शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया
शिक्षक दिवस: जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने स्कूलों का औचक निरीक्षण किया और बाल बाटिका का महत्व समझाया
# डीएम साहब ने शिक्षकों और छात्रों को विभिन्न प्रकार के गृह उद्योग निर्मित आचारों के स्वाद चखाये और मिड डे मील में बच्चों को देने के निर्देश दिये।
@ कमलेश पांडेय/विशेष संवाददाता
नई दिल्ली/जौनपुर। गुरुवार को उत्तरप्रदेश के जौनपुर जनपद के यशस्वी जिलाधिकारी डॉ दिनेश चंद्र सिंह ने शिक्षक दिवस से पूर्व जनपद के सरकारी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया और छात्रों को "गुरु ब्रह्मा गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वरा:। गुरु साक्षात परब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः।।" का मर्म समझाते हुए कहा कि यह एक संस्कृत गुरु मंत्र है, जिसका अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश्वर (शिव) हैं और गुरु ही साक्षात परब्रह्म हैं, उन गुरु को मेरा नमस्कार है। इसका भावार्थ बताते हुए उन्होंने कहा कि यह मंत्र गुरु की महत्ता को दर्शाता है, जो सृजनहार ब्रह्मा के समान शिष्य में ज्ञान और जागरूकता का सृजन करते हैं, रक्षा करने वाले विष्णु के समान छात्रों में अच्छे गुणों की रक्षा करते हैं, और संहारक शिव के समान अज्ञान को नष्ट करते हैं।
अपने औचक निरीक्षण के क्रम में इस उन्होंने विभिन्न स्कूलों में बच्चों के ज्ञान की वास्तविक जांच भी खुद से ही की और माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशा निर्देशन में शिक्षण प्रणाली में हुए अभूतपूर्व सुधार से संतुष्ट हुए। इस दौरान विद्यालय के शिक्षक व शिक्षिकाओं की मौजूदगी में उन्होंने विद्यालय बाल बाटिका के महत्व को समझाया और आम, अमरूद, सहजन, केला, नींबू आदि लोकप्रिय वृक्षों के वृक्षारोपण कार्य को तेज करने का आह्वान किया, ताकि निकट भविष्य में बच्चों को स्कूली परिसर में ही फल-फूल मुफ्त में मिल सके।
वहीं उन्होंने देशज औषधि तुल्य व पौष्टिक विटामिनों से भरे सहजन आदि पेड़ों व उनकी फलियों के महत्व को दर्शाते हुए बच्चों के सामान्य ज्ञान की परीक्षा भी ली। साथ ही बच्चों को विभिन्न प्रकार के आचार का स्वाद भी चखाये। कुछ पैकेट व जार तो वो अपने साथ लेकर आए और कुछ बाद में भी भिजवाने की बात कही। डीएम डॉ सिंह ने शिक्षकों और छात्रों को विभिन्न प्रकार के गृह उद्योग निर्मित आचारों के स्वाद चखाये और मिड डे मील में बच्चों को देने के निर्देश दिये।
इस बारे में दूरभाष पर पूछे जाने पर डीएम डॉ सिंह ने बताया कि सभी शिक्षकों को प्रणाम करते हुए आज का औचक निरीक्षण उन पूज्य गुरुजनों के लिए जिन्होंने मुझे प्रेरणा देकर इस योग्य बनाया, उन्हीं को समर्पित करते हुए आज ये मैंने आकस्मिक निरीक्षण किया। इसी भाव से मैंने बच्चों को स्वागत किया। उनको खान पान के बारे में जानकारी दी तथा उत्कृष्ट ज्ञान अर्जित करने के लिए बच्चों को उत्प्रेरित किया। साथ ही शिक्षकों से अनुरोध किया कि बच्चों को अद्यतन ज्ञान देकर अपने दायित्वों का निर्वहन करें। ततपश्चात उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को अंग वस्त्रम देकर सम्मानित किया।
जिलाधिकारी डॉ सिंह ने आगे बताया कि आज शिक्षक दिवस है। भले ही किसी भी व्यक्ति के व्यक्तित्व का निर्माण माता-पिता प्राथमिक शिक्षक होते हैं, फिर भी उसके अतिरिक्त व्यक्तित्व के विकास में सर्वाधिक योगदान प्रारंभिक जीवन की शिक्षा के क्रम में जो भी शिक्षक बन्धु बच्चों की शिक्षा देते हैं, उनका महत्व है, क्योंकि कक्षा 1 से 5 तक की शिक्षा के दौरान शिक्षक बच्चों न केवल शब्दों का ज्ञान सिखाते हैं बल्कि उनके आचार विचार और आचरण को एक समसामयिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, सामाजिक विचारों के अनुरूप उनके व्यक्तित्व का निर्माण करने का प्रयास करते हैं, इसलिए प्राइमरी शिक्षक न केवल गुण अपितु उस बच्चे के व्यक्तित्व के निर्माण के समग्र पहलुओं के निर्माण करने के प्रारंभिक शिक्षक होते हैं।
उन्होंने आगे बताया कि चूंकि 1 से 12 साल तक के ही उम्र के बच्चों का मानसिक विकास होता है, इसलिए प्रारंभिक शिक्षकों का महत्व बढ़ जाता है। इसलिए मेरे द्वारा नवाचार के रूप में शिक्षकों से अनुरोध किया गया है कि बच्चों का स्वास्थ्य उत्तम हो, उनका बौद्धिक विकास हो, इसलिए करौंदे के अचार को जो बरसात के दिनों में सबसे सस्ता, सर्वसुलभ और अत्यंत गुणकारी है, इसके गुणों के बारे में मैंने विस्तार से लिखा है, उसको नवचार के रूप में अपनाइए। जिससे कि बच्चों की शिक्षा के साथ साथ उनका मानसिक विकास हो सके और वह स्वस्थ होकर आगे बढ़ सकें। यह एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसको नीति आयोग में नवाचार के रूप में मेरे द्वारा अपनी ओर से संस्तुति की गई है कि इस प्रकार के विचारों को बच्चों की समस्त प्रारंभिक शिक्षा में समेकित करें।
वहीं, शिक्षकों ने बताया कि जिलाधिकारी डॉ सिंह के जनप्रिय व्यवहार से बच्चों का काफी उत्साह बर्द्धन हुआ है। उनमें कुछ कर गुजरने की प्रेरणा जगी है।
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