The crucial questions surrounding slogans like 'We want freedom'!
'हमें चाहिए आजादी' जैसे नारों से जुड़े यक्ष प्रश्न! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हमारे देश में जब “हमें चाहिए आजादी” जैसे नारे लगते हैं, तो राजनीतिक, प्रशासनिक और न्यायिक खामोशी के बीच कई सुलगते सवाल भी पैदा होते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि हमारे प्रधानमंत्री लाल किले के प्राचीर से प्रशासन और न्यायपालिका को यह संदेश दें कि राजनीति और राष्ट्रनीति में तफरका स्थापित करने में कार्यपालक प्रशासन के स्थायित्व की बहुत बड़ी भूमिका और जिम्मेदारी दोनों है। वह इसे बखूबी निभाए। इसलिए राष्ट्रनीति को राजनीति से ऊपर रखने की व्यवस्था विदेश नीति की भांति ही हो, अन्यथा आने वाली पीढ़ियां कार्यपालक प्रशासन के स्थायित्व पर भी सवाल उठाने से नहीं हिचकेंगी। यही नहीं, इनके जातीय, धार्मिक और भाषाई मिजाज पर भी गौर करने की जरूरत है, अन्यथा "हमें चाहिए आजादी” जैसे नारे लगते रहेंगे, राष्ट्रद्रोही तत्व फलते-फूलते रहेंगे और एक दिन भारत माता को भी असमय दम तोड़ना पड़ेगा, क्योंकि पाकिस्तान परस्त इस्लामिक देशों के ख्वाब भी यही हैं, जिन्हें अमेरिका-चीन दोनों के शह हासिल हैं। अलबत्ता, ...