औषधि का असली अर्थ
औषधि का असली अर्थ @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार औषधि केवल शीशी में बंद, गोली, काढ़ा या इंजेक्शन नहीं, जीवन जीने की सच्ची कला भी स्वास्थ्य की सबसे बड़ी औषधि है कहीं। भोर की पहली किरण कहती है, जल्दी सोओ, जल्दी जागो। ईश्वर स्मरण, योग और प्राणायाम से, तन-मन में नवजीवन जागो। सूरज की गर्माहट, शीतल जल, हर कदम की सैर निराली। हर कौर को प्रेम से चबाना, यही सेहत की असली थाली। वज्रासन का छोटा-सा अभ्यास, उपवास का संयम महान। ध्यान, मौन और मधुर मुस्कान, भर देते जीवन में नवप्राण। हँसी सबसे सस्ती दवा है, संतोष सबसे बड़ा धन। शांत मन और निर्मल अंतःकरण, यही है सुख का सच्चा जीवन। ईमानदारी की उजली राह, सकारात्मक सोच का साथ। निस्वार्थ प्रेम और सेवा-भाव, खोल दें खुशियों की हर बात। परिवार संग बिताया हर पल, मित्रों का स्नेहिल व्यवहार। बिन मूल्य का ऐसा चिकित्सालय, जहाँ मिलता प्रेम अपार। मस्त रहो, व्यस्त रहो, स्वस्थ रहो, उत्साह रहे हर श्वास। हर नया दिन एक उपहार बने, हर क्षण में हो उल्लास। प्रकृति माँ की गोद में छिपी, जीवन की अनमोल विधि। जिसने इसका मर्म समझ लिया, उसी ने पा ली सच्ची औषधि। आओ ऐसा जीवन अ...