सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के राजनीतिक निहितार्थ को समझिए
सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के राजनीतिक निहितार्थ को समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार के कई गहरे राजनीतिक मायने हैं। यह केवल सत्ता संचालन का मामला नहीं, बल्कि 2029 लोकसभा और आगामी बिहार विधानसभा चुनावों की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का शक्ति प्रदर्शन बना दिया। पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा को मिली अभूतपूर्व विजय से बिहार का महत्व और भी बढ़ चुका है, क्योंकि पश्चिम, उत्तर, मध्य भारत के बाद पूर्वी भारत में भाजपा ने गजब का विस्तार किया है। इसे बरकरार रखने में बिहार की अहम भूमिका होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सम्राट मंत्रिमंडल विस्तार का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि बिहार में भाजपा अब “सहयोगी दल” नहीं बल्कि “मुख्य धुरी” बनना चाहती है। यही वजह है कि वह एनडीए के सामाजिक समीकरणों को फिर से पुनर्गठित कर रहा है। खासकर 'नीतीश युग' से 'सम्राट युग' की ओर नियंत्रि...