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'चीनियों और अमेरिकियों की तुलना में भारतीयों को बौद्धिक रूप से मजबूत बनाते हैं सनातनी धार्मिक संस्कार’

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‘चीनियों और अमेरिकियों की तुलना में भारतीयों को बौद्धिक रूप से मजबूत बनाते हैं यहाँ प्रचलित धार्मिक संस्कार’ @ डॉ दिनेश चन्द्र सिंह, आईएएस, डीएम, जौनपुर, यूपी      “जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ| मैं बपुरा बुड़न डरा, रहा किनारे बैठ|” कहने का तात्पर्य यह कि “जो व्यक्ति मेहनत करता है, उसे सफलता अवश्य ही मिलती है| लेकिन जो व्यक्ति पानी में डूबने  के डर से, पानी में डुबकी न लगाकर सिर्फ किनारे पर बैठा रहता है, उसे कुछ भी प्राप्त नहीं होता है|” यह मानवीय जीवन की कड़वी सच्चाई है| चूँकि मुझे धर्म, अर्थ, काम, और मोक्ष के सफल और सकारात्मक जीवन यात्रा को जीने की यात्रा का बोध है| इसलिए अबोध होकर भी बोध करने की वजह ढूंढ लेता हूँ, ढूंढ रहा हूँ| दरअसल मुझे धर्म और अधर्म का कुछ ज्ञान है| धर्म का अल्प और अधर्म का अनंत ज्ञान है| आमतौर पर किसी भी व्यक्ति को केवल अधर्म का ही ज्ञान होता है, क्योंकि मनुष्य का जन्म ही प्राकृतिक तौर पर नर-नारी के मिलन का प्रतिफल है| इसलिए जन्म के समय से ही हम प्राकृतिक जीवन जीते हैं| परन्तु धर्म की व्याख्या शास्त्रों में, ‘वेद’, ‘पुराण’, ‘भग...

मसीहा

जौनपुर के जिलाधिकारी दिनेश चंद्र ने मछुवारे घुरहू बिन्द के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव पहुंचवा कर रच दिया इतिहास

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# अपने मन कछुऔर है, कर्ता के मन कछु और...जिलाधिकारी जौनपुर की तत्परता से मछुवारे घुरहू बिन्द का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गाँव लाया गया @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विशेष संवाददाता “अपने मन कछुऔर है,कर्ता के मन कछु और”  जी हां, किसी को कभी मुकम्मल जहां नहीं मिलता! यह एक कहानी है इसी जौनपुर जिले की, जिसे कभी शिराजे हिन्द कहा जाता था| जहां पर सर्व-धर्म समभाव की सरिता गोमती बहती है| जहां की संस्कृति में गंगा-जमुना तहजीब समाई हुई है, जहां कभी आर्थिक संपन्नता घर-घर मौजूद थी, वहां काल के थपेड़े ने समय बदला| वास्तव में, आर्थिक संपन्नता के सीमित हो जाने, उद्योगों की दशा और दिशा बदल जाने, कृषि जोतों के बंटवारे के कारण छोटा होते जाने, आदि का परिणाम यह हुआ कि लोग यहाँ से पलायन का दंश झेलने को मजबूर होकर बाहर जाने लगे। लोग अपने बूढ़े मां-बाप, नव विवाहिता, यहाँ तक कि दुधमुँहे बच्चे को भी छोड़कर मुंबई, गुजरात आदि औद्योगिक क्षेत्र में रोजी-रोटी की तलाश में जाने लगे!     कुछ ऐसी ही कहानी, इस तलाश में भटकते हुए एक ऐसे किरदार की है जो अपने आंखों में एक ...