कृत्रिम रंग-गुलाल कहीं फीका न कर दे आपका हर्ष-उल्लास, इसलिए बरतें ये सावधानियां
वसंतोत्सव होली का कृत्रिम रंग-गुलाल कहीं फीका न कर दे आपका हर्ष-उल्लास, इसलिए बरतें ये सावधानियां @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार रंग पर्व होली पर जब से आधुनिकता का रंग चढ़ा है तब से इसके साइड इफेक्ट्स की चर्चा हर जुबां पर होती रहती है।भला हो भी क्यों नहीं, क्योंकि व्यक्ति विशेष की सेहत का सवाल है। कहा भी गया है कि स्वास्थ्य ही धन है। जब यह धन महफूज रहेगा, तभी होली का उमंग और उत्साह आप अपने स्वजनों, परिजनों व मित्रजनों के साथ शेयर कर पाएंगे। देखा जाए तो मौजूदा दौर में फूलों की होली या सिर्फ चंदन और गुलाल की होली के बढ़ते प्रचलन के पीछे में प्राकृतिक रंगों से इतर रासायनिक रंगों का बहुत बड़ा योगदान है, जो अक्सर आंख समेत चेहरे के लिए अभिशाप बन जाता है और बहुधा चर्म रोगों का भी कारक बनता है। इसके अलावा, अब अबीर-गुलाल में भी मिलावट होने लगी है, जो दमा और श्वास रोगियों के लिए बहुत ही हानिकारक है। अमूमन रंगोत्सव होली खेलने के दौरान आपको क्या क्या अतिरिक्त सावधानियां बरतनी चाहिए, ताकि कृत्रिम रंगों व गुलालों का दुष्प्रभाव आपके ऊपर नहीं पड़े। क्योंकि प्राकृतिक रंगों के मह...