संदेश

हेक्सागन गठबंधन के अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक मायने समझिए

चित्र
हेक्सागन गठबंधन के अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक मायने समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक इजरायल द्वारा प्रस्तावित "हेक्सागन गठबंधन" के अंतर्राष्ट्रीय मायने बेहद दिलचस्प हैं। यह अतिवादी ताकतों के विरूद्ध शक्ति संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है।वास्तव में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा प्रस्तावित यह गठबंधन एक ऐसा कूटनीतिक समूह है, जिसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी राष्ट्र, ग्रीस, साइप्रस और अन्य एशियाई देश शामिल होंगे।  समझा जाता है कि भले ही इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य कट्टरपंथी शिया और सुन्नी ताकतों के खिलाफ एकजुट होकर सुरक्षा, स्थिरता और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना है, लेकिन इसके उन वैश्विक कूटनीतिक निहितार्थों से भी इंकार नहीं किया जा सकता, जो अमेरिका, चीन और रूस जैसे तीनों अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों के कान खड़े करने वाले साबित हो सकते हैं।  ऐसा इसलिए कि इस गठबंधन में विश्व की चौथी बड़ी शक्ति भारत बेहद मजबूत और नेतृत्वकारी स्थिति में रहेगा। लिहाजा इसका स्वरूप तय हो जाने के बाद अरब और खाड़ी के इस्लामिक देशों पर वर्चस्व की जो होड़ वैश...

ग्लोबल नॉर्थ को ग्लोबल साउथ से मिल रही नीतिगत टक्कर के मायने समझिए

चित्र
ग्लोबल नॉर्थ को ग्लोबल साउथ से मिल रही नीतिगत टक्कर के मायने समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक वैश्विक मंचों पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ग्लोबल साउथ की बात दृढ़ता से रखते आए हैं, खासकर जी-20 जैसे मंचों पर प्रमुखता से। इसलिए भारत को ग्लोबल साउथ का प्रवक्ता समझा जाने लगा है। दरअसल, इसके पीछे उनकी सोच रहती है कि ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ के बीच की नीतिगत और रणनीतिक असमानता को सामूहिक रूप से दूर किया जाए और इसके दृष्टिगत विकसित देश, विकासशील देशों को कुछ छूट और कुछ सहूलियत दोनों प्रदान करें। उनकी इस बदलती सोच से ग्लोबल नार्थ को ग्लोबल साउथ से नीतिगत टक्कर मिल रही है, जिसके दूरगामी मायने बेहद अहम हैं।  आईए सबसे पहले समझते हैं कि आखिर ग्लोबल नॉर्थ और साउथ क्या है और किसमें कौन से देश शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि ग्लोबल नॉर्थ विकसित, धनी देशों को दर्शाता है जैसे अमेरिका, यूरोप, जापान- जहाँ उच्च आय, उन्नत तकनीक और औद्योगिक शक्ति है। जबकि ग्लोबल साउथ विकासशील देशों का समूह है, जिसमें भारत, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका जैसे एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका...

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंफ के 'स्टेट ऑफ द यूनियन' भाषण के वैश्विक निहितार्थ

चित्र
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंफ के 'स्टेट ऑफ द यूनियन' भाषण के वैश्विक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दुनिया के थानेदार अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप का 2026 स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण मुख्य रूप से अमेरिकी अर्थव्यवस्था और घरेलू उपलब्धियों पर केंद्रित रहा। उन्होंने अमेरिकियों को आश्वस्त किया कि 'मेक अमेरिका ग्रेट अगेन' की उनकी नीति सफल रही और इसके तहत दुनियावी देशों पर लगाए गए टैरिफ से अमेरिका के पुराने स्वर्णिम दिन लौट आए हैं। वहीं उनके भाषण में वैश्विक मामलों पर भी उल्लेख हुआ जो भारत, पाकिस्तान और ईरान जैसे परस्पर जुड़े देशों के लिए प्रासंगिक और अहम है। इसलिए इसके अंतरराष्ट्रीय निहितार्थों को समझना होगा। कतिपय प्रमुख वैश्विक संदर्भ की चर्चा करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध रोक दिया, जिसमें पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ के हवाले से कहा कि 3.5 करोड़ लोग मरने वाले थे। इसके अलावा, उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर कार्यक्रम पर 2025 के 'ऑपरेशन मिडनाइट हैमर' का भी जिक्र किया और तेहरान को स्पष्ट चेतावनी द...

दिल्ली शराब घोटाले में आप नेताओं को मिली न्यायिक जीत के राजनीतिक मायने

चित्र
दिल्ली शराब घोटाले में आप नेताओं को मिली न्यायिक जीत के राजनीतिक मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली शराब घोटाले में आम आदमी पार्टी (आप) को राउज एवेन्यू कोर्ट से न्यायिक राहत मिली है, जहां अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया समेत सभी आरोपी बरी हो गए। मसलन, कोर्ट ने सीबीआई के सबूतों को कमजोर बताते हुए आरोपों को खारिज कर दिया। उल्लेखनीय है कि दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने शुक्रवार, 27 फरवरी को  अपना फैसला सुनाया। वह यह कि शराब नीति में कोई साजिश या आपराधिक इरादा साबित नहीं हुआ। इसलिए अदालत ने 600 पेज के आदेश में स्पष्ट किया कि बिना ठोस सबूतों के आरोप टिक नहीं सकते। वहीं, सीबीआई ने फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील का फैसला लिया है। बावजूद इसके निचली अदालत में आप नेताओं की यह जीत पूरी आप पार्टी की सियासत के लिए एक बड़ा राजनीतिक हथियार बनेगी, खासकर दिल्ली विधानसभा चुनावों 2030 से पहले। क्योंकि पार्टी अब दावा कर सकती है कि केंद्र की एजेंसियों ने राजनीतिक विद्वेष यानी बदले की भावना के तहत फंसाया। यही नहीं, पंजाब-गुजरात जैसे राज्यों में आप का आधार मजबू...

योगी आदित्यनाथ की विदेश यात्रा से विकास और हिंदुत्व मॉडल हुआ मजबूत!

चित्र
योगी आदित्यनाथ की विदेश यात्रा से विकास और हिंदुत्व मॉडल हुआ मजबूत! @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री और फायरब्रांड हिन्दू नेता योगी आदित्यनाथ की हालिया सिंगापुर-जापान यात्रा प्रदेश की आर्थिक महत्वाकांक्षाओं को मजबूत करने का एक सशक्त प्रयास है। भले ही सीएम का यह दौरा निवेश आकर्षण और औद्योगिक साझेदारी पर केंद्रित रहा। लेकिन इन दौरों से इस बात के स्पष्ट संकेत मिले कि विकास और हिंदुत्व के मॉडल पर गतिशील यूपी सरकार के लिए निकट भविष्य में 1 ट्रिलियन डॉलर की सूबाई इकॉनमी वाले लक्ष्य को पाना बिल्कुल कठिन नहीं है।  आर्थिक विश्लेषक बता रहे हैं कि जिस तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने सहयोगी उपमुख्यमंत्री और भरोसेमंद मंत्रियों के साथ 22 से 26 फरवरी 2026 तक चार दिवसीय विदेश यात्रा पर रहे, उसका अपना महत्व है।सर्वप्रथम उन्होंने 23-24 फरवरी को सिंगापुर की यात्रा की और फिर 25-26 फरवरी को जापान की यात्रा किए।इन दोनों यात्राओं से उन्हें अभूतपूर्व अनुभव हासिल हुआ, जिसके कुछ पलों को उन्होंने सोशल मीडिया पर साझा भी किया था। कहना न होगा कि...

न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर मचे बौद्धिक बवाल के मायने

चित्र
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने पर मचे बौद्धिक बवाल के मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी विद्यालय, विश्वविद्यालय या अकादमिक संस्थानों में क्या पढ़ाया जाए और क्या नहीं पढ़ाया जाए, यह तय करना न्यायपालिका नहीं बल्कि शिक्षाविदों का कार्यक्षेत्र है। हाँ, यदि कोई शिक्षाविद या उनका संपादक मंडल राष्ट्र के बुनियादी संवैधानिक ढांचे को तहस-नहस करने और सद्भावी देश के सत्तागत सरोकारों और सामाजिक, सूबाई तथा राष्ट्रीय जनसरोकारों के विरुद्ध कोई लक्षित पाठ्यक्रम रचता/गढ़ता है, या किसी लेखक को ऐसा करने के लिए उत्प्रेरित/बाध्य करता है तो उन्हें अवश्य ही दंडित किया जाना चाहिए, ताकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का लोकतांत्रिक दुरुपयोग न होने पाए। लेकिन, दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि भारत में एनसीईआरटी जैसा प्रतिष्ठित सरकारी प्रकाशन संस्थान अपने विषयवस्तु को लेकर अक्सर विवादों के घेरे में रहता है। कतिपय अन्य जिम्मेदार संस्थाओं की भी यही नियति बन चुकी है। कुछेक फिल्मों और धारावाहिकों को लेकर भी विवाद की ऐसी ही मिलीजुली स्थिति है, जो अस्वीकार्य है। ह...

आखिर सुन्नी 'एक्सिस' से कितनी प्रभावित होगी अरब-खाड़ी देशों और भारत की रणनीति?

चित्र
आखिर सुन्नी 'एक्सिस' से कितनी प्रभावित होगी अरब-खाड़ी देशों और भारत की रणनीति? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक देश-दुनिया में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने के लिए, उसके समर्थकों को मात देने के लिए, अपने अपने राजनीतिक प्रभाव, धार्मिक वर्चस्व और क्षेत्रीय दादागिरी को स्थायित्व देने के लिए पिछली शताब्दी में अनेक प्रयोग हुए, विभिन्न देशों पर आक्रमण किये गए या करवाए गए, यौद्धिक अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सारे जहां में विभिन्न हथियार बंद गुट पैदा किए गए, करवाए गए और जो अशांति मचवाई गई, उससे मानवता और शासन दोनों आक्रांत हुए। सुन्नी एक्सिस ऐसी ही क्षुद्र कूटनीति का विस्तार है जो इजरायल के खिलाफ आक्रामक या उससे आत्मरक्षार्थ पहल भी समझा जा सकता है। हालांकि, इससे भारत विरोधी इस्लामिक ताकतों को भी बल मिलना स्वाभाविक है। ऐसा नहीं है कि यह सबकुछ पहली बार हुआ, या हो रहा है, बल्कि जो क्षुद्र रणनीति प्राचीन कबीलाई सोच, मध्ययुगीन सामंती समाज और  राजतंत्रीय शासकों के बीच कायम रही, जिसके तहत वे लोग एक दूसरे को मात देते, दिलाते फिरते थे, वही विनाशकारी सोच औद्योगिक...