संदेश

आखिर में देश के सामान्य जाति के युवाओं को गांव से महानगर तक क्या करना चाहिए जिससे आरक्षण की जातीय सोच बदले, आर्थिक-सामाजिक पिछड़ापन केंद्र में बने? समझिए

चित्र
Ultimately, what should the general caste youth of the country, from villages to cities, do to change the caste-based approach to reservation and make socio-economic backwardness the center of attention? आखिर में देश के सामान्य जाति के युवाओं को गांव से महानगर तक क्या करना चाहिए जिससे आरक्षण की जातीय सोच बदले, आर्थिक-सामाजिक पिछड़ापन केंद्र में बने? समझिए विस्तार से...... @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक आखिर देश के सामान्य जाति के युवाओं को गांव से महानगर तक क्या क्या करना चाहिए ताकि आरक्षण की जातीय, धार्मिक व क्षेत्रीय सोच बदले और संवैधानिक रूप से 'पददलित' गरीब प्रतिभावान लोगों को भी भविष्य में बराबरी का मौका मिले? निःसंदेह यह एक ऐसा जटिल प्रश्न है, जो उन सभी राजनीतिक दुविधाओं के समुचित जवाब दे सकता है, जिससे अक्सर राजनेता, उनके दल, अधिकारी, न्यायाधीश, संपादक आदि भागते तो हैं, लेकिन आपकी एकजुटता के बाद भाग नहीं पाएंगे, बल्कि सवालों के चक्रब्यूह में घिरकर अपनी जनतांत्रिक राजसी सुविधाओं को गंवाएंगे, जो गुलामी काल से जारी सत्तागत अतार्किक सुविधाओं को...

जंतर-मंतर से सियासी झाड़फूंक: संविधान, राजनीति और सामाजिक न्याय की असली परीक्षा!

चित्र
जंतर-मंतर से सियासी झाड़फूंक: संविधान, राजनीति और सामाजिक न्याय की असली परीक्षा! (Political exorcism from Jantar Mantar: The real test of the Constitution, politics and social justice!) @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक नई दिल्ली स्थित ऐतिहासिक धरना-प्रदर्शन स्थल "जंतर-मंतर" (वोट क्लब के बाद) पर 21 अगस्त 2026 को हुआ ‘आरक्षण हटाओ’ आंदोलन वास्तव में आरक्षण सुधार मुहिम बनकर रह गया। हालांकि इसके सामाजिक मिजाज और जनहितकारी तेवरों ने यह स्पष्ट कर दिया कि यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति के लिए महज एक और धरना नहीं है, बल्कि यह उस असंतोष की राजनीतिक अभिव्यक्ति है जो सरकारी नौकरियों, प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्च शिक्षा में अवसरों को लेकर सामान्य वर्ग के एक प्रतिभाशाली हिस्से, खासकर जेन-जी युवाओं में दिखाई दे रहा है। साथ ही प्रौढ़ और बुजुर्ग समाजसेवियों का समर्थन भी उन्हें प्राप्त है।  इसलिए जंतर-मंतर की सियासी झाड़फूंक पर गौर फरमाना आवश्यक है, क्योंकि संविधान, राजनीति और सामाजिक न्याय की असली परीक्षा यहीं से शुरू होती है जो कब खत्म होगी, शायद नेताओं को भी नहीं पता, क...

USCIRF बनाम RSS: आरोप, अधिकार-सीमा और भारत-अमेरिका संबंधों की अग्निपरीक्षा

चित्र
USCIRF vs RSS: Allegations, limits, and a litmus test for India-US relations USCIRF बनाम RSS विवाद के ऊपर आरोप, अधिकार-सीमा और भारत-अमेरिका संबंधों की अग्निपरीक्षा के बादल मंडराने लगे हैं। इसलिए  तथ्य-जांच के बाद बड़ा सवाल यह है कि क्या USCIRF की रिपोर्ट चेतावनी है या कूटनीतिक दबाव का औजार? समझिए विस्तार से @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) ने एक बार फिर भारत को लेकर अपनी कठोर भाषा तेज कर दी है।गत 20 अगस्त 2026 को RSS प्रमुख मोहन भागवत की प्रस्तावित अमेरिका यात्रा से ठीक पहले आयोग के अध्यक्ष आसिफ महमूद (मुस्लिम) और आयुक्त जीन मिल्स (ईसाई) ने RSS नेताओं को उच्चस्तरीय अमेरिकी मुलाकातों और रजनयिक सम्मान से दूर रखने तथा धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए जाने वाले RSS सदस्यों पर प्रतिबंध लगाने की वकालत की।  उल्लेखनीय है कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के 29 अगस्त 2026 को न्यूयॉर्क में Universal Oneness Celebrations में शामिल होने का कार्यक्रम है। यह आयोजन American Hindus for Engagement and Dialogue (A...

अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा से चीनी-पाकिस्तान में मचेगा हड़कंप!

चित्र
US Ambassador Sergio Gour's visit to Jammu and Kashmir will cause a stir in China and Pakistan! अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा से चीनी-पाकिस्तान में मचेगा हड़कंप! अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर की जम्मू-कश्मीर यात्रा से चीनी-पाकिस्तान में हड़कंप मच गया है। यह मोदी कूटनीति का ही करिश्मा है कि जब जब कोई भारत को घेरने की कोशिश करता है तो खुद ही घिरता हुआ महसूस करने को अभिशप्त हो जाता है। जानिए विस्तार से.... @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जरा गौर कीजिए, जब चीन अरुणाचल प्रदेश में भारत को आंखें दिखा रहा हो, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का  जम्मू-कश्मीर/लद्दाख पहुंचना और जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताना भारतीय कूटनीति की कितनी बड़ी सफलता है, क्योंकि यह परोक्ष रूप से चीन को संदेश है कि भारत का साथ मिलते ही अमेरिका अन्य एशियाई 'बदमाशों' को रौंद डालेगा।  उधर, पाकिस्तान को संदेश है कि इस्लामिक नाटो उसकी सुरक्षा की गारंटी नहीं बनेगा, यदि अमेरिका खुलकर भारत के साथ खड़ा रहेगा। जी हां, अमेरिकी राजदूत की 19–20 अगस्त 202...

Which of the five most celebrated third-generation BJP leaders has the brightest political prospects? Understand this seriously.

चित्र
आखिर भाजपा की तीसरी पीढ़ी के पांच बहुचर्चित नेताओं में से किसकी सियासी संभावनाएं हैं बुलंद, समझिए गम्भीरता से @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय जनता पार्टी की तीसरी पीढ़ी के नेताओं में यूँ तो कई छुपे रुस्तम हैं, जो समय के रथ पर सवार होकर सामने आएंगे, लेकिन फिलवक्त जो सर्वाधिक चर्चा में हैं, उनमें उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, असम के मुख्यमंत्री हिमंता विश्व शर्मा, बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुभेन्दु अधिकारी की अपनी अपनी राजनीति शैली और सियासी संभावनाएँ हैं। चूंकि सबने अपने अपने स्वतंत्र तरीके से अपना अपना क्षेत्रीय कद मजबूत किया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से तालमेल बिठाकर अपना राष्ट्रीय राजनीतिक कद बढ़ाया है।  इसलिए इनमें से मोदी-शाह का समयानुकूल व मनोनुकूल सर्वश्रेष्ठ उत्तराधिकारी कौन बन सकता है, यह तो भविष्य के गर्भ में है, लेकिन यह फैसला भी जब होगा तो पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के फैसले की तरह चौंकाने वाला ही होगा।...

'भूमिहार ब्राह्मण' जाति को सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 'भूमिहार' दर्ज करना 'ओबीसी राजनीति' का षड्यंत्र नहीं तो क्या है?

चित्र
(If registering the 'Bhumihar Brahmin' caste as just 'Bhumihar' in government documents is not a 'conspiracy' of 'OBC politics' then what is it?) भूमिहार ब्राह्मण' जाति को सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 'भूमिहार' दर्ज करना 'ओबीसी राजनीति' का षड्यंत्र नहीं तो क्या है? बिहार के जाति विशेष के लोग जानना चाहते हैं। बताइए नहीं तो लालू प्रसाद की तरह सत्ता से बेदखल होने का इंतजार कीजिए। प्रशांत किशोर आपकी रिक्तता की पूर्ति के लिए तैयार है, पर्दे के पीछे से, जैसी की चर्चा है। समझिए विस्तार से..... @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार में भूमिहार ब्राह्मण' जाति को सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 'भूमिहार' दर्ज करना 'ओबीसी राजनीति' का 'षड्यंत्र' नहीं तो क्या है? यह सवाल इसलिए कि किसी भी राजसत्ता की प्रकृति और उसके कर्ता-धर्ता व अन्य सिपहसालारों का चरित्र ही षड्यंत्रकारी/शरारती होता है, कुछेक अपवादों को छोड़कर। बिहार में जाति विशेष के साथ यही हो रहा है। ऐसा इसलिए कि राजसत्ता जनित षड्यंत्र के शिका...

परीक्षाओं में व्यापक सुधार और पेपर लीक रोकने से जुड़े यक्ष प्रश्नों को समझिए

चित्र
परीक्षाओं में व्यापक सुधार और पेपर लीक रोकने से जुड़े यक्ष प्रश्नों को समझिए (Understand the Yaksha questions related to comprehensive reforms in examinations and prevention of paper leaks) "यद्यपि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने छात्रों-युवाओं को पेपर लीक रोकने से लेकर परीक्षा प्रणालियों में सुधार का कदम उठाए जाने का भरोसा दिया है, फिर भी केंद्र सरकार से कुछ बुनियादी यक्ष प्रश्न पूछना लाजिमी है, क्योंकि सिस्टम के सड़ांध से छात्र परेशान हैं।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पेपर लीक अब केवल किसी एक परीक्षा या किसी एक राज्य की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह मेहनत, मेरिट, रोजगार, प्रशासनिक विश्वसनीयता और देश की मानव पूंजी से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। लिहाजा परीक्षाओं में व्यापक सुधार अपेक्षित है। यूँ तो स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने छात्रों-युवाओं को पेपर लीक रोकने से लेकर परीक्षा प्रणालियों में सुधार का कदम उठाए जाने का भरोसा दिया है, फिर भी केंद्र सरकार से कुछ बुनियादी यक्ष ...