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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे विश्व के ताकतवर नेता बन गए? उनके गूढ़ राजनीतिक गुणों के बारे में जानिए।

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 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कैसे विश्व के ताकतवर नेता बन गए? उनके गूढ़ राजनीतिक गुणों के बारे में जानिए। "पीएम मोदी ने पारंपरिक गुटनिरपेक्षता की नीति को बदलते हुए 'मल्टी-अलाइनमेंट' की रणनीति अपनाई। भारत ने एक ही समय में अमेरिका, रूस, यूरोप और मध्य-पूर्व (खाड़ी देशों) के साथ मजबूत व्यापारिक और सुरक्षा संबंध बनाए रखे हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच वैश्विक दबावों के बावजूद भारत के राष्ट्रीय हितों को सर्वोपरि रखना और वैश्विक दक्षिण की आवाज बनना उनकी मजबूत कूटनीतिक क्षमता को दर्शाता है।" # प्रधानमंत्री के जन्मदिन (17 सितंबर) पर विशेष @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक क्षेत्रीय नेता से वैश्विक पटल पर सबसे प्रभावशाली शीर्ष नेताओं में शामिल होना, उनकी सुदृढ़ रणनीतिक सोच, जनसंपर्क क्षमता और कूटनीतिक दूरदर्शिता का परिणाम है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति के सबसे प्रमुख और चर्चित चेहरों में से एक हैं। देश की जनता उन्हें अलग-अलग दृष्टिकोणों से देखती है, और विपक्षी नेताओं के साथ उनके राजनीति...

हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए

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हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए  "हिंदी भाषा भारत को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन इसे किसी राजनीतिक एजेंडे या अनिवार्यता के बजाय आपसी संवाद और बाजार की जरूरत के तहत स्वाभाविक रूप से विकसित होने देना ही देश के बहुभाषी ताने-बाने को मजबूत रख सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भारत में हिंदी भाषा को लेकर चलने वाली राजनीति और उसकी जमीनी सच्चाई के बीच एक बड़ा अंतर है, जो लगातार गहराता चला गया। हालांकि अब इसे पाटने और इससे लेकर गाहे बगाहे उत्पन्न होते रहने वाले मतभेदों को दूर करने की जरूरत है। एक तरफ जहां हिंदी को राजनीतिक ध्रुवीकरण और भाषाई अस्मिता के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, वहीं व्यावहारिक धरातल पर इसकी स्थिति बिल्कुल अलग नजर आती है। इसलिए जनसामान्य के नजरिए से ही इसका सम्यक समाधान अपेक्षित है। https://www.pravakta.com/assess-the-hindi-language-from-the-perspective-of-ground-reality-not-politics/ खासकर भारतीय अभिजात्य वर्ग यानी अंग्रेजी दां लोगों के इशारे पर दक्षिण-पश्चिम-पूर्वी भारतीय भाषाओं...

आखिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर जारी अमेरिकी-चीनी रस्साकसी के बीच क्या करे भारत? समझिए विस्तार से

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आखिर कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर जारी अमेरिकी-चीनी रस्साकसी के बीच क्या करे भारत? समझिए विस्तार से "एआई सेक्टर में न केवल अमेरिका और चीन के बीच, बल्कि यूरोप और अन्य देशों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो रही है। ऐसे में भारत के सामने चुनौती केवल एआई मॉडल बनाने की नहीं, बल्कि चिप, कंप्यूटिंग, डेटा, प्रतिभा, पूंजी और बाजार—पूरी एआई वैल्यू चैन में मजबूत होने की है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  वैश्विक पटल पर अमेरिका और चीन की प्रतिस्पर्धा देखते ही बनती है। इस बार मुद्दा कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी एआई बनी है, वो भी ब्रिक्स 2026 बैठक के तुरंत बाद जिसका अपना महत्व है। चूंकि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने ब्रिक्स देशों को एआई ओपन सोर्स उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, इसलिए अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने प्रतिक्रिया  स्वरूप कहा कि एआई की दौड़ में अमेरिका चीन से आगे है? तो सवाल उठना लाज़मी है कि कितना आगे? और क्या चीन अगले कुछ वर्षों में इस दूरी को पाट सकता है?  सबसे बड़ा सवाल यह कि इस वैश्विक प्रतिद्वंद्विता में भारत को क्या करना चाहिए? इस सभी बिंदुओं क...

क्या दुनिया को संकट से उबारने का कूटनीतिक प्रयत्न है ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026?

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क्या दुनिया को संकट से उबारने का कूटनीतिक प्रयत्न है ब्रिक्स नई दिल्ली घोषणा पत्र 2026?  "दुनिया को युद्ध नहीं बुद्ध का शांति संदेश देने वाले भारत के दूरदर्शी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न युद्धों से संकटग्रस्त दुनिया और उनके दांवपेंच से परेशान अन्य देशों को संकट से उबारने का सटीक कूटनीतिक प्रयत्न किया है। इसलिए ब्रिक्स दिल्ली घोषणा पत्र 2026 की सराहना सभी देश किए हैं और आगे भी इस पर अमल किए बिना किसी के पास कोई दूसरा चारा नहीं बचा है। समझिए आखिर क्या हैं इसके भूराजनीतिक अंतर्राष्ट्रीय मायने।"  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषण  भारत विविधता में एकता बनाए रखने वाला देश है। यह अपने उदारमना विचारों के चलते तमाम नीतिगत विरोधाभासों के बावजूद मतैक्यता स्थापित करने में सफल हो जाता है। अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि में "वसुधैव कुटुंबकम्" और "सर्वे भवन्तु सुखिन:" जैसे उदात्त जनसरोकारों के चलते इसकी एक अलग विशिष्ट पहचान बनी हुई है, जिससे सभी देश भारतीय नेतृत्व पर भरोसा जताते आए हैं। यह गुटनिरपेक्षता और रणनीतिक स्वायत्तता का पक...

वार्ड 72 कौशाम्बी के भक्तों ने ईडीएम मॉल के मल्टिप्लेक्स में देखी "हनुमान अंश" फिल्म, लगाए जयकारे

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वार्ड 72 कौशाम्बी के भक्तों ने ईडीएम मॉल के मल्टिप्लेक्स में देखी "हनुमान अंश" फिल्म, लगाए जयकारे  @ राजनैतिक दुनिया  गाजियाबाद। उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाथ संप्रदाय से जुड़े रहे सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक संत बाबा नीम करौली जी महाराज, जिन्होंने भगवान हनुमानजी की अविरल भक्ति की, के जीवन दर्शन और संतत्व के विभिन्न पड़ावों के उपर एक प्रेरणादायी फिल्म "हनुमान अंश" बनाई गई। भक्तों की मानें तो उनके अनुयायी देश-विदेश में फैले हुए हैं। उनके द्वारा स्थापित नीम करौली धाम की ख्याति निरंतर बढ़ती जा रही है। इसलिए भाजपा नेता अपने समर्थकों को मुफ्त में यह फिल्म दिखला रहे हैं। इसी कड़ी में कौशांबी, गाजियाबाद में भक्तों की टोली द्वारा शुक्रवार को "हनुमान अंश" फिल्म ईडीएम मॉल में देखी गई। इससे पूरा माल कल भक्ति में डूबा हुआ था। भगवान राम और हनुमान जी के नारे मॉल में गूंज रहे थे। इस अवसर पर पार्षद कुसुम मनोज गोयल द्वारा महिला टोली का उत्साह बढ़ाया गया। भक्तों की टोली में मंजू शर्मा, रीना मिगलानी, सोनू, सील, वंदना चावला, उर्मिल अरोड़ा, रजनी, शीला,...

क्या अमेरिका, रूस और चीन के साथ मिलकर जी-3 बना सकता है?

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क्या अमेरिका, रूस और चीन के साथ मिलकर जी-3 बना सकता है?  समझिए इसके पीछे की बदलती कूटनीति! "अब वाशिंगटन, बीजिंग और मॉस्को के बीच एक नया समीकरण बन रहा है, क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हमेशा से ये मानते रहे हैं कि अगर वो पुतिन और शी जिनपिंग से सीधे बातचीत करें, तो दुनिया के बड़े-बड़े विवाद पलक झपकते ही सुलझ सकते हैं।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की "रणनीतिक स्वायत्तता" वाली कूटनीति से जहां अमेरिका, चीन, रूस तीनों बड़े देश घबराए हुए हैं, वहीं फ्रांस, जापान, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और ब्राजील जैसे देश इसमें ही अपना कूटनीतिक भविष्य देख रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों का भी मानना है कि यदि भारत अपने मिशन में कामयाब हो जाता है तो इससे न केवल बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था को बल मिलेगा, बल्कि अमेरिका, रूस और चीन के "हथियारों के सौदागरों" के हाथ-पांव भी ठिठक जाएंगे।  चूंकि समसामयिक वैश्विक परिदृश्य में अरब-खाड़ी देशों में अमेरिका-यूरोप की इज्जत दांव पर पड़ी हुई है, क्योंकि रूस-चीन...

यूपी में 350 से अधिक सीटें जीतकर योगी सरकार लगाएगी हैट्रिक: निषाद

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यूपी में 350 से अधिक सीटें जीतकर योगी सरकार लगाएगी हैट्रिक: निषाद  @ राजनैतिक दुनिया  गाजियाबाद। उत्तरप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अब फिज़ा बननी शुरू हो चुकी है। भाजपा नीत एनडीए गठबंधन के नेताओं ने गाजियाबाद/गौतमबुद्ध नगर में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं, क्योंकि लखनऊ की हवा बनाने में मेरठ मंडल के एनसीआर क्षेत्र की बड़ी भूमिका होती है।  प्राप्त जानकारी के मुताबिक, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष व उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इशारे पर प्रदेश में अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैंl बुद्धवार को वे गाजियाबाद में थे। इसी क्रम में वरिष्ठ भाजपा नेता व पार्षद पति मनोज गोयल ने उनसे भेंट की और पुष्प गुच्छ से स्वागत किया। इस दौरान राजनीतिक वार्ता भी हुई | खासकर उत्तर प्रदेश की राजनीति के बारे में खुलकर चर्चा हुई।  श्री गोयल के मुताबिक, उन्होंने बताया कि आने वाले चुनाव में माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में  350 से अधिक सीट लेकर योगी सरकार हैट्रिक बनाएगी। इस नजरिए से मिशन मोड पर काम चल रहा...