भारत व दक्षिण कोरिया के बीच हुई नई डील के सियासी निहितार्थ
भारत व दक्षिण कोरिया के बीच हुई नई डील के सियासी निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दुनियाभर में भारत की कूटनीति अपने अनोखे अंदाज के लिए चर्चित रहती आई है, क्योंकि हम तमाम हानि-लाभ की परवाह किए बगैर वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवंतु सुखिनः के सभ्यता-संस्कृतिगत सिद्धांतों को अमलीजामा पहनाते आए हैं। हालांकि कोई इसे गुटनिरपेक्षता समझता है तो कोई निज स्वार्थपरकता, जो गलत भी नहीं है। आखिर बिना स्वार्थ साधे परमार्थ भी किया जाए तो कैसे? इसलिए व्यवहारम फलदायकम हमारा मूलमंत्र है। भारत और द#क्षिण कोरिया के बीच हुई नई डील (व्यापार, तकनीक, रक्षा और ऊर्जा सहयोग) को इसी नजरिए से देखने की जरूरत है, क्योंकि इससे ही द्विपक्षीय रिश्तों के साथ‑साथ हिंद‑प्रशांत के रणनीतिक संतुलन में भी गहरे सियासी निहितार्थ निकलते हैं। आइए क्रमबद्ध तरीके से इसे समझते हैं- पहला, भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति मजबूत होना सबसे ज्यादा मायने रखता है। जहां भारत‑दक्षिण कोरिया की “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को आगे बढ़ाने के घोषणाओं से भारत को उत्तर‑पूर्व एशिया और इंडो‑पैसिफिक में एक अलग ...