सनातनियों के हकहुकूक की लड़ाई लड़ता रहेगा विश्व सनातन हिन्दू संसद: बॉबी पारीक
सनातनियों के हकहुकूक की लड़ाई लड़ता रहेगा विश्व सनातन हिन्दू संसद: बॉबी पारीक
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार
नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संध और जनसंघ की सामाजिक-राजनीतिक नर्सरी से निकली विभूतियों और उनके उत्तराधिकारियों ने न केवल हिंदुत्व बल्कि भारतीयता को भी अपने खून-पसीने से सींचा है। हरेक भारतीय को इस बात का गर्व होना चाहिए कि उनके द्वारा शुरू किया हुआ यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। भारतीय जनता पार्टी, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल जैसे लगभग 3 दर्जन सामाजिक-राजनीतिक-आर्थिक-सांस्कृतिक संगठनों के कार्यकलाप इस बात के साक्षी हैं कि हिंदुत्व और राष्ट्रवाद को अलग अलग चश्मों से नहीं देखा जा सकता है, बल्कि दोनों एक ही सिक्के के दो पहलू हैं।
सच कहा जाए तो वर्तमान में मानवीयता और राष्ट्रीयता के उपर गहराते संकट से उबरने की जितनी बेचैनी आरएसएस या उससे किसी न किसी रूप में सम्बन्धित या फिर उससे निकले लोगों में दिखाई पड़ती है, उतनी शायद अन्यत्र कहीं और नहीं! क्योंकि पिछले 8-9 दशकों से विकसित हो रहे हमारे धर्मनिरपेक्ष मिजाज ने हमारी सनातन सभ्यता और संस्कृति को जितना हतोत्साहित किया है, उतना किसी और ने नहीं। आलम यह रहा कि न केवल हमारे वस्तुनिष्ठ इतिहास से सुनियोजित छेड़छाड़ हुई, बल्कि हमारी शैक्षणिक प्रणाली में भी मिलावट की गई, ताकि हमारे उर्वर मनमस्तिष्क को नियंत्रित किया जा सके। भारतीयों को इस स्थिति से निजात दिलाने के लिए छिटपुट कोशिशें अनवरत रूप से जारी हैं, लेकिन अब समवेत रूप से कुछ बड़ा कर दिखाने का बीड़ा उठाया है विश्व सनातन हिन्दू संसद नामक सामाजिक संगठन ने।
बता दें कि विश्व सनातन हिन्दू संसद (वीएसएचएस) नामक अंतरराष्ट्रीय संगठन, जो भारत के अलावा संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, स्कॉटलैंड, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी अपनी गहरी जड़ें जमा रहा है, के संस्थापक अध्यक्ष रौचिका अग्रवाल की अहम उपस्थिति में चेयरमैन बॉबी पारीक ने अपनी अनुभवी टीम के मार्फ़त सनातन धर्म के प्रति आस्थावान संगठनों को एक छत के नीचे लाने और राष्ट्रहित में कुछ बड़ी पहल करने का बीड़ा उठाया है ताकि विश्व शांति व समावेशी विकास के लिए खतरा बनते जा रहे साम्प्रदायिक उग्रपंथियों और उनके पूंजीवादी प्रोत्साहकों, भले ही वो कोई देश ही क्यों न हों, से समय रहते ही निपटा जा सके।
इस दिशा में उनके साधन और साध्य को लेकर मशहूर पत्रकार व स्तम्भकार कमलेश पांडेय ने ओखला औद्योगिक क्षेत्र, दिल्ली स्थित उनके मुख्यालय कक्ष में उनसे विशेष बातचीत की है, ताकि उनकी भावी योजनाओं और मुद्दागत प्राथमिकताओं से राष्ट्रीय जनमानस को अवगत कराया जा सके। यहां प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के कुछ खास अंश:-
सवाल:- हिंदुत्व की अहर्निश सेवा करने का ख्याल आपको कब और कैसे आया?
जवाब:- सनातन धर्म वसुधैव कुटुम्बकम और सर्वे भवन्तु सुखिनः जैसे उदात्त विचारों का पालक पोषक है। हमलोग चाहते हैं कि विश्व का कल्याण हो। लेकिन पिछले 70-80 साल में हिंदुओं के खिलाफ, धर्म के आधार पर ही विभाजित भारतीय भूमि में से हिंदुस्तान की भूमि जो हिंदुओं को उनके हिस्से के रूप में हासिल हुई है, जो साम्प्रदायिक वैमनस्यता के बीज रोप दिए गए हैं, उसने हमें फिर से अपने अस्तित्व के बारे में सोचने को विवश कर दिया है।
आपको पता होना चाहिए कि भारतीय मुस्लिमों के पूर्वज भी हिन्दू थे। आज भी उनके उपनाम चौधरी, चौहान आदि हैं। फिर भी उन्हें वंदे मातरम बोलने तक से परहेज है। उनकी निष्ठा पाकिस्तान से है। वो एकजुट होकर आज एक वोट बैंक बन चुके हैं, जिससे हमारे नेता भी आपसी प्रतिस्पर्धा में उनके सामने नतमस्तक हैं। वहीं, हम हिन्दू जाति व क्षेत्र के नाम पर बंटकर बिखर चुके हैं। हमें रणनीतिक रूप से बिखेरा जा रहा है। ऐसा करने वाले बुद्धिजीवियों व नेताओं आदि को गुप्त रूप से अंतरराष्ट्रीय धन मिल रहे हैं। इसलिए हमें भी अब गोलबंद होना चाहिए।
हमारे खिलाफ चल रहे अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र से भी हमें अवगत होना चाहिए। यदि हमलोग नहीं संभले तो कश्मीर, केरल और पश्चिम बंगाल जैसे लोमहर्षक वाकये भविष्य में भी दुहराए जा सकते हैं। क्योंकि जहां-जहां भी मुस्लिमों का संख्या बल अधिक हुआ है, वहां से हिन्दू पलायन कर जाते हैं और सरकार कागजी खाना पूर्ति के अलावा कुछ नहीं कर पाती है, पीएम मोदी व सीएम योगी जैसे कुछेक अपवादों को छोड़कर, जिन्होंने ऐसी घटनाओं के खिलाफ त्वरित एक्शन लिया।
उन्होंने आगे बताया कि हमने लगभग 30 साल पहले कश्मीरी हिंदुओं पर जुल्म देखे हैं और मूकदर्शक सरकारें भी। सिर्फ एक वोट बैंक के लिए हिन्दू नेता व उनके समर्थक कितने कमजोर हो चुके हैं कि वो सच्ची बात भी नहीं रख पाते हैं। यदि कोई आपको कहे कि अपनी संपत्ति और बीबी-बच्चों को छोड़कर चले जाइए तो कैसा लगेगा।लेकिन कश्मीरी हिंदुओं ने यह दंश झेला है। लगभग तीन दशकों से वो रिफ्यूजी कॉलोनियों में हैं। तभी हमने दृढ़ निश्चय कर लिया कि जब भी मौका मिलेगा, इस हालात को बदलने के लिए अपना अभिन्न योगदान देंगे। अब वह घड़ी आ गई है।
हमारा मानना है कि पहले हमारा घर मजबूत होना चाहिए। फिर समाज को मजबूत करना चाहिए। ततपश्चात देश को मजबूत बनाने में विलम्ब नहीं होगा। सबसे पहले हमने व्यवसाय किया, फिर लोगों को जोड़ा। उन्हें जागृत किया। क्योंकि हमारी रगों में भी उन महान स्वतंत्रता सेनानियों और हिंदुत्व सेवियों का खून दौड़ रहा है जिन्होंने देश व समाज को सुख-शांति प्रदान करने के लिए न केवल बहुतेरे यत्न किये बल्कि आजीवन तत्कर्म को ही समर्पित रहे। उनकी मित्रमण्डली भी इसी दिशा में सक्रिय रही। हमारी परवरिश भी उसी मर्यादित परिवेश में हुई, इसलिए हमलोगों ने उनके अधूरे सपनों को पूरा करने का निश्चय कर लिया है। हम पीएम नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह के आभारी हैं कि हलक में हाथ डालकर उन्होंने कश्मीर को पाकिस्तानी शिकंजे में जाने से बचा लिया।
सवाल:- आपकी प्राथमिकताएं क्या-क्या हैं?
जवाब:- विश्व सनातन हिन्दू संसद का निर्माण सनातन समाज को संगठित करने एवं सही दिशा दिखाने के लिए किया गया है। इसके अंतर्गत देश तथा विदेश के समाजसेवी अपना बहुमूल्य योगदान दे रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य अन्य समाजसेवियों, कार्यकर्ताओं और सामाजिक संस्थाओं को एक मंच पर लाने का व उन्हें विभिन्न प्रकार की सहूलियतें प्रदान करना है। इस कार्य के अंतर्गत यदि राज्य सरकारों, केंद्र सरकार व उनके मातहत अन्य अधिकारियों से वार्तालाप करने की आवश्यकता होगी तो विश्व सनातन हिन्दू संसद उस कार्य को पूर्ण करने हेतु हर मुमकिन प्रयास करेगी।
विश्व सनातन हिन्दू संसद सनातन संस्कृति का प्रचार प्रसार करेगी और सनातन धर्म की विशेषताओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रचारित करेगी। विश्व सनातन हिंदू संसद प्रतिवर्ष जरूरतमंद कन्याओं की शिक्षा व सामूहिक विवाह का आयोजन करेगी। विश्व सनातन हिन्दू संसद सरकार से समान नागरिक संहिता कानून, जनसंख्या नियंत्रण कानून, हिन्दू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने का कानून लाने और व्यक्ति-व्यक्ति के बीच भेदभाव लाने के लिए बने सभी कानूनों को बदलने का आग्रह करेगी।
सवाल:- हिंदुत्व की मजबूती के लिए इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं को आप कैसे मजबूत करेंगे।
जवाब:- अखंड भारत को सोने की चिड़ियां कहा जाता था। यहां पर दूध की नदियां बहती थीं। यहां ज्ञान की अविरल गंगा सतत प्रवाहमान रहीं। लेकिन मुगलों और अंग्रेजों ने यहां ऐसी नीतियों को बढ़ावा दिया और आजाद भारत में भी देश को जिस तरह से दोनों हाथों से लूटा, उससे आम भारतीयों के आर्थिक हित प्रभावित हुए। अमीरी-गरीबी की खाई बढ़ी। आज महज 3 प्रतिशत लोग टैक्स देते हैं, इसे बढ़ावा देने के उपाय किये जायेंगे।
उन्होंने कहा कि सनातन धर्म में भीख नहीं भिक्षा मांगी जाती है। साईं इतना दीजिये, जा में कुटुंब समाय, मैं भी भूखा ना रहूं, साधु न भूखा जाए...वाली अवधारणा हमारी है। दरअसल भिक्षा देने के निमित्त उदात्त सोच यह रहती है कि उनके जप-तप-पूण्य यानी सद्कर्मों के फल हमें भी प्राप्त हो सके। हमारे यहां अतिथि देवो भव की अवधारणा रही है। इसलिए भी हमलोग लूट-पिट गए।
उन्होंने कहा कि सनातनियों ने, हिंदुस्तानियों ने कभी भी किसी पर आक्रमण नहीं किया। हमारे राजाओं में भी आपसी एकता कभी नहीं रही। हिंदुओं में भी जातिवाद को विदेशियों ने और गहरा किया, कराया जिससे आपसी एकता भी कभी अटूट नहीं हो पाई। राजस्थान एक मात्र ऐसा स्थान है जहां के किसी भी शहर का नाम मुसलमानों के नाम पर नहीं रखा हुआ है।
हिंदुओं में जो तथाकथित धर्मनिरपेक्ष प्रवृति पैदा करने की कोशिश की गई, उसके वास्ते हमारे एजुकेशनल सिस्टम को बदल दिया गया। हमारे इतिहास से सुनियोजित छेड़छाड़ की गई। उसे विदेशियों के हितों के अनुरूप ढाला गया, जिससे हमारी मानसिकता पंगु हुई। हमारा देश 1943 में ही आजाद हो गया होता, लेकिन आजाद हिंद फौज के संस्थापक सुभाष चन्द्र बोस की प्रतिभा से भी कुछ लोग कुंठित हो गए और उनसे छल किया। जो किसी राष्ट्रीय छल से कम नहीं है।
बढ़ती जनसंख्या को 70 सालों तक बर्दाश्त क्यों किया गया और अब भी स्पष्ट कानून क्यों नहीं बन पा रहे हैं, यह सोचनीय बात है। हम दो हमारे दो का कानून सब पर लागू होना चाहिए, या फिर सबको इससे छूट मिलनी चाहिए।
सबसे बेहतर यह होगा कि दो बच्चे से अधिक पैदा करने वाले लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित किया जाए।
उन्होंने कहा कि राष्ट्र हित में आरएसएस महान कार्य कर रहा है। संघ की सादगी और किसी भी प्रकार की आपदा में उसका सहयोगी रुख देश का सबसे बड़ा सम्बल है। पीएम मोदी और सीएम योगी के हमलोग कृतज्ञ हैं। इनकी वजह से हमारी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय छवि सुधरी है और जो लोग कानून हाथ में लेकर खेलते थे, उनलोगों में भी भय का माहौल पैदा हुआ है।
उन्होंने कहा कि धर्म के हिसाब से कानून नहीं होनी चाहिए। इसलिए हमलोग समान नागरिक संहिता को जल्द से जल्द लागू करने की मांग करते हैं। हमारी यह भी मांग है कि गौ माता को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए। हिन्दू मंदिरों का अधिग्रहण बन्द किया जाए और अधिग्रहित मंदिरों को शीघ्र ही मुक्त किया जाए।
# पिता के अधूरे सपने को उनके जीते जी पूरा करने को ततपर रहते हैं बॉबी पारीक
@ जीवन परिचय: बॉबी पारीक, चेयरमैन, वीएसएचएस
5 जुलाई 1970 को अवतरित प्रख्यात होटल-रेसोर्ट्स व्यवसायी बॉबी पारीक वैसे तो जयपुर, राजस्थान के मूल निवासी हैं और अब डिफेंस कॉलोनी, दक्षिण दिल्ली के स्थायी निवासी हो चुके हैं। इन्होंने भारती विद्या भवन, दिल्ली से स्कूल की शिक्षा पूरी करने बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के नार्थ कैंपस से स्नातक व स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की। फिर अपने व्यवसाय में जुट गए।
इनके पिता और सर्वोच्च न्यायालय के अधिवक्ता शिव कुमार पारीक आरएसएस और जनसंघ से जुड़े हुए थे। संघ के निर्देश पर ही उन्होंने अपने जीवन के बहुमूल्य 6 दशक भारत रत्न अटल बिहारी बाजपेयी, पूर्व प्रधानमंत्री के सान्निध्य में व्यतीत किये। उन्होंने एक दूसरे को वह सबकुछ प्रदान किये, जिसकी उम्मीद आज के सियासी माहौल में एक दूसरे से भी कदापि नहीं की जा सकती है।
बताया जाता है कि जब जनसंघ के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष दीन दयाल उपाध्याय की अकस्मात हत्या हो गई, तब जनसंघ का भार अटल बिहारी बाजपेयी के कंधों पर डाल दिया गया, क्योंकि वह सबसे वरिष्ठ राजनेता थे। तभी नाना जी देशमुख ने तय किया कि अटल बिहारी बाजपेयी के साथ हर तरह से मजबूत एक कद काठी वाला व्यक्ति चाहिए, जिससे उनकी हर तरह की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
इसलिए यह जिम्मेदारी शिव कुमार पारीक को सौंपी गई, जिसको उन्होंने उनके अंतिम दम तक निभाई। शिव कुमार पारीक की महानता का पता इस बात से भी चलता है कि उन्होंने कोई भी लाभ या पद कभी नहीं लिया और अपना सम्पूर्ण जीवन हिंदुत्व की अहर्निश सेवा को सुपुर्द कर दिया। आज भी वो जीवित हैं और अपने अनुभव हिंदुत्व प्रेमियों से साझा करते रहते हैं, ताकि उनमें एक नई ऊर्जा का संचार किया जा सके।
इस बात में कोई दो राय नहीं कि अटल बिहारी बाजपेयी और शिव कुमार पारीक ने हिंदुत्व और राष्ट्रवाद की जो लौ जनसंघ और बीजेपी के विभिन्न जनसरोकारों को लेकर जलाई, आज उससे देश-दुनिया आलोकित हो रही है। 2 सीटों वाली बीजेपी पूर्ण बहुमत हासिल कर चुकी है और पोस्ट गोधरा कांड के बाद बाजपेयी जी ने जिस राजधर्म का पालन किया और कराया, उसी का यह नतीजा है कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी आज लगातार 2 बार प्रधानमंत्री बनकर देश को दुनिया में एक नई पहचान दिलवाने की अथक कोशिश कर रहे हैं, जिसमें वो सफल हैं।
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