रंगोत्सव होली के सियासी और सांस्कृतिक मायने
रंगोत्सव होली के सियासी और सांस्कृतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक रंगपर्व होली भले ही भारतीय सभ्यता-संस्कृति से अनुप्राणित है, लेकिन गुलामी काल में यह पाश्चात्य सभ्यता-संस्कृति के सामाजिक दुष्प्रभाव से भी यह अछूती नहीं बची है। आमतौर पर यह रंगोत्सव देश-दुनिया में हंसी ठिठोली का त्योहार समझा जाता है। इस दौरान आमलोगों में रंग-गुलाल खेलने के साथ-साथ मीठे पकवानों, नमकीन मांसाहारों और नशीले पदार्थों के सेवन जैसे (भांग), द्रव्य (शराब) और गैस (गांजा) का प्रयोग बहुतायत में देखने को मिलता है जिससे लोग झूम उठते हैं। आमतौर पर शुद्र यानी सेवक पर्व होली आपसी प्रेम और सौहार्द का प्रतीक है, जब घोर दुश्मन भी एक दूसरे के गले मिलने से नहीं हिचकते हैं। बदलते जमाने के अनुरूप लोकपर्व होली का रंगोत्सव भारतीय राजनीति में व्यक्तित्व ब्रांडिंग का भी पर्याय बन चुका है। यह वसंत पर्व अब सामाजिक-राजनीतिक ध्रुवीकरण, सांप्रदायिक तनाव और चुनावी रणनीति का प्रतीक बन गया है। लोकतांत्रिक भारत में यह प्रवृत्ति वर्ष दर वर्ष गहराती जा रही है। खासकर 2026 में ही बिहार, यूपी और अन्य राज्य...