यक्ष प्रश्न: आखिर अमेरिकी वर्चस्व की कीमत कबतक चुकाएगी शेष दुनिया?
यक्ष प्रश्न: आखिर अमेरिकी वर्चस्व की कीमत कबतक चुकाएगी शेष दुनिया? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक महाकवि तुलसीदास ने 'रामचरितमानस' में लिखा है कि "समरथ को नहीं दोष गोसाईं।" यानी कि ताकतवर लोगों को कोई भी दैव दोष तक नहीं लगता है! यदि समकालीन लोकतांत्रिक कसौटियों और प्रवृत्तियों में इसे देखें तो देश-दुनिया के सभी वैधानिक नियमन शक्तिशाली देशों और लोगों के ही पक्ष में कार्य करते प्रतीत होते हैं। वाकई उनके किसी भी लोकविरोधी या जनविरोधी कार्य में प्रायः कोई न्यायिक बाधाएं तक नजर नहीं आतीं और न ही उनमें कोई दोष या खामियां तलाशी जाती हैं। आलम यह है कि किसी भी संसद, सर्वोत्तम न्यायालय या फिर अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय तक में ऐसे मामले पर ज्यादा सवाल जवाब नहीं किये जाते और अंततः मामले रफादफा कर, करवा दिए जाते हैं। कबीलाई भाषा में कहें तो जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली कहावत न केवल ग्रामीण जगत की मानसिकता बल्कि आधुनिक नृशंस विश्व के मानस पटल तक पर हावी महसूस होता है। बहरहाल इससे बचने का कोई रास्ता भी नजर नहीं आता। सच कहूं तो "वीर भोग्या वसुंधरा...