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आखिर कैसे रुकेगा निजी अस्पतालों में मरीजों का 'शोषण', जिम्मेदार कौन?

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आखिर कैसे रुकेगा निजी अस्पतालों में मरीजों का 'शोषण', जिम्मेदार कौन? @ कमलेश पांडेय/वरिष्ठ पत्रकार व राजनीतिक विश्लेषक चिकित्सा पेशा या स्वास्थ्य व्यवसाय कोई सामान्य पेशा नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत जीवन और जनस्वास्थ्य से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य है, जिसमें थोड़ी-सी भी लापरवाही किसी के जीवन पर भारी पड़ सकती है। वहीं, अपना या अपने परिवार का इलाज करवाने के चक्कर में यदि कोई व्यक्ति या परिवार लूट-पिट जाए तो यह भी प्रशासनिक नजरिए से अनुचित है। और ऐसे ही जरूरतमंद लोगों के पक्ष में सरकार और समाजसेवी संस्थाओं दोनों को अवश्य खड़ा होना चाहिए।  यही वजह है कि जनस्वास्थ्य से जुड़े चिकित्सा पेशा या स्वास्थ्य व्यवसाय को सिर्फ कारोबारी लाभ के नजरिए से नहीं देखा जा सकता है, बल्कि यह एक सामाजिक और नैतिक उत्तरदायित्व से जुड़ा हुआ विषय (पेशा) है, जिसे जनसेवा की भावना से किया जाए तो सरकार और संस्था दोनों को यश मिलेगा। भारतीय सभ्यता व संस्कृति तो शुरू से ही 'सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया' की पक्षधर रही है। लेकिन देश में लागू नई आर्थिक नीतियों से उपजी नैतिक व कानूनी म...