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राम मंदिर के सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के पीछे छिपे प्रशासनिक व सियासी संदेश को समझिए

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राम मंदिर के सीईओ एयर मार्शल जितेंद्र मिश्र की नियुक्ति के पीछे छिपे प्रशासनिक व सियासी संदेश को समझिए (Understand the administrative and political message behind the appointment of Air Marshal Jitendra Mishra as the CEO of Ram Temple) "क्या राम मंदिर की भव्यता के साथ उसकी प्रशासनिक विश्वसनीयता भी उतनी ही भव्य बन पाएगी? यही वह प्रश्न है जो आने वाले वर्षों में राम मंदिर की राजनीतिक विरासत तय करेगा। क्योंकि अब राम मंदिर का सवाल केवल यह नहीं है कि “रामलला का मंदिर कितना भव्य है?” बल्कि मौलिक सवाल यह है कि “रामलला के मंदिर की व्यवस्था कितनी आदर्श है?”  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उत्तरप्रदेश की आध्यात्मिक राजधानी अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण भारतीय राजनीति के सबसे लंबे और निर्णायक अध्यायों में से एक रहा है। इस मंदिर आंदोलन ने भारतीय राजनीति की दिशा बदली, भाजपा को राष्ट्रीय सत्ता के केंद्र तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई और अंततः 22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के साथ आंदोलन का सबसे बड़ा प्रतीकात्मक लक्ष्य पूरा हुआ। लेकिन इतिहास का...

क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय?

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क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय? (Is the chapter of a 'new institutional era' beginning in Ayodhya?) "अब तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का संचालन मुख्यतः ट्रस्ट के पदाधिकारियों और धार्मिक-सामाजिक नेतृत्व के माध्यम से होता रहा। अब पहली बार पूर्णकालिक CEO का पद बनाया गया है। इसका अर्थ है कि मंदिर प्रशासन को केवल धार्मिक न्यास के पारंपरिक ढांचे में नहीं, बल्कि एक बड़े, जटिल और बहुस्तरीय संस्थान के रूप में देखने की जरूरत महसूस हुई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के सबसे शक्तिशाली धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों में बदल चुका है। इसलिए जब भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र कुमार मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाता है, तो इसे महज एक प्रशासनिक नियुक्ति मानकर छोड़ देना शायद इस घटनाक्रम के वास्तविक राजनीतिक और संस्थागत अर्थ को छोटा करके देखना होगा। इस बड़ा अभिप्राय यह है कि क्या अयोध...

आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं?

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आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं? (After all, how long will political and administrative beliefs continue to wander in the mirage of Swadeshi?) "सच कहूँ तो “स्वदेशी से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से प्रतिस्पर्धी भारत और प्रतिस्पर्धी भारत से विश्व बाजार में भारतीय नेतृत्व की पैठ बढ़ती है।” इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंस्टा पोस्ट में देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता भी बतलाई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "आर्थिक विकास दर" में उल्लेखनीय वृद्धि पर देशवासियों को बधाई देते हुए एक बार फिर से स्वदेशी का राग अलापा है और विदेशों से गैर जरूरी सोने की खरीद न करने, विदेश यात्रा से परहेज करने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की है। चूंकि ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुके हैं, इसलिए सवाल उठता है कि आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में राजनीतिक आस्थाएं कबतक भटकेंगी? जब स्वदेशी ही सफलता का मूल मंत्र है तो बार-बार आह्वान करने से बेहतर है, वैधानिक प्रतिबंध लगा देना, या मात्रा...

जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए

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जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए (How to assess the political maneuvering of Congress and BJP regarding caste census) "कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज करने के लिए स्पष्ट, पूर्व-निर्धारित सूची/कोडिंग व्यवस्था नहीं होगी, तो अलग-अलग नाम, वर्तनी और उपजातियों के कारण आंकड़े अविश्वसनीय हो सकते हैं। इसलिए उसने इसे दुरुस्त करने की मांग उठाई, ताकि जातिगत जनगणना सही तरह से हो सके।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का भाजपा के खिलाफ मौजूदा हमला केवल “जाति गिनी जाए या नहीं” का सवाल नहीं है, बल्कि असली लड़ाई अब डेटा की विश्वसनीयता, सामाजिक न्याय की राजनीति और उससे बनने वाले नए राजनीतिक समीकरण की है। यही वजह है कि अगस्त 2026 में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा जाति-जनगणना पद्धति पर आपत्ति जताई है। इसलिए जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को ऐसे जानिए। कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज...

शारदा हॉस्पिटल,, ग्रेटर नोएडा के सहयोग से निःशुल्क HLA टाइपिंग शिविर में 120 रोगियों की जांच हुई

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शारदा हॉस्पिटल,, ग्रेटर नोएडा के सहयोग से निःशुल्क HLA टाइपिंग शिविर में 120 रोगियों की जांच हुई # निःशुल्क HLA टाइपिंग शिविर में 120 सैंपल लिए गए # जरूरतमंद बच्चों एवं मरीजों को मिली महत्वपूर्ण जांच की सुविधा राजनैतिकदुनिया टीम लखनऊ, 1 सितंबर 2026। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों एवं मरीजों को महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से "शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा एवं शारदा केयर हेल्थसिटी" के सहयोग से "Paras Neuro-Spine Multi-Speciality Hospital, लखनऊ" में निःशुल्क HLA Typing शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में थैलेसीमिया, सिकल सेल डिजीज एवं अन्य रक्त संबंधी तथा आनुवंशिक विकारों से पीड़ित बच्चों एवं मरीजों के लिए कुल 120 HLA सैंपल लिए गए।  शिविर को बाल आयुष फाउंडेशन द्वारा सहायता से, थैलेसीमिया सेवा समिति के संस्थापक अविनाश सिंह एवं दिव्यांग सहायता केंद्र (स्वयंसेवी संस्था) के विशेष सहयोग से आयोजित किया गया। शिविर का आयोजन Paras Neuro-Spine Multi-Speciality Hospital, सरस्वती पुरम, रायबरेली रोड, लखनऊ में किया गया। ...

भारत का बिश्केक संदेश: अब 'गुट' नहीं, 'भूमिका' चुनने की दरकार!

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भारत का बिश्केक संदेश: अब 'गुट' नहीं, 'भूमिका' चुनने की दरकार!   Bishkek Message of India: Now need to choose 'Bhoomika', not 'faction'! "भारत अब किसी धुरी से जुड़कर नहीं, बल्कि अपनी शर्तों पर करेगा विश्व राजनीति! वह न अमेरिकी खेमे में जुड़ेगा, और न ही चीन-रूस धुरी में बंधेगा! समझिए विस्तार से...." @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत अब न तो अमेरिका का पिछलग्गू बनना चाहता है, और न ही चीन-रूस धुरी का हिस्सा बनने में दिलचस्पी रखता है; बल्कि वह तो रूस से संबंध रखते हुए, चीन से प्रतिस्पर्धा करते हुए और ईरान-मध्य एशिया से जुड़ते हुए अपनी स्वतंत्र वैश्विक शक्ति की जगह बना रहा है, ताकि भारत भी एक वैसी महत्वपूर्ण शक्ति बन जाए, जिसे आंख दिखाने से पहले दुनिया सौ बार सोचे। देखा जाए तो यही बिश्केक SCO की सबसे महत्वपूर्ण भारतीय कूटनीतिक पटकथा है। दरअसल, किर्गिज़स्तान की राजधानी बिश्केक में 31 अगस्त-1 सितंबर को आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन को केवल एक बहुपक्षीय बैठक मानना भारत की मौजूदा विदेश नीति को समझने में बड़ी ...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ''अमेरिकी सम्बोधन' के अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक कूटनीतिक मायने

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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के ''अमेरिकी सम्बोधन' के अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक कूटनीतिक मायने (International socio-diplomatic implications of RSS chief Mohan Bhagwat's "US address")  "मोहन भागवत के अमेरिकी भाषण का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मायने यही है: RSS पहली बार इतने बड़े वैश्विक मंच पर अपने को केवल Hindu organisation के रूप में नहीं, बल्कि मानवता, विविधता और वैश्विक सामाजिक व्यवस्था के बारे में एक वैकल्पिक सभ्यतागत विचार देने वाली संस्था के रूप में प्रस्तुत कर रहा है। और यदि यह रणनीति आगे ब्रिटेन, कनाडा और अन्य देशों में भी जारी रहती है, तो RSS की शताब्दी के बाद का दशक भारत के भीतर वैचारिक प्रभाव से आगे बढ़कर वैश्विक वैचारिक प्रभाव की प्रतिस्पर्धा का दशक बन सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक आधुनिक भारत का सामाजिक चाणक्य समझे जाने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत एक असाधारण व्यक्तित्व के स्वामी हैं, क्योंकि उन्होंने भाजपा के 'गाबाज' नेतृत्व को बदलवाकर कांग्रेसियों/समाजवादियों को उनके ही रा...