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आखिर आर्थिक सुनामी के राजनीतिक व आर्थिक मायने क्या हैं?

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आखिर आर्थिक सुनामी के राजनीतिक व आर्थिक मायने क्या हैं? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक राहुल गांधी की "आर्थिक सुनामी" वाली चेतावनी को फिलहाल एक राजनीतिक चेतावनी और आर्थिक जोखिमों पर विपक्षी आक्रमण के रूप में देखा जाना चाहिए। क्योंकि उनका यह कहना कि भारत निश्चित रूप से आर्थिक सुनामी की ओर बढ़ रहा है, अभी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जल्दबाजी होगी। हालांकि वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए इस बहस को पूरी तरह खारिज भी नहीं किया जा सकता। आर्थिक मामलों के जानकार बताते हैं कि भारत में वास्तव में "आर्थिक सुनामी" आएगी या नहीं, इसका कोई निश्चित उत्तर अभी नहीं दिया जा सकता। लेकिन विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा हाल में दी गई चेतावनी ने आर्थिक और राजनीतिक बहस को तेज कर दिया है। क्योंकि राहुल गांधी का तर्क है कि वैश्विक संकट, विशेषकर पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगाई, ईंधन कीमतों और आर्थिक असमानता के कारण भारत एक बड़े आर्थिक झटके की ओर बढ़ सकता है। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार और भाजपा...

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं तो संभावनाएं हैं...

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं तो संभावनाएं हैं @ कमलेश पांडेय, कवि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं तो संभावनाएं हैं, बिहार के नव निर्माण की नई कथाएं हैं। गांव-गांव तक सड़कें हों, ऐसी योजनाएं हैं, हर घर खुशहाली पहुंचे, ऐसी कामनाएं हैं। खेतों में हरियाली हो, नदियों में रवानियां हैं, युवाओं के सपनों को मिलती नई उड़ानें हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार की नई दिशाएं हैं, विकास के पथ पर बढ़ती हुई निशानियां हैं। उद्योगों का विस्तार हो, ऐसी परिकल्पनाएं हैं, निवेश और नवाचार की खुलती खिड़कियां हैं। भ्रष्टाचार पर अंकुश हो, ऐसी अपेक्षाएं हैं, सुशासन के संकल्पों की नई व्याख्याएं हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी हैं तो संभावनाएं हैं, जन-जन के विश्वास की यही तो गूंजती वाणियां हैं। समय बताएगा कितना साकार हुआ सपना, फिलहाल उम्मीदों से भरी हुई ये कहानियां हैं। @ कमलेशवाणी की काव्य मय प्रस्तुति

आखिर कैसे रूकेंगे मालवीय नगर होटल अग्निकांड जैसे हादसे, जिम्मेदार कौन?

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आखिर कैसे रूकेंगे मालवीय नगर होटल अग्निकांड जैसे हादसे, जिम्मेदार कौन? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल-अग्निकांड में 21 लोगों की मृत्यु और दर्जनों के घायल होने की घटना केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा नियमों की संभावित विफलता और प्रशासनिक लापरवाही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। दुर्भाग्य की बात है कि दिल्ली या अन्य महानगरों में हुई ऐसी ही घटनाओं से सिविल/पुलिस प्रशासन ने कोई सीख नहीं ली, जिससे यह हादसा भी नियति का खेल बनकर रह गया। प्रशासन को इसे गम्भीरता से लेना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर लगाम लगे, जिससे इतनी भारी क्षति नहीं हो पाए। प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, भवन में केवल एक प्रवेश-निकास मार्ग था, बेसमेंट और ऊपरी मंजिलों में क्षमता से अधिक कमरे संचालित किए जा रहे थे, तथा अग्नि सुरक्षा मानकों के पालन पर भी सवाल उठ रहे हैं। लिहाजा यह प्रश्न मौजूं है कि आखिर इस लोमहर्षक और दर्दनाक घटना का जिम्मेदार कौन? यह ठीक है कि जांच पूरी होने से पहले अंतिम निष्कर्ष निक...

यदि आप काठमांडू और जनकपुर धाम नहीं गए तो क्या गए?

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यदि आप काठमांडू और जनकपुर धाम नहीं गए तो क्या गए? @ विष्णुदेव वैद्य, यात्रा ब्लॉगर मैंने मशहूर यात्रा ब्लॉगर और एनजीओ छाया फाउंडेशन के प्रमुख विष्णु देव वैद्य की हैसियत से भारत-नेपाल के कटु मधु रिश्तों के बीच आमलोगों के दिलोदिमाग में प्रेम और सौहार्द भरने के लिए नेपाल के कुछ महत्वपूर्ण हिस्सों के दौरे किये। जिसकी पहली कड़ी में आज दो प्रमुख पर्यटन एवं तीर्थस्थल — काठमांडू और जनकपुर का अवलोकन यहां पर मैं अपने नजरिए से प्रस्तुत करता हूँ। बिल्कुल दिल्ली-बिहार के नजरिए से, मैंने उक्त स्थलों के धार्मिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आर्थिक महत्व की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण प्रकाश डाला हैं। आइए पहले समझते हैं काठमांडू का पर्यटन महत्व, जो काठमांडू नेपाल की राजधानी होने के साथ-साथ देश का सबसे बड़ा पर्यटन केंद्र है। यहां का प्रमुख आकर्षण है Kathmandu Durbar Square, जो प्राचीन राजमहलों, मंदिरों और नेवारी स्थापत्य कला का अद्भुत केंद्र। इसे विश्व धरोहर स्थलों में गिना जाता है। Pashupatinath Temple जो भगवान शिव का विश्वप्रसिद्ध मंदिर, जो हिंदू श्रद्धालुओं के लिए अत्यं...

दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा से मान्यता प्राप्त पत्रकार कल्याण समिति, दिल्ली के अध्यक्ष रविन्द्र गुप्ता ने भेंट की

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दिल्ली के श्रम मंत्री कपिल मिश्रा से मान्यता प्राप्त पत्रकार कल्याण समिति, दिल्ली के अध्यक्ष रविन्द्र गुप्ता ने भेंट की राजनैतिकदुनिया टीम नई दिल्ली: हिंदी पत्रकारिता दिवस के 200वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता को उनके श्रम मंत्री कपिल मिश्रा के मार्फ़त "मान्यता प्राप्त पत्रकार कल्याण समिति, दिल्ली" के अध्यक्ष रविन्द्र गुप्ता और सदस्य अशोक कौशिक आदि ने हार्दिक शुभकामनाएँ एवं दिली बधाई प्रेषित की। इसी सिलसिले में मंत्री मिश्रा के आवास पर मुलाकात की और उन्हें एक स्मरण-पत्र सौंपा, जिसमें अपनी उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए विभिन्न लंबित मांगों से भी उन्हें अवगत कराया गया। स्मरण-पत्र में लिखा हुआ है कि आपको अत्यंत हर्ष के साथ सूचित करना है कि हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली 200 वर्ष पूर्ण होने के इस ऐतिहासिक अवसर पर, समिति द्वारा पत्रकारिता दिवस की पूर्व संध्या पर एक भव्य और गरिमामयी राष्ट्रीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस ऐतिहासिक समागम में देश के कोने-कोने से आए प्रबुद्ध पत्रकारों, संपादकों और मार्गदर्शकों ...

पश्चिम बंगाल में टीएमसी की बढ़ती सियासी मुश्किलों के अहम राजनीतिक मायने

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पश्चिम बंगाल में टीएमसी की बढ़ती सियासी मुश्किलों के अहम राजनीतिक मायने  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पश्चिम बंगाल में टीएमसी और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बढ़ती राजनीतिक मुश्किलें केवल एक दल का संकट नहीं हैं; बल्कि वे बंगाल की सत्ता-राजनीति, विपक्षी एकता, भाजपा के विस्तार और राज्य की भविष्य की राजनीतिक दिशा से जुड़ा बड़ा घटनाक्रम हैं। यदि पार्टी आंतरिक चुनौतियों पर नियंत्रण नहीं कर पाती, तो बंगाल में आने वाले वर्षों में एक नए राजनीतिक युग की शुरुआत हो सकती है।  वैसे तो टीएमसी की बढ़ती मुश्किलें कई स्तरों पर दिखाई दे रही हैं। हालांकि पार्टी अभी भी पश्चिम बंगाल की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति है, लेकिन उसे कुछ महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। आइए पहले समझते हैं कि आखिर उसकी बढ़ती मुश्किलें क्या क्या हैं-  पहली, भ्रष्टाचार के आरोप और छवि का संकट: शिक्षक भर्ती, नगर निकाय भर्ती और अन्य कथित घोटालों को लेकर पार्टी के कई नेताओं पर जांच एजेंसियों की कार्रवाई हुई है। इससे "सुशासन" और "परिवर्तन" की वह छवि...

आखिर हर बार अनुत्तरित क्यों रह जाता है सभ्यता का नैतिक प्रश्न?

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आखिर हर बार अनुत्तरित क्यों रह जाता है सभ्यता का नैतिक प्रश्न?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार “सभ्यता का नैतिक प्रश्न” वे मूलभूत प्रश्न हैं जो किसी समाज, राष्ट्र या पूरी मानवता के सामने यह चुनौती रखते हैं कि विकास, शक्ति, विज्ञान और समृद्धि का उपयोग किस उद्देश्य और किस नैतिक आधार पर किया जाए। इस हेतु थोड़ी गहराई में जाकर चिंतन-मनन करें तो अंतर्मन कह उठेगा कि अंततोगत्वा मनुष्य के पास बढ़ती हुई शक्ति का उपयोग किस उद्देश्य के लिए होगा—स्वार्थ, प्रभुत्व और उपभोग के लिए, या न्याय, करुणा, स्वतंत्रता और मानव कल्याण के लिए?” यही प्रश्न किसी भी सभ्यता की दिशा और भविष्य को निर्धारित करता है। मानव इतिहास बताता है कि बढ़ती हुई शक्ति—चाहे वह सैन्य शक्ति हो, आर्थिक संपन्नता, राजनीतिक प्रभाव या वैज्ञानिक-तकनीकी क्षमता—अपने आप में न तो नैतिक होती है और न अनैतिक। उसका नैतिक मूल्य इस बात से तय होता है कि उसका उपयोग किस उद्देश्य के लिए किया जाता है।  अनुभूत सत्य है कि जब शक्ति का उपयोग प्रभुत्व, शोषण और असीमित उपभोग के लिए होता है, तब साम्राज्यवाद, ...