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आखिर कबतक मिलेंगे 'सनातनी राष्ट्रवाद' से जुड़े ज्वलंत सवालों के निर्णायक जवाब? समझिए

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आखिर कबतक मिलेंगे 'सनातनी राष्ट्रवाद' से जुड़े ज्वलंत सवालों के निर्णायक जवाब? समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय सनातनी राष्ट्रवाद से जुड़े ज्वलंत सवालों, यथा-  संपूर्ण गोवंश हत्याबंदी कानून, समान नागरिक संहिता, राष्ट्रीय नागरिकता पंजी (NRC), पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) मुक्ति, अविरल गंगा-निर्मल गंगा, बांग्लादेशी घुसपैठिए भगाना, कैलाश मानसरोवर मुक्ति, स्वदेशी और विकेंद्रीकरण, जनसंख्या नियंत्रण कानून, शिक्षा का भारतीयकरण, रुपये को मजबूत करना,चीन से आयात घटाना आदि पर हमारे देश में राजनीति तो बहुत हुई, लेकिन ऐसे ज्वलंत राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी द्वारा पिछले 12 वर्षों में भी मनोवांछित परिणाम नहीं दिया जाना आमलोगों के दिलोदिमाग को उद्वेलित कर रहा है।  आम तौर पर देखा जा रहा है कि जो लोग भाजपा समर्थक नहीं हैं, उनका मनोमिजाज अब आमलोगों को इन्हीं धधकते हुए मसलों पर उकसा रहा है कि आखिर क्यों भाजपा नीत एनडीए सरकार ऐसा नहीं कर पाई, जबकि विपक्ष में रहते हुए उसने इन मुद्दों को खूब हवा दी और सत्ता तक...

सूचना अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता हिमालय एनक्लेव फेज तीन वृंदावन योजना आरडब्ल्यूए के कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित

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हिमालय एनक्लेव फेज तीन वृंदावन योजना आर डब्ल्यू ए का चुनाव संपन्न नरेंद्र पांडेय अध्यक्ष एवं सच्चिदानंद पांडेय सचिव निर्वाचित अनिल श्रीवास्तव उपाध्यक्ष एवं नरेंद्र प्रताप ट्रेजरार निर्वाचित सूचना अधिकारी दिनेश कुमार गुप्ता हिमालय एनक्लेव फेज तीन वृंदावन योजना आरडब्ल्यूए के  कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित लखनऊ। मुख्य चुनाव अधिकारी आर एम अग्रवाल के पर्यवेक्षण एवं निर्देशन में आरडब्ल्यूए हिमालय एनक्लेव फेज तीन वृंदावन योजना का निर्वाचन संपन्न हुआ जिसमें नरेंद्र पांडेय अध्यक्ष, अनिल श्रीवास्तव उपाध्यक्ष, सच्चिदानंद पांडेय सचिव एवं नरेंद्र प्रताप ट्रेजरार के पद पर निर्वाचित घोषित किए गए। इसके अतिरिक्त प्रमिला बुधवार, दिनेश कुमार गुप्ता, पीयूष वर्मा, प्रशांत जायसवाल, अमित गोपाल झींगरन, आर के सिंह, के के राय एवं नवनीत श्रीवास्तव कार्यकारिणी सदस्य निर्वाचित घोषित किए गए। उक्त चुनाव प्रक्रिया को सकुशल संपन्न कराने में सभी अध्यासियों और विशेष रूप से मुख्य चुनाव अधिकारी आर एम अग्रवाल,न्यायमूर्ति (से नि) डी एन शुक्ला,भूपेंद्र सिंह,अवधेश श्रीवास्तव आदि का योगदान...

मिज़ोरम की अंधेरी आसमान: जहाँ रात्रि आकाश प्राचीन परंपराओं से मिलता है

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एस्ट्रो-पर्यटन  ·  पूर्वोत्तर भारत  ·  सामुदायिक विकास शीर्षक: मिज़ोरम की अंधेरी आसमान: जहाँ रात्रि आकाश प्राचीन परंपराओं से मिलता है # पूर्वोत्तर भारत का सबसे उपेक्षित राज्य एशिया के कुछ सबसे अंधेरे आसमानों के नीचे बसा है —  और एक सांस्कृतिक रहस्य रखता है जिसे दुनिया ने अभी तक नहीं जाना। @ सुश्री मोहुआ दत्ता/डॉ. विवेक रस्तोगी लेखिका परिचय: सुश्री दत्ता: सहायक प्रोफेसर, पर्यटन विभाग, SBIHM, न्यू टाउन, कोलकाता एवं पीएचडी शोधार्थी, गीता विश्वविद्यालय लेखक परिचय: डॉ. रस्तोगी: प्रोफेसर, वाणिज्य एवं व्यवसाय प्रबंधन विद्यालय, गीता विश्वविद्यालय, पानीपत मई 2026  ·  SUSTAIN-AI 2026  ·  गीता विश्वविद्यालय  ·  ORCID: 0009-0001-0129-531X   भोर में मिज़ोरम की पहाड़ी घाटियों पर बादलों का समुद्र — वही आसमान जो सूर्यास्त के बाद एशिया की सबसे अंधेरी रात बन जाती है। फ़ोटो: सुश्री मोहुआ दत्ता मिज़ोरम के एक शांत पहाड़ी गाँव के ऊपर, आकाश-गंगा पूरी तरह से फैली हुई है — प्रकाश की एक नदी जिसे दुनिया की अधिकांश जनसंख्या अब नहीं...

पंजाब त्रिस्तरीय निकाय चुनाव के दलगत, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सियासी मायने अहम

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पंजाब नगर निकाय चुनाव के दलगत, क्षेत्रीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सियासी मायने अहम @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पंजाब नगर निकाय चुनाव- नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायत- सिर्फ स्थानीय सत्ता का संघर्ष नहीं हैं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव का “सेमीफाइनल” माने जा रहे हैं। ये चुनाव सिर्फ स्थानीय प्रशासनिक चुनाव नहीं हैं, बल्कि ये पंजाब की बदलती क्षेत्रीय राजनीति, राष्ट्रीय दलों की रणनीति और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की संघीय लोकतांत्रिक छवि से भी जुड़े हुए हैं। यही वजह है कि 2026 के इन चुनावों को 2027 विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा “पॉलिटिकल टेस्ट” माना जा रहा है।  पंजाब नगर निकाय चुनाव 2026 के चुनाव आयोग और मतगणना से जुड़े अब तक के मुख्य आंकड़े निम्नलिखित हैं- कुल 102 शहरी निकायों- नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों- में चुनाव हुए, जहां मतदान प्रतिशत लगभग 63.94% दर्ज किया गया। नगर पंचायतों में सबसे अधिक 76.18% मतदान हुआ। नगर निगम क्षेत्रों में सबसे कम लगभग 59.91% मतदान दर्ज हुआ। नगर परिषदों में लगभग 65.06% मतदान ह...

“फ्लेक्सिबल जियोपॉलिटिक्स” के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक निहितार्थ

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“फ्लेक्सिबल जियोपॉलिटिक्स” के अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक "लचीली भूराजनीति” यानी फ्लेक्सिबल जियोपॉलिटिक्स का जन्मदाता भारत की देखा-देखी अब पूरी दुनिया में इसका प्रचलन बढ़ रहा है। इसे मोदी डॉक्ट्रिन कहना ज्यादा उचित होगा, जो गुटनिरपेक्षता का हाइब्रिड पालिसी संस्करण है। आम कहानी वाली भाषा में कहें तो “खुल जा सिमसिम और बंद हो जा सिमसिम” वाली वैश्विक कूटनीति ही अब लचीली भूराजनीतिक बन चुकी है।  दरअसल, फ्लेक्सिबल जियोपॉलिटिक्स यानी लचीली भूराजनीति का अर्थ ऐसी अवसरवादी विदेश नीति से है, जिसमें देश अपने हित के अनुसार कभी दोस्ती का दरवाज़ा खोलते हैं और कभी तुरंत बंद कर लेते हैं। आज की दुनिया में यही “फ्लेक्सिबल जियोपॉलिटिक्स” तेजी से बढ़ रही है। जिसके सफल उपयोगकर्ता टीम पीएम मोदी हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ भारत जैसे उन देशों को होता है जो आर्थिक रूप से शक्तिशाली हों, तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर हों, सैन्य रूप से सक्षम हों, और बहुध्रुवीय दुनिया में संतुलन साधना जानते हों। यही वजह है कि भारत इसे अपनाकर दुनिया...

कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बदलकर कर्नाटक का धर्मंसंकट टाला! क्या मुख्यमंत्री बदलकर से हल निकलेगा?

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कांग्रेस ने मुख्यमंत्री बदलकर कर्नाटक का धर्मंसंकट टला! क्या मुख्यमंत्री बदलकर से हल निकलेगा?  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक कर्नाटक में कांग्रेस इस समय एक गहरे राजनीतिक धर्मसंकट में दिखाई दे रही थी, लेकिन मुख्यमंत्री बदलकर उसने इसका भी तोड़ निकाल लिया है। जिस तरह से आलाकमान के निर्देश पर सिद्धारमैया की जगह डी के शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाने का फैसला किया है, वह दूरदर्शिता का परिचायक है। लेकिन सवाल है कि क्या मुख्यमंत्री बदलने से समस्या का स्थायी हल निकल चुका है? या फिर कोई और नई समस्या पनपेगी! कांग्रेस का अतीत इसी बात की चुगली करता है। चूंकि कांग्रेस के लिए जहां एक ओर सत्ता संतुलन मायने रखता है, तो वहीं दूसरी ओर एक स्थिर और टिकाऊ सरकार की चुनौती उसके समक्ष मौजूद है, जो चुनावी मुद्दा भी 2028 के विधानसभा चुनाव में बनेगा। और इसी बीच मुख्यमंत्री बदलने की लगातार चल रही चर्चाओं को सही साबित करके और अपना नया मुख्यमंत्री घोषित करके उसने कर्नाटक के राजनीतिक तापमान बढ़ा चुकी है। सवाल यह है कि क्या नेतृत्व परिवर्...