आखिर तेल के वैश्विक खेल से कैसे और कबतक निबटेगा भारत?
आखिर तेल के वैश्विक खेल से कैसे और कबतक निबटेगा भारत? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिका की ब्रितानी साम्राज्यवादी चाहत से विकासशील दुनिया एक बार फिर संकट में फंस चुकी है। पहले कुवैत-इराक युद्ध के बहाने और अब इजरायल-ईरान युद्ध की आड़ लेकर अमेरिका ने जो युद्ध और तेल का खेल किया, उससे अमेरिकी कम्पनियां तो मालामाल हुईं, लेकिन इससे अभिशप्त विकासशील देश तबाह! वैसे तो पश्चिम और मध्य-पूर्व एशियाई देशों के बीच आपसी प्रतिस्पर्धा पैदा करके अमेरिका अपनी और अपने डॉलर की बादशाहत बनाए रखता है, और जब भी उसकी नीति को इराक, ईरान जैसे मजबूत देशों से चुनौती मिलती है तो उन्हें वह बर्बाद कर देने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ता। देखा जाए तो अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद, ड्रग्स स्मगलिंग और नानाविध उकसाऊ लोकतांत्रिक संगठन, जो धर्म और क्षेत्र के नाम पर लक्षित जगहों पर उन्माद पैदा करते आये हैं, वे सब उसके ही तो घिनौने चेहरे हैं, जिससे दुनिया अब वाकिफ हो चुकी है। उधर, जब अमेरिकी खलनीति पर पलटवार स्वरूप रूस, चीन, फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी और भारत की दिलचस्पी भी अरब और खाड़ी के देशों में बढ़ी त...