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विकसित भारत 2047 का रोडमैप है युवा बजट 2026-27, विकास को रफ्तार

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विकसित भारत 2047 का रोडमैप है युवा बजट 2026-27, विकास को रफ्तार @ राजकुमार सिंह भाटी, निगम पार्षद, गाजियाबाद भारत सरकार का 2026-27 का केंद्रीय बजट अनवरत विकास, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन और राजकोषीय अनुशासन पर केंद्रित है। यह युवा बजट है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को पूरा करता है। वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने रविवार 1 फरवरी को इसे संसद की पटल पर प्रस्तुत करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया है। यह बजट ऐतिहासिक, समावेशी और विकासोन्मुखी बजट है। इससे 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाऐं पूरी होंगी।  इससे सुधारों को मजबूती मिलेगी और विकसित भारत के सपने पूरे होंगे।  देखा जाए तो यह विकास का रोडमैप है। इसमें नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब दिखाई देता है। इसमें अपार अवसर निहित है। इसमें युवाओं के लिए नया आयाम है तो हर घर लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित करने वाला है। इसमें विकास पर फोकस किया गया है जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ेगी, रोजगार सृजन ज्यादा होगा और समावेशी विकास संभव होगा। कुलमिलाकर यह बजट देश को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएगा।  सच कहूं तो यह बजट विकसि...

विकसित भारत के लिए समर्पित है आम लोगों का युवा बजट 2026-27

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विकसित भारत के लिए समर्पित है आम लोगों का युवा बजट 2026-27 @ मनोज गोयल, भाजपा नेता व पूर्व पार्षद, नगर निगम गाजियाबाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और गाजियाबाद नगर निगम के पूर्व पार्षद मनोज गोयल ने रविवार को कहा कि 2026-27 का आम बजट प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार की नीतियों और सुशासन की निरंतरता को साफ तौर पर रेखांकित करता है। यह केंद्रीय बजट को भारत को 2047 तक विकसित बनाने की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम प्रतीत होता है।  भाजपा नेता गोयल ने बजट 2026-27 की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश की अर्थव्यवस्था को निरंतर मजबूत बनाए रखने के लिए जो निर्णायक कदम उठाए हैं, उसे देश के विकास को रफ्तार मिलेगी। चूंकि जनता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भरोसा करती है, इसलिए उसकी समग्र बेहतरी के लिए लाया हुआ यह युवा बजट है, जो जनकल्याणकारी है।   पूर्व पार्षद मनोज गोयल कहा कि यह बजट हमारे लघु एवं मध्यम उद्यम क्षेत्र की प्रगति करता है, देश में उत्पादन क्षमता में वृद्धि करता...

भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक के सियासी व कूटनीतिक मायने

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भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक के सियासी व कूटनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत की सियासत में भले ही हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे के विपरीत ध्रुव समझे जाते हों, लेकिन वैश्विक दुनियादारी में वे परस्पर पूरक बनते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि अरब जगत पर कसते अमेरिकी-चीनी शिकंजे के दृष्टिगत पश्चिम और मध्य एशियाई देशों की भलाई इसी में निहित है कि वे सभी 22 देश भारत-रूस और यूरोपीय देशों को साध कर चलें, ताकि कोई एक महाशक्ति या उनका दूसरा प्रतिद्वंद्वी देश मनमाफिक इनका दोहन-शोषण नहीं कर पाए। यही वजह है कि कूटनीतिक विसात पर भारत का महत्व सभी देशों के लिए बढ़ता जा रहा है। अमेरिका, चीन, रूस के समानांतर भारत एक मजबूत और अविवादित कूटनीतिक हस्ती के रूप में उभरा है, जिसकी सोच में वैश्विक प्रेम और पारस्परिक सद्भाव की भावना अंतर्निहित है।  यही वजह है कि भारत की राजधानी नई दिल्ली में गत 31 जनवरी 2026 को लगभग एक दशक के अंतराल के बाद भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक आयोजित हुई, जो भारत-अरब संबंधों को मजबूत करने का महत्वपूर्ण कदम साबित होगी। खासकर...

स्वस्थ समाज ही उन्नति का आधार है: पार्षद राजकुमार सिंह भाटी

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स्वस्थ समाज ही उन्नति का आधार है: पार्षद राजकुमार सिंह भाटी # समाज के स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक योगदान देना हमारी प्राथमिकता है: अजीत सिंह यादव # वार्ड नम्बर 89 (वैशाली 3) के रामप्रस्था ग्रीन्स में लगा स्वास्थ्य शिविर, 300 से अधिक निवासियों ने कराई जाँच राजनैतिक दुनिया संवाददाता वैशाली, साहिबाबाद। सामुदायिक कल्याण और बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में कदम बढ़ाते हुए वैशाली के वार्ड नम्बर 89 (वैशाली 3) स्थित रामप्रस्था ग्रीन्स में स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। रामप्रस्था एनएक्सटी प्राइवेट लिमिटेड द्वारा आयोजित इस शिविर में मैक्स हॉस्पिटल और रोटरी ब्लड बैंक का विशेष सहयोग रहा। इस ​शिविर में स्थानीय निवासियों का भारी उत्साह देखा गया, जहाँ 300 से अधिक लोगों ने अपनी सेहत की जाँच कराई और परामर्श लिया। इस स्वास्थ्य शिविर में डॉक्टरों की अनुभवी टीम ने ब्लड प्रेशर, शुगर और अन्य बीमारियों पर निःशुल्क परामर्श दिया। साथ ही, रोटरी ब्लड बैंक के सहयोग से रक्तदान के महत्व को साझा किया गया। यह शिविर रामप्रस्था एनएक्सटी के चेयरमैन अजीत सिंह यादव, एस. यादव के कुशल नेतृ...

ड्रीम बजट 2026-27: विकसित भारत के निमित्त शहरी विकास आवंटन में दृष्टिगोचर हुआ व्यापक बदलाव

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ड्रीम बजट 2026-27: विकसित भारत के निमित्त शहरी विकास आवंटन में दृष्टिगोचर हुआ व्यापक बदलाव @ अंकित जैन, सीईओ व कोफाउंडर, कोसमोस पम्पस भारत के बजट 2026-27 में शहरी विकास के लिए प्रस्तावित ₹20,000 करोड़ का आवंटन वास्तव में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह सीधे तौर पर ₹20,000 करोड़ का एकमुश्त खर्च शहरी विकास के लिए नहीं है। दरअसल, यह राशि मुख्य रूप से औद्योगिक क्षेत्रों में कार्बन कैप्चर प्रोजेक्ट्स से जुड़ी हो सकती है, जबकि शहरी विकास के लिए City Economic Regions (CER) पर 5 वर्षों में ₹5,000 करोड़ का निवेश प्रस्तावित है। हालांकि, इस व्यापक बदलाव का स्वरूप उल्लेखनीय है क्योंकि यह आवंटन पिछले बजटों से अलग है। चूंकि यह अब बड़े महानगरों से हटकर टियर-2 और टियर-3 शहरों (5 लाख से अधिक आबादी वाले) पर फोकस करता है, जहां बुनियादी ढांचे, पुनर्विकास और आर्थिक क्षेत्रों का विकास होगा। इससे छोटे शहरों में रियल एस्टेट, लॉजिस्टिक्स हब और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। देखा जाए तो पिछले बजटों से तुलना में यह विशेष कदम है, क्योंकि पिछले वर्षों में शह...

जातिवाद एक वैचारिक कैंसर, इससे अंतरराष्ट्रीय नुस्खे से निबटे भारत

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जातिवाद एक वैचारिक कैंसर, इससे अंतरराष्ट्रीय नुस्खे से निबटे भारत @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत में जातिवाद को वैचारिक कैंसर कहना एक सशक्त रूपक है, जो इसकी गहरी जड़ों, फैलाव और विनाशकारी प्रभावों को दर्शाता है। दरअसल जातिवाद सामाजिक एकता को खोखला करता है और राजनीतिक-आर्थिक प्रगति में बाधा बनता है। इसलिए इसे जड़मूल से मिटाना अत्यन्त आवश्यक है। यदि अमेरिका, कनाडा, स्वीडन और सिंगापुर के सफल अनुप्रयोगों से भारतीय नेतृत्व कुछ सीख सके तो जातिवाद से भारत भी आसानी पूर्वक निबट सकता है।  देखा जाए तो भारत में जातिवाद एक राजनीतिक हथियार बन चुका है, क्योंकि राजनीतिक दल वोट बैंक के लिए जाति को भुनाते हैं, जिससे यह वैचारिक रूप से निरंतर मजबूत होता चला आया है। देखा जाता है कि दलगत उम्मीदवार चयन से लेकर नीतियां निर्धारित करने तक में दलीय हुक्मरानों के समक्ष जाति-आधारित प्राथमिकताएं बनी रहती हैं, जो समाज को क्यारियों में बांट देती हैं। इससे सामाजिक वैमनस्य बढ़ता है और राष्ट्रीय एकता कमजोर पड़ती है।  जातिवाद से सामाजिक विभाजन भी मजबूत होता है, क्योंकि जातिवाद ...

युवा बजट 2026-27 के आर्थिक मायने विशिष्ट, सियासी प्रभाव से विकसित भारत के सपने होंगे पूरे

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युवा बजट 2026-27 के आर्थिक मायने विशिष्ट, सियासी प्रभाववश विकसित भारत 2047 के सपने पूरे होंगे @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत सरकार का 2026-27 का केंद्रीय बजट विकास, रोजगार सृजन और राजकोषीय अनुशासन पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026, दिन रविवार को इसे संसद की पटल पर प्रस्तुत करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया। लिहाजा इसके आर्थिक मायने और राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण है। इसपर बहस तेज हो गई, जो कई कारणों से अभिप्रेरित है। जहां सत्ता पक्ष ने इसे युवा शक्ति का प्रतीक बजट ठहराया, वहीं विपक्ष ने इसे अदृश्य बजट करार देते हुए जमकर आलोचना की। जहां तक कुल बजट आकार की बात है तो यह 53.5 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। भले ही राजकोषीय घाटा जीडीपी (GDP) का 4.3% रखा गया, जो पिछले साल के 4.4% की तुलना में कुछ कम है। वहीं, जहां तक कर सुधार की बात है तो आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं आया; जबकि नया आयकर अधिनियम 2026 अप्रैल से लागू होगा। वहीं, एफ एंड ओ (F&O) पर एसट...