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यूपी में 350 से अधिक सीटें जीतकर योगी सरकार लगाएगी हैट्रिक: निषाद

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यूपी में 350 से अधिक सीटें जीतकर योगी सरकार लगाएगी हैट्रिक: निषाद  @ राजनैतिक दुनिया  गाजियाबाद। उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब फिज़ा बननी शुरू हो चुकी है। भाजपा नीत एनडीए गठबंधन के नेताओं ने गाजियाबाद/गौतमबुद्ध नगर में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं, क्योंकि लखनऊ की हवा बनाने में मेरठ मंडल के एनसीआर क्षेत्र की बड़ी भूमिका होती है।  प्राप्त जानकारी के मुताबिक, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर प्रदेश में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैंl बुद्धवार को वे गाजियाबाद में थे। इसी क्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता व पार्षद पति मनोज गोयल ने उनसे भेंट की और पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। इस दौरान राजनीतिक वार्ता भी हुई | खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति के बारे में खुलकर चर्चा हुई।  श्री गोयल के मुताबिक, उन्होंने बताया कि आने वाले चुनाव में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में  350 से अधिक सीट लेकर योगी सरकार हैट्रिक बनाएगी। इस नजरिए से मिशन मोड पर काम चल रहा...

क्या मोदी-शी मुलाकात से भारत-चीन संबंधों में कोई नया अध्याय खुलेगा?

क्या मोदी-शी मुलाकात से सीमाई तनाव से लेकर रणनीतिक संवाद तक भारत-चीन संबंधों में कोई नया अध्याय खुलेगा? # समझिए आखिर जब नई दिल्ली में मोदी से जिनपिंग मिलेंगे तो दुनिया के अन्य महत्वपूर्ण देशों में क्या कूटनीतिक संदेश जाएगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  अगर 12–13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की द्विपक्षीय मुलाकात होती है, तो इसका कूटनीतिक संदेश केवल भारत-चीन संबंधों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एशिया और वैश्विक शक्ति-संतुलन के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत होगा। ऐसा इसलिए कि चीनी राष्ट्रपति शी की यह भारत यात्रा सात वर्षों बाद हो रही है। लिहाजा उम्मीद बंधी है कि जब मोदी-शी मुलाकात होगी तो सीमा पर तनाव से लेकर रणनीतिक संवाद तक, खुलकर बात होगी और फिर दोनों नेताओं के मूड से पता चलेगा कि क्या भारत-चीन संबंधों में कोई नया अध्याय खुलेगा या यथास्थिति बनी रहेगी? देखा जाए तो इस द्विपक्षीय मुलाकात के 8 बड़े कूटनीतिक संदेश होंगे, जो इस प्रकार हैं:-  पहला, सीमा विवाद के बावजूद संवा...

# आखिर युवाओं के बीच क्यों नहीं चमक पा रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन?

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# आखिर युवाओं के बीच क्यों नहीं चमक पा रहे हैं भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन?  "इतिहास में कुछ अध्यक्ष संगठन के पदाधिकारी बनकर रह जाते हैं और कुछ अपने दौर के राजनीतिक चेहरे बन जाते हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को दूसरा रास्ता चुनना होगा। इसके लिए उन्हें मोदी-शाह से टकराने की जरूरत नहीं है; यह उनका स्वभाव भी नहीं है। इसलिए उन्हें मोदी-शाह की छाया के भीतर अपनी राजनीतिक धूप पैदा करनी होगी। यही उनकी वास्तविक नेतृत्व-परीक्षा है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भाजपा के राजनीतिक गलियारों में एक सवाल सबको बेचैन किए हुए है कि आखिर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन युवाओं के बीच क्यों नहीं चमक पा रहे हैं? क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, सपा मुखिया अखिलेश यादव, राजद सुप्रीमो तेजस्वी यादव, आप नेता अरविंद केजरीवाल, जनसुराज नेता प्रशांत किशोर आदि जैसे राजनीतिक क्षत्रपों को सियासी रूप से निपटाने के लिए नितिन नवीन के रूप में जो राजनीतिक तुरूप का पत्ता चला है, वह अब मनहूसियत की ओ...

जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए?

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जानिए, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को पार्टी से 'युवाओं' को जोड़ने के लिए क्या क्या करना चाहिए? "यदि नितिन नवीन भाजपा को युवाओं—विशेषकर Gen Z, first-time voters, college students, युवा professionals और startup/entrepreneur वर्ग—से जोड़ना चाहते हैं, तो सबसे जरूरी बदलाव उन्हें यह करना होगा कि युवाओं को केवल “वोट बैंक” नहीं, बल्कि पार्टी के विचार, संगठन और नीति-निर्माण में भागीदार बनाया जाए।" @  कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन युवा नेता हैं, लेकिन युवाओं खासकर जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की उनकी मुहिम जब रंग नहीं ला पाई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी यह कार्य अपने ही जिम्मे ले लिया और श्रीराम कॉलेज से लेकर मेट्रो तक "हनुमान कूद" करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे खुद नितिन नवीन के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठने लगे हैं। पार्टी सूत्रों का कहना है कि मोदी-शाह और भाजपा-आरएसएस में तालमेल बिठाने के चक्कर में वह खुद अप्रासंगिक होते नजर आ रहे हैं। देखा जाए तो लगभग आठ महीने से वो पार्टी के राष...

गाजियाबाद नगर निगम के वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी-वैशाली एक में गड्ढे व खड्डे की भराई शुरू

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गाजियाबाद नगर निगम के वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी-वैशाली एक में  गड्ढे व खड्डे  की भराई शुरू # समाजसेवी  पप्पू चौपाल द्वारा हनुमान द्वार पर भगवान श्री कृष्ण की छठी के अवसर पर भंडारा का आयोजन किया गया @ राजनैतिकदुनिया  गाजियाबाद। दिल्ली की सीमा से सटे गाजियाबाद नगर निगम अंतर्गत वार्ड नंबर 72 कौशांबी में 9 सितंबर को निगम द्वारा बरसात के दौरान हुए बने हुए गड्ढे व खड्डे को भरने का अभियान चलाया गया,  ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। इस अवसर पर निगम पार्षद कुसुम मनोज गोयल द्वारा मौके पर पहुंच कर निगम के अधिकारियों को जगह जगह गड्ढे व खड्डे दिखाए गए और उन्हें अविलंब भरवाने में सहयोग किया गया। पार्षद श्रीमती कुसुम मनोज गोयल ने बताया कि उन्हें भरवाना बहुत जरूरी है। चूंकि बरसात के कारण अभी प्लांट बंद पड़ा है और नगर निगम द्वारा अभी पेच वर्क  टेंडर होना बाकी है। चूंकि लोगों की गुहार पर कल ही इसकी शिकायत निगम के अधिकारियों से पार्षद द्वारा की गई थी, इसलिए आज यह कार्य कराया जा रहा है। इससे लोगों ने जनप्रतिनिधि व निगम अधिकारियों की सराहना की।  इस अवसर पर ...

अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति?

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अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति? "समझिए, चीन, पश्चिम और UN के बीच भारत की कूटनीतिक परीक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के वास्ते  भारत अपनी जमीन की रक्षा के साथ-साथ दुनिया के नक्शे में अपनी जमीन की सही कहानी भी सुरक्षित रखे। इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सीमा पर चीन से मुकाबला जरूरी है; लेकिन भारत की सीमाओं के नैरेटिव पर दुनिया से संवाद उससे भी ज्यादा जरूरी है।” @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  क्या संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे में भारतीय सीमाओं का विवादित चित्रण महज ‘कार्टोग्राफिक एनोमली’ है, या इसके पीछे बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का कोई गहरा संदेश छिपा है? दरअसल भारत को इस सवाल का जवाब भावनाओं में नहीं, बल्कि अत्यंत सतर्क कूटनीति से देना होगा। उल्लेखनीय है कि गत 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने “Correct the Map” प्रस्ताव को 164 मतों के समर्थन से पारित किया। मसलन, इस प्रस्ताव का घोषित उद्देश्य दुनिया के मानचित्रों में महाद्वीपों के आकार को अधिक न्यायसंगत ढंग से प्रदर्शित करना है। भारत ने...

नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की कूटनीतिक परीक्षा और मोदी की वैश्विक रणनीति

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नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की कूटनीतिक परीक्षा और मोदी की वैश्विक रणनीति # क्या नई दिल्ली दुनिया को नया शक्ति-संतुलन दिखाने जा रही है? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  नई दिल्ली में 12–13 सितंबर को होने वाला 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं है। यह उस समय हो रहा है जब दुनिया एक साथ कई संकटों से गुजर रही है—युद्ध, व्यापारिक टकराव, ऊर्जा असुरक्षा, प्रतिबंधों की राजनीति, आपूर्ति-श्रृंखलाओं का दबाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई भू-राजनीति। ऐसे समय में BRICS की अध्यक्षता भारत के हाथ में होना अपने आप में महत्वपूर्ण है।  भारत ने इस वर्ष के लिए जिस दृष्टिकोण को सामने रखा है—Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability—उसमें केवल आर्थिक सहयोग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलती विश्व-व्यवस्था के बीच भारत की कूटनीतिक सोच भी दिखाई देती है। सवाल इसलिए बड़ा है कि दिल्ली सम्मेलन के बाद दुनिया भारत को किस रूप में देखेगी—एक बड़े विकासशील देश के रूप में, BRICS के संयोजक के रूप में या एक ऐसे स्वतंत्...