क्या 'समाजवादी परिवार' की रिक्तता को भर पाएंगे समाजवादी पृष्ठभूमि के राजनीतिक दल?
क्या 'समाजवादी परिवार' की रिक्तता को भर पाएंगे समाजवादी पृष्ठभूमि के राजनीतिक दल? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पहले कांग्रेस ने और अब भाजपा ने, जिस तरह से समाजवादी दलों को उनके साथ मिलकर बारी-बारी पूर्वक निपटा दिया है, यह भारत की कूटनीतिक राजनीतिक परंपरा है। खासकर यह राजनेताओं व उनके कार्यकर्ताओं के लिए सियासी शोध-अनुसंधान का विषय है। ऐसा इसलिए कि पहले देश-दुनिया में समाजवादी और वामपंथी विचारधाराओं से प्रेरित दलों के बीच खुली टकराहट हुआ करती थी। जिसके दृष्टिगत भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने मध्यममार्गी राजनीति का रास्ता अख्तियार किया और देश को आजादी दिलाते हुए केंद्र-राज्य में सत्तारूढ़ होकर अपने राजनीतिक उद्देश्य में कामयाब हुई। हालांकि, कांग्रेस की दूरदर्शिता पूर्ण अल्पसंख्यक तुष्टिकरण की नीतियों व अन्य कारणों से कांग्रेस सेवा दल में फूट पड़ी और 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ' (आरएसएस) का जन्म हुआ। जो हिंदुत्व व राष्ट्रीय विरासत पर गर्व करने वाला राष्ट्रवादी समाजसेवी संगठन है। इसी के राजनीतिक मुखौटे के रूप में पहले जनसंघ लोकप्रिय हुआ और अब भारत...