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After all, when will you understand the role of painting and fine arts in child development in the digital AI era?

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आख़िर डिजिटल एआई युग में बाल विकास में चित्रकला एवं फाइन आर्ट्स की भूमिका को कब समझिएगा? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ संघर्ष शर्मा, फाइन आर्ट्स जॉर्नलिस्ट, दिल्ली-एनसीआर मानव सभ्यता के विकास का इतिहास इस बात का साक्षी है कि कला ही मनुष्य की मूलभूत अभिव्यक्ति का उत्कृष्ट माध्यम रही है। आदिमानव द्वारा गुफाओं की दीवारों पर बनाए गए चित्र केवल सजावट नहीं थे, बल्कि वे तत्कालीन अनुभव और भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम थे। यही परंपरा समय के साथ विकसित होकर चित्रकला, मूर्तिकला, वास्तुकला और अन्य ललित कलाओं के रूप में मानव संस्कृति का अभिन्न अंग बन गई। आज भी समाज की सांस्कृतिक समृद्धि का मूल्यांकन उसकी कला और साहित्य से ही किया जाता है। चित्रकला केवल मनोरंजन या अवकाश का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य के बौद्धिक और सांस्कृतिक विकास का आधार है। इसलिए स्वाभाविक सवाल है कि आख़िर डिजिटल एआई युग में बाल विकास में चित्रकला एवं फाइन आर्ट्स की भूमिका को कब समझिएगा? अनुभव बताता है कि वर्तमान समय में शिक्षा प्रणाली तेजी...

On International Justice Day, the Yaksha question of the irony of protracted justice

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अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस पर दीर्घसूत्री न्याय की विडंबना का यक्ष प्रश्न https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अंतर्राष्ट्रीय न्याय दिवस (17 जुलाई) केवल न्याय की महत्ता का स्मरण कराने का अवसर नहीं है, बल्कि यह स्वयं से एक कठिन प्रश्न पूछने का भी दिन है—क्या वर्षों बाद मिला न्याय वास्तव में न्याय कहलाता है? वाकई आज दुनिया के अनेक देशों की तरह भारत में भी करोड़ों मुकदमे लंबित हैं। अनेक वादियों की पूरी उम्र अदालतों के चक्कर लगाते-लगाते बीत जाती है। कई मामलों में निर्णय तब आता है जब पीड़ित या आरोपी इस दुनिया में ही नहीं रहते। ऐसे में न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है और इस खास दिवस पर प्रासंगिक भी। आखिर हमें यह समझना ही होगा कि 21वीं सदी के भारत की न्यायिक व्यवस्था की सफलता इस बात से नहीं आंकी जाएगी कि उसने कितने ऐतिहासिक फैसले दिए, बल्कि इस बात से आंकी जाएगी कि उसने आम नागरिक को कितनी जल्दी, कितनी निष्पक्षता से और कितनी कम लागत में...

The pilgrimage to Lord Pashupatinath is a bridge of faith, culture and India-Nepal friendship: Dr. Dinesh Chandra

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भगवान पशुपतिनाथ की यात्रा है आस्था, संस्कृति और भारत-नेपाल मैत्री का सेतु: डॉ दिनेश चंद्र @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 उत्तरप्रदेश के निवर्तमान आईएएस अधिकारी और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद व जनसंवेदनाओं के मशहूर अभिव्यक्ति कर्ता लेखक डॉ दिनेश चंद्र ने गत दिनों नेपाल की राजधानी काठमांडू स्थित भगवान पशुपतिनाथ तीर्थस्थल की यात्रा की। अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने मुख्य महंत जी का आशीर्वाद लिया और भारत राष्ट्र की ओर से बाबा काशी विश्वनाथ और मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीरामजी, अयोध्या का अंग वस्त्रम उन्हें भेंट करते हुए सम्मानित किया। वहीं मुख्य महंत जी ने भी तीर्थस्थल पटका प्रदान करके डॉ दिनेश चंद्र को सम्मानित किया और अपना आशीर्वाद दिया।  उल्लेखनीय है कि इस आशय की वीडियो व तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जब "राजनैतिकदुनिया" ने उनसे मोबाइल पर संपर्क किया तो अपनी परम पावन तीर्थयात्रा का अनुभव देश व समाज से साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत...

Bankipur By-Election 2026: Sudden change in BJP candidate raises burning questions?

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बांकीपुर उपचुनाव 2026: भाजपा उम्मीदवार के यकायक बदलाव से उभरने लगे सुलगते सवाल? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 भोजपुरी में एक कहावत है- लइका मालिक, बूढ़ दीवान, मामला बिगड़े साँझ बिहान। यानी कि जिस घर का लड़का मालिक होता है और बूढ़ा व्यक्ति दीवान मतलब सलाहकार की भूमिका में आ जाता है तो वहां अच्छे और कार्यकुशल सुझावों पर भी विलंब से निर्णय होने के चलते मामला साँझ यानी शाम से सुबह तक कभी भी उलझ यानी बिगड़ जाता है। यदि पुरानी कुछ बातों को भूला भी दिया जाए तो हाल ही में बांकीपुर उपचुनाव में भाजपा द्वारा घोषित उम्मीदवार अभिषेक कुमार सिन्हा (बंटी) का नामांकन वापस लेकर नीरज कुमार सिन्हा को उम्मीदवार बनाए जाने से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन की काफी किरकिरी हुई है।  चूंकि उनका चयन प्रधानमंत्री मोदी के स्तर पर यकायक हुआ है, इसलिए उँगली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ भी उठी। बात इतनी सी नहीं है, बल्कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और उनके चहेते मुख्यमंत...

In the world of advertising, AI has posed an exciting challenge to human creativity.

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विज्ञापन की दुनिया में एआई ने इंसानी क्रिएटिविटी के समक्ष पैदा की एक उत्साहबर्द्धक चुनौती @ डॉ. संघर्ष शर्मा, फाइन आर्ट्स जॉर्नलिस्ट https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 विज्ञापन की लोकलुभावन दुनिया ने हमेशा से ही अपने समय की तकनीकी तरक्की को प्रदर्शित किया। यह अपने दौर में हुए बदलावों का प्रतिबिंब भी समझा गया, जो यह दिखाता रहा कि तकनीकी दुनिया कितनी तेजी से हमारे जनजीवन का अभिन्न अंग बनती जा रही है। पहले मौखिक प्रचार-प्रसार में सहयोगी बने यंत्रों, फिर हाथ से बने पोस्टरों और अब अखबारों में छपने वाली चित्ताकर्षक तस्वीरों से लेकर डिफरेंट फोटोग्राफी के विभिन्न प्रासंगिक अंदाजों, टीवी विज्ञापनों और डिजिटल मार्केटिंग तक के हर नए आविष्कार ने, देश-प्रदेश के समाज के समक्ष व्यवहारिक उत्पादों और प्रासंगिक विचारों को पेश करने के तरीके को बदल दिया। बहरहाल इस बदलाव को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आगे बढ़ा रहा है।  सवाल है कि विज्ञापन की दुनिया में एआई ने इंसानी क्रिएटिविटी के समक्ष एक उत्साहबर्द्धक चुनौती पैदा की है...

After all, who will give a proper answer to the questions raised on anethol mixed petrol?

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आखिर एनाथाल मिश्रित पेट्रोल पर उठते सवालों का माकूल जवाब कौन देगा? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (Ethanol Blended Petrol - EBP) को लेकर जनमानस में कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। भले ही केंद्र सरकार और उसके मुलाजिम इस नीति के पक्ष में लगातार तर्क देते आए हैं, लेकिन कुछ मुद्दों पर लोगों और विशेषज्ञों को लगता है कि पर्याप्त स्पष्टता नहीं दी गई है। मजे की बात तो यह है कि एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर उठने वाले सवालों का जवाब देने की प्राथमिक जिम्मेदारी अलग-अलग संस्थाओं की है, जो इस प्रकार हैं:- पहली, भारत सरकार: नीति बनाने, उसके उद्देश्यों और प्रभावों को स्पष्ट करने की मुख्य जिम्मेदारी सरकार की है। दूसरी, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय: एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम, उसके वैज्ञानिक आधार और नीति संबंधी प्रश्नों का उत्तर देने वाला प्रमुख मंत्रालय। तीसरी, भारतीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड तथा तेल विपणन ...

After all, why are peace agreements between America and Iran being broken again and again? Who is responsible?

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आखिर अमेरिका और ईरान के शांति समझौते बार बार क्यों टूट जा रहे हैं? जिम्मेदार कौन? https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक ईसाई मुल्कों का अगुवा अमेरिका और इस्लामिक देशों का कथित अगुवा ईरान के बीच होने वाले शांति समझौते बार-बार यानी ब्रेक के बाद टूट जा रहे हैं। यह स्थिति वैश्विक शांति और प्रगति के लिए अच्छी नहीं समझी जा सकती है।सवाल है कि आखिर इन शांति समझौतों के टूटने की क्या वजह है? क्या कतर, पाकिस्तान और कुवैत जैसे मुल्क इनके बीच मध्यस्थता करवाने में विफल हो चुके हैं? या फिर अमेरिका-ईरान के अंतरराष्ट्रीय दांवपेंच इनकी समझ से बाहर हैं!  राजनीतिक व कूटनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इसका  कारण केवल एक घटना नहीं, बल्कि दशकों से चली आ रही गहरी अविश्वास की राजनीति है। इसके पीछे जी-7 और ब्रिक्स के अलावा ओआईसी देशों की खल नीति का  भी बड़ा हाथ है। भोजपुरी में एक कहावत है- "जबरा मारे, रोवन न दे।" यानी कि मजबूत व्यक्ति किसी की लक्षित पिटाई करता है तो रोने भी नहीं देता ह...