नेताओं की अराजकतावादी मानसिकता क्या है? इससे हुई राष्ट्रीय क्षति से बचाव कैसे होगा?
नेताओं की अराजकतावादी मानसिकता क्या है? इससे क्या क्या राष्ट्रीय क्षति हुई है? बचाव कैसे होगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक नेताओं की अराजकतावादी मानसिकता का अर्थ ऐसी राजनीतिक सोच और व्यवहार से है, जिसमें संविधान, संस्थाओं, कानून, सामाजिक संतुलन और राष्ट्रीय हितों की अपेक्षा व्यक्तिगत सत्ता, भीड़-उत्तेजना, तुष्टीकरण, हिंसात्मक राजनीति, असंयमित बयानबाजी या अराजक दबाव-राजनीति को प्राथमिकता दी जाती है। हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को गद्दार कहने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने एलओपी के वक्तव्य को अराजकतावादी राजनीतिक मानसिकता करार दिया है, जिससे यह सवाल पुनः मुखर हो चुका है। राजनीतिक विश्लेषक बताते हैं कि यह मानसिकता कई रूपों में दिखाई देती है— पहला, संवैधानिक संस्थाओं पर लगातार अविश्वास फैलाना। दूसरा, कानून से ऊपर स्वयं को प्रस्तुत करना। तीसरा, जाति, धर्म, क्षेत्र या भाषा के आधार पर समाज को भड़काना। चौथा, भीड़तंत्र को लोकतंत्र से ऊ...