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पार्षद कुसुम गोयल ने श्रीराम पार्क, कौशांबी के आसपास 16 नए खंभे लगवाकर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त किया

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पार्षद  कुसुम गोयल ने श्रीराम पार्क, कौशांबी के आसपास  16 नए खंभे लगवाकर प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त किया  # पार्षद द्वारा इस कार्य को कराए जाने के लिए महापौर सुनीता दयाल एवं नगर आयुक्त विक्रमादित्य मलिक का आभार प्रकट किया गया @ राजनैतिक दुनिया  गाजियाबाद। कौशांबी स्थित श्रीराम पार्क (सेंट्रल पार्क) के आसपास 16 नए खंभों को क्षेत्रीय पार्षद कुसुम गोयल द्वारा लगवाए गए हैं। सनातन धर्म मंदिर के पुजारी देवमणि पांडे  द्वारा पूजा करके इसका शुभारंभ मंदिर के अध्यक्ष आशीष गौड द्वारा किया गया।  इस अवसर पर पूर्व पार्षद डॉ मनोज गोयल द्वारा बताया गया कि श्रीराम पार्क के आसपास मुख्य मार्ग पर नगर निगम द्वारा लगाए स्ट्रीट लाइट खंबे गिर गए थे, उनके बदले में कुछ स्थानों पर नए खंभे लगाए गए हैं तथा पार्क के आसपास कुछ जगह पर खंबे नहीं थे, उनको भी लगाया गया है। कौशांबी का सतनाम धर्म मंदिर रोड पर रोशनी कम थी, वहां भी कुछ खंबे लगाए गए हैं ताकि मंदिर में आने जाने वालों को सुविधा हो। पार्षद द्वारा इस कार्य को कराए जाने के लिए महापौर सुनीता दयाल एवं नगर आयुक्त विक्...

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में जेन जी ने एबीवीपी को जीताया, एनएसयूआई को छकाया, समझिए इसके राजनीतिक निहितार्थ

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दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव में जेन जी ने एबीवीपी को जीताया, एनएसयूआई को छकाया, समझिए इसके राजनीतिक निहितार्थ  "जेन-जी युवाओं का रूझान अब भी एबीवीपी के साथ बना हुआ है। चर्चित जेन-जी आंदोलन (CJP) के बाद आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेन-जी युवाओं को खुद से जोड़े रखने का जो बीड़ा उठाया, वह सफल रहा। इसके राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी दूरगामी होंगे।" @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव 2026 के परिणाम घोषित हो चुके हैं, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समर्थित छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने शानदार प्रदर्शन करते हुए केंद्रीय पैनल के चार में से तीन मुख्य पदों (अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव) पर जीत हासिल की है। वहीं उपाध्यक्ष पद पर एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहाँ निर्दलीय उम्मीदवार दीपांशु शौकीन ने बड़ी जीत दर्ज की है। इस चुनाव में कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई का खाता भी नहीं खुल सका। इससे साफ है कि जेन-जी युवाओं का रूझान अब भी एबीवीपी के साथ बना हुआ है। चर्चित जेन-जी...

आतंकी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के बारे में जानिए और उसके प्रमुख कारनामों के विषय में समझिए

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आतंकी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क के अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क के बारे में जानिए और उसके प्रमुख कारनामों के विषय में समझिए "भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने आतंकी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ 14 राज्यों (पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि) में एक साथ बड़े पैमाने पर जॉइंट ऑपरेशन चलाकर 250 से अधिक गुर्गों/सस्पेक्ट्स को गिरफ्तार/हिरासत में लिया और 80 से अधिक FIR दर्ज की हैं।" @ कमलेश पांडेय / वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक शहज़ाद भट्टी नेटवर्क (SBN) पाकिस्तान से संचालित एक कुख्यात हाइब्रिड आतंकी और संगठित अपराध सिंडिकेट है। यह नेटवर्क मुख्यतः पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के इशारे पर भारत में आतंकी गतिविधियों, लक्षित हत्याओं और हथियार-ड्रग्स की तस्करी को अंजाम देता है। यही वजह है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने इस संगठन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत इसे आतंकवादी संगठन घोषित कर बैन कर दिया है। आइए सबसे पहले इसके अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की संरचना  को समझते हैं:- https://www.pravakta.com/learn-ab...

चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के कूटनीतिक मायने

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चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग की तीन दिवसीय अमेरिका यात्रा के कूटनीतिक मायने "चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) और दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शी जिनपिंग का स्वागत करने और स्टेट डिनर देने के फैसले से साफ है कि दोनों महाशक्तियां तनाव को कम कर नए तालमेल की ओर बढ़ना चाहती हैं।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निमंत्रण पर 23 से 25 सितंबर 2026 तक अमेरिका की राजकीय यात्रा पर रहेंगे। शी जिनपिंग 23 सितंबर को वाशिंगटन पहुंचेंगे। उनका यह दौरा 25 सितंबर को समाप्त होगा, जिसके बाद उनकी वापसी होगी। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच शिखर वार्ता होगी, जिसमें व्यापार, टैरिफ, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अमेरिका यात्रा वैश्विक भू-राजनीति (Geopolitics) और दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रह...

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाने वाले दुनिया भर में फेैलाते जा रहे हैं अशांति! यह एक गंभीर आत्मचिंतन का अवसर?

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अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस मनाने वाले दुनिया भर में फेैलाते जा रहे हैं अशांति! यह एक गंभीर आत्मचिंतन का अवसर?        (21 सितंबर, अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर विशेष)  "जिस दौर में शांति दिवस मनाया जा रहा है, उसी दौर में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में युद्ध, नस्लीय हिंसा और भू-राजनीतिक तनाव चरम पर हैं। संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतर्राष्ट्रीय संगठन, जिनका मुख्य उद्देश्य दुनिया को युद्ध से बचाना था, संघर्षों को रोकने में कमजोर साबित हो रहे हैं। यह अशांति दर्शाती है कि शांति स्थापित करने के पारंपरिक तरीके अब अप्रभावी साबित हो रहे हैं।" @ कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  प्रतिवर्ष 21 सितंबर को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस केवल एक तारीख या रस्म नहीं है, बल्कि दुनिया भर में पसरती अशांति के बीच एक गंभीर आत्मचिंतन का अवसर है। ऐसे समय में जब संघर्ष, वैमनस्यता और अशांति हर ओर पैर पसार रहे हैं, इस दिन का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस पर हर तरफ फैलती अशांति के मुख्य मायने इस प्रकार हैं:-  ए...

आखिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वीटो प्राप्त देशों की अनर्गल भूमिका पर उठते ज्वलंत सवालों की कब तक उपेक्षा करेगी शेष दुनिया?

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आखिर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के वीटो प्राप्त देशों की अनर्गल भूमिका पर उठते ज्वलंत सवालों की कब तक उपेक्षा करेगी शेष दुनिया? "वास्तव में, सुरक्षा परिषद को पंगु बनाने में रूस और अमेरिका सबसे आगे हैं, क्योंकि ये दोनों देश अपने भू-राजनीतिक स्वार्थों और सहयोगियों को बचाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय कानूनों को सबसे ज्यादा ताक पर रखते हैं। इसके बाद चीन का नंबर आता है, जो अपनी आर्थिक और सैन्य ताकत के बल पर वैश्विक जवाबदेही से बचता है।" @ कमलेश पांडेय/ वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि "समरथ को नहीं दोष गोसाईं।" यानी जो लोग धन और बल से ताकतवर होते हैं वो कुछ भी करें, दुनिया उनके दोष नहीं गिनती/मानती। संयुक्त राष्ट्र संघ प्रमुख एंटोनियो गुटेरस ने भी कुछ ऐसी ही कड़ी आलोचना दुनियावी वीटो शक्ति प्राप्त देशों की, की है और दो टूक शब्दों में कहा है कि "जो वैश्विक शक्तियां खुद अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करती हैं, वे ही सुरक्षा परिषद में बैठी हैं। इससे सुरक्षा परिषद पंगु हो गई है। इसलिए इस वैश्विक संस्था मे...

हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए

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हिंदी भाषा को राजनीति नहीं, जमीनी सच्चाई की दृष्टि से देखिए  "हिंदी भाषा भारत को जोड़ने का एक सशक्त माध्यम है, लेकिन इसे किसी राजनीतिक एजेंडे या अनिवार्यता के बजाय आपसी संवाद और बाजार की जरूरत के तहत स्वाभाविक रूप से विकसित होने देना ही देश के बहुभाषी ताने-बाने को मजबूत रख सकता है।" @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक  भारत में हिंदी भाषा को लेकर चलने वाली राजनीति और उसकी जमीनी सच्चाई के बीच एक बड़ा अंतर है, जो लगातार गहराता चला गया। हालांकि अब इसे पाटने और इससे लेकर गाहे बगाहे उत्पन्न होते रहने वाले मतभेदों को दूर करने की जरूरत है। एक तरफ जहां हिंदी को राजनीतिक ध्रुवीकरण और भाषाई अस्मिता के हथियार के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, वहीं व्यावहारिक धरातल पर इसकी स्थिति बिल्कुल अलग नजर आती है। इसलिए जनसामान्य के नजरिए से ही इसका सम्यक समाधान अपेक्षित है। https://www.pravakta.com/assess-the-hindi-language-from-the-perspective-of-ground-reality-not-politics/ खासकर भारतीय अभिजात्य वर्ग यानी अंग्रेजी दां लोगों के इशारे पर दक्षिण-पश्चिम-पूर्वी भ...