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आखिर OBC व SC-ST के गौरवशाली इतिहास को छिपाकर उन्हें मनगढ़ंत कहानियां सुनाकर EWS (सवर्णों) के खिलाफ भड़काने वाले लोग कौन हैं? ऐसे भारत द्रोहियों को पहचानिए!

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आखिर OBC व SC-ST के गौरवशाली इतिहास को छिपाकर उन्हें मनगढ़ंत कहानियां सुनाकर EWS (सवर्णों) के खिलाफ भड़काने वाले लोग कौन हैं? ऐसे भारत द्रोहियों को पहचानिए! (Who are the people who are hiding the glorious history of OBCs and SCs and inciting them against upper castes by telling them fabricated stories? Identify these traitors!) "सच कहूं तो इतिहास का अध्ययन नारे या भावनाओं से नहीं, बल्कि शिलालेखों, अभिलेखों, साहित्य, पुरातात्त्विक साक्ष्यों और विश्वसनीय इतिहासकारों के शोध के आधार पर होना चाहिए। यही दृष्टिकोण सबसे संतुलित और प्रमाण-आधारित समझ विकसित करता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत के हिन्दू समाज को वर्णों के बजाय जातियों-उपजातियों में बांटकर एक-दूसरे के खिलाफ सामाजिक विषबमन करने-करवाने की जो अरबी (मुगलिया) और ब्रितानी चालें चली गईं, वही यदि आजाद भारत का सियासी एजेंडा बना दिया गया तो ऐसा करने वाले राजनेता नहीं, बल्कि सामाजिक 'खलनायक' थे, हैं और रहेंगे! और इनके नापाक इरादों से निपटे बिना समकालीन भारत का कोई भविष्य नहीं है।  जरा ग...

......तो अब सोनिया गांधी ने 'विवादास्पद' किताब लिखकर छीन ली मोदी-भागवत की चैन!

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......तो अब सोनिया गांधी ने 'विवादास्पद' किताब लिखकर छीन ली मोदी-भागवत की चैन @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पूर्व कांग्रेस अध्यक्षा और निवर्तमान यूपीए संयोजिका श्रीमती सोनिया गांधी की प्रस्तावित किताब ‘Belonging: A Journey of Love in India’ को लेकर विवाद पैदा हो गया है। यह विवाद इसलिए बड़ा हो गया है क्योंकि मामला सिर्फ किताब के प्रकाशन का नहीं, बल्कि मोदी सरकार, RSS, चीन, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और राजनीतिक दबाव के आरोपों तक पहुंच गया है। लिहाजा, इसके विभिन्न पहलुओं की चर्चा लाजिमी है। बता दें कि यह किताब सोनिया गांधी का संस्मरण है, जिसमें उनके जीवन, राजीव गांधी से विवाह, भारत में उनके अनुभव और लगभग छह दशकों के सामाजिक-राजनीतिक बदलावों को उनके दृष्टिकोण से रखा गया है। खबर है कि अमेरिका में इसे Alfred A. Knopf से 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित किया जाना प्रस्तावित है। इससे साफ है कि भारत विरोधी एजेंडा उसके कथित मित्र देश अमेरिका में ही तैयार होने वाला है। मुंह में राम, बगल में छुरी ही अमेरिकी विदेश नीति की सफलता का सार है, जिसके पीछे डीप स्टेट की  रण...

अधिवक्ता रजनीश शर्मा और प्रोफेसर अनंदिता शर्मा को सम्पादक कमलेश पांडेय ने "कर्मकुम्भ" की प्रति भेंट की

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अधिवक्ता रजनीश शर्मा और प्रोफेसर अनिंदिता शर्मा को सम्पादक कमलेश पांडेय ने "कर्मकुम्भ" की प्रति भेंट की @ राजनैतिकदुनिया डिजिटल टीम नई दिल्लीगाजियाबाद। वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कमलेश पांडेय ने अपने द्वारा संपादित "कर्मकुम्भ" नामक कालजयी कृति  सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता रजनीश कुमार शर्मा और उनकी धर्मपत्नी श्री मती प्रो (डॉ) अनंदिता शर्मा, प्रबंधन शास्त्र विभाग, आईएमएस विवि, गाजियाबाद को सप्रेम भेंट की। जिसका अवलोकन करने के बाद उन्होंने विषय वस्तु चयन, प्रशासनिक विवेक, मानवीय उदारता समेत कई पहलुओं को देश व समाज के लिए अनुकरणीय बताया। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को रक्षाबंधन के पवित्र अवसर पर श्रीमान व श्रीमती द्वय अपनी बहन व प्रेस क्लब ऑफ इंडिया की मानद सदस्या श्री मती बैदेही पांडेय से राखी बंधवाने उनके वसुंधरा निवास स्थान पर पधारे थे। जहां पर यह अमूल्य कृति उन्हें भेंट की गई। आप विद्वत द्वय आचार्य विनोवा भावे विश्वविद्यालय, हजारीबाग के राजनीति विज्ञान विभाग के लब्धप्रतिष्ठित अध्यक्ष प्रो (डॉ) कुरेश प्रसाद शर्मा, वर...

बुद्धिजीवी पर्व "रक्षा बंधन" को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सियासी फलक पर मजबूत विस्तार दीजिए, इतिहास के निहितार्थ को समझिए

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बुद्धिजीवी पर्व "रक्षा बंधन" को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सियासी फलक पर मजबूत विस्तार दीजिए, इतिहास के निहितार्थ को समझिए (Give a strong expansion to the intellectual festival "Raksha Bandhan" on the national and international political front, understand the implications of history) "रक्षा बंधन को यदि केवल “बहन राखी बाँधे और भाई रक्षा का वचन दे” तक सीमित रखा गया तो यह पारिवारिक पर्व बना रहेगा। लेकिन यदि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अर्थ को आधुनिक लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, महिला गरिमा, पर्यावरण, नागरिक अधिकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ा जाए तो यह एक असाधारण भारतीय soft-power narrative बन सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक यदि रक्षा बंधन को केवल भाई-बहन के भावनात्मक पर्व के बजाय एक सभ्यतागत, सामाजिक और कूटनीतिक प्रतीक के रूप में पढ़ें, तो इसका विस्तार राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति तक किया जा सकता है। इसी में राष्ट्रीय हित निहित है। इतिहास में राखी/रक्षासूत्र के अनेक अर्थ रहे हैं—व्यक्तिगत स्नेह, सामाजिक संरक्...

फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए, समझिए कैसे बनेगा?

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फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए, समझिए कैसे बनेगा? Make the Farakka Agreement a boon for Bihar-Jharkhand, not a curse. Understand how this will be done? "असली सवाल “फरक्का रहे या हटे?” से आगे है—“फरक्का के कारण पैदा हुए जल, गाद और बाढ़ के लाभ-हानि का न्यायपूर्ण बंटवारा कौन सुनिश्चित करेगा?” और यही बिहार की सबसे मजबूत दलील बन सकती है। इसलिए फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक “फरक्का समझौता बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप है” यह कहना एक राजनीतिक व क्षेत्रीय तर्क के रूप में तो समझ में आता है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से एक जरूरी फर्क यह भी है कि वास्तविक समस्या केवल 1996 के भारत-बांग्लादेश जल-बंटवारा समझौते की नहीं, बल्कि फरक्का बैराज की जल-प्रवाह व्यवस्था, गाद (silt) जमाव और उससे पैदा हुए नदी-भूगोल की भी है, जिस पर गहन चिंतन मनन आवश्यक है ताकि बिहार को बाढ़ के मामले में 1972 के बाद से ही जिस अप्राकृतिक और अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, उससे मुक्ति मिले। ...

Sharda Care Organises Mega Health Drive in Morena

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Sharda Care Organises Mega Health Drive in Morena # Senior specialists provide consultations as nearly 1,000 people access health screening and medical services @ Rajnaitik Duniya Dijital Morena: Specialist healthcare moved closer to the community in Morena as Sharda Care Healthcity, in association with Rotary Club Chambal, organised a mega health drive that brought together senior doctors, diagnostic screening and consultations for nearly 1,000 people. Held at Government Excellence Higher Secondary School No. 1 on MS Road, the health drive provided residents an opportunity to undergo a range of health investigations and consult specialists from different medical disciplines at a single location. The programme included tests such as blood sugar, haemoglobin, blood pressure, ECG, Bone Mineral Density, Neuropathy Test and Pulmonary Function Test. A major feature of the initiative was the participation of senior specialists from Sharda Care....

जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए

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जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए (How to assess the political maneuvering of Congress and BJP regarding caste census) "कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज करने के लिए स्पष्ट, पूर्व-निर्धारित सूची/कोडिंग व्यवस्था नहीं होगी, तो अलग-अलग नाम, वर्तनी और उपजातियों के कारण आंकड़े अविश्वसनीय हो सकते हैं। इसलिए उसने इसे दुरुस्त करने की मांग उठाई, ताकि जातिगत जनगणना सही तरह से हो सके।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का भाजपा के खिलाफ मौजूदा हमला केवल “जाति गिनी जाए या नहीं” का सवाल नहीं है, बल्कि असली लड़ाई अब डेटा की विश्वसनीयता, सामाजिक न्याय की राजनीति और उससे बनने वाले नए राजनीतिक समीकरण की है। यही वजह है कि अगस्त 2026 में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा जाति-जनगणना पद्धति पर आपत्ति जताई है। इसलिए जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को ऐसे जानिए। कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज...