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Mittimate: A True Companion for a Child's Bright Future—From Screen to Creation

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Mittimate: A True Companion for a Child's Bright Future—From Screen to Creation https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ Dr. Sangharsh Sharma, Fine Arts Journalist, Delhi-NCR Children today are born into a digital world; consequently, mobile phones, tablets, laptops, and smart TVs have become a routine part of their lives. While online education, entertainment, and the internet have opened up new avenues for learning, they have also brought a significant challenge: the issue of rising screen time has become a pressing concern for everyone. Many experts believe that prolonged screen exposure can adversely affect children's concentration, creativity, social behavior, physical activity, and mental health. Therefore, moderation is essential. If a disciplined approach is adopted, nothing could be better for them; this allows children to keep pace with the times while ensuring their health rema...

Mittimate: A true companion for children's bright future—from screen to creation.

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       🌹राजनैतिकदुनिया प्रायोजित परिशिष्ट 🌹 मिट्टीमेट (Mittimate): स्क्रीन से सृजन तक बच्चों के समुज्ज्वल भविष्य का सच्चा साथी @ डॉ संघर्ष शर्मा, फाइन आर्ट्स जॉर्नलिस्ट, दिल्ली-एनसीआर https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 आजकल का बच्चा डिजिटल दुनिया में जन्म ले रहा है। इसलिए मोबाइल, टैबलेट, लैपटॉप और स्मार्ट टीवी उसकी दिनचर्या का सामान्य हिस्सा बन चुके हैं। ऑनलाइन शिक्षा, मनोरंजन और इंटरनेट ने सीखने के नए अवसर तो दिए हैं, लेकिन इसके साथ ही एक नई चुनौती भी सामने आई है; वह यह कि बढ़ता हुआ स्क्रीन टाइम हम सबकी जेहन में यक्ष प्रश्न बनकर समुपस्थित है।  अनेक विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक स्क्रीन के सामने रहने से बच्चों की एकाग्रता, रचनात्मकता, सामाजिक व्यवहार, शारीरिक सक्रियता और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए परहेज भी जरूरी है। यदि अनुप्रयोग या अनुपालन अनुशासन विकसित कर लिया जाए, तो इससे अच्छा उनके लिए कुछ भी नहीं हो सकता। इससे बच्चे जमाने के ...

After all, when will you understand the role of painting and fine arts in child development in the digital AI era?

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      🌹राजनैतिकदुनिया प्रायोजित परिशिष्ट 🌹 आख़िर डिजिटल एआई युग में बाल विकास में चित्रकला एवं फाइन आर्ट्स की भूमिका को कब समझिएगा? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ संघर्ष शर्मा, फाइन आर्ट्स जॉर्नलिस्ट, दिल्ली-एनसीआर मानव सभ्यता के विकास का इतिहास इस बात का साक्षी है कि कला ही मनुष्य की मूलभूत अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट माध्यम रही है। आदिमानव द्वारा गुफाओं की दीवारों पर बनाए गए चित्र केवल सजावट नहीं थे, बल्कि वे तत्कालीन अनुभव और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम थे। यही परंपरा समय के साथ विकसित होकर चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला और अन्य ललित कलाओं के रूप में मानव संस्कृति का अभिन्न अंग बन गई। आज भी समाज की सांस्कृतिक समृद्धि का मूल्यांकन उसकी कला और साहित्य से ही किया जाता है। चित्रकला केवल मनोरंजन या अवकाश का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास का आधार है। इसलिए स्वाभाविक सवाल है कि आख़िर डिजिटल एआई युग में बाल विकास में चित्रकला एवं फाइन आर्ट्स की भूमिका को कब समझ...

On International Justice Day, the Yaksha question of the irony of protracted justice

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अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस पर दीर्घसूत्री न्याय की विडंबना का यक्ष प्रश्न https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस (17 जुलाई) केवल न्याय की महत्ता का स्मरण कराने का अवसर नहीं है, बल्कि यह स्वयं से एक कठिन प्रश्न पूछने का भी दिन है—क्या वर्षों बाद मिला न्याय वास्तव में न्याय कहलाता है? वाकई आज दुनिया के अनेक देशों की तरह भारत में भी करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। अनेक वादियों की पूरी उम्र अदालतों के चक्कर लगाते-लगाते बीत जाती है। कई मामलों में निर्णय तब आता है जब पीड़ित या आरोपी इस दुनिया में ही नहीं रहते। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है और इस खास दिवस पर प्रासंगिक भी। आखिर हमें यह समझना ही होगा कि 21वीं सदी के भारत की न्यायिक व्यवस्था की सफलता इस बात से नहीं आंकी जाएगी कि उसने कितने ऐतिहासिक फैसले दिए, बल्कि इस बात से आंकी जाएगी कि उसने आम नागरिक को कितनी जल्दी, कितनी निष्पक्षता से और कितनी कम लागत में...

The pilgrimage to Lord Pashupatinath is a bridge of faith, culture and India-Nepal friendship: Dr. Dinesh Chandra

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भगवान पशुपतिनाथ की यात्रा है आस्था, संस्कृति और भारत-नेपाल मैत्री का सेतु: डॉ दिनेश चंद्र @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 उत्तरप्रदेश के निवर्तमान आईएएस अधिकारी और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद व जनसंवेदनाओं के मशहूर अभिव्यक्ति कर्ता लेखक डॉ दिनेश चंद्र ने गत दिनों नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भगवान पशुपतिनाथ तीर्थस्थल की यात्रा की। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने मुख्य महंत जी का आशीर्वाद लिया और भारत राष्ट्र की ओर से बाबा काशी विश्वनाथ और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामजी, अयोध्या का अंग वस्त्रम उन्हें भेंट करते हुए सम्मानित किया। वहीं मुख्य महंत जी ने भी तीर्थस्थल पटका प्रदान करके डॉ दिनेश चंद्र को सम्मानित किया और अपना आशीर्वाद दिया।  उल्लेखनीय है कि इस आशय की वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जब "राजनैतिकदुनिया" ने उनसे मोबाइल पर संपर्क किया तो अपनी परम पावन तीर्थयात्रा का अनुभव देश व समाज से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत...

Bankipur By-Election 2026: Sudden change in BJP candidate raises burning questions?

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बांकीपुर उपचुनाव 2026: भाजपा उम्मीदवार के यकायक बदलाव से उभरने लगे सुलगते सवाल? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 भोजपुरी में एक कहावत है- लइका मालिक, बूढ़ दीवान, मामला बिगड़े साँझ बिहान। यानी कि जिस घर का लड़का मालिक होता है और बूढ़ा व्यक्ति दीवान मतलब सलाहकार की भूमिका में आ जाता है तो वहां अच्छे और कार्यकुशल सुझावों पर भी विलंब से निर्णय होने के चलते मामला साँझ यानी शाम से सुबह तक कभी भी उलझ यानी बिगड़ जाता है। यदि पुरानी कुछ बातों को भूला भी दिया जाए तो हाल ही में बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) का नामांकन वापस लेकर नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की काफी किरकिरी हुई है।  चूंकि उनका चयन प्रधानमंत्री मोदी के स्तर पर यकायक हुआ है, इसलिए उँगली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ भी उठी। बात इतनी सी नहीं है, बल्कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उनके चहेते मुख्यमंत...