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कांग्रेस नेत्री डोली शर्मा के 37वें जन्मदिवस पर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दी बधाई

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कांग्रेस नेत्री डोली शर्मा के 37वें जन्मदिवस पर नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दी बधाई # पिता नरेंद्र भारद्वाज, पति दीपक शर्मा समेत परिवारीजनों, पार्टीजनों व मित्रों ने धूमधाम से मनाया जन्म दिवस कमलेश पांडेय/भास्कर ब्यूरो गाजियाबाद। यूपीसीसी की प्रदेश प्रवक्ता और गाजियाबाद-गौतमबुद्धनगर प्रभारी डॉली शर्मा का जन्मदिवस आज पार्टी कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों ने धूमधाम से मनाया। इस मौके पर उनके पिता और गाजियाबाद के दिग्गज कांग्रेस नेता, बड़े उद्यमी और बहुचर्चित समाजसेवी नरेंद्र भारद्वाज ने फोन करके बधाई दी। उनके पति और यूपी-उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध उद्यमी दीपक शर्मा ने भी उनके सुदीर्घ और सफल जीवन हेतु बधाई दी। कांग्रेस के टिकट पर 2019 में गाजियाबाद लोकसभा सीट से चुनाव लड़ चुकीं डॉली शर्मा न केवल दिल्ली एनसीआर बल्कि हिंदी पट्टी की ऐसी पहली दिग्गज कांग्रेस नेत्री हैं, जिनकी ब्राह्मण समाज के साथ साथ सर्व समाज की महिलाओं पर अच्छी खासी पकड़ है। अपनी राजनीतिक प्रतिभा, सामाजिक पकड़ और उत्कृष्ट भाषण शैली के चलते वह नेहरू-गांधी परिवार की करीबी नेताओं में समझी जाती हैं और प्रियंका गांध...

वैश्विक कूटनीति की बलिवेदी पर आखिर कबतक चढ़ते रहेंगे भारत के दूरगामी हित!

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वैश्विक कूटनीति की बलिवेदी पर आखिर कबतक चढ़ते रहेंगे भारत के दूरगामी हित! @ तीखी बात/कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार वैश्विक कूटनीति यानी वर्ल्ड वाइड डिप्लोमेसी की आंखमिचौली से भारत का हित कितना सधेगा, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन दुनिया के थानेदार अमेरिका से नजदीकी बढ़ाने और वैश्विक मंच के सर्वाधिक भरोसेमंद दोस्त समझे जाने वाले रूस से दूरी बनाने से बेहतर होगा कि चीन को हर वक्त अपनी रणनीति केंद्र में रखते हुए भारत हर वह सधा कदम उठाए, जिसको कमतर आंकने की भूल न तो चीन करे, न रूस करे और न ही अमेरिका कर सके।  देखा जाए तो चीन, रूस और अमेरिका जैसे राष्ट्र यदि हमारे मित्र नहीं हो सकते तो इन्हें अपना धुर शत्रु बनाने वाला कोई भी कदम हमारी बुद्धिमानी कदापि नहीं समझी जाएगी। वाकई, चीन से शत्रुता भाव विकसित करना जहां भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की भारी भूल रही है, वहीं अमेरिका को शत्रु गुट पाकिस्तान का मददगार बनाने में भारत की प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की लापरवाही भी कम नहीं रही है।  रही बात रूस की तो वैश्विक मंच पर उसके जैसे भरोसेमंद द...

आइए भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की तकलीफ समझें और उसे मिलजुलकर दूर करवाएं?

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आखिरकार भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था की तकलीफ क्या है? आइए जानते हैं, समझते हैं, ताकि उसे दूर करने की एक सार्थक पहल कर सकें! @ डॉ मनीष कुमार/वरिष्ठ न्यूरो सर्जन, दिल्ली-एनसीआर किसी भी देश में स्वास्थ्य व्यवस्था सिर्फ आवश्यक नहीं, बल्कि सबसे महत्वपूर्ण सेवा है। लेकिन दुर्भाग्यवश आम आदमी या नागरिक सबसे ज्यादा समझौता इसी में/से करते हैं। वाकई, यदि व्यवस्था की ओर से इसका इंतज़ाम नहीं किया जाता है तो एक खाली जगह बन जाता है। जिसे कोई न कोई स्वतः ही भर देता है और इस तरह भारतीय चिकित्सा व्यवस्था के समानांतर "झोला छाप" चिकित्सक या कंपाउंडर नाम का शब्द जन्म लेता है! # आखिर जीने में बाधा क्या है? वैसे तो जीना सभी चाहते हैं, और वो भी जितना ज्यादा से ज्यादा हो सके। पर जीने में बाधा क्या है? यमराज किसके सीने में घुसा है? कैसे यमराज को नियंत्रित कर सकते हैं? यह सम्बन्धित देश की स्वास्थ्य सेवा का काम है। आइए बात भारत की करते हैं। यहां पर स्वास्थ्य की स्थिति के सभी मानक, चाहे वह जीने का औसत (एवरेज) साल हो या बच्चों की मृत्य दर हो या गर्भवती माताओं की मृत्य दर हो या कैंसर, टीबी या एचआईवी से संबंध...