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The crucial questions surrounding slogans like 'We want freedom'!

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'हमें चाहिए आजादी' जैसे नारों से जुड़े यक्ष प्रश्न! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक हमारे देश में जब “हमें चाहिए आजादी” जैसे नारे लगते हैं, तो राजनीतिक, प्रशासनिक और न्यायिक खामोशी के बीच कई सुलगते सवाल भी पैदा होते हैं। इसलिए बेहतर होगा कि हमारे प्रधानमंत्री लाल किले के प्राचीर से प्रशासन और न्यायपालिका को यह संदेश दें कि राजनीति और राष्ट्रनीति में तफरका स्थापित करने में कार्यपालक प्रशासन के स्थायित्व की बहुत बड़ी भूमिका और जिम्मेदारी दोनों है। वह इसे बखूबी निभाए। इसलिए राष्ट्रनीति को राजनीति से ऊपर रखने की व्यवस्था विदेश नीति की भांति ही हो, अन्यथा आने वाली पीढ़ियां कार्यपालक प्रशासन के स्थायित्व पर भी सवाल उठाने से नहीं हिचकेंगी। यही नहीं, इनके जातीय, धार्मिक और भाषाई मिजाज पर भी गौर करने की जरूरत है, अन्यथा "हमें चाहिए आजादी” जैसे नारे लगते रहेंगे, राष्ट्रद्रोही तत्व फलते-फूलते रहेंगे और एक दिन भारत माता को भी असमय दम तोड़ना पड़ेगा, क्योंकि पाकिस्तान परस्त इस्लामिक देशों के ख्वाब भी यही हैं, जिन्हें अमेरिका-चीन दोनों के शह हासिल हैं।  अलबत्ता, ...

Know why Delhi remains the target of terrorists?

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जानिए, आखिर दिल्ली क्यों रहती है आतंकियों के निशाने पर?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक आपको पता होगा कि 15 अगस्त और 26 जनवरी के मौके पर यानी राष्ट्रीय पर्वों दिल्ली अक्सर पाक परस्त आतंकियों के निशाने पर रहती है! ऐसा खुफिया जानकारियों से भी पता चलता है। ऐसा इसलिए कि नई दिल्ली सिर्फ भारत की राजधानी नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक, संवैधानिक और प्रतीकात्मक शक्ति का सबसे बड़ा केंद्र है। चूंकि  राष्ट्रीय पर्व—15 अगस्त तथा 26 जनवरी—आतंकियों के लिए इसी प्रतीकात्मक महत्व को भुनाने और इसमें भागीदारी जताने वालों के बीच अधिकतम भयावह माहौल पैदा करने का षड्यंत्र रचा जाता है, इसलिए खुफिया व सुरक्षा एजेंसियां चौकस हो जाती हैं। दरअसल, इस अहम मौके पर जगह जगह उमड़ने वाली भीड़ के बीच आतंकियों द्वारा अपने नापाक इरादों को पूरे करने के अवसर के रूप में देखा जाता है और इसी उद्देश्य से वो अमन-चैन के दुश्मन बन जाते हैं। भला हो एनआईए, खुफिया एजेंसियों और दिल्ली पुलिस का जो समय रहते ही उनके नापाक इरादों को ध्वस्त कर देती हैं। इस समय यह सवाल और गंभीर है, क्योंकि 13 अगस्त 2026 को...

Nawab Singh Nagar will give new momentum to the organization in Western UP: Maharaj Singh Vasuta Gurjar

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पश्चिमी यूपी में संगठन को नई धार देंगे नवाब सिंह नागर : महाराज सिंह वसुटा गुर्जर राजनैतिकदुनिया मेरठ। भाजपा कार्यकर्ता और समाजसेवी महाराज सिंह  वसुटा गुर्जर  ने पार्टी के पश्चिमी उत्तरप्रदेश के क्षेत्रीय अध्यक्ष नवाब सिंह नागर की सरजमीनी कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि संगठन की ताकत कार्यकर्ता से आती है, और कार्यकर्ता का सम्मान ही नवाब सिंह नागर की पहचान है। उनकी पहली प्राथमिकता है। इसलिए भाजपा विधानसभा चुनाव 2027 में पहले से भी ज्यादा करिश्मा दिखाएगी। झुनझुनी, मेरठ निवासी महाराज सिंह  वसुटा गुर्जर  ने राजनैतिकदुनिया से फोन पर बातचीत करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने नवाब सिंह नागर को जो  पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी है, उसे पूरा करने के लिए उनके समर्थक दिन रात एक किए हुए हैं। समाजसेवी महाराज सिंह  वसुटा गुर्जर  ने आगे बताया कि उनकी मौजूदा जिम्मेदारी भाजपा को और अधिक मजबूती प्रदान करेगी। क्योंकि वह अपने दायित्व को पद नहीं, बल्कि एक बड़ी जिम्मेदारी के रूप में देखते आए हैं। चूंकि पश्चिम...

India must move beyond the politics of reservation: we need social justice as well as justice for merit!

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आरक्षण की राजनीति से आगे बढ़े भारत: सामाजिक न्याय भी चाहिए, प्रतिभा का न्याय भी! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत में आरक्षण पर बहस जितनी पुरानी है, उतनी ही अधूरी भी। हर कुछ वर्षों में देश दो खेमों में बंट जाता है—एक तरफ वे लोग होते हैं जो आरक्षण को सामाजिक न्याय की अनिवार्य व्यवस्था मानते हैं और दूसरी तरफ वे लोग जो इसे प्रतिभा, प्रतिस्पर्धा और समान अवसर के विरुद्ध बताते हैं। लेकिन क्या भारत की जटिल सामाजिक वास्तविकता को इतनी आसानी से दो खानों में बांटा जा सकता है?जवाब होगा, शायद नहीं। मसलन आज आवश्यकता इस बात की है कि आरक्षण को न तो पवित्र राजनीतिक प्रतीक मानकर हर सवाल से ऊपर रखा जाए और न ही देश की तमाम समस्याओं का कारण बताकर खारिज कर दिया जाए। आरक्षण की समीक्षा, उसके राजनीतिक दुरुपयोग, क्रीमी लेयर, वास्तविक वंचितों तक लाभ की पहुंच, प्रतिभा और समान अवसर—इन सभी पर खुली और तथ्यपरक बहस होनी चाहिए।  मेरी स्पष्ट सलाह है कि हमारे राजनेतागण, नौकरशाह, न्यायविद और पेशेवर बुद्धिजीवीगण इस सुलगते सवाल पर संतुलित और निष्पक्ष नजरिया अपनाए...

Is India now sending a 'follow the rules or leave the way' message to global tech companies?

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क्या भारत अब वैश्विक टेक कंपनियों के लिए ‘नियम मानो या रास्ता छोड़ो’ वाला संदेश दे रहा है? @ कमलेश पांडेय / वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत सरकार ने इंस्टाग्राम, वाट्सएप और फेसबुक का संचालन करने वाली कंपनी मेटा की मनमानी को अब नियंत्रित करने का निर्णय लिया है। इसी के दृष्टिगत उसे यह चेतावनी भी दी है कि उसे भारतीय कानूनों का पालन करना ही होगा। यही नहीं, सरकार ने मेटा से अपने एल्गोरिदम को लेकर भी जवाब तलब किया है।  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 इसका तातपर्य है कि अब मेटा को यह सुनिश्चित करना होगा कि इस सरकारी निर्देश का वास्तव में पालन हो, क्योंकि मेटा अथवा अन्य इंटरनेट मीडिया कंपनियां एलगोरिदम का मनमाना उपयोग करती हैं। एआइ के आगमन के बाद उनके लिए ऐसा करना और आसान हो गया है। इसलिए सवाल उठने लगे हैं कि  क्या भारत अब वैश्विक टेक कंपनियों के लिए ‘नियम मानो या रास्ता छोड़ो’ वाला संदेश दे रहा है? वस्तुतः वैश्विक इंटरनेट कंपनियां एक विशेष एजेंडे का प्रचार-प्रसार करती हैं। अब इंटरनेट मीडिया कंपनियां यह ...

Russia Sanctions Bill: India needs to understand the 'American nature' and take precautionary measures in time

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रूस प्रतिबंध विधेयक: भारत को समय रहते ही 'अमेरिकी फितरत' को समझना पड़ेगा और एहतियाती कदम उठाने पड़ेंगे @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित नए 'रूस प्रतिबंध विधेयक' ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है, क्योंकि यह विधेयक रूसी कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का आयात करने वाले शीर्ष देशों, जिनमें भारत और चीन शामिल हैं, पर सौ प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रविधान करता है। यही वजह है कि अमेरिका के सीनेट के इस कदम ने भारत-अमेरिका के भावी रिश्तों को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 इसलिए सवाल उठता है कि अमेरिकी सीनेट द्वारा पारित नए 'रूस प्रतिबंध विधेयक' क्या हैं? इससे कौन कौन देश प्रभावित होंगे? और इससे भारतीय गुटनिरपेक्षता का क्या हश्र होगा? तो दो टूक जवाब होगा कि हाँ—यह विधेयक भारत के लिए केवल रूस पर अमेरिकी प्रतिबंधों का मामला नहीं है; इसका बड़ा प्रश्न यह है कि क्या अमेरिका अब तीसरे देशों की विदे...

Message of social harmony and Sanatan unity resonates at the Kanwar service camp in Kamalpur: Dr. Dinesh Chandra

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कमालपुर में कांवड़ सेवा शिविर में गूंजा सामाजिक समरसता और सनातन एकता का संदेश: डॉ दिनेश चंद्र  # पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने संत शिरोमणि रविदास जी की शिष्य परंपरा के साधु-संतों का अंगवस्त्र पहनाकर किया सम्मान, यज्ञ में की सहभागिता @ कमलेश पांडेय/राजनैतिकदुनिया सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी के नेतृत्व में पश्चिमी उत्तर प्रदेश इन दिनों शिवभक्ति और धार्मिक आस्था से सराबोर है। कांवड़ यात्रा के दौरान जगह-जगह शिव कांवड़ सेवा शिविरों में श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की सेवा के साथ-साथ सामाजिक समरसता एवं सनातन संस्कृति का संदेश भी दिया जा रहा है। इसी क्रम में कमालपुर, सहारनपुर में आयोजित शिव कांवड़ सेवा शिविर में पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने सहभागिता की। कार्यक्रम में हिंदू जागरण मंच के संयोजक सूर्यकांत सिंह के तत्वावधान में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, ग्राम प्रधानों एवं ग्रामीणों की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण यज्ञ एवं हवन रहा। पूर्व जिलाधिकारी डॉ. दिनेश चंद्र ने यज्ञ में सहभाग...