संदेश

Where will India—as it sheds its boundaries of propriety—ultimately end up? The thought is frightening!

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आखिर मर्यादाएं खोता हुआ भारत जाएगा किधर, सोचकर लगता है डर!  @ गौरव पांडेय, स्वतंत्र पत्रकार व राष्ट्रवादी चिंतक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 भारत केवल भौगोलिक सीमाओं में बसा एक देश नहीं, बल्कि हजारों वर्षों से चली आ रही जीवंत संस्कृति, शालीन परंपरा, मानवीय संस्कार और जीवन मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति है। यहां परिवार को पहली पाठशाला माना गया और माता-पिता, गुरु, बुजुर्ग तथा समाज को व्यक्ति के चरित्र निर्माण का आधार समझा गया।  देश-काल-पात्र की कसौटी पर खरे संतों, ऋषियों-मुनियों और समाज सुधारकों ने अपने आचरण और विचारों के माध्यम से भारतीय समाज को मर्यादा, यम-नियम, संयम, सेवा, तप, त्याग और उत्तम आचरण का जो मार्ग दिखाया, वही लोककल्याणकारी समझा गया। वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया: का स्रोत भी यही उदात्त विचार है जो हमारी अमिट दुनियावी छाप बन चुका है। ऐसे में जब सार्वजनिक मंचों पर या सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं के व्यवहार और सोच के ऐसे उदाहरण ...

Why, after all, did India call upon the international community to intervene and ensure accountability regarding the state-sponsored repression taking place in Pakistan-occupied Jammu and Kashmir?

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आखिर भारत ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर में हो रहे सरकारी दमन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही तय करने का आह्वान क्यों किया? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत द्वारा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK/PoJK) में कथित सरकारी दमन पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप और जवाबदेही की अपील केवल एक मानवीय बयान नहीं, बल्कि एक बहु-स्तरीय कूटनीतिक रणनीति भी मानी जा रही है। हाल के दिनों में भारत ने पाकिस्तान से क्षेत्र में नागरिकों के साथ हुए कथित दमन पर जवाबदेही तय करने की जो मांग की है, उसके कूटनीतिक मायने तलाशे जाने लगे हैं।  दरअसल किसी भी तानाशाह देश में जब चुनाव भरोसे का संकट बन जाए, तो जनता का उद्वेलित होना स्वाभाविक है। पाक अधिकृत कश्मीर/जम्मू-कश्मीर में आजकल यही हो रहा है। वहां पर इन दिनों एक ही नारा गूंज रहा है, वह यह कि  "Justice for PoJK, End Our Exile!" अर्थात "POJK के लिए न्याय, हमारा निर्वासन समाप्त करो!" यही वजह है कि ...

The political significance of the NDA MPs' 'Mangal Milan' session

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एनडीए सांसदों के सत्रीय 'मंगल मिलन' के सियासी मायने https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक केंद्र में पिछले 12 वर्षों से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार इन दिनों पुनः उस एकजुट विपक्ष के निशाने पर है, जिसे वह अबतक चुनावी सियासी पाट पर पछाड़ते आई है। लेकिन जिस तरह से बहुरूपिया विपक्ष कभी मुसलमानों के छद्म वेश में, कभी किसानों के रूप में और कभी छात्रों के छद्म वेश में जिस तरह से मोदी सरकार को घेरने पर तुला हुआ है, उसके पीछे विदेशी हाथ से इंकार नहीं किया जा सकता है। फिर भी सरकार सबसे जूझ रही है! हाल ही में छात्र आंदोलन की कथित सफलता से घबराई सरकार ने जिस तरह से अपने ओबीसी रणनीतिकार शिक्षा मंत्री की राजनीतिक बलि चढ़ाई है, और इससे उत्साहित कॉकरोच जनता पार्टी के नेता अभिजीत दीपके ने जिस घमंड का प्रदर्शन किया, उससे विपक्ष उत्साहित है। यही वजह है कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को सीधे निश...

Ghaziabad's Dr. Vijay Pandey's robotic surgery expertise resonates in the US

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अमेरिका में गूंजी गाजियाबाद के डॉ विजय पांडेय की रोबोटिक सर्जरी विशेषज्ञता की अनुगूंज # डॉ. विजय एस. पांडे ने रोबोटिक सर्जरी पर प्रस्तुत किया शोध पत्र # फ्लोरिडा में सोसायटी ऑफ रोबोटिक सर्जन्स के प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में वक्ता के रूप में हुए शामिल, दुनिया के विशेषज्ञों के सामने साझा किया अनुभव # रोबोटिक तकनीक से जटिल हर्निया के दीवार के पुनर्निर्माण पर उपचार और पेट की दीवार के पुनर्निर्माण पर दिया वैज्ञानिक व्याख्यान, नई शल्य चिकित्सा पद्धति की जानकारी दी  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 # अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय चिकित्सा विशेषज्ञता का बढ़ा मान, रोबोटिक और हर्निया सर्जरी के क्षेत्र में डॉ. पांडे के योगदान को मिली नई पहचान @ कमलेश पांडेय/राजनैतिकदुनिया गाजियाबाद। चिकित्सा के क्षेत्र में गाजियाबाद के लिए गौरव की एक और उपलब्धि सामने आई है। शहर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. विजय एस. पांडे ने अमेरिका के फ्लोरिडा में आयोजित प्रतिष्ठित सोसायटी ऑफ रोबोटिक सर्जन्स (एसआरएस) के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में बतौर वक...

Could foreign powers, uneasy with India's rapid progress, be hatching a social media conspiracy?

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क्या भारत की तेज़ प्रगति से असहज विदेशी शक्तियाँ रच सकती हैं सोशल मीडिया षड्यंत्र? समझिए https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की तेज़ प्रगति से असहज शक्तियाँ सोशल मीडिया, फर्जी अकाउंट, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कुछ संस्थागत माध्यमों का उपयोग करके देश में भ्रम, विभाजन और अस्थिरता फैलाने का प्रयास कर सकती हैं। यह बात हमने नहीं बल्कि उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कही है। उन्होंने दो टूक लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि भारत के शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में पहुँचने और वैश्विक प्रभाव बढ़ने से कुछ देशों या समूहों को असुविधा हो सकती है। यही वजह है कि अब लोगों के जेहन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भारत की तेज़ प्रगति से असहज विदेशी शक्तियाँ सोशल मीडिया षड्यंत्र रच सकती हैं? राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह संदेश मुख्यतः डिजिटल सूचना-सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित हैं, क्योंकि उन्होंने बेझिझक कहा है कि भारत की बढ़ती आर्...

What should be the 'protest protocol' so that there is no disturbance?

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आख़िर क्या हो 'प्रदर्शन प्रोटोकॉल' ताकि न होने पाए उपद्रव? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी लोकतंत्र में प्रदर्शन का अधिकार और जन-जीवन की सुरक्षा—दोनों समान रूप से महत्वपूर्ण हैं। इसलिए ऐसा प्रोटोकॉल होना चाहिए जो शांतिपूर्ण विरोध की रक्षा करे, लेकिन हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ को रोके। गत दिनों कॉकरोच जनता पार्टी/सीजेपी के विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली या अन्य राज्यों में जो कुछ हुआ, उसे कानून का शासन कतई नहीं माना जा सकता। इससे यह प्रश्न एक बार पुनः प्रासंगिक हो चुका है।  चूंकि इससे पहले भी अनेक प्रदर्शन उग्र हुए, जिससे सरकारी व निजी संपत्ति की क्षति हुई, पर कार्रवाई वही लीपापोती वाली या फिर दलगत प्रतिशोध जैसी, जबकि दोनों अनुचित है। ऐसी कोई भी कार्रवाई निष्पक्ष होनी चाहिए। जानकारों की राय में एक संतुलित "प्रदर्शन प्रोटोकॉल" इस प्रकार हो सकता है:-  पहला, पूर्व अनुमति और उत्तरदायित्व: आयोजकों को समय, मार्ग, अनुमानित भीड़ और जिम्मे...

Is political, social, economic, cultural, administrative and judicial 'hooliganism' the Yaksha question of contemporary democracy?

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क्या राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक, सांस्कृतिक और न्यायिक 'गुंडागर्दी' समकालीन लोकतंत्र का यक्ष प्रश्न है? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  समय के साथ-साथ जैसे-तैसे मैं बड़ा हुआ तो घर-परिवार, गांव-समाज, देश-दुनिया के हर क्षण बदलते चेहरों से वाकिफ होता रहा। कहीं भुक्तभोगी, कहीं प्रत्यक्षदर्शी की तरह और प्रायः समाचार/मीडिया माध्यमों में, जो कुछ देखा-सुना-समझा, उसने हमारे छात्र जीवन और पेशेवर जीवन को झकझोर कर रख दिया।  शायद इसी से हमारे लोक चिंतन की शुरुआत हुई, लेखन को तरह तरह की धार पर धार मिली और समकालीन विश्व का सबसे बड़ा सवाल मन में कौंधा कि आखिर में "राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक, प्रशासनिक और न्यायिक 'गुंडागर्दी' समकालीन लोकतंत्र का यक्ष प्रश्न क्यों बना हुआ है?"  आखिर हर बार हमारा-आपका संविधान खामोश क्यों हो जाता है? संसद, शीर्ष सचिवालय, सुप्रीम कोर्ट, और प्रसार भारती सबकुछ रफा-दफा करने के चक्कर में क्यों पड़ जाता है? आखिर...