जनहितैषी सुझाव को शिकायत समझने की भूल न करें, अपेक्षित बदलाव के वाहक बनें

* जनहितैषी सुझाव को शिकायत समझने की भूल न करें, अपेक्षित बदलाव के वाहक बनें
* नववर्ष की सचेष्ट मंगलकामनाएं, अहर्निश शुभकामनाएं!
@ अनुभव की बात/आईएएस डॉ दिनेश चंद्र सिंह, जिलाधिकारी, जौनपुर, उत्तरप्रदेश

स्वार्थपरक महाभारत के दौरान कुरुक्षेत्र के मैदान में जीवन जगत के सारथी भगवान श्रीकृष्ण, महान धनुर्धर अर्जुन के मोहपाश को तोड़ने के लिए कर्मयोग का उपदेश देते हुए एक बार कहते हैं कि "कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन" अर्थात आपका अधिकार केवल कर्म Sang में है, उसके फल में कभी नहीं। पुनः स्पष्ट करते हैं कि "मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि:" यानी कर्म के फल के लिए कभी प्रेरित मत हो, और न ही अकर्म (निष्क्रियता) में तुम्हारी आसक्ति हो। इस। प्रकार भारत ही नहीं बल्कि देश दुनिया के कर्मयोगियों के लिए यह आदर्श व अनुकरणीय उक्ति बन गई है।
सर्वप्रथम, ॐ नमः शिवाय। जनपद जौनपुर, उत्तरप्रदेश के सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नववर्ष 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं। इस ऊर्जान्वित अवसर पर परम पिता परमेश्वर आप सभी को सुख, शांति, समृद्धि युक्त सम्पत्ति, स्वरूप, संयम, सादगी, संस्कार, स्वास्थ्य, सम्मान एवं सफलता प्रदान करें। इन्हीं मंगलकामनाओं के साथ आपको एवं आपके परिवार को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं, अशेष मंगलकामनाएं। ॐ नमः शिवाय।

वस्तुतः, देवभाषा संस्कृत की महत्वपूर्ण उक्ति है- "अलमर्थेन कामेन सुकृतेनापि कर्मणा। एभ्य: संसारकान्तारे न विश्रान्तम भून्मनः।।" अर्थात अर्थ, काम और सुकृत कर्म बहुत हो चुके। इनमें भी संसार रूपी जंगल में मन विश्रांति को प्राप्त नहीं हुआ। यही जीवन जगत का सार सत्य है। सबको व्यक्तिगत अनुभूति हासिल कराते हुए कर्मयोगी मोक्ष की सच्चिदानंद अवस्था है। इसलिए कुछ बातें बड़े भाई के तौर पर साझा करना उचित समझता हूं, इसलिए इसे अन्यथा नहीं लेना है। दरअसल, निज अनुभूतियों से सीख हासिल करने वाला इंसान ही बुलंदियों को स्पर्श करता है।
प्रिय साथियों, टीम जौनपुर जनपद को नेतृत्व प्रदान करने का अवसर सौभाग्यवश मुझे मिला। यह आशीर्वाद मुझे उत्तरप्रदेश के तपस्वी, यशस्वी, पराक्रमी, साहसी और कर्तव्यनिष्ठ मुख्यमंत्री श्रीयुत योगी आदित्यनाथ जी की सदाशयी अनुकम्पा वश प्राप्त हुआ। उनकी पहचान नैतिकता के शिखर पुरूष, न्याय  के प्रति हृदय के अंतर्मन की आवाज को सुनने वाले की बनी है, जो स्वभाववश जाति-धर्म के विभेद से परे रहकर केवल उत्तरप्रदेश की जनता के कल्याण के प्रति समर्पित हैं। निःसन्देह आप "संकल्प से सिद्धि की परिकल्पना" को साकार कर रहे हैं।
आप तपस्वी महंत एवं हृदय सिंह की ऊर्जा धारण करते हैं। 

आपके व्यक्तित्व में सूर्य एवं चंद्रमा की प्रकृति समाहित है। इन्हीं महान लक्ष्णों से ईश्वरीय कृपावश और योग साधना के बल पर आप गोरक्षनाथ पीठाधीश्वर के परम पूज्य महंत श्री योगी आदित्यनाथ जी के रूप में जगत प्रसिद्ध हुए और देश-काल-पात्र की कोटि पर खरे उतरकर उत्तरप्रदेश को मुख्यमंत्री के रूप में सफल नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं। आपके अनुमोदित आदेश से ही जनपद जौनपुर में मुझे कार्य करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। जिसे करते हुए अपनी प्रशंसा मैं स्वयं करने योग्य नहीं हूँ, अस्तु मनसा वाचा कर्मणा अहर्निश भाव से अनवरत जनहितकारी कार्य के प्रति संकल्पबद्ध हूँ।
परन्तु मेरे प्रिय कनिष्ठ आईएएस एवं पीसीएस अधिकारी गण, आपको यह अनुभूति होनी चाहिए कि प्रशासनिक कार्य करने एवं पद-प्रतिष्ठा के साथ समाज में शासकीय दायित्वों के निर्वहन के लिए आप सबको उत्तरप्रदेश स्थित जौनपुर जैसे ऐतिहासिक जिले में कार्य करने का सुअवसर प्राप्त हुआ है। आप सभी योग्य हैं, इसलिए प्रतिष्ठापूर्ण परीक्षाओं में आपका चयन हुआ है। हालांकि चयन के पश्चात आपके मन में कार्य करने की निष्ठा न हो और आपको बार-बार एक ही कार्यों को करने के लिए डीएम को प्रत्येक दिन वीसी करके आपकी प्रगति को अवगत कराना पड़े।

 तो प्रिय साथियों, यह आपकी अकर्मण्यता व शिथिलता है जिसे लोकतंत्र में आवाम सहन नहीं करेगी, चाहे आप किसी भी पद पर हों। यदि किन्हीं को कोई शंका हो तो समाज में अपनी प्रतिष्ठा के बारे में किसी गरीब व्यक्ति के मुख से सुनो, आपको ज्ञात हो जाएगा, कि हकीकत क्या है? फिर आपलोग खुद ही महसूस करेंगे कि हे प्रभु! मैंने इतनी प्रतिष्ठित परीक्षा पास की, परन्तु समाज में मेरा क्या अस्तित्व एवं पहचान है!

यहां पर मैं स्पष्ट करना चाहूंगा कि मेरी 32 वर्षों की सेवा हो चुकी है, और इस दौरान हमने सदैव जनता और जनता के कार्यों को तरजीह दी। इसके लिए प्रत्येक दिवस बिना किसी सार्वजनिक अवकाश के और व्यक्तिगत जीवन के निजी हितार्थ उपभोग किये, सीधे जनमानस के कार्य के लिए सहजता पूर्वक पीड़ित जनता के लिए उपलब्ध रहा हूँ। यही मैंने अपने पूर्व के डीएम और आयुक्त महोदय लोगों से सीखा है। 

परन्तु आजकल आलम यह है कि प्रत्येक कार्य के लिए आईएएस, पीसीएस एवं अन्य सेवाओं के अधिकारियों की वीसी से समीक्षा करने के बाद भी उनकी चेतना जागृत नहीं हो पाती है। ऐसे में तो यह दोष किसी और का नहीं अपितु स्वयं उस अधिकारी का है! आखिर वह क्यों सेवा में आया है, खुद के अंतर्मन से पूछना चाहिए। और यदि सेवा को स्वीकार किया है, योग्य है तो उसे शासन को अपना बेस्ट देने हेतु खुद ही ततपर रहना चाहिए। आखिर किसी को बार-बार टोकने की आवश्यकता किसी भी वरिष्ठ अधिकारी को क्यों, सवाल महत्वपूर्ण है, प्रेरणादायक है।

अनुभव साझा करता हूँ कि कोविड-19 के पहले वीसी नहीं होती थी, परन्तु कार्य होता था। उसके पूर्व में भी मासिक बैठक होती थी, जिससे कार्य भी गुणवत्तापरक होता था। इसलिए आप-हम-सबलोग यह संकल्प लें कि बार बार वीसी से कहना न पड़े, बल्कि स्वयं अपने कार्यों को समझें। फार्मर्स रजिस्ट्री (एफ आर), आयुष्मान कार्ड, फैमिली आईडी, पीएम सूर्य योजना, राजस्व वादों एवं आईजीआरएस के गुणवत्तापूर्ण निष्तारण से जनसामान्य एवं जनमानस के कार्यों के प्रति सचेत और संवेदनशील होकर शासकीय कार्यों का निष्पादन करें। खासकर स्थानीय विभागीय अधिकारीगण भी अपने-अपने विभागीय कार्यों को उसी तत्परता से करें; वीसी से निर्देश आवश्यक हैं, ये जारी रहेँगे लेकिन निरंतर नहीं, अपितु समय समय पर आवश्यकता के अनुसार। 

दरअसल, मैं रहूं न रहूं आपका बॉस कोई न कोई रहेगा। इसलिए आपलोग याद रखिए कि वह आपको लिखकर समझायेगा नहीं, बल्कि लिखित दंड देकर आपके सपनों की प्रगति में बाधक बनेगा, और आपकी निष्कलंक प्रगति को सापेक्षिक दंड देकर बाधित करेगा। मैं यहाँ पर स्पष्ट कर दूं कि "मैं तो दंड दूंगा नहीं परन्तु निम्नलिखित पंक्तियों से नसीहत जरूर दूंगा। 
क्योंकि....
"आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, यदि करते नहीं कोई यात्रा। आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, यदि पढ़ते नहीं कोई किताब। आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, यदि सुनते नहीं अपने अंतर्मन की आवाज। 
आप धीरे-धीरे मरने लगते हैं, यदि करते नहीं किसी की तारीफ।"
परन्तु अनावश्यक तारीफ भी हम सबके कार्यों की प्रगति में बाधा बनती है। इसलिए दंड का प्राविधान है। बार-बार वीसी करके एक ही बात को मैं अब नहीं कहूँगा।

प्रिय साथियों सुनो, योग्य हो इशारा समझो, फार्मर्स रजिस्ट्री (एफआर), आयुष्मान कार्ड, फैमिली आईडी, पीएम सूर्य योजना, सीएम युवा योजना, राजस्व वादों का निष्तारण एवं आईजीआरएस की शिकायतों का गुणवत्ता के साथ निष्तारण करने की खुद के अंतर्मन की आवाज को सुनो। यही गुड गवर्नेंस 2025 या वीक था। और यही भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय अटल जी को सच्ची श्रद्धांजलि एवं नमन होगा। सादर अभिवादन के साथ, जय श्री प्रभु राम, जय हनुमान, जय हिन्द, जय भारत!

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