विता चल रही है, उससे सनातन धर्म के सम्मुख अस्तित्व रक्षा का एक सवाल उतपन्न हो चुका है। क्योंकि धर्म परिवर्तन द्वारा सनातन मतावलंबियों को कोई ईसाई बनने का प्रलोभन दे रहा है तो कोई मुसलमान बनाने के लिए हर दांवपेंच लगा रहा है। यही वजह है कि विश्व सनातन हिन्दू संसद ने सनातन धर्म की विशेषताओं से देश-दुनिया को अवगत कराने का निश्चय किया है, ताकि सनातन धर्म के प्रति न केवल लोगों की आस्था बनी रहे बल्कि अन्य धर्मावलम्बी भी इस ओर आकर्षित हों।  अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए वीएसएचएस समान विचारों वाले संगठनों को एक छतरी के नीचे ला रहा है, ताकि वैश्विक क्षितिज पर साम्प्रदायिक सद्भाव और हिंदुत्व की रक्षा के साथ साथ...

सनातनियों के हकहुकूक की लड़ाई लड़ता रहेगा विश्व सनातन हिन्दू संसद: बॉबी पारीक

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सनातनियों के हकहुकूक की लड़ाई लड़ता रहेगा विश्व सनातन हिन्दू संसद: बॉबी पारीक @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संध और जनसंघ की सामाजिक-राजनीतिक नर्सरी से निकली विभूतियों और उनके उत्तराधिकारियों ने न केवल हिंदुत्व बल्कि भारतीयता को भी अपने खून-पसीने से सींचा है। हरेक भारतीय को इस बात का गर्व होना चाहिए कि उनके द्वारा शुरू किया हुआ यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे लगभग 3 दर्जन सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक-सांस्कृतिक संगठनों के कार्यकलाप इस बात के साक्षी हैं कि हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को अलग अलग चश्मों से नहीं देखा जा सकता है, बल्कि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।  सच कहा जाए तो वर्तमान में मानवीयता और राष्ट्रीयता के उपर गहराते संकट से उबरने की जितनी बेचैनी आरएसएस या उससे किसी न किसी रूप में सम्बन्धित या फिर उससे निकले लोगों में दिखाई पड़ती है, उतनी शायद अन्यत्र कहीं और नहीं! क्योंकि पिछले 8-9 दशकों से विकसित हो रहे हमारे धर्मनिरपेक्ष मिजाज ने हमारी सनातन सभ्यता और संस्कृति को जितना हतोत्साहित किया...