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International implications of the Iranian proposal to transform BRICS into an organization like NATO

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ब्रिक्स को नाटो जैसा संगठन बनाने के ईरानी प्रस्ताव के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक इस्लामी साम्राज्यवाद के स्वप्नद्रष्टा देश ईरान की अंतरराष्ट्रीय ताकत अब किसी से छिपी हुई नहीं है, क्योंकि अपनी ठोस देशज रणनीति व रूस-चीन के बल पर उसने अरब व खाड़ी देशों में अमेरिका-इजरायल की बादशाहत को कड़ी चुनौती दे डाली है। वहीं, अब ईरान द्वारा ब्रिक्स को नाटो जैसी सामूहिक सुरक्षा व्यवस्था (Collective Security Alliance) में बदलने या उसके समान सुरक्षा ढांचा विकसित करने का जो विचार प्रकट किया गया है, वह केवल एक संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति-संतुलन को प्रभावित करने वाला प्रस्ताव है।  हालांकि अभी तक ब्रिक्स ने इसे औपचारिक रूप से स्वीकार नहीं किया है, लेकिन ईरान लगातार चाहता रहा है कि ब्रिक्स केवल आर्थिक मंच न रहकर सुरक्षा और सामरिक मुद्दों पर भी अधिक सक्रिय भूमिका निभाए।  सवाल है कि ईरान आखिर ऐसा क्यों चाहता है तो जवाब निम्नलिखित है...

The political and diplomatic implications of the impact on President Trump, who is facing setbacks on the domestic front.

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घरेलू मोर्चे पर झटके खा रहे राष्ट्रपति ट्रंप पर पड़े असर के राजनीतिक व कूटनीतिक मायने  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रम्प (Donald Trump) को हाल के दिनों में घरेलू मोर्चे पर दो बड़े झटके लगे हैं, जिनका असर उनकी राजनीतिक ताकत, चुनावी रणनीति और राष्ट्रपति पद की सीमाओं पर पड़ सकता है।  लिहाजा विश्व राजनीति और कूटनीति पर भी इन घटनाओं का असर लाजिमी है। पहले हम बात करते हैं, उन दो बड़े झटके का- जहां पहला झटका: मतदान संबंधी आदेश पर अदालत की रोक का है, वहीं दूसरा झटका राष्ट्रपति की शक्तियों पर बढ़ता न्यायिक अंकुश है। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 उल्लेखनीय है कि एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन के उस आदेश को असंवैधानिक बताते हुए रोक दिया, जिसमें मतदाता पंजीकरण के लिए नागरिकता का दस्तावेजी प्रमाण अनिवार्य करने की कोशिश की गई थी। अदालत ने कहा कि चुनावी नियम तय करना राष्ट्रपति का नहीं बल्कि राज्यों और कांग्रेस का अधिकार है। वहीं दूसरी ओर ट्रंप की कई नीतियां—जैसे व्य...

Samrat Model in Bihar (बिहार में सम्राट मॉडल)

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बिहार में सम्राट मॉडल (अभी तक अपने मोदी मॉडल, योगी मॉडल और नीतीश मॉडल आदि की बात सुनी थी, लेकिन मोदी मॉडल के गुजरात की तरह ही अब सम्राट मॉडल से बिहार को आशातीत लाभ मिल रहा है। तो प्रस्तुत है बिहार के सम्राट मॉडल पर एक कविता....... https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 बिहार में सम्राट मॉडल @ ,कमलेश पांडेय/कवि बदल रही है सोच यहाँ, बदल रहा परिवेश, जनसेवा का नया अध्याय, लिख रहा नया संदेश। गाँव-गाँव तक पहुँच रही अब, विकास की उजली किरण, जनता के विश्वास से खिलती, आशाओं की नई धरण। न टालमटोल, न कोई बहाना, काम बने पहचान, जनहित को सर्वोपरि रखकर, मिले सभी को सम्मान। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, सिंचाई, हर क्षेत्र में नई उड़ान, संकल्पों को कर्म बनाकर, बढ़ता बिहार महान। युवा शक्ति को अवसर देकर, सपनों को आकार मिला, मेहनत, साहस और समर्पण से, नव बिहार का द्वार खुला। सम्राट मॉडल यही सिखाता, सेवा ही सबसे बड़ा धर्म, जनता के सुख-दुख में सहभागी, यही न...

Collaboration Camp: The Identity of a New Bihar (सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान)

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                सहयोग शिविर : नए बिहार की पहचान कवि : कमलेश पांडेय https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 न टालमटोल, न कोई बहाना, अब बदला है शासन का तराना। जनता के द्वार स्वयं प्रशासन, यही है सेवा, यही सुशासन। फाइलों की धूल झाड़ दी गई, लालफीताशाही हार गई। बिचौलियों के टूटे जाल, जनता को मिला अधिकार विशाल। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सहयोग शिविर बना विश्वास, जन-जन को मिला नया प्रकाश। अधिकारी बैठे गाँव-गाँव, सुनते हर पीड़ा, हर घाव। अब नहीं महीनों का इंतजार, तुरंत समाधान, तुरंत विचार। न्याय पहुँचता घर के द्वार, यही है विकास का असली सार। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 कड़क नेतृत्व, दृढ़ संकल्प, जनहित जिसका सर्वोत्तम विकल्प। सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में, बिहार बढ़ रहा नव सृजन में। सत्ता नहीं केवल सम्मान, जनसेवा ही है उनकी पहचान। साफ नीयत, ईमानदार विचार, बना र...

I am a word merchant! (मैं शब्दों का दुकानदार हूँ!)

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मैं शब्दों का दुकानदार हूँ! https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 ✍️  कवि: कमलेश पांडेय मैं शब्दों का दुकानदार हूँ, विचारों का सौदागर समझो, मन की मिट्टी से गढ़ता हूँ, मुझको भावों का आगर समझो। मेरी पूँजी अक्षर-अक्षर है, सपनों का व्यापार नहीं, सच की लौ से दीप जलाता, झूठों का बाजार नहीं। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 कभी कलम तलवार बन जाती, कभी मरहम का काम करे, कभी सवालों की आंधी बन, सत्ता से सीधा संवाद करे। मैं बेचूँ नहीं जमीर किसी का, न ही सत्य गिरवी रखता हूँ, जनमन की पीड़ा को सुनकर, शब्दों में उसको लिखता हूँ। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 मेरी दुकान सजी रहती है, अनुभव, संघर्ष, विश्वासों से, कुछ गीतों की खुशबू लेकर, कुछ आँसू के इतिहासों से। जो चाहे ले जाए मुझसे, आशा, चेतन, नई उमंग, मैं शब्दों का दुकानदार हूँ, विचारों का सौदागर संग। कलम मेरी पहचान बने, जनहित मेरा धर...

The social and political implications of the questions constantly raised regarding the RSS's registration and funding. (आरएसएस के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के बारे हमेशा सवाल उठने के सामाजिक व राजनीतिक मायने)

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आरएसएस के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग के बारे हमेशा सवाल उठने के सामाजिक व राजनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 जो लोग अमूमन देश भक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ  (Rashtriya Swayamsevak Sangh) के रजिस्ट्रेशन, फंडिंग और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर समय-समय पर सवाल उठाते हैं, वही लोग आरएसएस (RSS) जैसी अन्य वैचारिक संस्थाएं जैसे, Jamaat-e-Islami Hind जैसी धार्मिक-सामाजिक संस्था, Vishwa Hindu Parishad जैसे सांस्कृतिक संगठन, विभिन्न चर्च, गुरुद्वारा और मंदिर ट्रस्ट, वक्फ संस्थाएं के अलावा लाखों एनजीओ, सोसाइटियां और धर्मार्थ ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के बारे में  रणनीतिक चुप्पी साध लेते हैं, आखिर ऐसा क्यों? क्या इसके पीछे कोई सामाजिक, राजनीतिक वजह है या साम्प्रदायिक कारण है?  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 जानकार बताते हैं कि ऐसे सिर्फ आरएसएस के बारे में  उठने वाले सियासी मौसमी सवालों के के...

How can AI be leveraged in the publishing business while ensuring the continued relevance of editors in the industry? (प्रकाशन व्यवसाय में एआई (AI) की मदद कैसे ली जाए कि इंडस्ट्री में संपादक की उपयोगिता बनी रहे?)

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प्रकाशन व्यवसाय में एआई (AI) की मदद कैसे ली जाए कि इंडस्ट्री में संपादक की उपयोगिता बनी रहे? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रिंट, डिजिटल या वीडियो प्रकाशन/प्रसारण व्यवसाय में एआई (Artificial Intelligence) का बढ़ता प्रभाव कई संपादकों को यह सोचने पर मजबूर कर रहा है कि कहीं उनकी भूमिका समाप्त तो नहीं हो जाएगी। लेकिन वास्तविकता यह है कि एआई संपादकों का विकल्प नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली सहायक उपकरण बन सकता है। जो संपादक एआई को अपनाएंगे, उनकी उपयोगिता और प्रभाव पहले से अधिक बढ़ सकता है। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 सवाल है कि प्रकाशन व्यवसाय में एआई का उपयोग कैसे करें? तो यह जान लीजिए कि निम्नलिखित प्रकार से आप इसका उपयोग कर सकते हैं:- पहला, शोध और तथ्य-संग्रह में एआई का उपयोग कीजिए, क्योंकि एआई कुछ ही मिनटों में किसी विषय पर उपलब्ध सामग्री, रिपोर्ट, दस्तावेज और पृष्ठभूमि जानकारी जुटा सकता है। अब रही संपा...