जौनपुर के जिलाधिकारी दिनेश चंद्र ने मछुवारे घुरहू बिन्द के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव पहुंचवा कर रच दिया इतिहास
# अपने मन कछुऔर है, कर्ता के मन कछु और...जिलाधिकारी जौनपुर की तत्परता से मछुवारे घुरहू बिन्द का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गाँव लाया गया
@ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विशेष संवाददाता
“अपने मन कछुऔर है,कर्ता के मन कछु और” जी हां, किसी को कभी मुकम्मल जहां नहीं मिलता! यह एक कहानी है इसी जौनपुर जिले की, जिसे कभी शिराजे हिन्द कहा जाता था| जहां पर सर्व-धर्म समभाव की सरिता गोमती बहती है| जहां की संस्कृति में गंगा-जमुना तहजीब समाई हुई है, जहां कभी आर्थिक संपन्नता घर-घर मौजूद थी, वहां काल के थपेड़े ने समय बदला| वास्तव में, आर्थिक संपन्नता के सीमित हो जाने, उद्योगों की दशा और दिशा बदल जाने, कृषि जोतों के बंटवारे के कारण छोटा होते जाने, आदि का परिणाम यह हुआ कि लोग यहाँ से पलायन का दंश झेलने को मजबूर होकर बाहर जाने लगे। लोग अपने बूढ़े मां-बाप, नव विवाहिता, यहाँ तक कि दुधमुँहे बच्चे को भी छोड़कर मुंबई, गुजरात आदि औद्योगिक क्षेत्र में रोजी-रोटी की तलाश में जाने लगे!
कुछ ऐसी ही कहानी, इस तलाश में भटकते हुए एक ऐसे किरदार की है जो अपने आंखों में एक सपना लेकर अपने परिवार के भरण-पोषण हेतु परिवार छोड़कर पलायन तो कर जाता है, लेकिन बदनसीबी उसे मौत के मुंह तक पहुंचा देती है और फिर जैसे ही जिला प्रशासन को इस बारे में पता चलता है, वह मानवीय मदद पहुँचाने को जुट जाता है। उसकी सफलता से सरकार यशस्वी बनती है| जी हां! यह कहानी घुरहू बिंद की है जो दो पैसे की जुगत में अपने जिले से दूर रोजी-रोटी की तलाश में गुजरात निकल जाता है, क्योंकि सामान्य परिवार से गए व्यक्ति के पास किसी डिग्री और प्रक्षिक्षण का अभाव होना सामान्य सी बात है, जो घुरहू के साथ भी थी| लेकिन अनुवांशिक आधार पर मिला अनुभव हमेशा ही काम आता है और उसके इसी हुनर के चलते एक दिन गुजरात की एक फिशरीज कम्पनी में उन्हें काम करने का मौका मिल ही जाता है, जहां वह अपने परंपरागत व्यवसाय में दक्ष होने के कारण दूर समुद्र में जाकर के मछलियों के पकड़ने का काम शुरू करते हैं।
लेकिन कहा भी गया है कि “कर्ता के मन कछु और है, विधना के मन कछु और और|” हम जानते हैं कि समुद्र की कोई सीमा नहीं होती है, और वह कहां से लेकर के कहां चला जाए, कुछ पता नहीं चलता! और व्यक्ति के भटकाव की भी कहानी ऊपर वाला पहले से ही रच देता है| कुछ यही हुआ घुरहू के साथ, एक दिन उनकी नाव भटकती हुई चली गई पाकिस्तान की सीमा में। हां, वही पाकिस्तान जो कभी भारत का ही हिस्सा था, फिर अपना बिगडेल भाई बना था, जो कभी अपने इसी शरीर की दूसरी बांह की तरह थी, आज उसी की हरकतें पूरे शरीर से बांह को काट लेने की है। आज वह नफरत भरी आंख से अपने इस बड़े भाई को देखता है| कुछ हुआ वही घुरहू के साथ, घुरहू पाकिस्तान की सीमा में पकड़ लिए गए और एक दिन ऐसा आया कि मानसिक संत्रास वश वहां ही उनकी मृत्यु हो गई। किरदार को जो कुछ करना था वह किया और वह अनंत में समा गया| लेकिन मानवता क्या कहती है? इंसानियत का क्या तकाजा है? हमें क्या करना चाहिए? यह भी सिखला गया|
दरअसल मानवता के प्रशासनिक मिशाल की कहानी इस पर शुरू होती है| मूलतः वह परिवार जो सपने पाल रक्खा था, क्या उसे अपने प्रिय घुरहू की लाश को भी देखने का अधिकार नहीं है| उसके पीछे घुरहू के अंतिम दर्शन करने की उसके परिवार वालों की तमन्ना पूरी करने के पीछे जौनपुर के जिलाधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र सिंह हैं, जो मोदी-योगी सरकार की मूल भावनाओं को सरजमीं पर उतारने में कतई नहीं हिचकते हैं| वह जहाँ भी रहे, जनसेवा की एक मिशाल कायम की| जी हां, जौनपुर के जिलाधिकारी डॉक्टर दिनेश चंद्र सिंह, उन्हें जब यह पता चला, तो जैसा कि उनका स्वभाव है कि वह अंतिम सीमा तक जद्दोजहद करते हैं, कि किस प्रकार से अपने जिले के लोगों का कल्याण किया जाए| और वो लग गए, माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी की लोक कल्याण की भावना को जनमानस में पुनः प्रतिष्ठापित करने में| और उनके सक्षम प्रयास की सद्भावना रंगत भी लायी|
यह उनके सद्प्रयासों का ही नतीजा है कि, घुरहू की कमाई तो नहीं आई, लेकिन कम से कम घुरहू की लाश तो आ जाए, इसके लिए रात-दिन एक करके जिलाधिकारी महोदय लग गए। उनके पार्थिव शरीर को लाने के लिए जहां घुरहू नौकरी करते थे, उनसे सम्पर्क किया| फिर गुजरात सरकार के भी सारे अधिकारी लगे और जौनपुर के जिलाधिकारी ने माननीय मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप, जैसा कि वो करोना काल में भी आने वाले प्रदेश के लाखों लोगों को अपने प्रदेश में बाहर से लाये थे, को संज्ञान में लेकर उनके साथ प्रयास किया और प्रयास रंग लाया| उनकी डी कंपोज बॉडी बाघा बॉर्डर पर आ गई| फिर वहां से जिलाधिकारी के प्रयास से उस पार्थिव शरीर को शनिवार १९ अप्रैल की रात तक यहां लाया जाएगा।
इस बाबत जिला मत्स्य अधिकारी, जौनपुर को आगरा में दिवंगत मछुवारे की बॉडी को रिसीव करने हेतु लगाया गया है| इस हेतु समिति बना दी गई है जिससे कम से कम उस परिवार को अंतिम दर्शन कराया जा सके, जिसका सपना, सपना रह गया और हकीकत में मिली घुरहू की लाश| वह भी कर्मठ और मानवता को अपना जीवन समझने वाले जिलाधिकारी डॉ दिनेश चन्द्र सिंह के सदप्रयास से।
दुनिया में अपने से बिछड़ने पर किसे पीड़ा नहीं होती, कौन ऐसा है जो अपनी माटी से नहीं मिलना चाहता, मुख्यमंत्री-प्रशासन और जिलाधिकारी ने शायद जिस मिट्टी से घुरहू पैदा हुआ था, आज उसकी उस मृत आत्मा को इस मिट्टी तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। प्रयास मानवता का होना चाहिए, प्रयास लोक कल्याण का होना चाहिए, बाकी तो ईश्वर की इच्छा होती है। कहा भी गया है कि “होइहें सोई जो राम रचि राखा। को करि तर्क बढ़ावें शाखा।।“ लेकिन मानव कल्याण का दम्भ भरने वालों को भी यह प्रेरणा लेनी चाहिए कि अपनी मिट्टी का लाल अपनी मिट्टी में आ रहा है, उसे श्रद्धांजलि दें| उसकी परम्परानुसार क्रिया कर्म करें।
जिलाधिकारी महोदय ने उसे शासन प्रशासन से मिलने वाली समस्त सुविधाओं को दिलाने का प्रयास किया है, समितियां गठित की हैं, कहानी के पीछे मेरा मंतव्य यही है कि काश ऐसे ही जिलाधिकारी की तरह सोच वाला मुख्यमंत्री की तरह सक्षम रूप से प्रभावित प्रशासन देने वाला हमारे जिले के सभी अधिकारी, नागरिक, नेता हो जाते, हमारे जिले के उद्यमी अपने माटी के लाल अपनी माटी के लिए कुछ करते तो यह पलायन का जो दंश है इसको बहुत कम ही लोग झेलते, और अपनी माटी के होनहार लाल अपनी इसी माटी में रहते।
तभी तो कहा जाता है कि केंद्र में सत्तारूढ़ माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार और उत्तरप्रदेश में सतारूढ़ माननीय योगी आदित्यनाथ सरकार आम जनता के सहयोग के लिए सदैव तत्पर रहती है| दोनों सरकारें भारतीय संस्कृति की रक्षा एवं मानवीय मूल्यों को बनाए रखने के लिए इतनी तत्पर हैं कि राष्ट्रीय संसाधनों व नागरिक प्रशासन का सदुपयोग भी गरीब लोगों के पक्ष में कर रही हैं, ताकि जनविश्वास सत्ता प्रतिष्ठान के प्रति बरकार रहे और देश-प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर गतिमान रहें|
गत दिनों स्व० घुरहू बिन्द पुत्र श्री रामानन्द बिन्द मकान- 31 ग्राम बसिरहा, पोस्ट मछलीशहर, तहसील मछलीशहर, जनपद जौनपुर, उत्तरप्रदेशन जिनकी मृत्यु कराची पाकिस्तान में हुई थी, के पार्थिव शरीर को जिस तत्परता पूर्वक उनके पैतृक गाँव पहुंचाया गया, वह जौनपुर प्रशासन की नागरिक सम्वेदनशीलता के साथ साथ राज्य प्रशासन की उदारता और केन्द्रीय प्रशासन की गतिशीलता का भी द्योतक है| इस विषय में प्रशासन द्वारा हिन्दू परम्पराओं का सम्मान करने और इस वास्ते आमलोगों के साथ सहयोग करने की एक मिशाल कायम कर दी है जो न केवल प्रादेशिक बल्कि राष्ट्रीय व् अंतर्राष्ट्रीय सदाशयता का विषय है|
इस पूरे प्रकरण में जिलाधिकारी जौनपुर डॉ दिनेश चन्द्र सिंह की सम्वेदनशीलता व कार्य प्रतिबद्धता भी महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोगों के लिए अनुकरणीय है, क्योंकि दिवंगत आत्मा की अंगूठा छाप पत्नी श्रीमती पार्वती देवी के एक अधियाचना आवेदन के बाद उन्होंने जिस प्रकार की तत्परता दिखाई और स्थानीय प्रशासन के द्वारा शोकाकुल परिवार से संपर्क करके उनकी भावनाओं के अनुरूप मृतक के शव को उनके गाँव लाए जाने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के शीर्ष अधिकारियों को भरोसे में लेते हुए केन्द्रीय विदेश मंत्रालय, गुजरात सरकार, पंजाब सरकार के प्रशासनिक हुक्मरानों से आपात पत्राचार करते हुए, और अधीनस्थ अधिकारियों के मार्फत उचित सम्पर्क स्थापित करवाते हुए मृतक के शव को उनके पैतृक गाँव पहुंचाकर प्रशासनिक देखरेख में अंत्येष्टि क्रिया करवाने की व्यवस्था की गई, ताकि अधिक दिन व्यतीत हो जाने वाले शव से किसी अन्य नागरिक को संक्रमण नहीं फैले| इसलिए यह वास्तव में सराहनीय सरकारी व प्रशासनिक पहल है, जिसके लिए योगी सरकार व जौनपुर प्रशासन बधाई के पात्र हैं|
बता दें कि सम्बन्धित विषय जिलाधिकारी जौनपुर डॉ दिनेश चन्द्र सिंह की संज्ञान में जैसे ही आया, उन्होंने स्थानीय जॉइंट मजिस्ट्रेट के मार्फत और क्षेत्रीय तहसीलदार के द्वारा शोकाकुल परिवार से सम्पर्क स्थापित करवाते हुए पहचान के दस्तावेज एकत्रित करवाए और शीर्षस्थ अधिकारियों के संज्ञान में यह विषय लाए| इसी क्रम में गत 17 अप्रैल 2025 को कार्यालय ज्वाइंट मजिस्ट्रेट/उपजिलाधिकारी मछलीशहर जौनपुर ने जिलाधिकारी जौनपुर के आदेश के प्रतिउत्तर में अपने पत्रांक- 1055 / एस०टी० (म०शहर) के द्वारा जिलाधिकारी, जौनपुर को लिखा है कि महोदय, आप द्वारा दिये गये निर्देश के क्रम में स्व० घुरहू बिन्द पुत्र श्री रामानन्द बिन्द मकान- 31 ग्राम बसिरहा, पोस्ट मछलीशहर तहसील मछलीशहर जनपद जौनपुर की मृत्यु कराची पाकिस्तान में हुई है, और उनके पार्थिव शरीर को बाधा अटारी सीमा से भारत लाया जा रहा है, के सम्बन्ध में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य) व तहसीलदार मछलीशहर को मृतक के परिजनों से मुलाकात कर आवश्यक कार्यवाही करते हुए आख्या प्रेषित किये जाने का निर्देश दिया गया था। जिसके सम्बन्ध में आपको अवगत कराना है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य) व तहसीलदार मछलीशहर द्वारा मृतक के घर जाकर मुलाकात किये। इस क्रम में मृतक के परिजनों द्वारा अवगत कराया गया कि पार्थिव शरीर हम लोगों को चाहिए| क्योंकि हम लोग अपने गांव बसिरहा में पार्थिव शरीर का दाह संस्कार करेगें। इस बारे में मृतक के परिजनों द्वारा एक अन्य प्रार्थना पत्र भी दिया गया है, जो संलग्न है।
जिसके दृष्टिगत गत 18 अप्रैल 2025 को जिलाधिकारी, जौनपुर ने डिप्टी कमिश्नर अमृतसर (पंजाब) को अपने पत्रांक संख्या- 1737/ओएसडी/2025 के मार्फत लिखा कि मृतक भारतीय मछुवारे के पार्थिव शरीर की वापसी उसके पैतृक गाँव में की जानी है| इसलिए कृपया उपर्युक्त विषयक विदेश मंत्रालय, भारत सरकार (पी.ए.आई. डिवीजन) द्वारा प्रेषित पत्र संख्या जे/411/01/2025 दिनांक 15.04.2025, जो अधोहस्ताक्षरी यानी जिलाधिकारी जौनपुर को पृष्ठांकित है, का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें। इस बाबत मृतक के परिजन एवं ग्रामवासियों द्वारा पार्थिव शरीर को पैतृक गाँव में लाने का अनुरोध किया गया है, जिसके क्रम में केन्द्र सरकार, गुजराज सरकार एवं उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास से मृतक के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव में लाये जाने की कार्यवाही की जा रही है।
इसलिए आपको अवगत कराना है कि मृतक भारतीय मछुवारे के पार्थिव शरीर अमृतसर से बाबतपुर वाया दिल्ली लाने के लिए श्री मोहित संघवानी, सुपरिटेन्डेन्ट आफ फिशरिज, जनपद-दाहोद, गुजरात मो०नं0-8780813394 अमृतसर एयरपोर्ट पर उपस्थित हैं, किन्तु अपरिहार्य कारणों से शव की लिफ्टिंग नहीं हो पा रही है। अतः शव को समुचित वाहन के माध्यम से अमृतसर से जौनपुर वाया दिल्ली, नोएडा, लखनऊ एक्सप्रेस-वे लाया जाना है, अतः अनुरोध है कि आपातकालीन परिस्थितियों में तथा मानवीय दृष्टिकोण रखते हुए अमृतसर में उपस्थित एवं निख्तर प्रयासरत अधिकारी श्री मोहित संधवानी, सुपरिटेन्डेन्ट आफ फिशरिज, जनपद- दाहोद, गुजरात मो0नं0-8780813394 को अमृतसर में मृतक के पार्थिव शरीर को अमृतसर से जनपद जौनपुर (पैतृक ग्राम) में पहुँचाने हेतु समुचित वाहन उपलब्ध कराने का कष्ट करें।
जनपद जौनपुर में इस विषय में सहयोग हेतु श्री शाहिद जमाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य), मो0नं0-7783914665 वाहन पर होने वाले व्यय का वहन उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में जिला मजिस्ट्रेट/जिलाधिकारी द्वारा करा दिया जायेगा। मा० मुख्यमंत्री जी के निर्देश के क्रम में मानवीयता के आधार पर यह अत्यन्त संवेदनशील एवं मानवोचित कार्य उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता का विषय है, अतः इसमें आवश्यक सहयोग अपेक्षित है। एवं उत्तर प्रदेश सरकार के प्रयास से मृतक के पार्थिव शरीर को उनके पैतृक गाँव में लाये जाने की कार्यवाही की जा रही है।
जिलाधिकारी जौनपुर ने इस पत्र की प्रति मा० मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन, लखनऊ को सूचनार्थ एवं आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित किया है। साथ ही पुलिस महानिदेशक, उ०प्र०; पुलिस महानिदेश, पंजाब; चेयरमैन, नेशनल हाईवे आयोरिटी आफ इण्डिया, महानिदेशक उत्तर प्रदेश मत्स्य विभाग, आयुक्त, वाराणसी मण्डल, वाराणसी, पुलिस अधीक्षक, जौनपुर को इस आशय से प्रेषित कि प्रकरण में आवश्यक सहयोग एवं समन्वय हेतु अपने स्तर से आवश्यक कार्यवाही करने का कष्ट करें। वहीं श्री मोहित संघवानी, सुपरिटेन्डेन्ट आफ फिशरिज, जनपद- दाहोद, गुजरात को इस आशय से प्रेषित कि डिप्टी कमिश्नर, अमृतसर से समन्वय स्थापित कर अपेक्षित कार्यवाही सुनिश्चित करें।
इसके अलावा कार्यालय जिलाधिकारी, जौनपुर ने अपने पत्रांक-1695 /ओ०एस० डी0/2025, दिनांक 18 अप्रैल, 2025, विषयः मृतक मछुवारे के पार्थिव शरीर की वापसी के सम्बन्ध में, श्री शाहिद जमाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य), मो0नं0-7783914665 को पत्र लिखकर सूचित किया है कि आप द्वारा अवगत कराया गया है कि मृतक घुरहू का पार्थिव शरीर जनपद आगरा होते हुए जनपद जौनपुर में स्थित उसके पैतृक निवास पर लाया जायेगा। अतएव आपको निर्देशित किया जाता है कि आप शासकीय वाहन या अन्य निजी वाहन से जनपद आगरा पहुँच कर मृतक के पार्थिव शरीर को अपने संरक्षण में लेकर मृतक के पैतृक निवास स्थान पर पहुँचाना सुनिश्चित करें। आपके सहयोग हेतु दो पुलिस कर्मी नामित किये जा रहे है। इस पत्र की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक, जौनपुर को इस आशय से प्रेषित की गई है कि अपने स्तर से वो दो पुलिसकर्मियों को दिनांक 19.04.2025 की प्रातः 6:00 बजे श्री शाहिद जमाल, मुख्य कार्यकारी अधिकारी (मत्स्य) को उपलब्ध कराने हेतु निर्देशित करें। वहीं उप जिलाधिकारी, मछलीशहर को सूचनार्थ एवं इस निर्देश के साथ कि मृतक के पैतृक निवास पर शान्ति व सुरक्षा हेतु आवश्यक कार्यवाही किया जाना सुनिश्चित करें।
बता दें कि प्रशासनिक देखरेख में मृतक का शव उनके पैतृक गांव पहुंचने के बाद अन्य सामाजिक और धार्मिक औपचारिकताओं का निर्वहन करवाने के पश्चात अंतिम संस्कार 20 अप्रैल रविवार को प्रातः किया गया, जो उत्तरप्रदेश में प्रशासनिक जनसहयोग की दिशा में एक नया कीर्तिमान रच गया। इसके लिए राज्य सरकार और उसके जनपद प्रशासन की सर्वत्र सराहना हो रही है। जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह को उनकी जनप्रियता के लिए जनपद और राज्य के लोग उन्हें धन्यवाद दे रहे हैं।
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