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The pilgrimage to Lord Pashupatinath is a bridge of faith, culture and India-Nepal friendship: Dr. Dinesh Chandra

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भगवान पशुपतिनाथ की यात्रा है आस्था, संस्कृति और भारत-नेपाल मैत्री का सेतु: डॉ दिनेश चंद्र @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 उत्तरप्रदेश के निवर्तमान आईएएस अधिकारी और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद व जनसंवेदनाओं के मशहूर अभिव्यक्ति कर्ता लेखक डॉ दिनेश चंद्र ने गत दिनों नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भगवान पशुपतिनाथ तीर्थस्थल की यात्रा की। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने मुख्य महंत जी का आशीर्वाद लिया और भारत राष्ट्र की ओर से बाबा काशी विश्वनाथ और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामजी, अयोध्या का अंग वस्त्रम उन्हें भेंट करते हुए सम्मानित किया। वहीं मुख्य महंत जी ने भी तीर्थस्थल पटका प्रदान करके डॉ दिनेश चंद्र को सम्मानित किया और अपना आशीर्वाद दिया।  उल्लेखनीय है कि इस आशय की वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जब "राजनैतिकदुनिया" ने उनसे मोबाइल पर संपर्क किया तो अपनी परम पावन तीर्थयात्रा का अनुभव देश व समाज से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत...

Bankipur By-Election 2026: Sudden change in BJP candidate raises burning questions?

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बांकीपुर उपचुनाव 2026: भाजपा उम्मीदवार के यकायक बदलाव से उभरने लगे सुलगते सवाल? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 भोजपुरी में एक कहावत है- लइका मालिक, बूढ़ दीवान, मामला बिगड़े साँझ बिहान। यानी कि जिस घर का लड़का मालिक होता है और बूढ़ा व्यक्ति दीवान मतलब सलाहकार की भूमिका में आ जाता है तो वहां अच्छे और कार्यकुशल सुझावों पर भी विलंब से निर्णय होने के चलते मामला साँझ यानी शाम से सुबह तक कभी भी उलझ यानी बिगड़ जाता है। यदि पुरानी कुछ बातों को भूला भी दिया जाए तो हाल ही में बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) का नामांकन वापस लेकर नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की काफी किरकिरी हुई है।  चूंकि उनका चयन प्रधानमंत्री मोदी के स्तर पर यकायक हुआ है, इसलिए उँगली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ भी उठी। बात इतनी सी नहीं है, बल्कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उनके चहेते मुख्यमंत्री सम्राट च...

In the world of advertising, AI has posed an exciting challenge to human creativity.

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विज्ञापन की दुनिया में एआई ने इंसानी क्रिएटिविटी के समक्ष पैदा की एक उत्साहबर्द्धक चुनौती @ डॉ. संघर्ष शर्मा, फाइन आर्ट्स जॉर्नलिस्ट https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 विज्ञापन की लोकलुभावन दुनिया ने हमेशा से ही अपने समय की तकनीकी तरक्की को प्रदर्शित किया। यह अपने दौर में हुए बदलावों का प्रतिबिंब भी समझा गया, जो यह दिखाता रहा कि तकनीकी दुनिया कितनी तेजी से हमारे जनजीवन का अभिन्न अंग बनती जा रही है। पहले मौखिक प्रचार-प्रसार में सहयोगी बने यंत्रों, फिर हाथ से बने पोस्टरों और अब अखबारों में छपने वाली चित्ताकर्षक तस्वीरों से लेकर डिफरेंट फोटोग्राफी के विभिन्न प्रासंगिक अंदाजों, टीवी विज्ञापनों और डिजिटल मार्केटिंग तक के हर नए आविष्कार ने, देश-प्रदेश के समाज के समक्ष व्यवहारिक उत्पादों और प्रासंगिक विचारों को पेश करने के तरीके को बदल दिया। बहरहाल इस बदलाव को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आगे बढ़ा रहा है।  सवाल है कि विज्ञापन की दुनिया में एआई ने इंसानी क्रिएटिविटी के समक्ष एक उत्साहबर्द्धक चुनौती पैदा की है...

After all, who will give a proper answer to the questions raised on anethol mixed petrol?

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आखिर एनाथाल मिश्रित पेट्रोल पर उठते सवालों का माकूल जवाब कौन देगा? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol - EBP) को लेकर जनमानस में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। भले ही केंद्र सरकार और उसके मुलाजिम इस नीति के पक्ष में लगातार तर्क देते आए हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर लोगों और विशेषज्ञों को लगता है कि पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी गई है। मजे की बात तो यह है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उठने वाले सवालों का जवाब देने की प्राथमिक जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं की है, जो इस प्रकार हैं:- पहली, भारत सरकार: नीति बनाने, उसके उद्देश्यों और प्रभावों को स्पष्ट करने की मुख्य जिम्मेदारी सरकार की है। दूसरी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय: एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम, उसके वैज्ञानिक आधार और नीति संबंधी प्रश्नों का उत्तर देने वाला प्रमुख मंत्रालय। तीसरी, भारतीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड तथा तेल विपणन ...

After all, why are peace agreements between America and Iran being broken again and again? Who is responsible?

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आखिर अमेरिका और ईरान के शांति समझौते बार बार क्यों टूट जा रहे हैं? जिम्मेदार कौन? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक ईसाई मुल्कों का अगुवा अमेरिका और इस्लामिक देशों का कथित अगुवा ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते बार-बार यानी ब्रेक के बाद टूट जा रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक शांति और प्रगति के लिए अच्छी नहीं समझी जा सकती है।सवाल है कि आखिर इन शांति समझौतों के टूटने की क्या वजह है? क्या कतर, पाकिस्तान और कुवैत जैसे मुल्क इनके बीच मध्यस्थता करवाने में विफल हो चुके हैं? या फिर अमेरिका-ईरान के अंतरराष्ट्रीय दांवपेंच इनकी समझ से बाहर हैं!  राजनीतिक व कूटनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इसका  कारण केवल एक घटना नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही गहरी अविश्वास की राजनीति है। इसके पीछे जी-7 और ब्रिक्स के अलावा ओआईसी देशों की खल नीति का  भी बड़ा हाथ है। भोजपुरी में एक कहावत है- "जबरा मारे, रोवन न दे।" यानी कि मजबूत व्यक्ति किसी की लक्षित पिटाई करता है तो रोने भी नहीं देता ह...

Yaksha Question: Will the goal of Developed India 2047 be achieved in 2075?

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यक्ष प्रश्न: क्या विकसित भारत 2047 का लक्ष्य 2075 में हासिल होगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 यदि आप विकसित भारत 2047 का स्वप्न देख रहे हैं तो थोड़ा संभल जाइए, क्योंकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने यह तर्क दिया है कि यदि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि दर, उत्पादकता और रोजगार सृजन की गति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ, तो भारत को "विकसित देश" बनने में 2047 के बजाय 2075 तक का समय लग सकता है।  बता दें कि यह कोई आधिकारिक सरकारी अनुमान नहीं है, बल्कि कतिपय अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए एक आर्थिक विश्लेषण पर आधारित दृष्टिकोण मात्र है, जो सत्य के निकट है या परे, यह भविष्य के गर्भ में है। हाँ, इतना जरूर है कि इससे विपक्ष को सत्तापक्ष की खिल्ली उड़ाने का एक मौका जरूर मिल गया है। दरअसल, इस संदर्भ में चर्चित अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने भी कहा कि यदि वर्तमान गति ऐसी ही बनी रही, तो विकसित भारत का लक्ष्य 2047 तक हासिल करना कठिन हो सकता है। मसलन, Sur...

The international implications of the bomb blast that occurred during French President Emmanuel Macron's visit to Syria are profound.

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फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सीरिया यात्रा के दौरान हुई बम विस्फोट की घटना के अंतरराष्ट्रीय निहितार्थ बहुत गहरे @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 जिस तरह से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सीरिया यात्रा के दौरान बम विस्फोट की घटना हुई, वह वीवीआइपी लोगों की सुरक्षा सम्बन्धी वैश्विक लापरवाही का तकाजा नहीं तो क्या है? यह विस्फोट केवल एक सुरक्षा घटना नहीं, बल्कि यह संदेश भी है कि सीरिया में राजनीतिक परिवर्तन के बावजूद स्थिरता की राह अभी लंबी है और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को अस्थिर करने की कोशिशें जारी रह सकती हैं। बता दें कि Emmanuel Macron की हालिया Syria यात्रा के दौरान Damascus में हुए दो विस्फोट केवल एक सुरक्षा घटना नहीं थे, बल्कि इनके कई व्यापक अंतरराष्ट्रीय और सामरिक संकेत हैं जिन्हें समझने की जरूरत है।  प्रारंभिक रिपोर्टों के अनुसार, विस्फोट उस होटल के निकट हुए जहाँ फ्रांसीसी प्रतिनिधिमंडल ठहरा हुआ था। घटना में कई लोग घायल हुए, हालांकि म...