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मार्च 3, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

क्या वाकई अमेरिका बदल रहा है या फिर कोई नया स्वांग रच रहा है?

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क्या वाकई अमेरिका बदल रहा है या फिर अपनी कमजोरी छिपाने के लिए नया स्वांग रच रहा है? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दुनिया का थानेदार अमेरिका बदल रहा है! उसकी विदेश नीति बदल रही है! इससे दुनियाभर के देश प्रभावित हो रहे हैं! चूंकि अब वह 'चंद्रायण व्रत' कर चुका है! इसलिए युद्ध नहीं शांति की बात कर रहा है! वह तीसरा विश्व युद्ध टालना चाहता है, इसलिए अपने यूरोपीय सहयोगियों को सद्बुद्धि बांट रहा है! इससे नाटो के सदस्य देशों में खलबली मची हुई है! यूरोपीय संघ भी परेशान है! सवाल है कि क्या वाकई अमेरिका बदल रहा है या फिर अपनी कमजोरी छिपाने के लिए नया स्वांग रच रहा है? भारत में एक कहावत है कि नौ सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली। मतलब स्वभाव से हिंसक प्राणी, अहिंसक होने का नाटक रच रहा है। इसकी को चंद्रायण व्रत करार दिया जाता है। अमेरिका के संदर्भ में यही बात लागू होती है। हालांकि, आपको यह जानकर हैरत होगी कि यह सब कुछ अनायास नहीं हो रहा है बल्कि इसके पीछे चतुर अमेरिकी लोगों, उनके अमेरिकी प्रशासन और वहां के रिपब्लिकन नेताओं की एक सोची-समझी रणनीति काम कर रही है। दरअ...

क्या जेलेन्सकी, इंदिरा गांधी की तरह अमेरिकी राष्ट्रपति को करारा जवाब दे पाएंगे?

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तो क्या जेलेन्सकी, इंदिरा गांधी की तरह अमेरिकी राष्ट्रपति को करारा जवाब दे पाएंगे?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की में जो हालिया तीखी बहस देखी गई है, वह पहली बार नहीं है जब कोई देश अपने हितों के लिए अमेरिका से लड़ा है और अपमानित महसूस किया है। क्योंकि अपने वक्त में यानी 1970 के दशक में भारत की लौह महिला प्रधानमंत्री  इंदिरा गांधी ने भी जाने-अनजाने अमेरिका से सीधी टक्कर ली थी। उन्होंने तब अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत के पीएम के तौर पर करारा जवाब दिया था और उन्हें घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। हालांकि, तब भी अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन को भारत के खिलाफ भड़काने की कोशिश की थी, लेकिन इंदिरा गांधी की रणचंडी वाली भूमिका और रूस से अटूट दोस्ती की वजह से किसी की हिम्मत नहीं हुई थी कि वह भारत की ओर आंख तरेर ले। और जब अमेरिका ने ऐसी जुर्रत की तो रूस के डर से सहम गया। इसलिए दुनिया की मीडिया में यह सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या यूक्रेनी राष्ट्रपति ब्लोदिमिर जेलेन्सकी, भारत की पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इंद...

बसपा की सियासी दुर्गति के लिए मायावती खुद जिम्मेदार!

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# बसपा की सियासी दुर्गति के लिए मायावती खुद जिम्मेदार! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उत्तरप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और बहुजन समाज पार्टी की नेत्री सुश्री मायावती भले ही दलित की बेटी हैं, लेकिन जब दलित राजनीति के रथ पर सवार होकर वह सूबाई सत्ता और पार्टी दोनों के शीर्ष तक पहुंचीं तो दौलत पसंद बन गईं। उन्होंने अपनी सारी नीतियों को दौलत बटोरने के ही इर्दगिर्द केंद्रित कर दिया। जिससे दृढ़ स्वभाव की इस महिला नेत्री ने न केवल अकूत धन बटोरीं, बल्कि अपनी पार्टी को भी खूब आगे बढ़ाया। इस क्रम में उन्होंने जायज-नाजायज का ख्याल तक नहीं रखा। क्योंकि दलित समर्थक एक कानून हमेशा उन जैसों की कानूनी ढाल बन जाती है।हालंकि, वक्त का पाशा पलटते ही अब वही दौलत उन जैसी अविवाहित महिला के गले की फांस बन चुका है। बहरहाल वह सत्ताधारी भाजपा के इशारे पर थिरकने को अभिशप्त हैं। कहना न होगा कि जिस बामसेफ ने देश की दलित राजनीति को एक मजबूत प्रशासनिक आधार दिया, उसकी भी मायावती काल में इसलिए एक न चली, क्योंकि परिवार और पार्टी से आगे की सोच-समझ उनमें विकसित ही न हो पाई। दरअसल, बसपा के संस्था...