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अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति?

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अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति? "समझिए, चीन, पश्चिम और UN के बीच भारत की कूटनीतिक परीक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के वास्ते  भारत अपनी जमीन की रक्षा के साथ-साथ दुनिया के नक्शे में अपनी जमीन की सही कहानी भी सुरक्षित रखे। इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सीमा पर चीन से मुकाबला जरूरी है; लेकिन भारत की सीमाओं के नैरेटिव पर दुनिया से संवाद उससे भी ज्यादा जरूरी है।” @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  क्या संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे में भारतीय सीमाओं का विवादित चित्रण महज ‘कार्टोग्राफिक एनोमली’ है, या इसके पीछे बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का कोई गहरा संदेश छिपा है? दरअसल भारत को इस सवाल का जवाब भावनाओं में नहीं, बल्कि अत्यंत सतर्क कूटनीति से देना होगा। उल्लेखनीय है कि गत 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने “Correct the Map” प्रस्ताव को 164 मतों के समर्थन से पारित किया। मसलन, इस प्रस्ताव का घोषित उद्देश्य दुनिया के मानचित्रों में महाद्वीपों के आकार को अधिक न्यायसंगत ढंग से प्रदर्शित करना है। भारत ने...

नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की कूटनीतिक परीक्षा और मोदी की वैश्विक रणनीति

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नई दिल्ली ब्रिक्स सम्मेलन: भारत की कूटनीतिक परीक्षा और मोदी की वैश्विक रणनीति # क्या नई दिल्ली दुनिया को नया शक्ति-संतुलन दिखाने जा रही है? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  नई दिल्ली में 12–13 सितंबर को होने वाला 18वां ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन भारत के लिए केवल एक अंतरराष्ट्रीय आयोजन नहीं है। यह उस समय हो रहा है जब दुनिया एक साथ कई संकटों से गुजर रही है—युद्ध, व्यापारिक टकराव, ऊर्जा असुरक्षा, प्रतिबंधों की राजनीति, आपूर्ति-श्रृंखलाओं का दबाव और कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नई भू-राजनीति। ऐसे समय में BRICS की अध्यक्षता भारत के हाथ में होना अपने आप में महत्वपूर्ण है।  भारत ने इस वर्ष के लिए जिस दृष्टिकोण को सामने रखा है—Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability—उसमें केवल आर्थिक सहयोग का कार्यक्रम नहीं, बल्कि बदलती विश्व-व्यवस्था के बीच भारत की कूटनीतिक सोच भी दिखाई देती है। सवाल इसलिए बड़ा है कि दिल्ली सम्मेलन के बाद दुनिया भारत को किस रूप में देखेगी—एक बड़े विकासशील देश के रूप में, BRICS के संयोजक के रूप में या एक ऐसे स्वतंत्र वैश्विक शक...

वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी की क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल द्वारा वैशाली सेक्टर एक स्थित नेस्कॉट लाइन में हाई मार्क्स लाइट लगवाया गया

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वार्ड नंबर 72 कौशाम्बी की क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल द्वारा वैशाली सेक्टर एक स्थित नेस्कॉट लाइन में हाई मार्क्स लाइट लगवाया गया @ राजनैतिकदुनिया गाजियाबाद। नगर निगम अंतर्गत वार्ड 72 कौशाम्बी की क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल द्वारा वैशाली सेक्टर एक स्थित नेस्कॉट लाइन में हाई मार्क्स लाइट लगवाया गया, ताकि बरसात में लोगों को इलाका साफ नज़र आए। इसका उद्घाटन समाजसेवी के एल शर्मा एवं जुगेश द्वारा नारियल फोड़ कर किया गया। इस अवसर पर पार्षद श्रीमती गोयल द्वारा वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान फूल माला पहनाकर  किया गया। अपने संबोधन में निगम पार्षद श्रीमती गोयल ने  बताया कि  इस जगह पर हमेशा अंधेरा बना रहता था। इसलिए क्षेत्रवासियों की मांग पर यह कार्य कराया गया। उन्होंने कहा कि गाजियाबाद में ट्रिपल इंजन की सरकार में उनके क्षेत्र में विकास कार्य निरंतर चल रहे हैं। अभी कुछ दिनों पहले नाले के साथ लगी ग्रीन बेल्ट पर घास और पेड़ पौधे लगाए गए हैं। उन्होंने इस कार्य को करने के लिए महापौर सुनीता दयाल एवं नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक का आभार प्रकट किया। बताया जाता है कि ...

क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय?

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क्या अयोध्या में शुरू हो रहा है ‘नए संस्थागत युग’ का अध्याय? (Is the chapter of a 'new institutional era' beginning in Ayodhya?) "अब तक राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र का संचालन मुख्यतः ट्रस्ट के पदाधिकारियों और धार्मिक-सामाजिक नेतृत्व के माध्यम से होता रहा। अब पहली बार पूर्णकालिक CEO का पद बनाया गया है। इसका अर्थ है कि मंदिर प्रशासन को केवल धार्मिक न्यास के पारंपरिक ढांचे में नहीं, बल्कि एक बड़े, जटिल और बहुस्तरीय संस्थान के रूप में देखने की जरूरत महसूस हुई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के सबसे शक्तिशाली धार्मिक-सांस्कृतिक प्रतीकों में बदल चुका है। इसलिए जब भारतीय वायुसेना के पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र कुमार मिश्र को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला पूर्णकालिक CEO बनाया जाता है, तो इसे महज एक प्रशासनिक नियुक्ति मानकर छोड़ देना शायद इस घटनाक्रम के वास्तविक राजनीतिक और संस्थागत अर्थ को छोटा करके देखना होगा। इस बड़ा अभिप्राय यह है कि क्या अयोध...

आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं?

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आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में कबतक भटकती रहेंगी राजनीतिक-प्रशासनिक आस्थाएं? (After all, how long will political and administrative beliefs continue to wander in the mirage of Swadeshi?) "सच कहूँ तो “स्वदेशी से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से प्रतिस्पर्धी भारत और प्रतिस्पर्धी भारत से विश्व बाजार में भारतीय नेतृत्व की पैठ बढ़ती है।” इसलिए प्रधानमंत्री मोदी ने अपने इंस्टा पोस्ट में देश को आत्मनिर्भर बनाने की आवश्यकता भी बतलाई है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "आर्थिक विकास दर" में उल्लेखनीय वृद्धि पर देशवासियों को बधाई देते हुए एक बार फिर से स्वदेशी का राग अलापा है और विदेशों से गैर जरूरी सोने की खरीद न करने, विदेश यात्रा से परहेज करने और विदेश में शादी करने से बचने की अपील की है। चूंकि ऐसा वो पहले भी कई बार कर चुके हैं, इसलिए सवाल उठता है कि आखिर स्वदेशी की मृगमरीचिका में राजनीतिक आस्थाएं कबतक भटकेंगी? जब स्वदेशी ही सफलता का मूल मंत्र है तो बार-बार आह्वान करने से बेहतर है, वैधानिक प्रतिबंध लगा देना, या मात्रा...

शारदा हॉस्पिटल समूह: आगरा चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला में किडनी ट्रांसप्लांट की बारीकियां समझाई

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शारदा हॉस्पिटल समूह: आगरा चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला में किडनी ट्रांसप्लांट की बारीकियां समझाई # शारदा केयर हेल्थ सिटी एवं शारदा हॉस्पिटल द्वारा आगरा में आयोजित चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला में किडनी ट्रांसप्लांट की बारीकियां समझाई @ कमलेश पांडेय/राजनैतिकदुनिया आगरा: शारदा केयर हेल्थ सिटी एवं शारदा हॉस्पिटल, ग्रेटर नोएडा ने 'दिल्ली डायलिसिस टेक्नोलॉजिस्ट एसोसिएशन' के साथ मिलकर 5 सितंबर 2026 को आगरा में एक दिवसीय चिकित्सा शिक्षा कार्यशाला (Medical Education Workshop) का भव्य आयोजन किया। इस कार्यशाला में नई दिल्ली, गाजियाबाद, मथुरा, अलीगढ़ और आगरा सहित विभिन्न क्षेत्रों से आए वरिष्ठ डायलिसिस तकनीशियन (Senior Dialysis Technicians) शामिल हुए और  किडनी ट्रांसप्लांट से जुड़ीं बारीकियां समझाई। किडनी ट्रांसप्लांट और आधुनिक तकनीकों पर चर्चा कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में शारदा हॉस्पिटल के वरिष्ठ किडनी रोग एवं किडनी ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. कुणाल गांधी तथा वरिष्ठ यूरोलॉजिस्ट एवं ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. अहमद कमाल मौजूद रहे। इस मौके पर मुख्य वक्ता डॉ...

जानिए ISRO की सफलता का वैज्ञानिक मॉडल और कीजिए NASA, SpaceX और चीन से तुलना

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जानिए ISRO की सफलता का वैज्ञानिक मॉडल और कीजिए NASA, SpaceX और चीन से तुलना "समझिए, आखिर कैसे संभव हुई इसरो की सफलता-दर-सफलता वाली उपलब्धि? क्या इसके पीछे टीम नरेंद्र मोदी यानी पीएमओ से जुड़े लोगों के राष्ट्रीय समर्पण का भी बड़ा योगदान है? जी हां, सच्चाई यही इशारे करती है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जन्माष्टमी की शुभ घड़ी यानी 4 सितंबर 2026 की रात जब श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 ने उड़ान भरी और EOS-05 को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया, तब यह केवल एक और रॉकेट लॉन्च नहीं था, बल्कि यह भारत की चार दशक से अधिक पुरानी अंतरिक्ष-यात्रा में तकनीकी परिपक्वता, संस्थागत अनुशासन और असफलताओं से सीखने की वैज्ञानिक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण प्रमाण था। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (ISRO) के आधिकारिक रिकॉर्ड में GSLV-F17/EOS-05 को 4 सितंबर 2026 के सफल मिशन के रूप में दर्ज किया गया है। हालांकि, इस सफलता का मूल्यांकन केवल राष्ट्रवादी उत्साह से करना वैज्ञानिक दृष्टि से अधूरा होगा। असली सवाल यह है— आखिर ISRO बार-बार कठिन अंतरिक्ष अभियानों...