बुद्धिजीवी पर्व "रक्षा बंधन" को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सियासी फलक पर मजबूत विस्तार दीजिए, इतिहास के निहितार्थ को समझिए
बुद्धिजीवी पर्व "रक्षा बंधन" को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सियासी फलक पर मजबूत विस्तार दीजिए, इतिहास के निहितार्थ को समझिए (Give a strong expansion to the intellectual festival "Raksha Bandhan" on the national and international political front, understand the implications of history) "रक्षा बंधन को यदि केवल “बहन राखी बाँधे और भाई रक्षा का वचन दे” तक सीमित रखा गया तो यह पारिवारिक पर्व बना रहेगा। लेकिन यदि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अर्थ को आधुनिक लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, महिला गरिमा, पर्यावरण, नागरिक अधिकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ा जाए तो यह एक असाधारण भारतीय soft-power narrative बन सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक यदि रक्षा बंधन को केवल भाई-बहन के भावनात्मक पर्व के बजाय एक सभ्यतागत, सामाजिक और कूटनीतिक प्रतीक के रूप में पढ़ें, तो इसका विस्तार राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति तक किया जा सकता है। इसी में राष्ट्रीय हित निहित है। इतिहास में राखी/रक्षासूत्र के अनेक अर्थ रहे हैं—व्यक्तिगत स्नेह, सामाजिक संरक्...