हिंदुत्व पर फिदा हुए वोटर, तुष्टीकरण की निकल गई कचूमर!
हिंदुत्व पर फिदा हुए वोटर, तुष्टीकरण की निकल गई कचूमर! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने हिंदुत्व की राजनीति को केवल चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी बड़ा बल दिया है। विशेषकर उन राज्यों में, जहाँ पहले भाजपा या हिंदुत्व आधारित राजनीति को सीमित माना जाता था, वहाँ मिली सफलता ने यह संदेश दिया है कि हिंदुत्व अब केवल उत्तर भारत की राजनीतिक धारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श का स्थायी केंद्र बन चुका है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि हिंदुत्व केवल धार्मिक विचार नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान” का राजनीतिक मॉडल है। यही वजह है कि हिंदुत्व पर वोटर फिदा हुए, जिससे सियासी तुष्टीकरण की कचूमर निकल गई। भारतीय राजनीति में इसके असर दूरगामी होंगे। पहला, हिंदुत्व की “भौगोलिक सीमा” टूटने से भाजपा को बड़ा बल मिला। खासकर पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में भाजपा की सफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक अर्थ यही है कि हिंदुत्व अब केवल हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं रहा। बंगाल में “बंगाली अस्मिता बनाम हिंदुत्व” की ...