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अमेरिका व ईरान के बीच बने समझौते मसौदे के वैश्विक मायने (Globalimplications of the draft agreement between the US and Iran)

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अमेरिका व ईरान के बीच बने समझौते मसौदे के वैश्विक मायने             client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक             client=ca-pub-6262725213669814 अमेरिका और ईरान के बीच हाल में उभरे समझौता-ढांचे (Framework Agreement) को यदि अंतिम रूप मिल जाता है, तो इसके प्रभाव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया, वैश्विक ऊर्जा बाजार और विश्व राजनीति पर पड़ेंगे। समझौते में युद्धविराम, परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण, तेल प्रतिबंधों में राहत, ईरान की जमी हुई संपत्तियों की रिहाई तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने जैसे मुद्दे शामिल बताए जा रहे हैं। यदि यह समझौता सफलतापूर्वक लागू होता है, तो इसे 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक घटनाक्रमों में गिना जा सकता है। आइए इसके वैश्विक मायने को क्रमशः समझते हैं:- पहला, वैश्विक ऊर्जा बाजार को मिलेगी बड़ी राहत: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के तेल और LNG व्यापार का एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। इस मार्ग पर रणनीति पूर्वक ईरान ने...

How will India become a world power while battling the tactics of the US and China? (आखिर अमेरिका व चीन की चालों से जूझते हुए विश्व शक्ति कैसे बनेगा भारत? समझिए)

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आखिर अमेरिका व चीन की चालों से जूझते हुए विश्व शक्ति कैसे बनेगा भारत? समझिए (How will India become a world power while battling the tactics of the US and China?)                  (client=ca-pub-6262725213669814) @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत को अमेरिका और चीन के मुकाबले यदि विश्व महाशक्ति बनना है तो उसे सार्क देशों, आशियान देशों और अरब-खाड़ी देशों यानी भारतीय उपमहाद्वीपीय देशों, दक्षिण-पूर्वी एशिया के आशियान देशों, अरब-खाड़ी के इस्लामिक देशों से मजबूत रणनीतिक, आर्थिक और सामरिक/सैन्य गठबंधन की संभावनाओं को तलाशने पड़ेंगे। वहीं मध्य एशियाई देशों और पूर्वी एशियाई देशों से भी मजबूत प्रतिरक्षात्मक व रणनीतिक सम्बन्ध विकसित करने होंगे। (client=ca-pub-6262725213669814) ऐसा इसलिए कि हर पीड़ित देश अमेरिका/चीन की क्षुद्र वैश्विक चालों से परेशान है और सोवियत संघ के विघटन के विघटन के बाद उन्हें रूस पर्याप्त संरक्षण नहीं दे पा रहा है। ऐसे में भारत यदि चीन को छोड़कर शेष ब्रिक्स देशों, अफ्रीकी देशों, दक्षिण अमेरिकी देशों, ऑस्ट...

न सोना है, न सोने देना है; न खाना है, न खाने देना है!

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न सोना है, न सोने देना है;  न खाना है, न खाने देना है! @ कमलेश पांडेय/कवि  न सोना है, न सोने देना है, विकास का दीप हर घर में लेना है। राह कठिन हो, पथ चाहे वीरान हो, मंज़िल तक हर हाल में पहुँचना है। न खाना है, न खाने देना है, जनता का हक़ किसी को न लेने देना है। पसीने की हर बूंद का सम्मान हो, ईमान का परचम ऊँचा रखना है। दिन हो या रात, कदम न रुकें, सपनों के रथ के पहिए न थकें। गाँव-गाँव में खुशहाली की बहार हो, बिहार का गौरव जग में अपार हो। न डर से झुकना, न लोभ से बिकना, जनसेवा के पथ से कभी न हटना। हर हाथ को अवसर, हर मन को मान, यही हो शासन का सच्चा अभियान। मेहनत का मंत्र, कर्म की शान, यही बने प्रगति का नया विधान। जन-जन के विश्वास को सींचना है, न्याय और विकास से बिहार को खींचना है। न सोना है, न सोने देना है, न खाना है, न खाने देना है। यही संकल्प यदि सच में निभ जाएगा, तो बिहार नया इतिहास रच जाएगा। <script async src="https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814"      crossorigin="anonymous"></script...