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परिसीमन बिल पर हुए हंगामे के सियासी मायने

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परिसीमन बिल पर हुए हंगामे के सियासी मायने @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक परिसीमन बिल पर संसद में हुआ सुनियोजित हंगामा मुख्य रूप से उत्तर बनाम दक्षिण भारत के प्रतिनिधित्व के विवाद से जुड़ा है। क्योंकि यह बिल लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 850 करने और महिला आरक्षण लागू करने का प्रयास है, लेकिन विपक्ष इसे भाजपा की सियासी चाल बता रहा है। जबकि यह विधेयक 2011 जनगणना के आधार पर निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण करता है, ताकि जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो।  यही वजह है कि सरकार इसे लोकतांत्रिक सुधार बता रही है, जिसमें 2029 चुनाव से महिलाओं को 33% आरक्षण मिलेगा। इस हेतु ही 16-18 अप्रैल 2026 के विशेष सत्र में तीन विधेयक पेश किए गए हैं: संविधान संशोधन, परिसीमन और केंद्रशासित प्रदेश विधेयक। जबकि विपक्ष, खासकर दक्षिणी राज्य जैसे तमिलनाडु, का आरोप है कि इससे उत्तर भारत (बिहार, यूपी) की सीटें बढ़ेंगी, जबकि दक्षिण की घटेंगी, जो भाजपा को लाभ देगा। इसके अलावा, राहुल गांधी और जयराम रमेश ने इसे 'जेरीमैंडरिंग' कहा, जबकि तमिलनाडु सीएम स्टालिन ने बिल ...