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फ्रांस में हुई ट्रंफ-मोदी की बहुप्रतीक्षित मुलाकात के वैश्विक कूटनीतिक निहितार्थ (Global diplomatic implications of the much-anticipated Trump-Modi meeting in France?

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फ्रांस में हुई ट्रंफ-मोदी की बहुप्रतीक्षित मुलाकात के वैश्विक कूटनीतिक निहितार्थ https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js?client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक जब दुनिया के दो बड़े लोकतांत्रिक देशों के मशहूर राष्ट्राध्यक्ष मिलते हैं तो दुनियावी जनकल्याण की बातें अवश्य छिड़ती हैं। हाल ही में जब फ्रांस में भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump की मुलाकात हुई तो इसे केवल द्विपक्षीय शिष्टाचार भर नहीं मानी जा रही, बल्कि इसके व्यापक राजनीतिक, सामरिक और कूटनीतिक संकेत मिले हैं।  https://pagead2.googlesyndication.com/pagead/js/adsbygoogle.js? client=ca-pub-6262725213669814 वहीं, Narendra Modi और Donald Trump के बीच हालिया मुलाकात को कई विश्लेषक केवल औपचारिक कूटनीतिक संवाद नहीं, बल्कि व्यक्तिगत समीकरणों को पुनर्जीवित करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं। हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों के रिश्तों पर जमी पूरी "बर्फ" पिघल गई है, लेकिन यह स्पष्ट है कि दोनों नेताओं ने सा...

आखिर छोटे छोटे दलों को तोड़वाकर भाजपा/कांग्रेस खुद को या गठबंधन को कितना मजबूत बना पाएंगी? (After all, by engineering the split of small parties, how much will the BJP or Congress be able to strengthen themselves or their alliances?)

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आखिर छोटे छोटे दलों को तोड़वाकर भाजपा/कांग्रेस खुद को या एनडीए/इंडिया गठबंधन को कितना मजबूत बना पाएंगी?            client=ca-pub-6262725213669814 @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारतीय राजनीति में भाजपा या कांग्रेस जैसे बड़े दलों और क्षेत्रीय दलों के संबंध अक्सर सहयोग, प्रतिस्पर्धा और संघर्ष—तीनों पर आधारित होते हैं। यही वजह है कि पहले कांग्रेस द्वारा और अब भाजपा द्वारा छोटे-छोटे क्षेत्रीय और जातीय आधार वाले दलों को अपने साथ मिलाना, उनका विलय कराना या उनके नेताओं को पार्टी में शामिल कराना भारतीय राजनीति की एक महत्वपूर्ण रणनीति रही है।  client=ca-pub-6262725213669814 वाकई कोई कम, कोई ज्यादा, क्योंकि इसका उद्देश्य केवल सीटें बढ़ाना नहीं, बल्कि विपक्षी सामाजिक समीकरणों को कमजोर करना और अपने प्रभाव क्षेत्र का विस्तार करना भी होता है। इस यक्ष प्रश्न समुपस्थित है कि आखिर छोटे छोटे दलों को तोड़वाकर भाजपा/कांग्रेस खुद को या एनडीए/इंडिया गठबंधन को कितना मजबूत बना पाएंगी? देखा जाए तो भारत की बहुदलीय राजनीति में क्षेत्रीय दलों की भूमिक...