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भारत नरक नहीं, स्वर्ग का अहसास है, मानवता का वैभव, सभ्यता का प्रकाश है। ऐसे समझिए

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'भारत नरक नहीं, स्वर्ग का अहसास है, मानवता का वैभव, सभ्यता का प्रकाश है।' ऐसे समझिए  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत के लिए अब तक कई बार ऐसे तीखे या अपमानजनक बयान दिए हैं जिनके पश्चात उन्होंने या तो रुख बदल दिया या सॉफ्ट स्टेटमेंट जारी करके अपनी बात पर “यू‑टर्न” लेकर साफ‑साफ मुकर जैसा अंदाज़ दिखाया है। हाल ही में फिर उन्होंने “नरक जैसा देश” वाला बयान दिया और फिर यू‑टर्न ले लिया। उनका रवैया दुनिया का थानेदार समझे जाने वाले सर्वाधिक विकसित और धनी देश अमेरिका के शालीन, सभ्य और सुसंस्कृत होने पर सवालिया निशान लगाने को काफी है।  खासकर भारत के खिलाफ जिसका अंतर्राष्ट्रीय आचरण सदैव मर्यादित रहता आया है। भारत पैसे वालों की कद्र नहीं करता, क्योंकि यह तो देशी-विदेशी अपराधियों और वेश्याओं के पास भी खूब होता है, लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा बिल्कुल नहीं होती। ट्रंफ के नेतृत्व में अमेरिका इसी फूहड़ता से ग्रसित है, अभिशप्त है और अंतर्राष्ट्रीय गुंडई में इतना आगे निकल चुका है कि उसके मित्र देश भी उसके साथ खड़े हो...

बिहार में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने सियासी मायने

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बिहार में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने सियासी मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक बिहार के नए मुख्यमंत्री और भाजपा के भविष्य द्रष्टा नेता सम्राट चौधरी ने शहरीकरण के क्षेत्र में अब तक का सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य के 11 प्रमुख शहरों में ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है। सरकार का उद्देश्य बिना योजना के बनी कॉलोनियों के विस्तार पर रोक लगाना और भू-माफियाओं पर नकेल कसना है। इसके परिणामस्वरूप इन टाउनशिप के लिए निर्धारित क्षेत्रों के भीतर जमीन के पंजीकरण, हस्तांतरण और किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य पर अभी से प्रभावी तत्काल रोक लगा दी गई है। इसके सियासी मायने स्पष्ट हैं- पहला, नई सम्राट सरकार विकास ने नए प्रतिमान स्थापित करने को प्रतिबद्ध है। इसलिए बिहार में सम्राट कैबिनेट ने अपनी पहली ही बैठक में 11 नए ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने का जो फैसला किया है, वह संतुलित और समावेशी विकास के दृष्टिगत सोचा-समझा और सधा हुआ कदम है। इस नजरिए प्रस्तावित जगहों की सूची निम्नलिखित है, जिनका शैक्षणिक, औद्योगिक और सां...

क्या आप अपनी पर्सनालिटी पर खास लेख चाहते हैं? तो अविलम्ब संपर्क कीजिए 8586800513 पर

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क्या आप अपनी पर्सनालिटी पर कुछ खास लिखना चाहते हैं? तो राजनैतिकदुनिया डॉट ब्लॉग्स्पॉट डॉट कॉम की अनुभवी टीम से संपर्क कीजिए मेरा मानना है कि हरेक व्यक्ति के व्यक्तित्व की अलग अलग खासियतें होती हैं- कोई आध्यात्मिक है तो कोई भौतिक, सामाजिक, सांसारिक, राजनीतिक, व्यवसायिक, सांस्कृतिक, और कोई आपराधिक। आप चाहे जैसे भी हों, प्रकृति के वरदान हैं। बस आप अपने बारे में, अपने लक्ष्यों के बारे में, अपने सपनों के बारे में, अपने संघर्ष के बारे में, क्योंकि इन सबसे ही विकसित होता है हर किसी का आदमकद व्यक्तित्व। इसे शब्द शिल्प, भाव बोधक बनाने के लिए हमसे संपर्क करें। आप इसे संक्षिप्त में डिजिटल मीडिया में शेयर कर सकते हैं या व्यक्तित्व पुस्तक श्रृंखला का आकार भी दे सकते हैं। ✍🏻डिजिटल संपर्क पता:   श्री कमलेश पांडेय, वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक, मीडिया एडवाइजर, सदस्य- प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, रायसीना रोड, नई दिल्ली-100001, Mobile- 8586800513, Email: Rajnaitikduniya@gmail.com🌎🙏🙏

💐राजनैतिकदुनिया डॉट ब्लॉग्स्पॉट डॉट कॉम का संक्षिप्त परिचय, पत्रकारिता के क्षेत्र की गौरवशाली पहल

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                              🌹 राजनैतिकदुनिया डॉट ब्लॉग्स्पॉट डॉट कॉम का संक्षिप्त परिचय, पत्रकारिता के क्षेत्र की गौरवशाली पहल राजनैतिकदुनिया डॉट कॉम के संचालन में तकनीकी सलाहकारों से धोखा मिलने के बाद देश-दुनिया के वैचारिक हालात बदलने और उन्हें सुसंस्कृत बनाने के खातिर हमने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती बैदेरी कुमारी उर्फ बैदेही पांडेय की सलाह पर और सुश्री तेजस्विनी और आयुष्मान यशस्वी की सहमति के बाद अपने प्यारे इकलौते भांजे प्रणय राज के दिली प्रोत्साहन पर  Rajnaitikduniya.blogspot.com/"राजनैतिकदुनिया डॉट ब्लॉग्स्पॉट डॉट कॉम" की शुरुआत की, जो एक क्रांतिकारी पहल साबित हुई।  फिर इसे मैंने अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया, क्योंकि पत्रकार मित्र हमेशा कहते कि नौकरी के साथ साथ कुछ अपना करो। इसलिए राजनैतिकदुनिया डॉट ब्लॉग्स्पॉट डॉट कॉम की अन्य धाराओं की मित्रों के बीच शुरू किया, जिनकी व्यक्तिगत/संस्थागत मीडिया सहयोग के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान है। इससे उत्साहित होकर ही हमलोग पंचायत स्तरीय, विध...

सुशासन और विकास की पत्रकारिता के निमित्त किन-किन मुद्दों को आप कैसे उठाएंगे? ऐसे समझिए

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सुशासन और विकास की पत्रकारिता के निमित्त किन-किन मुद्दों को आप कैसे उठाएंगे? ऐसे समझिए @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक किसी भी देश-प्रदेश के समग्र उत्थान के लिए सुशासन और विकास  पहली शर्त है, जिसका मुख्य स्रोत राजनीति और प्रशासन है। जबकि सुशासन और विकास की पत्रकारिता समाज को मजबूत बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। जानकार बताते हैं कि ऐसी पत्रकारिता न केवल समस्याओं को उजागर करती है, बल्कि समाधान-केंद्रित रिपोर्टिंग के जरिए नीति-निर्माताओं और जनता के बीच पुल का काम करती है। सत्ताधारी नेता और विपक्ष दोनों इस नजरिए से लाभ उठा सकते हैं, बशर्ते कि उनकी नीयत साफ हो।इसके कतिपय तरीके निम्नलिखित हैं-  पहला, जांच-पड़ताल आधारित रिपोर्टिंग करें : केंद्र स्तरीय, राज्य स्तरीय और त्रिस्तरीय पंचायती राज से जुड़ीं विकास परियोजनाओं में भ्रष्टाचार, देरी या गुणवत्ता की जांच करें; और इसके वास्ते स्थानीय स्रोतों, आरटीआई और आधिकारिक दस्तावेजों से सबूत इकट्ठा करें। फिर उन्हें प्रकाशित करें या उन्हें फिल्मांकित करें, ताकि लोगों को हक़ीकत समझ आ जाए। दूसरा, समुद...

भारत व दक्षिण कोरिया के बीच हुई नई डील के सियासी निहितार्थ

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भारत व दक्षिण कोरिया के बीच हुई नई डील के सियासी निहितार्थ  @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक दुनियाभर में भारत की कूटनीति अपने अनोखे अंदाज के लिए चर्चित रहती आई है, क्योंकि हम तमाम हानि-लाभ की परवाह किए बगैर वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवंतु सुखिनः के सभ्यता-संस्कृतिगत सिद्धांतों को अमलीजामा पहनाते आए हैं। हालांकि कोई इसे गुटनिरपेक्षता समझता है तो कोई निज स्वार्थपरकता, जो गलत भी नहीं है। आखिर बिना स्वार्थ साधे परमार्थ भी किया जाए तो कैसे? इसलिए व्यवहारम फलदायकम हमारा मूलमंत्र है। भारत और द#क्षिण कोरिया के बीच हुई नई डील (व्यापार, तकनीक, रक्षा और ऊर्जा सहयोग) को इसी नजरिए से देखने की जरूरत है, क्योंकि इससे ही द्विपक्षीय रिश्तों के साथ‑साथ हिंद‑प्रशांत के रणनीतिक संतुलन में भी गहरे सियासी निहितार्थ निकलते हैं। आइए क्रमबद्ध तरीके से इसे समझते हैं- पहला, भारत की वैश्विक रणनीतिक स्थिति मजबूत होना  सबसे ज्यादा मायने रखता है। जहां भारत‑दक्षिण कोरिया की “विशेष रणनीतिक साझेदारी” को आगे बढ़ाने के घोषणाओं से भारत को उत्तर‑पूर्व एशिया और इंडो‑पैसिफिक में एक अलग ...

प्रधानमंत्री ने महिला कोटा संशोधन बिल सम्बन्धी अपनी सरकार की नाकामियों को विपक्ष के मत्थे मढ दिया

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प्रधानमंत्री ने महिला कोटा संशोधन बिल सम्बन्धी अपनी सरकार की नाकामियों को विपक्ष के मत्थे मढ दिया @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हालिया "राष्ट्र के नाम" संदेश मुख्य रूप से लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक से जुड़े कतिपय संशोधन के असफल होने के बाद आया, जिसमें उन्होंने विपक्ष पर सीधा प्रहार किया। यह संदेश राजनीतिक रूप से विपक्ष को निशाना बनाने और अपनी सरकार की छवि को मजबूत करने का प्रयास था। लेकिन उन्हें ठंडे दिमाग से देश को जवाब देना चाहिए कि जब ओबीसी और ईडब्ल्यूएस को आरक्षण प्राप्त है तो फिर संसद और विधान मंडलों में इसे अविलंब लागू करने के लिए सरकार परिसीमन का लॉलीपॉप क्यों थमा रही है?  या फिर सरकार तदर्थ व्यवस्था क्यों नहीं कर रही है कि राजनीतिक दल घोषित आरक्षण के मुताबिक ही टिकट वितरण करेंगे, अन्यथा उनकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी और चुनाव लड़ने से रोक दिया जाएगा? यही नहीं तमाम राजनीतिक दलों के सांगठनिक पदों में भी यह आरक्षण लागू होगा। जरा सोचिए, गलत तो नहीं कहा! बात छोटी थी, गलती बीजेपी एनडीए सरकार की थी, लेकिन ...