अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों पर सवालिया निशान लगा?
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी युद्ध से अंतर्राष्ट्रीय गठबंधनों पर सवालिया निशान लगा? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक पश्चिमी एशिया के लिए अभिशाप साबित हो रहे ईरान-इजरायल युद्ध, कोई साधारण युद्ध नहीं बल्कि एक प्रकार का सभ्यता-संस्कृति संघर्ष है, जिसके बीज इतिहास में ही जमे हुए हैं। एक ओर जहां यह युद्ध इजरायल के लिए उसके अस्तित्व के रक्षा की लड़ाई है, वहीं दूसरी ओर यह युद्ध ईरान के लिए ईसाई मुल्कों के कथित लोकतांत्रिक-आर्थिक दांवपेंचों से ईरान को महफ़ूज रखकर अरब-खाड़ी देशों में एक मजबूत इस्लामिक साम्राज्य स्थापित करने की मन:संकल्पित सोच-समझ और ईरान से वैश्विक इस्लामिक साम्राज्यवाद का दबदबा बढ़ाने के लक्ष्य को केंद्र में रखकर लड़ी जा रही है, जो आगे भी बदस्तूर जारी रह सकती, क्योंकि ईरानी धार्मिक शासन व संगठन का एकमात्र ध्येय यही है। वहीं, पश्चिम एशिया और मध्य-पूर्व के अकूत तेल व गैस भंडार पर जिस तरह से अमेरिकी-यूरोपीय गठबंधन वर्चस्व कायम है, और अपने अपने हितों को लेकर उनके बीच भी अंतर्विरोध उपज चुका है, वह अप्रत्याशित है। जबकि मध्यपूर्व में अमेरिकी वर्चस्...