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अमेरिका-यूरोप-इजरायल के खिलाफ चीन-रूस-ईरान में बढ़ती आर्थिक-सामरिक भागीदारी के वैश्विक निहितार्थ

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अमेरिका-यूरोप-इजरायल के खिलाफ चीन-रूस-ईरान में बढ़ती आर्थिक-सामरिक भागीदारी के वैश्विक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद आए दिन गहराते जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान का रूस और चीन के साथ आर्थिक और सामरिक समझौता लगातार मज़बूत होता जा रहा है। निकट भविष्य में इसके और प्रगाढ़ होने के आसार हैं। देखा जाए तो यह पारस्परिक और त्रिपक्षीय समझदारी दुनिया भर में ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह खाड़ी और अरब देशों में अमेरिकी/इजरायली-पश्चिमी वर्चस्व, वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और व्यापार-ऊर्जा संरचना पर सीधा प्रभाव डालेगी। ऐसा ही हो भी रहा है। इस घटनाक्रम से कमोबेश भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक स्वायत्तता भी प्रभावित होगी। इसलिए आइए इस रणनीतिक घटनाक्रम के विभिन्न विश्वव्यापी प्रभावों को क्रमबद्ध रूप से समझते हैं। क्योंकि अमेरिका-यूरोप-इजरायल के खिलाफ चीन-रूस-ईरान में बढ़ती आर्थिक-सामरिक भागीदारी के वैश्विक निहितार्थ स्पष्ट हैं। पहला, वैश्विक शक्ति संतुलन पर प्रभाव: रूस–चीन–ईरान “त्रिकोण” पश्चिमी प्रभुत्व वाली एकध्रुवीय दुनिया के वि...

डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के परिवर्तित नियमों के वैधानिक अंतर्राष्ट्रीय मायने

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डीपफेक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के परिवर्तित नियमों के वैधानिक अंतर्राष्ट्रीय मायने @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक आए दिन बदलते डिजिटल घटनाक्रम के बीच केंद्र सरकार ने IT (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 में संशोधन करके डीपफेक (deepfake) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने कंटेंट के लिए नए डिजिटल नियम जारी किए हैं, जो 10 फरवरी 2026 को अधिसूचित किए गए और 20 फरवरी 2026 से पूरे देश में लागू होते हैं। चूंकि सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक डीपफेक व एआई के बढ़ते गलत प्रचलन पर चिंता जाहिर कर चुके हैं, इसलिए सम्बन्धित प्रशासन का यह कदम स्वागत योग्य है।  आपको पता होना चाहिए कि सिर्फ साल 2024 में ही साइबर क्राइम के 22.68 लाख केस सामने आए थे। खासकर कई सेलेब्स शिकायत कर चुके हैं कि उनकी तस्वीरों-विडियो का इंटरनेट पर गलत इस्तेमाल हुआ। चूंकि नई दिल्ली में अगले हफ्ते से AI समिट होना है, जिसमें इस फील्ड के दिग्गज शामिल होंगे। इसलिए कहा जा सकता है कि सरकार के इंडिया AI मिशन की सफलता के लिए यह सम्मेलन बेहद अहम है।  हालांकि आर्टि...

भारत का "इंपोर्ट टू एक्सपोर्ट" मॉडल क्या है? इससे क्या रणनीतिक लाभ मिलेगा?

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भारत का "इंपोर्ट टू एक्सपोर्ट" मॉडल क्या है? इससे क्या रणनीतिक लाभ मिलेगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत का "इंपोर्ट टू एक्सपोर्ट" मॉडल मुख्य रूप से चीन जैसे कारोबारी देशों से कच्चे माल या मध्यवर्ती सामान आयात करके उन्हें भारत में प्रोसेसिंग, असेंबली या मैन्युफैक्चरिंग के बाद अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका आदि बाजारों में निर्यात करने पर आधारित है। यह मॉडल व्यापार घाटे के बावजूद भारत को प्रोसेसिंग हब के रूप में स्थापित करने की रणनीति है। जहां तक इस नूतन मॉडल की व्याख्या की बात है तो यह मॉडल स्मार्टफोन (जैसे ऐप्पल, सैमसंग) और फार्मास्यूटिकल सेक्टरों में प्रमुख है, जहां चीन से इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स या एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रीडिएंट्स (APIs) आयात होते हैं। भारत इनका मूल्यवर्धन जोड़कर उच्च मूल्य पर निर्यात करता है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूती मिलती है। बताया जाता है कि चीन से व्यापार घाटा (लगभग 100 अरब डॉलर से अधिक) होने पर भी यह फायदेमंद है क्योंकि निर्यात मूल्य आयात से कहीं अधिक होता है। जहां तक इस कारोबारी के नीति लाभा...

बंगलादेश में बीएनपी की भारी जीत से भारत के लिए सियासी निहितार्थ

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बंगलादेश में बीएनपी की भारी जीत से भारत के लिए सियासी निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक बांग्लादेश में प्रमुख विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने फरवरी 2026 के संसदीय चुनावों में भारी जीत हासिल की है। उसने 300 सीटों में से 151 से 209 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत प्राप्त किया है। इससे बंगलादेश में बीएनपी की भारी जीत से भारत के लिए सियासी निहितार्थ स्पष्ट हैं, क्योंकि यह अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग के पतन के बाद पहला बड़ा चुनाव है, जो 2024 के छात्र-आंदोलन से उभरा था।  चूंकि बीएनपी पहले से सत्ता में रहती आई है, इसलिए उसकी जीत के वैश्विक मायने भी हैं। वह यह कि पार्टी कमोबेश पूर्व प्रधानमंत्री स्व.बेगम खालिदा जिया के अधूरे सपनों को ही साकार करेगी। वो भी तब जब उनके पुत्र तारिक रहमान देश के नए प्रधानमंत्री बनेंगे। देखा जाए तो बीएनपी ने जमात-ए-इस्लामी को काफी पीछे छोड़ते हुए प्रचंड जीत दर्ज की है, जहां जमात को महज 42-68 सीटें ही मिलीं हैं। इसप्रकार तारिक रहमान, जो कि बीएनपी के प्रमुख नेता हैं, देश के संभावित प्रधानमंत्री बन सकते है...

आखिर सेवा तीर्थ से उपजते सियासी सवालों के जवाब कब तक मिलेंगे?

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आखिर सेवा तीर्थ से उपजते सियासी सवालों के जवाब कब तक मिलेंगे? @ कमलेश। पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि शब्द ब्रह्म है और हर शब्द अपने मंत्रमय भावमय अस्तित्व से आकार ग्रहण करते हुए देर-सबेर साकार होता है। इस दृष्टिकोण से दूरद्रष्टा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'नाम परिवर्तन' द्वारा जनमानस की सोच में बदलाव की जो मुहिम चलाई है, वह सुसंस्कृत भारत के निमित्त 'नाम/विचार परिवर्तन यात्रा' अनवरत रूप से जारी है।  इसी कड़ी में हमारा 'गवर्नमेंट ऑफ भारत' अपने 'लोककल्याण मार्ग' (सेवन रेस कोर्स) व 'कर्तव्य पथ' (राजपथ) होते हुए अब 'सेवा तीर्थ' (पीएमओ) तक के अपने वैचारिक सफर को पूरा कर चुका है।  पहले नया संसद भवन और अब कर्तव्य भवन 1 और 2 इसकी बानगी भर हैं जबकि अन्य बदलाव भी प्रक्रियाधीन हैं और नाम-भवन परिवर्तन द्वारा, भाव परिवर्तन यात्रा गतिमान है। वास्तव में, यह नया बदलाव नया भारत यानी गवर्नमेंट ऑफ भारत (गवर्नमेंट ऑफ इंडिया) के मार्फ़त लिए हुए फैसलों में सिर्फ 'मिल का पत्थर' भर है, और विगत लगभग एक दशक में हमलोग ऐसे...

एप्सटीन सेक्स फाइल्स जैसे सत्तागत सड़ांध पर भारत में चर्चा क्यों लाजिमी? समझिए

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एप्सटीन सेक्स फाइल्स जैसे सत्तागत सड़ांध पर भारत में चर्चा क्यों लाजिमी? समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक सेक्स की भूख प्रकृति प्रदत्त है, लेकिन इसकी उन्मुक्त और अनियंत्रित प्रवृत्ति विभिन्न शारीरिक व सामाजिक विकृतियों की वाहक समझी जाती है। हालांकि अब जिस तरह से इसे सियासी विस्तार, कारोबारी धंधे और प्रशासनिक प्रभुत्व के लिए बतौर हथियार इस्तेमाल किया जाने लगा है, उससे हमारी जनतांत्रिक, धार्मिक और मनोवैज्ञानिक व्यवस्था खतरे में है। खासकर ब्रह्मचर्य के नीति-नियंता सनातनी राष्ट्र भारत से जुड़े विभिन्न हस्तियों के ऊपर जो उंगलियां उठ रही  हैं, वह बड़े ही शर्म की बात है। दुनिया के शीर्ष कारोबारी देश अमेरिका से जिस तरह से कभी विकिलीक्स खुलासे, व कभी एप्सटीन सेक्स फाइल्स रहस्योद्घाटन के मामले सामने आते हैं और फिर अंतरराष्ट्रीय जगत में हलचल मच जाती है, वह शायद उसकी रणनीतिक साजिश ही क्यों न हो, लेकिन सड़ांध मार रहीं लोकतांत्रिक प्रवृतियों पर खुली चर्चा आवश्यक है, ताकि मानवीय सूरत और सीरत दोनों बदले व सभ्य-सुसंस्कृत समाज को बढ़ावा मिले, जिसे सुख-शांति-समृद्धि का आ...

एआई इम्पैक्ट सम्मिट 2026 के नीतिगत-समूहगत वैश्विक मायने

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एआई इम्पैक्ट सम्मिट 2026 के नीतिगत-समूहगत वैश्विक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में 16-20 फरवरी 2026 को आयोजित एक प्रमुख वैश्विक आयोजन है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार और समावेशी विकास पर केंद्रित है। यह समिट ग्लोबल साउथ के लिए पहला बड़ा AI शिखर सम्मेलन है, जो 100+ देशों से 35,000+ प्रतिनिधियों को एकजुट कर रहा है। देखा जाए तो यह समिट इंडियाAI मिशन के तहत आयोजित हो रहा है, जिसमें राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, उद्योग नेता, शोधकर्ता और सिविल सोसाइटी शामिल होंगे।  वास्तव में यह आयोजन UK AI Safety Summit, Seoul AI Summit जैसे पूर्व आयोजनों की निरंतरता में वैश्विक AI सहयोग को मजबूत करेगा। जिसका मुख्य थीम 'पीपुल, प्लैनेट, प्रोग्रेस' है। ये नीतियों को व्यावहारिक प्रभाव में बदलने पर जोर देता है। इस समिट का वैश्विक महत्व यह है कि AI इम्पैक्ट समिट AI के लोकतंत्रीकरण पर फोकस करता है, विशेष रूप से वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए संसाधनों को सुलभ बनाने हेतु सक्रिय किया गया है। वहीं, भारत की पूरक नवा...