अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति?
अंतर्राष्ट्रीय नक्शे की सीमा रेखा या भारत पर दबाव की कूटनीतिक रणनीति? "समझिए, चीन, पश्चिम और UN के बीच भारत की कूटनीतिक परीक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के वास्ते भारत अपनी जमीन की रक्षा के साथ-साथ दुनिया के नक्शे में अपनी जमीन की सही कहानी भी सुरक्षित रखे। इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि सीमा पर चीन से मुकाबला जरूरी है; लेकिन भारत की सीमाओं के नैरेटिव पर दुनिया से संवाद उससे भी ज्यादा जरूरी है।” @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक क्या संयुक्त राष्ट्र के नए नक्शे में भारतीय सीमाओं का विवादित चित्रण महज ‘कार्टोग्राफिक एनोमली’ है, या इसके पीछे बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का कोई गहरा संदेश छिपा है? दरअसल भारत को इस सवाल का जवाब भावनाओं में नहीं, बल्कि अत्यंत सतर्क कूटनीति से देना होगा। उल्लेखनीय है कि गत 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने “Correct the Map” प्रस्ताव को 164 मतों के समर्थन से पारित किया। मसलन, इस प्रस्ताव का घोषित उद्देश्य दुनिया के मानचित्रों में महाद्वीपों के आकार को अधिक न्यायसंगत ढंग से प्रदर्शित करना है। भारत ने...