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भाजपा के चाणक्य अमित शाह की सियासी सफलता के अहम सूत्र और संभावित चुनौतियों को समझिए

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भाजपा के चाणक्य अमित शाह की सियासी सफलता के अहम सूत्र और संभावित चुनौतियों को समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के शीर्ष रणनीतिकार अमित शाह की सियासी सफलता के महत्वपूर्ण सूत्र क्या हैं, इसे समझने में अब हर किसी की दिलचस्पी बढ़ी है, क्योंकि राजनीतिक महकमें में उनको अक्सर “भाजपा का चाणक्य” कहा जाता है। खासकर उनकी अभूतपूर्व चुनावी रणनीति और कुशल संगठनात्मक क्षमता की तोड़ आज किसी भी विपक्षी दल के पास नहीं है। पहले दिल्ली, फिर बंगाल को उन्होंने जिस चुनौती पूर्ण तरीके से जीता है और बिहार में सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली भाजपाई सरकार बनवाई है, उससे अब भाजपा में उनके धुर विरोधी राजनेता भी पस्त नजर आ रहे हैं। वहीं मोदी-शाह का सियासी जलवा बुलंदियों के शीर्ष पर पहुंचने को कटिबद्ध है।  स्वाभाविक सवाल है कि अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक चक्रब्यूह में लगातार घिरते जा रहे भारत ने और उसका विकल्प बनती जा रही भाजपा ने आंतरिक सियासत में जो मजबूत पकड़ बनाई है, उससे विदेशी-स्वदेशी षड्यंत्रकारी बेचैन दिखाई पड़ रहे हैं। राष्ट्रवाद की आंधी में और देशभक्ति...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “विदेशी मुद्रा बचाने” के आह्वान के राजनीतिक-आर्थिक निहितार्थ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा “विदेशी मुद्रा बचाने” के आह्वान के राजनीतिक-आर्थिक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसी भी प्रकार की आपदा को अवसर में बदलना जानते हैं। पहले कृत्रिम वैश्विक महामारी कोरोना (कोविड-19), फिर रूस-यूक्रेन युद्ध और अब अमेरिका/इजरायल-ईरान युद्ध के दौरान भी उन्होंने कुछ ऐसा ही किया है। फिलवक्त मौजूदा वैश्विक संकट से भारत को निजात दिलाने और इससे प्रभावित हो रहे आम भारतीयों के हितों की रक्षा करने के लिए ही उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने, आयातित वस्तुओं का उपभोग मितव्ययिता पूर्वक करने और इनके मौजूद देशी विकल्प को आजमाते हुए स्थायी हल निकालने और उनपर निर्भर होने की दिशा में जनसहयोग का आह्वान करके सबको चौंका दिया है। समझा जाता है कि अमेरिका, चीन, यूरोप और अरब के कुछ देशों के द्वारा लगातार भारत विरोधी षड्यंत्र किए जा रहे हैं। कोई अपना इस्लामिक एजेंडा भारत पर थोपना चाहता है तो कोई भारत-रूस के भरोसेमंद सम्बन्धों में पलीता लगाना चाहता है और कोई भारत को पाकिस्तान, बंग्लादेश और चीन के त्रिपक्षीय कुचक्र में उलझ...

शीर्षासन क्या है? शीर्षासन करने की सही विधि समझिए

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शीर्षासन क्या है? शीर्षासन करने की सही विधि समझिए @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, विशेष सचिव, पीडब्ल्यूडी, उत्तरप्रदेश सरकार शीर्षासन (Headstand) योग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उन्नत आसन माना जाता है। इसे “आसनों का राजा” भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें पूरा शरीर सिर के सहारे उल्टा संतुलित रहता है। यह आसन शारीरिक, मानसिक, तंत्रिका तंत्र तथा आध्यात्मिक स्तर पर गहरा प्रभाव डालता है। शीर्षासन केवल एक शारीरिक करतब नहीं, बल्कि संतुलन, साहस, एकाग्रता और आत्मनियंत्रण का अभ्यास है। सही तकनीक, धैर्य और प्रशिक्षित मार्गदर्शन के साथ किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी योगाभ्यास बन सकता है। # योगाभ्यास विद्या शीर्षासन के विभिन्न प्रकार के बारे में जानिए योगाभ्यास विद्या शीर्षासन के मुख्य प्रकार निम्नलिखित हैं:- पहला, समर्थित शीर्षासन (Supported Headstand):  हाथों और कोहनियों के सहारे किया जाता है। यह सबसे सामान्य और सुरक्षित रूप है। दूसरा, त्रिपाद शीर्षासन (Tripod Headstand): दोनों हाथ और सिर मिलाकर त्रिकोण बनाते हैं। तीसरा, पद्म शीर्षासन: शीर्षासन में रहते हुए पैरों को पद्मासन में बांधा जाता...

जानिए, महाराणा प्रताप वीरता की कैसे अखिल भारतीय पहचान बने, जनमानस पर अमिट छाप छोड़ी

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प्रतापी सम्राट महाराणा प्रताप भारतीय वीरता की राष्ट्रवादी पहचान बने, उनके अवदानों को राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में परखिए @ डॉ दिनेश चंद्र सिंह, आईएएस, विशेष सचिव, पीडब्ल्यूडी, उत्तर प्रदेश सरकार प्रतापी सम्राट महाराणा प्रताप भारत के इतिहास के सबसे वीर, स्वाभिमानी और संघर्षशील राजाओं में गिने जाते हैं। वे मेवाड़ के सिसोदिया राजवंश के शासक थे और मुगल सम्राट अकबर के सामने कभी झुके नहीं। उनका जीवन स्वतंत्रता, राष्ट्रगौरव और आत्मसम्मान का प्रतीक माना जाता है। आज 9 मई भारत के इतिहास का एक गौरवशाली दिवस है। यह दिन वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जन्म जयंती के रूप में पूरे देश में श्रद्धा, सम्मान और गर्व के साथ मनाया जाता है।  भारत वीरो की भूमि है। भारत भूमि ने सनातन धर्मसंस्कृति से लेकर अब तक वीर सूरमाओं को जन्म देकर भारत भूमि की रक्षा के लिए ऐसे इतिहास पुरुषों को पैदा किया है, जिनको स्मरण किया जाना प्रासंगिक ही नहीं, अपितु राष्ट्र गौरव की रक्षा के लिए प्रासंगिक भी है। भारत महावीरों की धरती है और इस पवित्र धरती ने समय-समय पर ऐसे महापुरुषों को जन्म दिया है जिन्होंने अपने...

सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के राजनीतिक निहितार्थ को समझिए

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सम्राट चौधरी सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के राजनीतिक निहितार्थ को समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार के कई गहरे राजनीतिक मायने हैं। यह केवल सत्ता संचालन का मामला नहीं, बल्कि 2029 लोकसभा और आगामी बिहार विधानसभा चुनावों की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का शक्ति प्रदर्शन बना दिया।  पश्चिम बंगाल और असम में भाजपा को मिली अभूतपूर्व विजय से बिहार का महत्व और भी बढ़ चुका है, क्योंकि पश्चिम, उत्तर, मध्य भारत के बाद पूर्वी भारत में भाजपा ने गजब का विस्तार किया है। इसे बरकरार रखने में बिहार की अहम भूमिका होगी। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सम्राट मंत्रिमंडल विस्तार का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि बिहार में भाजपा अब “सहयोगी दल” नहीं बल्कि “मुख्य धुरी” बनना चाहती है। यही वजह है कि वह एनडीए के सामाजिक समीकरणों को फिर से पुनर्गठित कर रहा है। खासकर 'नीतीश युग' से 'सम्राट युग' क...

बिहार में सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के राजनीतिक मायने

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बिहार में सम्राट सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार के राजनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मंत्रिमंडल विस्तार के कई गहरे राजनीतिक मायने हैं। यह केवल सत्ता संचालन का मामला नहीं, बल्कि 2029 लोकसभा और आगामी बिहार विधानसभा चुनावों की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी ने इसे राष्ट्रीय स्तर का शक्ति प्रदर्शन बना दिया।  राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, सम्राट मंत्रिमंडल विस्तार का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह है कि बिहार में भाजपा अब “सहयोगी दल” नहीं बल्कि “मुख्य धुरी” बनना चाहती है। एनडीए सामाजिक समीकरणों को फिर से पुनर्गठित कर रहा है। नीतीश युग से सम्राट युग की ओर नियंत्रित संक्रमण शुरू हो चुका है। 2029 की राजनीति की नींव अभी से रखी जा रही है। वहीं, ग्रेटर बंगलादेश के सपनों को नेस्तनाबूद करने की अंदरूनी तैयारी जारी है। पहला, भाजपा का “नया बिहार नेतृत्व” स्थापित करने की कोशिश सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाकर भाजपा ने बिहार में “प...

इंजीनियर कुमार शैलेंद्र की राजनीतिक सफलता को ऐसे समझिए

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इंजीनियर कुमार शैलेंद्र की राजनीतिक सफलता को ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक इंजीनियर कुमार शैलेंद्र की राजनीतिक सफलता को बिहार की बदलती सामाजिक और संगठनात्मक राजनीति के संदर्भ में समझना होगा। इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि से आने वाले कुमार शैलेंद्र ने तकनीकी शिक्षा, संगठनात्मक अनुशासन और क्षेत्रीय जनाधार को मिलाकर अपनी अलग पहचान बनाई। अब बिहार सरकार में मंत्री पद तक पहुंचना उनकी लंबी राजनीतिक यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। उनकी सफलता के पीछे कई प्रमुख कारण दिखाई देते हैं— # तकनीकी और शिक्षित छवि इंजीनियर होने के कारण उनकी पहचान एक पढ़े-लिखे, प्रशासनिक समझ रखने वाले नेता के रूप में बनी। भाजपा और एनडीए अब ऐसे नेताओं को आगे बढ़ा रहे हैं जिनकी छवि केवल जातीय राजनीति तक सीमित न होकर “विकासवादी” भी हो। # संगठन में लगातार सक्रियता कुमार शैलेंद्र ने लंबे समय तक जमीनी स्तर पर संगठनात्मक राजनीति की। बूथ स्तर से लेकर क्षेत्रीय समीकरणों तक उनकी सक्रियता ने उन्हें पार्टी नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा बनाया। # ओबीसी-सामाजिक समीकरण बिहार की राजनीति...