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'भूमिहार ब्राह्मण' जाति को सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 'भूमिहार' दर्ज करना 'ओबीसी राजनीति' का षड्यंत्र नहीं तो क्या है?

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(If registering the 'Bhumihar Brahmin' caste as just 'Bhumihar' in government documents is not a 'conspiracy' of 'OBC politics' then what is it?) भूमिहार ब्राह्मण' जाति को सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 'भूमिहार' दर्ज करना 'ओबीसी राजनीति' का षड्यंत्र नहीं तो क्या है? बिहार के जाति विशेष के लोग जानना चाहते हैं। बताइए नहीं तो लालू प्रसाद की तरह सत्ता से बेदखल होने का इंतजार कीजिए। प्रशांत किशोर आपकी रिक्तता की पूर्ति के लिए तैयार है, पर्दे के पीछे से, जैसी की चर्चा है। समझिए विस्तार से..... @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार में भूमिहार ब्राह्मण' जाति को सरकारी दस्तावेजों में सिर्फ 'भूमिहार' दर्ज करना 'ओबीसी राजनीति' का 'षड्यंत्र' नहीं तो क्या है? यह सवाल इसलिए कि किसी भी राजसत्ता की प्रकृति और उसके कर्ता-धर्ता व अन्य सिपहसालारों का चरित्र ही षड्यंत्रकारी/शरारती होता है, कुछेक अपवादों को छोड़कर। बिहार में जाति विशेष के साथ यही हो रहा है। ऐसा इसलिए कि राजसत्ता जनित षड्यंत्र के शिका...

परीक्षाओं में व्यापक सुधार और पेपर लीक रोकने से जुड़े यक्ष प्रश्नों को समझिए

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परीक्षाओं में व्यापक सुधार और पेपर लीक रोकने से जुड़े यक्ष प्रश्नों को समझिए (Understand the Yaksha questions related to comprehensive reforms in examinations and prevention of paper leaks) "यद्यपि राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने छात्रों-युवाओं को पेपर लीक रोकने से लेकर परीक्षा प्रणालियों में सुधार का कदम उठाए जाने का भरोसा दिया है, फिर भी केंद्र सरकार से कुछ बुनियादी यक्ष प्रश्न पूछना लाजिमी है, क्योंकि सिस्टम के सड़ांध से छात्र परेशान हैं।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पेपर लीक अब केवल किसी एक परीक्षा या किसी एक राज्य की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह मेहनत, मेरिट, रोजगार, प्रशासनिक विश्वसनीयता और देश की मानव पूंजी से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। लिहाजा परीक्षाओं में व्यापक सुधार अपेक्षित है। यूँ तो स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने छात्रों-युवाओं को पेपर लीक रोकने से लेकर परीक्षा प्रणालियों में सुधार का कदम उठाए जाने का भरोसा दिया है, फिर भी केंद्र सरकार से कुछ बुनियादी यक्ष ...

नोएडा, गौतमबुद्धनगर के 13 गाँवों की जमीन न्यू नोएडा बसाने हेतु नहीं दिए जाने का किसानों ने लिया फैसला

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गौतमबुद्धनगर के 13 गाँवों की जमीन न्यू नोएडा बसाने हेतु नहीं दिए जाने का किसानों ने लिया फैसला नोएडा प्राधिकरण द्वारा खेतिहर जमीन अधिग्रहण के विरोध में ग्राम छायसा-दयानगर के किसानों द्वारा पंचायत का आया निर्णय @ राजनैतिकदुनिया टीम गौतमबुद्ध नगर। रविवार 16 अगस्त को ग्राम छाँयसा, दादरी, गौतम बुद्ध नगर में किसानों की एक बड़ी पंचायत हुई। जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि समुचित मुआवजा धनराशि नहीं मिलने तक कोई भी जमीन नोएडा प्राधिकरण को नहीं दी जाएगी। इस बात की जानकारी बृजपाल मलिक, वैशाली सेक्टर 6 ने दी। उन्होंने दूरभाष पर बताया कि उक्त प्राधिकरण द्वारा जिला गौतमबुद्धनगर के 13 गाँवों की जमीन ली जा रही है, जिसपर न्यू नोएडा बसाया जाना प्रस्तावित है। यही वजह है कि न्यू नोएडा हेतु जमीन अधिग्रहण के विरोध में ग्राम छायसा-दयानगर के किसानों द्वारा पंचायत का निर्णय लिया गया, जिसके अध्यक्ष प्रहलाद मलिक, संचालक  ओमवीर मलिक एडवोकेट एवं मीडिया प्रभारी सुनील मलिक के नेतृत्व में किसान हितों की लड़ाई लड़ने का संकल्प प्रकट किया गया।  इस पंचायत में सर्वसम्मति से निर्णय...

आखिर जन सुराज पार्टी और लोजपा रामविलास के बीच पक रही सियासी खिचड़ी के निहितार्थ क्या हैं? समझिए

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आखिर जन सुराज पार्टी और लोजपा रामविलास के बीच पक रही सियासी खिचड़ी के निहितार्थ क्या हैं? समझिए (What exactly are the implications of the political alliance brewing between the Jan Suraaj Party and the LJP (Ram Vilas)? Let’s understand.) @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार में जन सुराज पार्टी के नवनिर्वाचित विधायक प्रशांत किशोर और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान के बीच जो राजनीतिक खिचड़ी पकने की चर्चा है, वह उत्तरप्रदेश की राजनीति से अभिप्रेरित है। चूंकि प्रशांत किशोर मशहूर चुनावी रणनीतिकार भी हैं और लगभग सभी प्रमुख पार्टियों के रणनीतिक घाटों की पानी का स्वाद चख चुके हैं, इसलिए उनसे जुड़ी इस आशय की चर्चा भी अनायास नहीं है।  राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सामाजिक न्याय क्रांति और मंडल बनाम कमंडल की मतलबी राजनीति की कड़ी में जहां उत्तरप्रदेश में चार-चार बार दलित नेत्री सुश्री मायावती को मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला और उनकी बहुजन समाज पार्टी तीन बार गठबंधन के तहत और एक बार पूर्ण बहुमत से यूपी की सत्ता में आई। ल...

Yaksha Question: Will the goal of Developed India 2047 be achieved in 2075?

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यक्ष प्रश्न: क्या विकसित भारत 2047 का लक्ष्य 2075 में हासिल होगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार यदि आप विकसित भारत 2047 का स्वप्न देख रहे हैं तो थोड़ा संभल जाइए, क्योंकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने यह तर्क दिया है कि यदि भारत की मौजूदा आर्थिक वृद्धि दर, उत्पादकता और रोजगार सृजन की गति में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ, तो भारत को "विकसित देश" बनने में 2047 के बजाय 2075 तक का समय लग सकता है।  बता दें कि यह कोई आधिकारिक सरकारी अनुमान नहीं है, बल्कि कतिपय अर्थशास्त्रियों द्वारा किए गए एक आर्थिक विश्लेषण पर आधारित दृष्टिकोण मात्र है, जो सत्य के निकट है या परे, यह भविष्य के गर्भ में है। हाँ, इतना जरूर है कि इससे विपक्ष को सत्तापक्ष की खिल्ली उड़ाने का एक मौका जरूर मिल गया है। दरअसल, इस संदर्भ में चर्चित अर्थशास्त्री सुरजीत भल्ला ने भी कहा कि यदि वर्तमान गति ऐसी ही बनी रही, तो विकसित भारत का लक्ष्य 2047 तक हासिल करना कठिन हो सकता है। मसलन, Surjit Bhalla का आशय यह है कि केवल उच्च आर्थिक वृद्धि दर पर्याप्त नहीं है। यदि वर्तमान गत...

A total of 13 speeches delivered by Prime Minister Narendra Modi from the ramparts of the Red Fort contain an important saga of development and systemic change.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लाल किले के प्राचीर से दिए गए कुल 13 भाषणों में अंतर्निहित है विकास और व्यवस्थागत बदलाव की महत्वपूर्ण गाथा @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय राजनीति और प्रशासन में प्रधानमंत्री 'नरेंद्र मोदी युग' का खास महत्व है, क्योंकि यही वह अवधि है जब एक विकासशील देश भारत की 'विकसित भारत 2047' की यात्रा प्रारंभ की गई। राष्ट्र हित में इस परिकल्पना को न केवल गढ़ा गया, बल्कि कतिपय युगांतरकारी फैसलों से उन्हें हर भारतीय के मनोमस्तिष्क पर मढ़ने की अनवरत कोशिशें चलती रहीं, जो आज भी जारी है। इस दौर में जिस तरह से आपदा को अवसर में बदलने की जद्दोजहद शुरू हुई, वह सभी के लिए अनुकरणीय है। देखा जाए तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 से 2026 तक लालकिले के प्राचीर से दिए गए 13 स्वतंत्रता दिवस संबोधनों को केवल भाषणों की श्रृंखला मानना अधूरा होगा, क्योंकि इनमें एक स्पष्ट नीति-यात्रा दिखाई देती है—2014 में “न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन” और जनभागीदारी से शुरुआत, फिर गरीब कल्याण व बुनियादी सुविधाएँ, डिजिटल भारत और औपचारिक आर्थिक सुधार, उ...

On the occasion of the 80th anniversary of independence, prominent citizens of Moradabad were sensitized about cancer.

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                                Pub-6262725213669814 आजादी की 80वीं वर्षगाँठ पर मुरादाबाद के प्रतिष्ठित लोगों को कैंसर की बीमारी के दृष्टिगत जागरूक किया # प्रेस क्लब मुरादाबाद और शारदा केयर हेल्थ सिटी ग्रेटर नोएडा की यादगार पहल @ राजनैतिकदुनिया मुरादाबाद। कहते हैं जहां चाह, वहां राह। कुछ ऐसा ही दिखा मुरादाबाद, उत्तरप्रदेश में, जहां स्वतंत्रता दिवस पर आयोजित कैंसर की रोकथाम विषयक चर्चा हुई। इस परिचर्चा पर उक्त कहावत बिल्कुल फिट बैठती है। उल्लेखनीय है कि आजादी की 80वीं वर्षगाँठ पर प्रेस क्लब मुरादाबाद और शारदा केयर हेल्थ सिटी ग्रेटर नोएडा की एक सेवाभावी पहल के माध्यम से मुरादाबाद के प्रतिष्ठित पत्रकारों और गणमान्य लोगों को कैंसर की बीमारी के दृष्टिगत जागरूक किया गया। मिली जानकारी के मुताबिक, स्थानीय नामचीन पत्रकार स्वर्गीय "श्रीमती उषा अग्रवाल प्रेस क्लब भवन", कंपनी बाग मुरादाबाद में प्रेस क्लब  मुरादाबाद (रजिस्टर्ड), मुरादाबाद मंडल द्वारा आयोजित सम्मान एवं स्वतंत्रता दिवस समारोह 2...