आखिर में देश के सामान्य जाति के युवाओं को गांव से महानगर तक क्या करना चाहिए जिससे आरक्षण की जातीय सोच बदले, आर्थिक-सामाजिक पिछड़ापन केंद्र में बने? समझिए
Ultimately, what should the general caste youth of the country, from villages to cities, do to change the caste-based approach to reservation and make socio-economic backwardness the center of attention? आखिर में देश के सामान्य जाति के युवाओं को गांव से महानगर तक क्या करना चाहिए जिससे आरक्षण की जातीय सोच बदले, आर्थिक-सामाजिक पिछड़ापन केंद्र में बने? समझिए विस्तार से...... @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक आखिर देश के सामान्य जाति के युवाओं को गांव से महानगर तक क्या क्या करना चाहिए ताकि आरक्षण की जातीय, धार्मिक व क्षेत्रीय सोच बदले और संवैधानिक रूप से 'पददलित' गरीब प्रतिभावान लोगों को भी भविष्य में बराबरी का मौका मिले? निःसंदेह यह एक ऐसा जटिल प्रश्न है, जो उन सभी राजनीतिक दुविधाओं के समुचित जवाब दे सकता है, जिससे अक्सर राजनेता, उनके दल, अधिकारी, न्यायाधीश, संपादक आदि भागते तो हैं, लेकिन आपकी एकजुटता के बाद भाग नहीं पाएंगे, बल्कि सवालों के चक्रब्यूह में घिरकर अपनी जनतांत्रिक राजसी सुविधाओं को गंवाएंगे, जो गुलामी काल से जारी सत्तागत अतार्किक सुविधाओं को...