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अनुकरणीय व्यक्तित्व: स्व. श्रीभगवान पांडेय बनने की कोशिश कीजिए, समृद्ध बनेगा सकल समाज

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जी हां, संस्कार बोलता है! पढ़िए, समझिए और गुनिये, ताकि बदले यह परिवेश अनुकरणीय व्यक्तित्व: स्व. श्रीभगवान पांडेय बनने की कोशिश कीजिए, समृद्ध बनेगा सकल समाज @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार कहते हैं कि शरीर नश्वर है लेकिन आत्मा अजर-अमर। आत्मा ही परमात्मा है। तो फिर सवाल है कि परमात्मा क्या है, कैसा है, किसमें हैं! यदि इसे समझना है तो देवाधिदेव महादेव के समतापूर्ण आचरण पर गौर कीजिए। वाकई भोलेनाथ का गूढ़ मतलब होता है लोककल्याणकारी, जनकल्याणकारी, सर्वहितकारी। जब कोई व्यक्ति आत्मकल्याण, निजकल्याण के साथ साथ परहित की बात सोचने लगता है तो वह इस धरा पर शिवत्व का अंश समझा जाता है। इनका संसर्ग अच्छा महसूस किया जाता है। ऐसे  लोग विरले मिलते हैं, लेकिन मिलते जरूर हैं, यदि आप पहचानने में पारंगत हैं। इनकी पहचान के लिए आपका विवेक पारंगत होना चाहिए। मैंने भाव प्रणव आध्यात्मिक जगत में इसे महसूस किया और भौतिक जगत में स्पष्ट दीदार भी किया। देश-प्रदेश में जब भी ऐसी शख्सियत मुझसे टकराई तो श्रद्धावनत हुए बिना नहीं रहा। ऐसे लोगों के बारे में लिखना तब सार्थक होता है, जब उनकी इहलीला संपन...