अमेरिका-यूरोप-इजरायल के खिलाफ चीन-रूस-ईरान में बढ़ती आर्थिक-सामरिक भागीदारी के वैश्विक निहितार्थ
अमेरिका-यूरोप-इजरायल के खिलाफ चीन-रूस-ईरान में बढ़ती आर्थिक-सामरिक भागीदारी के वैश्विक निहितार्थ @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद आए दिन गहराते जा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान का रूस और चीन के साथ आर्थिक और सामरिक समझौता लगातार मज़बूत होता जा रहा है। निकट भविष्य में इसके और प्रगाढ़ होने के आसार हैं। देखा जाए तो यह पारस्परिक और त्रिपक्षीय समझदारी दुनिया भर में ही सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह खाड़ी और अरब देशों में अमेरिकी/इजरायली-पश्चिमी वर्चस्व, वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था और व्यापार-ऊर्जा संरचना पर सीधा प्रभाव डालेगी। ऐसा ही हो भी रहा है। इस घटनाक्रम से कमोबेश भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक स्वायत्तता भी प्रभावित होगी। इसलिए आइए इस रणनीतिक घटनाक्रम के विभिन्न विश्वव्यापी प्रभावों को क्रमबद्ध रूप से समझते हैं। क्योंकि अमेरिका-यूरोप-इजरायल के खिलाफ चीन-रूस-ईरान में बढ़ती आर्थिक-सामरिक भागीदारी के वैश्विक निहितार्थ स्पष्ट हैं। पहला, वैश्विक शक्ति संतुलन पर प्रभाव: रूस–चीन–ईरान “त्रिकोण” पश्चिमी प्रभुत्व वाली एकध्रुवीय दुनिया के वि...