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हिंदुत्व पर फिदा हुए वोटर, तुष्टीकरण की निकल गई कचूमर!

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हिंदुत्व पर फिदा हुए वोटर, तुष्टीकरण की निकल गई कचूमर! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणामों ने हिंदुत्व की राजनीति को केवल चुनावी नहीं, बल्कि वैचारिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी बड़ा बल दिया है। विशेषकर उन राज्यों में, जहाँ पहले भाजपा या हिंदुत्व आधारित राजनीति को सीमित माना जाता था, वहाँ मिली सफलता ने यह संदेश दिया है कि हिंदुत्व अब केवल उत्तर भारत की राजनीतिक धारा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय विमर्श का स्थायी केंद्र बन चुका है। अब यह स्पष्ट हो चुका है कि हिंदुत्व केवल धार्मिक विचार नहीं, बल्कि “राष्ट्रीय सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान” का राजनीतिक मॉडल है। यही वजह है कि हिंदुत्व पर वोटर फिदा हुए, जिससे सियासी तुष्टीकरण की कचूमर  निकल गई। भारतीय राजनीति में इसके असर दूरगामी होंगे। पहला, हिंदुत्व की “भौगोलिक सीमा” टूटने से भाजपा को बड़ा बल मिला। खासकर पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में भाजपा की सफलता का सबसे बड़ा राजनीतिक अर्थ यही है कि हिंदुत्व अब केवल हिंदी पट्टी तक सीमित नहीं रहा। बंगाल में “बंगाली अस्मिता बनाम हिंदुत्व” की ...

पश्चिम बंगाल में भाजपा की चली सुनामी के सियासी मायने दूरगामी महत्व वाले!

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पश्चिम बंगाल में भाजपा की चली सुनामी के सियासी मायने दूरगामी महत्व वाले! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्र में विगत बारह वर्षों से सत्तारूढ़ 'भारतीय जनता पार्टी' ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में निर्णायक जीत दर्ज करके जनसंघ के संस्थापक और बंगाल मूल के दूरदर्शी हिंदूवादी राजनेता पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को अद्भुत श्रद्धांजलि दी है। सच कहूं तो आरएसएस के इस सुप्रसिद्ध सिपाही का कश्मीर में दिया हुआ सियासी बलिदान व्यर्थ नहीं गया। खासकर यह उपलब्धि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष पर भाजपा द्वारा उसे दिया हुआ बहुमूल्य वैचारिक तोहफा है।  पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत केवल सरकार बदलने की घटना नहीं होगी, बल्कि यह भारतीय राजनीति में “पूर्वी भारत के वैचारिक परिवर्तन” का प्रतीक मानी जाएगी। इससे विपक्ष का शक्ति-संतुलन बदलेगा, भाजपा का राष्ट्रीय आत्मविश्वास बढ़ेगा और बंगाल की दशकों पुरानी राजनीतिक संस्कृति में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। कम शब्दों में कहा जाए तो भय हारा और भरोसा जीता है। भद्रलोक के हृ...

धर्म शासित ईरान की सामरिक-आक्रामक तैयारी व बढ़ती सैन्य क्षमता गैर इस्लामिक देशों के लिए नसीहत है, कैसे?

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धर्म शासित ईरान की सामरिक-आक्रामक तैयारी व बढ़ती सैन्य क्षमता गैर इस्लामिक देशों के लिए नसीहत है, कैसे? @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत के निकटम पड़ोसी देश ईरान की सामरिक और आक्रामक तैयारी पूरी भारत-इजरायल समेत पूरी दुनिया के लिए नसीहत बन गई है, क्योंकि उसने सीमित संसाधनों और भारी पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद “असममित युद्ध” (Asymmetric Warfare) की ऐसी क्षमता विकसित कर ली, जिसने अमेरिका, इजराइल और पश्चिमी सैन्य गठबंधनों को भी नई रणनीति बनाने और उससे आगे की सोचने पर मजबूर कर दिया है। यदि समय रहते इसकी काट विकसित नहीं की गई, तो अरब देशों पर अमेरिका के बाद चीन की पकड़ मजबूत होगी, क्योंकि उसके साथ ईरान का सहयोगी रूस भी खड़ा है।  वहीं, इस्लामिक मुल्क के नाम पर मुस्लिम देशों का अंदरूनी झुकाव भी उसकी ओर है, जिससे रूसी मित्रता और चीनी छल की चक्की में भारत के पिसने के आसार प्रबल हैं। अनुभव बताता है कि ईरान अपने पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान पर ज्यादा भरोसा करता है और इस्लामिक नाटो का पक्षधर भी है, इसलिए ईरान के मामले में भारत की जरा सी रणनीत...

अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की सियासी कमर तोड़कर निरंतर आगे बढ़ रही है भाजपा-एनडीए

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अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की सियासी कमर तोड़कर निरंतर आगे बढ़ रही है भाजपा, मजबूत हो रहा एनडीए # पश्चिम बंगाल समेत पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव 2026 के एग्जिट पोल के राजनीतिक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय जनता पार्टी अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की सियासी कमर तोड़कर निरंतर आगे बढ़ रही है। इससे भाजपा नीत एनडीए का कुनबा भी लगतार मजबूत हो रहा है। देश के मतदाता भी जातीय और भाषाई प्रतिद्वंद्विता से ऊपर उठकर धुर मुस्लिम तुष्टिकरण की चुनावी राजनीति की बखिया उघेड़ रहे हैं, जबकि फ्रीबिज की घोषणाओं पर अब भी मतदाता फिदा हैं। 29 अप्रैल को देश के पांच राज्यों—पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी—के विधानसभा चुनावों के जो एग्जिट पोल आए, उससे भी इसी बात के संकेत मिल रहे हैं। इससे भाजपा और उसके एनडीए साथियों की बल्ले बल्ले है। वैसे तो अंतिम परिणाम 4 मई को ही आएंगे, लेकिन अब मीडिया की सजगता से अधिकांश एग्जिट पोल के औसत  सत्य के निकट होते हैं।लिहाजा यदि एग्जिट पोल सही होते हैं तो इससे जो बड़ा राजनीतिक निष्कर्ष निकलकर सामने आया...

आखिर ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते भारत जब 'ऊर्जा चक्रब्यूह' में घिरा ही गया तो फिर स्थायी समाधान ढूंढे!

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आखिर ईरान-अमेरिका युद्ध के चलते भारत जब 'ऊर्जा चक्रब्यूह' में घिरा ही गया तो फिर स्थायी समाधान ढूंढे! @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक ईरान संकट अब भारत के लिए केवल कूटनीतिक चुनौती नहीं, बल्कि बड़ा “तेल संकट” बन चुका है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है और उसका बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। सवाल है कि आखिर संकट कैसे पैदा हुआ? तो सीधा जवाब होगा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर खतरा की वजह है जहां ईरान और अमेरिका-इजरायल तनाव के कारण “स्ट्रेट ऑफ होर्मुज” असुरक्षित हो गया है।  बता दें कि दुनिया के लगभग 20% तेल टैंकर इसी रास्ते से गुजरते हैं। भारत के लिए आने वाला तेल और एलपीजी भी बड़े पैमाने पर इसी समुद्री मार्ग से आता है। यही कारण है कि: तेल आपूर्ति धीमी हुई, शिपिंग बीमा महंगा हुआ, और टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई। जबकि भारत, रूस-ईरान के सहयोग से यूरोपीय बाजारों में सुगम प्रवेश करने की योजना बना चुका है और चाबहार पोर्ट इसी उद्देश्य से विकसित कर चुका है। यही वजह है कि नया वैश्विक संकट समुपस्थित होते ही और चीन-र...

तारापुर के चहुँमुखी विकास में शकुनि-सम्राट चौधरी परिवार का उल्लेखनीय योगदान क्या है? ऐसे समझिए

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तारापुर के चहुँमुखी विकास में शकुनि-सम्राट चौधरी परिवार का उल्लेखनीय योगदान क्या है? ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक तारापुर के विकास में दिग्गज राजनेता शकुनी चौधरी के परिवार की अहम भूमिका रही है। इनके परिवार ने तारापुर को तीन विधायक, एक कैबिनेट मंत्री और एक मुख्यमंत्री दिया। शकुनि चौधरी के अलावा तारापुर की दिवंगत विधायिका श्रीमती पार्वती देवी हों, या मौजूदा विधायक और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, सबने क्षेत्रवासियों से आत्मीय लगाव बनाये रखा।  मुख्यतः रूप से इस परिवार का राजनीतिक प्रभाव, सहृदयी व्यवहार, स्थानीय प्रतिनिधित्व के जरिए दीन-दुखियों की सेवा और राजनीतिक दांव-पेंच के बीच खुद को महफूज रखते हुए जातीय-सामाजिक नेटवर्क को मजबूती देना, क्योंकि इसके जरिए ही उन सबकी लोकप्रियता रही है। सच कहूं तो तारापुर को राष्ट्रीय मानचित्र पर चर्चित बनाने की दिशा में उनका योगदान स्वर्णाक्षरों में लिखा जाएगा। निज अनुभव और उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार यह परिवार लगभग चार दशक से तारापुर की राजनीति का केंद्र-बिंदु रहा है और क्षेत्र में उनकी सर्वजातीय मजबूत पकड़ ने वि...

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के “नया चेहरा और नया नारा” से पश्चिम बंगाल में चल गई भाजपा की लहर

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 मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के “नया चेहरा और नया नारा” से पश्चिम बंगाल में चल गई भाजपा की लहर @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार में नए मुख्यमंत्री पद पर सम्राट चौधरी के चयन ने भाजपा को एक “नया चेहरा और नया नारा” दिया है, जिसे पार्टी पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनावों में केंद्र में लेकर चल रही है। इसी वजह से बिहार के नए प्रमुख चेहरे के इस चयन से बंगाल में भी भाजपा की “लहर की बात” तेज़ी से चलने लगी है। चूंकि बिहार में सम्राट चौधरी का महत्व निर्द्वन्द है, इसलिए पश्चिम बंगाल के लोगों में भाजपा के प्रति विश्वास और गहरा हुआ। उल्लेखनीय है कि बिहार में नीतीश कुमार के बाद भाजपा ने पहली बार अपने प्रत्यक्ष नेता को मुख्यमंत्री बनाकर संकेत दिया है कि पार्टी अब “एनडीए के नेतृत्व” को भी भाजपा के नाम से बेचेगी।  बता दें कि तारापुर की सियासत को लोककल्याण कारी दिशा देने वाले पूर्व स्वास्थ्य मंत्री शकुनि चौधरी के यशस्वी पुत्र सम्राट चौधरी कुशवाहा (कोईरी/ओबीसी) समाज से हैं; लेकिन सवर्णों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं। तारापुर से परवत्ता के लोग इसकी गवाही देते हैं। इससे भ...