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राष्ट्रीय विरासत को सहेजने या मिटाने का यक्ष प्रश्न

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विरासत को सहेजने या मिटाने का यक्ष प्रश्न @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक भारत में पक्ष विशेष के विरासत को बचाने और मिटाने की कोशिशों को लेकर सत्ताधारी भाजपा और प्रमुख विपक्षी कांग्रेस अब आमने-सामने आ चुकी है। दोनों पार्टियों के बीच जारी वाक-युद्ध से विरासत का यक्ष प्रश्न लोगों के समक्ष समुपस्थित हो चुका है। कहना न होगा कि भारत में देश के विरासत को लेकर राजनेताओं की दृष्टि संकुचित है। हालांकि, भाजपा के मुकाबले कांग्रेस की दृष्टि ज्यादा संकीर्ण प्रतीत हुई है।  उल्लेखनीय है कि कांग्रेस नेत्री सोनिया गांधी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना है और उनकी बहुमुखी विरासत को मिटाना है। श्रीमती गांधी ने यहां तक आरोप लगाया कि नेहरू की बहुमुखी विरासत को मिटाने और इतिहास को फिर से लिखने का एक व्यवस्थित प्रयास भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा, नेहरू को निशाना बनाने वाले लोग ऐसी विचारधारा से जुड़े हैं, जिसकी देश के स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान...

आरएसएस को भाजपा में संजय जोशी जैसे समझदार नेता की आज भी है जरूरत, समझें मोदी-शाह

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आरएसएस को भाजपा में संजय जोशी जैसे समझदार नेता की आज भी है जरूरत, समझें मोदी-शाह @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक देश-दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बन चुकी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को यदि नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में पूर्व राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) संजय जोशी मिल जाते तो बहुत अच्छा होता। यह बात मैं नहीं बल्कि आरएसएस-भाजपा से जुड़े लोग अपने निज अनुभवों के आधार पर बताते हैं। लेकिन यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के द्वारा यह अप्रत्याशित निर्णय लिया जाता तो यह सोने पर सुहागा सियासी फैसला माना जाता। निर्विवाद रूप से आरएसएस को भाजपा में संजय जोशी जैसे समझदार नेता की जरूरत आज भी है, लेकिन मोदी-शाह को समझाना उसके लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है। वैसे भी जब भाजपा का प्रधानमंत्री ओबीसी हो तो राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जोशी से बेहतर कोई दूसरा नहीं हो सकता! लोगों का कहना है कि संजय जोशी को भाजपा में हाशिए पर धकेले जाने का मुख्य कारण मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनके व्यक्तिगत और रणनीतिक मतभेद थे, खासकर गुजरात में सांगठनिक भूमिका को...