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बुद्धिजीवी पर्व "रक्षा बंधन" को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सियासी फलक पर मजबूत विस्तार दीजिए, इतिहास के निहितार्थ को समझिए

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बुद्धिजीवी पर्व "रक्षा बंधन" को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय सियासी फलक पर मजबूत विस्तार दीजिए, इतिहास के निहितार्थ को समझिए (Give a strong expansion to the intellectual festival "Raksha Bandhan" on the national and international political front, understand the implications of history) "रक्षा बंधन को यदि केवल “बहन राखी बाँधे और भाई रक्षा का वचन दे” तक सीमित रखा गया तो यह पारिवारिक पर्व बना रहेगा। लेकिन यदि इसके ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अर्थ को आधुनिक लोकतंत्र, सामाजिक न्याय, महिला गरिमा, पर्यावरण, नागरिक अधिकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ा जाए तो यह एक असाधारण भारतीय soft-power narrative बन सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक यदि रक्षा बंधन को केवल भाई-बहन के भावनात्मक पर्व के बजाय एक सभ्यतागत, सामाजिक और कूटनीतिक प्रतीक के रूप में पढ़ें, तो इसका विस्तार राष्ट्रीय ही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय राजनीति तक किया जा सकता है। इसी में राष्ट्रीय हित निहित है। इतिहास में राखी/रक्षासूत्र के अनेक अर्थ रहे हैं—व्यक्तिगत स्नेह, सामाजिक संरक्...

फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए, समझिए कैसे बनेगा?

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फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए, समझिए कैसे बनेगा? Make the Farakka Agreement a boon for Bihar-Jharkhand, not a curse. Understand how this will be done? "असली सवाल “फरक्का रहे या हटे?” से आगे है—“फरक्का के कारण पैदा हुए जल, गाद और बाढ़ के लाभ-हानि का न्यायपूर्ण बंटवारा कौन सुनिश्चित करेगा?” और यही बिहार की सबसे मजबूत दलील बन सकती है। इसलिए फरक्का समझौता को बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप नहीं वरदान बनाइए।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक “फरक्का समझौता बिहार-झारखंड के लिए अभिशाप है” यह कहना एक राजनीतिक व क्षेत्रीय तर्क के रूप में तो समझ में आता है, लेकिन तथ्यात्मक रूप से एक जरूरी फर्क यह भी है कि वास्तविक समस्या केवल 1996 के भारत-बांग्लादेश जल-बंटवारा समझौते की नहीं, बल्कि फरक्का बैराज की जल-प्रवाह व्यवस्था, गाद (silt) जमाव और उससे पैदा हुए नदी-भूगोल की भी है, जिस पर गहन चिंतन मनन आवश्यक है ताकि बिहार को बाढ़ के मामले में 1972 के बाद से ही जिस अप्राकृतिक और अमानवीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, उससे मुक्ति मिले। ...

Sharda Care Organises Mega Health Drive in Morena

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Sharda Care Organises Mega Health Drive in Morena # Senior specialists provide consultations as nearly 1,000 people access health screening and medical services @ Rajnaitik Duniya Dijital Morena: Specialist healthcare moved closer to the community in Morena as Sharda Care Healthcity, in association with Rotary Club Chambal, organised a mega health drive that brought together senior doctors, diagnostic screening and consultations for nearly 1,000 people. Held at Government Excellence Higher Secondary School No. 1 on MS Road, the health drive provided residents an opportunity to undergo a range of health investigations and consult specialists from different medical disciplines at a single location. The programme included tests such as blood sugar, haemoglobin, blood pressure, ECG, Bone Mineral Density, Neuropathy Test and Pulmonary Function Test. A major feature of the initiative was the participation of senior specialists from Sharda Care....

जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए

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जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को यूँ आंकिए (How to assess the political maneuvering of Congress and BJP regarding caste census) "कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज करने के लिए स्पष्ट, पूर्व-निर्धारित सूची/कोडिंग व्यवस्था नहीं होगी, तो अलग-अलग नाम, वर्तनी और उपजातियों के कारण आंकड़े अविश्वसनीय हो सकते हैं। इसलिए उसने इसे दुरुस्त करने की मांग उठाई, ताकि जातिगत जनगणना सही तरह से हो सके।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जातिगत जनगणना पर कांग्रेस का भाजपा के खिलाफ मौजूदा हमला केवल “जाति गिनी जाए या नहीं” का सवाल नहीं है, बल्कि असली लड़ाई अब डेटा की विश्वसनीयता, सामाजिक न्याय की राजनीति और उससे बनने वाले नए राजनीतिक समीकरण की है। यही वजह है कि अगस्त 2026 में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मौजूदा जाति-जनगणना पद्धति पर आपत्ति जताई है। इसलिए जातिगत जनगणना सम्बन्धी कांग्रेस-भाजपा के सियासी दांव-पेचों को ऐसे जानिए। कांग्रेस का तर्क है कि यदि जातियों के नाम दर्ज करने के लिए...

जयशंकर और डोभाल की रूस-चीन यात्रा के कूटनीतिक संदेश को ऐसे समझिए

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जयशंकर और डोभाल की रूस-चीन यात्रा के कूटनीतिक संदेश को ऐसे समझिए How to understand the diplomatic message of Jaishankar and Doval's Russia-China visit @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक महान भारतीय कूटनीतिज्ञ आचार्य चाणक्य ने कहा था कि "हर मित्रता के पीछे कुछ स्वार्थ होता है। स्वार्थ के बिना कोई मित्रता नहीं हो सकती। यह एक कड़वा सच है।" अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर उनकी बात हू-ब-हू लागू होती है। उनकी इसी बात से प्रेरणा लेते हुए समकालीन भारतीय नेतृत्व यानी भारत दुनिया की किसी एक शक्ति-धुरी में बंधने के बजाय रूस, चीन और पश्चिम—तीनों के साथ अपने हितों के अनुसार समानांतर कूटनीति चला रहा है। स्वाभाविक है कि कूटनीतिक संतुलन में बाधाएं आएंगी ही और सम्बन्धों में थोड़ी सी गफलत भारत को बहुत क्षति पहुंचा सकती है। इसलिए जब जब ऐसी सम्भावनाएं बलवती दिखाई देती हैं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भरोसेमंद सिपहसालार सक्रिय हो जाते हैं।  वाकई, यह संयोग नहीं है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर रूस में और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल चीन में लगभग एक ही समय में अपने अपने...

SDM Rakesh Sir द्वारा लिखित Bihar Special MCQ Book प्रतियोगी छात्रों के बीच हो रही है बेहद लोकप्रिय

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SDM Rakesh Sir द्वारा लिखित Bihar Special MCQ Book प्रतियोगी छात्रों के बीच हो रही है बेहद लोकप्रिय # अपने डिजिटल संस्करणों के चलते बिहार के बाहर बसे अप्रवासी बिहारियों के बीच दिल्ली-एनसीआर में भी सराही जा रही है यह पुस्तक  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक, दिल्ली-एनसीआर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने गृह अनुमंडल तारापुर (जिला- मुंगेर) को अनुमंडलाधिकारी/अनुमंडल दंडाधिकारी के तौर पर जिस राकेश कुमार का चयन किया है, वह कोई साधारण अधिकारी नहीं, बल्कि असाधारण प्रतिभा के स्वामी हैं। यह बात मैं नहीं, बल्कि उनके द्वारा तैयार की गई “Bihar Special MCQ Book” बोल रही है, जो एक परीक्षा-केंद्रित तैयारी सामग्री के रूप में लॉन्च की गई है।  इस पुस्तक की धूम बिहार से लेकर दिल्ली-एनसीआर तक चंद दिनों में ही मच चुकी है। आज सुबह जब इसकी एक डिजिटल प्रति मुझे मिली, तो समीक्षात्मक नजरिए से मैंने इसका अद्योपरांत अध्ययन किया और इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि बिहार के प्रतियोगी छात्रों के लिए यह वरदान साबित होगी, क्योंकि गागर में सागर सरीखा है। वहीं, बिहार...

आखिर 21वीं सदी की भारतीय सरकार कैसी होनी चाहिए?

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आखिर 21वीं सदी की भारतीय सरकार कैसी होनी चाहिए? After all, what should the Indian government of the 21st century be like? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब केंद्र या राज्यों की मौजूदा सरकारें अपनी 'तुगलकी नीतियों' से समाज के एक बड़े वर्ग यानी बुद्धिजीवियों पर बोझ प्रतीत होने लगी हों, तो फिर प्रबुद्ध लोगों के दिलोदिमाग में यह प्रश्न कौंधना स्वाभाविक है कि आखिर 21वीं सदी की भारतीय सरकार कैसी होनी चाहिए? मेरे विचार से 21वीं सदी की भारतीय सरकार का लक्ष्य “बड़ी सरकार” या “छोटी सरकार” नहीं, बल्कि “सक्षम, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित सरकार” होना चाहिए। ऐसा इसलिए कि भारत जैसे विशाल और विविध देश में सरकार को एक साथ सुरक्षा, सामाजिक न्याय, आर्थिक विकास, रोजगार, शिक्षा और अवसर सुनिश्चित करने हैं। इसलिए इसका मॉडल कुछ ऐसा होना चाहिए: पहला, सरकार कम नहीं—स्मार्ट हो: जहां सरकार की जरूरत है वहां पर्याप्त स्थायी कर्मचारी हों—पुलिस, स्वास्थ्य, शिक्षा, न्याय, रक्षा, नियमन, वैज्ञानिक अनुसंधान और संवेदनशील प्रशासन में। जहां तकनीक काम आसान कर सकती है वहां auto...