संदेश

दिसंबर 22, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

आखिर आरएसएस को भाजपा के नजरिए से न देखें तो फिर कैसे देखें, बना यक्ष प्रश्न!

चित्र
आखिर आरएसएस को भाजपा के नजरिए से न देखें तो फिर कैसे देखें, बना यक्ष प्रश्न! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक मोहन भागवत ने कोलकाता में हाल ही में दिए बयान में कहा कि आरएसएस को भाजपा के नजरिए से देखना बड़ी गलती है, क्योंकि इससे संगठन की सच्ची प्रकृति का गलत अंदाजा लगता है। देखा जाए तो भागवत का यह बयान आरएसएस की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान को राजनीतिक चश्मे से अलग करने के उद्देश्य से आया है। लेकिन इसके सियासी मायने राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय दोनों दृष्टि से अहम हैं। इसलिए देश-दुनिया के पक्ष-विपक्ष में यह बहस छिड़ चुकी है कि आखिरकार भाजपा (पूर्व नाम जनसंघ)  के मातृ संगठन समझे जाने वाले आरएसएस को बदलती भाजपा की अवसरवादी नजरिए से न देखें तो आप लोग ही बता दें कि फिर कैसे देखें? मसलन, भागवत ने स्पष्ट किया है कि आरएसएस का कोई राजनीतिक उद्देश्य नहीं है और इसे न तो केवल सेवा संगठन समझा जाए, न ही भाजपा से जोड़कर। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा क्योंकि कई लोग/दल गलती से आरएसएस को भाजपा से सीधे जोड़ते हैं, जबकि संगठन समाज निर्माण और हिंदू एकता पर केंद्रित है। चूंकि कोलकाता ...